ईसा अल मसीह अंदरूनी पाकीज़गी की बाबत तालीम देते हैं

पाक होना कितना ज़रूरी है ? सूरा अन –निसा (सूरा 4 – औरत) बयान करती है :

 ऐ ईमानदारों तुम नशे की हालत में नमाज़ के क़रीब न जाओ ताकि तुम जो कुछ मुंह से कहो समझो भी तो और न जिनाबत की हालत में यहॉ तक कि ग़ुस्ल कर लो मगर राह गुज़र में हो (और गुस्ल मुमकिन नहीं है तो अलबत्ता ज़रूरत नहीं) बल्कि अगर तुम मरीज़ हो और पानी नुक़सान करे या सफ़र में हो तुममें से किसी का पैख़ाना निकल आए या औरतों से सोहबत की हो और तुमको पानी न मयस्सर हो (कि तहारत करो) तो पाक मिट्टी पर तैमूम कर लो और (उस का तरीक़ा ये है कि) अपने मुंह और हाथों पर मिट्टी भरा हाथ फेरो तो बेशक ख़ुदा माफ़ करने वाला है

और) बख्श ने वाला है(सूरा अन – निसा 4:43

सूरा अन – निसा में यह हुक्म है कि नमाज़ से पहले अपने हाथ मुंह को पाक मिट्टी से साफ़ करो I यानी कि बाहिरी पाकी सफ़ाई ज़रूरी है I

सूरा अश – शम्स (सूरा 91 — आफ़ताब) हमसे कहती है कि हमारी जान –हमारी बातिनी शख्सियत भी मसावी तोर से उतनी ही ज़रूरी है I

   और जान की और उसे दुरूस्त कियाफिर उसकी बदकारी और परहेज़गारी को उसे समझा दिया(क़सम है) जिसने उस (जान) को (गनाह से) पाक रखा वह तो कामयाब हुआऔर जिसने उसे (गुनाह करके) दबा दिया वह नामुराद रहा      

सूरा अश –शम्स 91: 7-10

(सूरा अश – शम्स हम से कहती है कि हमारी जान या अंदरूनी शख्सियत अगर साफ़ है तभी हम ने कामियाबी को पालिया है पर अगर हमारी जान बिगड़ी हुई है तो फिर हम नाकाम हो जाते हैं I ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) ने भी अंदरूनी और बाहिरी पाकीज़गी कि बाबत तालीम दी I

हम ने देखा कि हज़रत ईसा आला मसीह के कलाम में कुव्वत थी जिस से कि वह इख्तियार के साथ तालीम देते , लोगों को शिफा देते यहाँ तक कि अपने कलाम से क़ुदरत पर भी क़ाबू रखते थे I उनहों ने यह भी तालीम दी कि ख़ुदा के सामने हम अपने दिलों की हालत को खोल दें जिस तरह हसमारी बाहिरी हालत है ताकि ख़ुद को जांच सकें I हम बाहिरी पाकीज़गी से तो मशहूर हैं जिस के लिए हम नमाज़ से पहले वज़ू करते हैं और यह भी कि हलाल गोश्त खाने को अहमियत देते हैं I हज़रत मोहम्मद (सल्लम) ने एक हदीस में फ़रमाया कि :

       “पाकीज़गी आधा ईमान है …”

मुसलिम बाब 1 किताब 002 सफ़हा 0432

नबी हज़रत ईसा अल मसीह भी हम से चाहते थे कि उस दूसरे आधे ईमान कि बाबत सोचें — जो कि अंदरूनी पाकीज़गी है I यह बहुत ज़रूरी है हालांकि बनी इंसान दूसरे लोगों की बाहिरी पाकीज़गी की तरफ़ क्यूँ न देखता हो मगर अल्लाह की नज़र में यह फ़रक़ है —वह अंदरूनी पाकीज़गी की तरफ़ भी देखता है I जब यहूदा के बादशाहों में से एक ने मज़हबी रिवायात की तमाम पाबंदियों को बाहिरी तोर से लाज़िम ठहराया मगर अपने अंदरूनी दिल की पाकीज़गी पर धियान नहीं दिया तो उस ज़मानेका एक नबी इस पैगाम को लेकर आया :

9 देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए। तूने यह काम मूर्खता से किया है, इसलिये अब से तू लड़ाइयों में फंसा रहेगा।

2 तवारीक़ 16:9

जिस् तरह से यह पैगाम सुनाया गया है हम को ‘दिल’ से अंदरूनी पाकीज़गी को अंजाम देना ज़रूरी हो गया — ‘तुम’ का जो लाफ़्ज़ है वह सोचता , महसूस करता , फ़ैसला करता , इताअत करता या ना फ़रमानी करता है और ज़ुबान को क़ाबू में रखता है I ज़बूर शरीफ़ के नबियों ने तालीम दी कि यह हमारे दिलों की प्यास थी जो कि हमारे गुनाहों की जड़ पर थी I हमारे दिल इतने अहम हैं कि हज़रत ईसा अल मसीह ने अपनी तालीम में हमारी बाहिरी पाकीज़गी का मुक़ाबला करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया I यहाँ इंजील की उन बातों का ज़िकर है जब ईसा अल मसीह ने फ़रक़ फ़रक़ औक़ात में अंदरूनी पाकीज़गी की बाबत तालीम दी I

बाहिरी पाकीज़गी के साथ साथ अंदर की भी सफ़ाई करो

(‘फ़रीसियों’ के बारे में यहाँ ज़िकर किया गया है I उस जमाने में यह यहूदी उस्ताद थे जिस तरह मौजूदा ज़माने के इमाम लीग होते हैं I हज़रत ईसा यहाँ ख़ुदा के लिए ‘दहयकी’ देने की बात करते हैं I यह यहूदी ज़कात के लिए ज़रूरी था I )

37 जब वह बातें कर रहा था, तो किसी फरीसी ने उस से बिनती की, कि मेरे यहां भेजन कर; और वह भीतर जाकर भोजन करने बैठा।
38 फरीसी ने यह देखकर अचम्भा दिया कि उस ने भोजन करने से पहिले स्नान नहीं किया।
39 प्रभु ने उस से कहा, हे फरीसियों, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर तो मांजते हो, परन्तु तुम्हारे भीतर अन्धेर और दुष्टता भरी है।
40 हे निर्बुद्धियों, जिस ने बाहर का भाग बनाया, क्या उस ने भीतर का भाग नहीं बनाया?
41 परन्तु हां, भीतरवाली वस्तुओं को दान कर दो, तो देखो, सब कुछ तुम्हारे लिये शुद्ध हो जाएगा॥
42 पर हे फरीसियों, तुम पर हाय ! तुम पोदीने और सुदाब का, और सब भांति के साग-पात का दसवां अंश देते हो, परन्तु न्याय को और परमेश्वर के प्रेम को टाल देते हो: चाहिए तो था कि इन्हें भी करते रहते और उन्हें भी न छोड़ते।
43 हे फरीसियों, तुम पर हाय ! तुम आराधनालयों में मुख्य मुख्य आसन और बाजारों में नमस्कार चाहते हो।
44 हाय तुम पर ! क्योंकि तुम उन छिपी कब्रों के समान हो, जिन पर लोग चलते हैं, परन्तु नहीं जानते॥

लूक़ा 11:37-44

यहूदी शरीअत के मुताबिक़ एक यहूदी जब एक मुर्दा जिस्म को छूता है तो वह नापाक ठहरता है I जब हज़रत ईसा ने कहा कि लोग जब ‘उन क़ब्रों’ पर चलते हैं जिन पर ‘निशान नहीं बने होते’ इसका मतलब यह है कि वह यहाँ तक कि उसे ‘जानते हुए’ भी नापाक ठहरे क्यूंकी वह अंदरूनी पाकीज़गी का इंकार कर रहे थे I अगर हम इसका इंकार करते हैं तो हम भी गैर ईमानदारों की तरह नापाक ठहर सकते थे जो किसी तरह की पाकीज़गी का ख़्याल नहीं रखता I

मज़हबी तोर से पाकीज़ा शख्स को दिल नापाक टहराता है

ज़ेल की तालीम में ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) का हवाला पेश करते हैं जो 750 क़बल मसीह में रहते थे I यहाँ नबी यसायाह की बाबत इतला के लिए हवाला पेश किया गया है :

ब यरूशलेम से कितने फरीसी और शास्त्री यीशु के पास आकर कहने लगे।
2 तेरे चेले पुरनियों की रीतों को क्यों टालते हैं, कि बिना हाथ धोए रोटी खाते हैं?
3 उस ने उन को उत्तर दिया, कि तुम भी अपनी रीतों के कारण क्यों परमेश्वर की आज्ञा टालते हो?
4 क्योंकि परमेश्वर ने कहा था, कि अपने पिता और अपनी माता का आदर करना: और जो कोई पिता या माता को बुरा कहे, वह मार डाला जाए।
5 पर तुम कहते हो, कि यदि कोई अपने पिता या माता से कहे, कि जो कुछ तुझे मुझ से लाभ पहुंच सकता था, वह परमेश्वर को भेंट चढ़ाई जा चुकी।
6 तो वह अपने पिता का आदर न करे, सो तुम ने अपनी रीतों के कारण परमेश्वर का वचन टाल दिया।
7 हे कपटियों, यशायाह ने तुम्हारे विषय में यह भविष्यद्वाणी ठीक की।
8 कि ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उन का मन मुझ से दूर रहता है।
9 और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्योंकि मनुष्यों की विधियों को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं।
10 और उस ने लोगों को अपने पास बुलाकर उन से कहा, सुनो; और समझो।
11 जो मुंह में जाता है, वह मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता, पर जो मुंह से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।
12 तब चेलों ने आकर उस से कहा, क्या तू जानता है कि फरीसियों ने यह वचन सुनकर ठोकर खाई?
13 उस ने उत्तर दिया, हर पौधा जो मेरे स्वर्गीय पिता ने नहीं लगाया, उखाड़ा जाएगा।
14 उन को जाने दो; वे अन्धे मार्ग दिखाने वाले हैं: और अन्धा यदि अन्धे को मार्ग दिखाए, तो दोनों गड़हे में गिर पड़ेंगे।
15 यह सुनकर, पतरस ने उस से कहा, यह दृष्टान्त हमें समझा दे।
16 उस ने कहा, क्या तुम भी अब तक ना समझ हो?
17 क्या नहीं समझते, कि जो कुछ मुंह में जाता, वह पेट में पड़ता है, और सण्डास में निकल जाता है?
18 पर जो कुछ मुंह से निकलता है, वह मन से निकलता है, और वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।
19 क्योंकि कुचिन्ता, हत्या, पर स्त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवाही और निन्दा मन ही से निकलतीं है।
20 यही हैं जो मनुष्य को अशुद्ध करती हैं, परन्तु हाथ बिना धोए भोजन करना मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता॥

मत्ती 15:1-20

इस मुक़ाबले पर आने में हज़रत ईसा ने इशारा किया की हम ख़ुदा के पैगाम की बनिस्बत ‘इंसानी रिवायतों’ से मज़हबी पाबंदियों को नाफ़िज़ करने में बहुत तेज़ फहम हैं I यहूदी रहनुमाओं ने अपनी रिवायतों को अल्लाह के सामने नज़रअंदाज़ कर दिया इस बतोर कि उनहो ने अपने माँबाप को पैसे दिये ताकि उनकी उमर रसीदा दिनों में उनकी परवाह हो सके बजाए इस के कि उनकी ख़िदमत करे या उन का सहारा बने I ऐसा उनहों ने अपने मज़हबी वुजूहात की बिना पर किया I

आज भी हम अपनी अंदरूनी पाकीज़गी को लेकर उसकी इज़्ज़त न करते हुए इसी तरह की परेशानी का सामना करते हैं I मगर अल्लाह हमारे दिल से निकलने वाली हरेक नापाकी की बाबत ज़ियादा फ़िकरमंद है I अगर यह पाकीज़ा न हुआ तो इस नापाकी का अंजाम अदालत के दिन हमको अब्दी हलाकत की तरफ़ ले जाएगा I

बाहर से खूबसूरत मगर अंदर से नजासत से भरपूर

25 हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्तु वे भीतर अन्धेर असंयम से भरे हुए हैं।
26 हे अन्धे फरीसी, पहिले कटोरे और थाली को भीतर से मांज कि वे बाहर से भी स्वच्छ हों॥
27 हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हिड्डयों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं।
28 इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो॥

मत्ती 23:25-28

जो हम सब ने देखा है उसकी बाबत हज़रत ईसा अल मसीह बयान करते हैं I ख़ुदा में जो ईमानदार पाए जाते हैं उनमें से बाहिरी पाकीज़गी का पीछा करने वाले आम हो सकते हैं ,मगर उनमें से बहुत से हैं जो बातिनी तोर से हिर्स और लुत्फ़ अंदोज़ी से भरे हुए हैं – यहाँ तक कि वह मज़हबी तोर से अहम शख़्सियत कहलाते हैं I अंदरूनी पाकीज़गी को हासिल करना हमारे लिए बहुत ज़रूरी है I मगर यह ज़ियादा मुश्किल है I अल्लाह हमारी बातिनी पाकीज़गी का बड़ी होशियारी से इनसाफ़ करेगा I सो यह मामला अपने आप से उठता है कि : हम अपने दिलों को कैसे साफ़ करते हैं ताकि अदालत के दिन हम ख़ुदा की बादशाही में दाख़िल हो सकें ? जवाबों के लिए हम इंजील को जारी रखेंगे I      

ख़ुदा की बादशाही : बहुतों के लिए दावत है मगर …

सूरा अस-सजदा (सूरा 32 – सजदा करना) यह बयान करता है कि जो लोग पुर शोक़ तरीक़े से सजदा करते हुए नमाज़ अदा करता है वह लोग इनाम के हक़दार हैं I

उन लोगों की कारगुज़ारियों के बदले में कैसी कैसी ऑंखों की ठन्डक उनके लिए ढकी छिपी रखी है उसको कोई शख़्श जानता ही नहीं  

सूरा अस-सजदा 32:17

सूरा अर-रहमान (सूरा 55 – करीमुन नफ़्स) आयत 13-77 तक 31 मर्तबा एक ही सवाल को पूछा गया है

तो (ऐ गिरोह जिन व इन्स) तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमतों को न मानोगेफिर तुम अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों से इन्कार करोगे

सूरा अर-रहमान 55:13-77

अगर इस तरह की खुशियाँ एक रास्तबाज़ के लिए जमा की जाती हैं तो एचएएम सोचेंगे कि ख़ुदावंद की तरफ़ से इस तरह की इनायत का कोई भी शख्स इंकार नहीं करेगा I अगर ऐसा करे तो वह सब से बड़ी बे वक़ूफ़ी होगी I मगर नबी हज़रत ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) तमसीलों के ज़रिये हमें सिखाते हैं कि ख़ुदावंद की इन इनायतों का इंकार करते हुए जो हमारे लिए जखीरा किया हुआ है हम हक़ीक़ी तोर से ख़तरे में पड़े हुए हैं I आइये देखेँ सब से पहले थोड़ा नज़र ए सानी I

हम ने देखा कि नबी हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम)का इख्तियार का ऐसा कलाम था जिस से बीमार शिफ़ा पाते और यहाँ तक कि कुदरत भी उसका हुक्म मानते थे और उसकी तालिम से हारकोइ हैरान था I इसके साथ ही उसने ख़ुदा की बादशाही की बाबत भी बहुत कुछ तालीम दी I कई एक ज़बूर के नबियों ने आने वाली ख़ुदा की बादशाही की बाबत लिखे थे I हज़रत ईसा ने इन्हीं को बुनयाद मानकर तालीम दी कि बादशाही नज़दीक थी I

उसने सब से पहले पहाड़ी वाज़ सिखाया यह बताते हुए कि ख़ुदा की बादशाही के शहरियों को किस तरह एक दूसरे से महब्बत करनी चाहिए I दुख, मुसीबत, मौत ,बे इंसाफ़ी , दहशत और खौफ़नाकी जिनका हम मौजूदा दौर में तजरुबा करते है (मौजूदा खबरों को सुनिए) I अब इसलिए कि ख़ुदा की महब्बत की बाबत लोग उसकी तालीम को नहीं सुन्ना चाहते I इस दूनया की जहन्न्मी जिंदगी के मुक़ाबले में ख़ुदा की बादशाही की उस जिंदगी की बाबत अगर थोड़ा सा भी समझ रखेंगे तो मैं सोचता हूँ कि हमारा आपसी बर्ताव में महब्बत के साथ बहुत कुछ फ़रक़ एनएज़ेडएआर आएगा I

बड़ी ज़ियाफ़त की तमसील

जबकि बहुत बहुत ही कम लोग ऐसे हैं जो हज़रत ईसा अल मसीह जैसी जिंदगी गुज़ारते हैं I उनहों ने जिस तरह से ख़ुदा की बादशाही की तालीम दी उसके मुताबिक़ आप सोचते होंगे कि बहुत ही कम लोग होंगे जो ख़ुदा की बादशाही में बुलाए जाएंगे I मगर यह ऐसा नहीं है I हज़रत ईसा ने एक बहुत बड़ी शादी की ज़ियाफ़त के बारे में तमसील देकर सिखाया कि बादशाही कितनी दूर तक फैली हुई है I उसकी पहुँच कहाँ तक है I मगर वह इतना दूर नहीं जैसे हम उम्मेद करते हैं I इंजील इसे इस तरह बयान करती है :

15 उसके साथ भोजन करने वालों में से एक ने ये बातें सुनकर उस से कहा, धन्य है वह, जो परमेश्वर के राज्य में रोटी खाएगा।
16 उस ने उस से कहा; किसी मनुष्य ने बड़ी जेवनार की और बहुतों को बुलाया।
17 जब भोजन तैयार हो गया, तो उस ने अपने दास के हाथ नेवतहारियों को कहला भेजा, कि आओ; अब भोजन तैयार है।
18 पर वे सब के सब क्षमा मांगने लगे, पहिले ने उस से कहा, मैं ने खेत मोल लिया है; और अवश्य है कि उसे देखूं: मैं तुझ से बिनती करता हूं, मुझे क्षमा करा दे।
19 दूसरे ने कहा, मैं ने पांच जोड़े बैल मोल लिए हैं: और उन्हें परखने जाता हूं : मैं तुझ से बिनती करता हूं, मुझे क्षमा करा दे।
20 एक और ने कहा; मै ने ब्याह किया है, इसलिये मैं नहीं आ सकता।
21 उस दास ने आकर अपने स्वामी को ये बातें कह सुनाईं, तब घर के स्वामी ने क्रोध में आकर अपने दास से कहा, नगर के बाजारों और गलियों में तुरन्त जाकर कंगालों, टुण्डों, लंगड़ों और अन्धों को यहां ले आओ।
22 दास ने फिर कहा; हे स्वामी, जैसे तू ने कहा था, वैसे ही किया गया है; फिर भी जगह है।
23 स्वामी ने दास से कहा, सड़कों पर और बाड़ों की ओर जाकर लोगों को बरबस ले ही आ ताकि मेरा घर भर जाए।
24 क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि उन नेवते हुओं में से कोई मेरी जेवनार को न चखेगा।

लूक़ा 14:15 -24

हमारे क़बूल किए हुए समझ कई दफ़ा इस कहानी में उल्टे हो जाते हैं I सबसे पहले फर्ज़ कर सकते हैं कि अल्लाह उसकी अपनी बादशाही में बहुत से लोगों को दावत नहीं देगा (जो उसके घर की शादी की ज़ियाफ़त है) क्यूंकि वह क़ाबिल लोगों को नहीं पाता है जो इस ज़ियाफ़त मे शरीक हो सके I मगर यह ख़्याल गलत है I आप देखें कि इस बड़ी ज़ियाफ़त की दावत बहुत बहुत लोगों तक पहुँचती है वह जो अमीर शख़्स है (इस तमसील में अल्लाह से मुराद है) वह चाहता है कि शादी की महफ़िल लोगों से भर जाए I मगर यहाँ एक बे तवक़्क़ो मरोड़ पाया जाता है जो उस अमीर शख़्स के लिए अफ़सोस का सबब बनता है I मतलब यह कि बहुत कम मेहमान लोग ही इस ज़ियाफ़त में जाने को तैयार होते हैं I बल्कि कई लोगों के पास इस ज़ियाफ़त में न जाने के कोर बहाने हैं I ऐसे बहाने जिनको बहाना कहना भी मुनासिब नहीं है I कोई कहता है , मैं ने पाँच जोड़ी बैल ख़रीदे हैं मुझे उनको आज़माना है I भला ऐसा कौन शख़्स होगा जो बैलों को आज़माए बगैर ख़रीदता हो I दूसरा कहता है कि मैं ने खेत ख़रीदा है मैं उसे देखने जाता हूँ I भला ऐसा कौन शख़्स होगा जो खेत को देखे बगैर ख़रीदता हो ? कोई नहीं I बल्कि यह बहाने मेहमानों के दिल के असली इरादे को ज़ाहिर करते हैं —मतलब यह कि ख़ुदा की बादशाही में दाखिल होने में कोई दिलचस्पी नहीं है मगर दीगर बातों में दिलचस्पी ज़रूर है I

इसी तरह जब हम सोचते हैं शायद उस अमीर शख़्स को उस वक़्त सदमा हुआ होगा कि इतने कम लोग ज़ियाफ़त में शरीक हुए I एक और मरोड़ वाली बात यह है कि वह लोग जो इस ज़ियाफ़त में शरीक होने के क़ाबिल नहीं थे उन सबको हम अपने दमाग से निकाल देते हैं क्यूंकि वह इस बड़ी ज़ियाफ़त में दावत दिये जाने के क़ाबिल नहीं थे क्यूंकि वह शहर के बाज़ारों और चौराहों से लाए गए थे यहाँ तक कि बड़ी सड़कों और सड़कपार दीहातों से लाए गए थे , वह गरीब थे , अपाहज थे , अंधे और लँगड़े भी थे जिन से हम अकसर दूर ही रहते हैं —वह इस ज़ियाफ़त में दावत दिये जाते हैं I इसके बावजूद भी इस ज़ियाफ़त की दावत इस से और आगे जाती है I इस ज़ियाफ़त में कुछ और लोगों की शमूलियत होती है I और आप के ख़्याल के मुताबिक़ क्या यह मुमकिन है I ज़ियाफ़त का मालिक चाहता था ऐसे लोगों को दावत दी जाए जिन्हें हम खुद ही अपने घरों में दावत नहीं देना चाहते I

और यह लोग आते हैं ! मगर इन के पास और लोगों की तरह खेत खरीदने या बैल ख़रीदने का कोई बहाना नहीं है I इसी तरह ख़ुदा की बादशाही लोगों से भरपूर है और ख़ुदा की मर्ज़ी तकमील तक पहुँचती है !

ईसा अल मसीह ने जब इस तमसील को कहा तो एक सवाल वह हमसे पूछना चाहता था कि अगर इस बादशाही में जाने के लिए दावत दी जाए तो क्या मैं इसे क़बूल करूंगा ? या दिलचसपी ज़ाहिर करते हुए बहाना करूंगा और ज़ियाफ़त की दावत का इंकार करूंगा I सच्चाई यह है कि आप इस बादशाही की ज़ियाफ़त में दावत दिए गए हैं मगर हक़ीक़त यह बताती है कि हम में से बहुत से इस दावत का इंकार करेंगे I किसी एक सबब से हम कभी भी बराहे रास्त यह नहीं कहेंगे कि नहीं ताकि हम अपने इनकारी के बहाने को छिपाएँ I इस तमसील में हमारी इनकारी की जड़ है दूनया की दीगर चीजों से महब्बत रखना I जो पहले बुलाए गए थे वह दूनया की चीजों से महब्बत रखते थे (जैसे ‘खेत’ है , ‘बैलें’ और ‘शादी’ वगैरा) यह चीज़ें उन के लिए ख़ुदा की बादशाही से बढ़कर थीं I

एक गैर रास्तबाज़ मज़हबी इमाम की तमसील

हम में से कुछ दूनया की दीगर चीजों को ख़ुदा की बादशाही से ज़ियादा महब्बत रखते हैं इसलिए हम इस दावत का इंकार करेंगे I दूसरे वह लोग होंगे जो उनकी अपनी रास्तबाज़ी के आमाल पर भरोसा रखेंगे I नबी हज़रत ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) ने इस की बाबत भी एक दूसरी कहानी के ज़रिये तालीम दी I वह कहानी एक मज़हबी रहनुमा की थी जिसको आम तोर पर इमाम भी कहा जा सकता है I

9 और उस ने कितनो से जो अपने ऊपर भरोसा रखते थे, कि हम धर्मी हैं, और औरों को तुच्छ जानते थे, यह दृष्टान्त कहा।
10 कि दो मनुष्य मन्दिर में प्रार्थना करने के लिये गए; एक फरीसी था और दूसरा चुंगी लेने वाला।
11 फरीसी खड़ा होकर अपने मन में यों प्रार्थना करने लगा, कि हे परमेश्वर, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि मैं और मनुष्यों की नाईं अन्धेर करने वाला, अन्यायी और व्यभिचारी नहीं, और न इस चुंगी लेने वाले के समान हूं।
12 मैं सप्ताह में दो बार उपवास करता हूं; मैं अपनी सब कमाई का दसवां अंश भी देता हूं।
13 परन्तु चुंगी लेने वाले ने दूर खड़े होकर, स्वर्ग की ओर आंखें उठाना भी न चाहा, वरन अपनी छाती पीट-पीटकर कहा; हे परमेश्वर मुझ पापी पर दया कर।
14 मैं तुम से कहता हूं, कि वह दूसरा नहीं; परन्तु यही मनुष्य धर्मी ठहराया जाकर अपने घर गया; क्योंकि जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा॥

लूक़ा 18:9-14

यहाँ एक फ़रीसी (एक मज़हबी उस्ताद जैसे एक इमाम) वह अपने मज़हबी कामों और लियाक़तों में कामिल था I उसके रोज़े और ज़कात हसबे मामूल से ज़ियादा थे I मगर यह इमाम अपने खुद की रास्तबाज़ी पर कुछ ज़ियादा ही एतमाद और एतबार किए हुए था I उसका वैसा ईमान नहीं था जो हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का था जिन्होंने अल्लाह के वायदे पर हलीमी से भरोसा किया था और यह एच यूएनकेई हक़ में रास्तबाज़ी गिना गया था I दरअसल एक महसूल लेने वाला (उस ज़माने के हिसाब से एक नफ़रती पेशा था) मगर उसने मक़्दिस में ख़ुदा की हुज़ूरी में खड़े होकर हलीमी से छाती पीटते हुए ख़ुदा के रहम की भीक मांगी और फिर ख़ुदा के फ़ज़ल को अपने दिल में महसूस करते हुए अपने घर लौटा I वह ख़ुदा की नज़र में ‘रास्तबाज़’ टहराया गया जबकि फ़रीसी (इमाम) जिसको हम समझते थे कि –‘उसका ख़ुदा के साथ का रिश्ता’— ठीक है I मगर उसके गुनाह अभी भी उसके खिलाफ़ गवाही देते थे I सो नबी हज़रत ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) आप से और मुझसे पूछते हैं कि क्या हम सचमुच ख़ुदा की बादशाही में दाखिल होने की ख़्वाहिश रखते हैं या फिर ऐसी ही दिलचसपी है जैसे कि दूनया केआई दीगर चीज़ों में दिलचसपी रखते हैं ? वह यह भी पूछते हैं कि हमारा भरोसा किस पर है I क्या हमारे मज़हबी काम ख़ुदा के रहम ओ फ़ज़ल से ज़ियादा अहमियत रखते हैं ? इन स्वालात को खुद से ईमानदारी से पूछना बहुत ज़रूरी है क्यूंकी इस के बगैर हम मसीह की अगली तालीम को नहीं समझ पाएंगे जो कि अंदरूनी पाकीज़गी की बाबत है I

नबी हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) का क़ुदरत पर इख्तियार

सूरा अज़ – ज़ारियात (सूरा 51 — पिछोड़ती हवाएँ) बयान करता है कि हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को फ़िरोन के किस् तरह भेजा गया था I

 जब हमने उनको फिरऔन के पास खुला हुआ मौजिज़ा देकर भेजा

रा अज़ ज़ारियात 51:38

हज़रत मूसा ने मिस्र में कई एक मोजिज़ाना ताक़त का मज़ाहिरा करते हुए अपने इख्तियार को ज़ाहिर किया जिन में बहर ए कुल्ज़ुम को दो हिस्सों में तक़सीम किया जाना भी शामिल है I जब भी कभी किसी शख़्स ने ख़ुद को एक नबी होने का दावा किया (जिस तरह मूसा ने किया) उसने मुखालफ़त का सामना किया या फिर उसको एक नबी होने की क़ाबिलियत का सबूत देना पड़ा I गौर करें कि यह नमूना सूरा अश शो’रा के मुआफ़िक़ है (सूरा 26 – शाइर लोग) I यह सूरा इनकारी के सिलसिले और सबूत का बयान करती है जिन में से होकर नबी लोग गुज़रे थे I

(यूँ ही) नूह की क़ौम ने पैग़म्बरो को झुठलायाकि जब उनसे उन के भाई नूह ने कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते मै तो तुम्हारा यक़ीनी अमानत दार पैग़म्बर हूँतुम खुदा से डरो और मेरी इताअत करो

सूरा अश शो’रा 26:105-107

(इसी तरह क़ौम) आद ने पैग़म्बरों को झुठलायाजब उनके भाई हूद ने उनसे कहा कि तुम ख़ुदा से क्यों नही डरतेमैं तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँतो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो(सूरा अश शो’रा 26:123-126)

(इसी तरह क़ौम) समूद ने पैग़म्बरों को झुठलायाजब उनके भाई सालेह ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यो नहीं डरतेमैं तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँतो खुदा से डरो और मेरी इताअत करो

सूरा अश शो’रा 26:141-144

इसी तरह लूत की क़ौम ने पैग़म्बरों को झुठलायाजब उनके भाई लूत ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरतेमै तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ तो ख़ुदा से डरोऔर मेरी इताअत करोसूरा

अश शो’रा 26:160-163

इसी तरह जंगल के रहने वालों ने (मेरे) पैग़म्बरों को झुठलायाजब शुएब ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरतेमै तो बिला शुबाह तुम्हारा अमानदार हूँतो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो

रा अश शो’रा 26:176-179

इन सारे नबियों ने इनकारी का सामना किया और उन के लिए एक बोझ था यह साबित करना कि वह भरोसे लायक़ नबी थे I यह बात नबी हज़रत ईसा अल मसीह के लिए भी सच था I

नबी हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के पास तालीम देने और ‘एक हुक्म’ के साथ शिफ़ा बख्शने का इख्तियार था I उन के पास क़ुदरत पर भी इख्तियार था I इंजील इस बात का ज़िकर करती है कि उसने अपने शागिर्दों के साथ एक झील को इस तरह से पार किया कि उसके शागिर्द ‘खौफ़ज़दा और दंग’ रह गए थे I यहाँ यह बयान पेश है :

22 फिर एक दिन वह और उसके चेले नाव पर चढ़े, और उस ने उन से कहा; कि आओ, झील के पार चलें: सो उन्होंने नाव खोल दी।
23 पर जब नाव चल रही थी, तो वह सो गया: और झील पर आन्धी आई, और नाव पानी से भरने लगी और वे जोखिम में थे।
24 तब उन्होंने पास आकर उसे जगाया, और कहा; हे स्वामी! स्वामी! हम नाश हुए जाते हैं: तब उस ने उठकर आन्धी को और पानी की लहरों को डांटा और वे थम गए, और चैन हो गया।
25 और उस ने उन से कहा; तुम्हारा विश्वास कहां था? पर वे डर गए, और अचम्भित होकर आपस में कहने लगे, यह कौन है जो आन्धी और पानी को भी आज्ञा देता है, और वे उस की मानते हैं॥

लूक़ा 8:22-25

नबी हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) का कलाम ए हुक्म से यहाँ तक कि हवाएँ और लहरें भी थम जाती  थीं ! इस में कोई शक नहीं कि ऐसे औक़ात उसके शागिर्द खौफ़ से भर जाते थे I ऐसे इख्तियारात और हुक्मों के होते उन्हें हैरत होती थी कि यह कौन शख़्स हो सकता है I एक और मोक़े पर जब वह हज़ारों लोगों के बीच में था उसने एक ऐसे ही इख्तियार का मज़ाहिरा किया I इस बार उसने हवा और लहरों को हुक्म नहीं दिया – बल्कि उस ने खाना खिलाया I देखें इसका ज़िकर :

दि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।
2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था।
3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।
4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी।
5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया।
6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था।
7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं।
8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था।
9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी।
10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना।
11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।
12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।
13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।
14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।
15 यूहन्ना ने उसके विषय में गवाही दी, और पुकारकर कहा, कि यह वही है, जिस का मैं ने वर्णन किया, कि जो मेरे बाद आ रहा है, वह मुझ से बढ़कर है क्योंकि वह मुझ से पहिले था।

यूहनना 6:1-15

जब लोगों ने देखा कि हज़रत ईसा मसीह (अलैहिस्सलाम) सिर्फ़ मालूम किया पाँच रोटी और दो मछली से 5000 आदमियों को खिला सकते हैं , इस के बाद भी और लोगों को खिलाने लायक़ हैं तो तब लोगों ने मालूम किया कि यह एक बे मिसल नबी है I लोगों ने उसके नबी होने पर ताज्जुब ज़ाहिर किया कि मूसा की तौरत में बहुत पहले पेशीन गोई हुई थी कि वह आएगा I हम जानते हैं कि ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) हक़ीक़त में वही नबी हैं जिन के लिए तौरेत में ऐसे ही नबी का ज़िकर है I

18 सो मैं उनके लिये उनके भाइयों के बीच में से तेरे समान एक नबी को उत्पन्न करूंगा; और अपना वचन उसके मुंह में डालूंगा; और जिस जिस बात की मैं उसे आज्ञा दूंगा वही वह उन को कह सुनाएगा।
19 और जो मनुष्य मेरे वह वचन जो वह मेरे नाम से कहेगा ग्रहण न करेगा, तो मैं उसका हिसाब उस से लूंगा।

इस्तिसना 18:18-19

इस नबी की यह निशानी थी कि अल्लाह अपना ‘कलाम इस नबी के मुंह में’ डालेगा I वह कौनसी चीज़ है जो आदमियों को अल्लाह के कलाम से जुदा करती है ? इस के जवाब को ज़ेल की आयतों में दुहराया गया है जो सूरा अन नहल (सूरा 16 –शहद की मक्खी) से शुरू होता है :

हम जब किसी चीज़ (के पैदा करने) का इरादा करते हैं तो हमारा कहना उसके बारे में इतना ही होता है कि हम कह देते हैं कि ‘हो जा’ बस फौरन हो जाती है (तो फिर मुर्दों का जिलाना भी कोई बात है)

अन नहल 16:40

उसकी आज्ञा तभी है जब वह एक ऐसी चीज का इरादा करता है जो वह उसे कहता है, “रहो,” और यह है

या-सीन 36:82

और ताकि तुम (उसकी क़ुदरत को समझो) वह वही (ख़ुदा) है जो जिलाता और मारता है, फिर जब वह किसी काम का करना ठान लेता है तो बस उससे कह देता है कि ‘हो जा’ तो वह फ़ौरन हो जाता है

अल मोमिन 40:68

नबी हज़रत ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) सिर्फ़ अपने मुंह के कलाम से बीमारों को शिफ़ा  बख्शते नापाक रूहों को लोगों में से निकालते थे I सो अभी हम ने देखा उसके कलाम से हवा और लहरें उसका हुक्म बाजा लाते थे , फिर वह बोलते थे उन के हाथों में आईं रोटियों की मिक़दार कई हज़ार गुना बढ़ जाती थीं I इन निशानियों को तौरेत शरीफ़ और क़ुरान शरीफ़ में इस लिए समझाया गया है की इधर ईसा अल मसीह ने कुछ कहा और वह उधर हो गया – क्यूंकि उसके पास इख्तियार था I वह मसीह था !

समझने के लिए दिल

मगर कई बार शागिर्दों को ख़ुद ही यह बातें समझ में नहीं आती थीं I उनहों ने उसके हाथों से जो रोटियों की मिक़दार बढ़ जाती थी उस अहमियत को नहीं समझा था I हम इसे जानते हैं क्यूंकि 5000 को खिलाने के कुछ ही अरसे बाद इस वाक़िए को इंजील ए शरीफ़ में कलमबंद कर दिया गया था I

45 तब उस ने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढाया, कि वे उस से पहिले उस पार बैतसैदा को चले जांए, जब तक कि वह लोगों को विदा करे।
46 और उन्हें विदा करके पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया।
47 और जब सांझ हुई, तो नाव झील के बीच में थी, और वह अकेला भूमि पर था।
48 और जब उस ने देखा, कि वे खेते खेते घबरा गए हैं, क्योंकि हवा उनके विरूद्ध थी, तो रात के चौथे पहर के निकट वह झील पर चलते हुए उन के पास आया; और उन से आगे निकल जाना चाहता था।
49 परन्तु उन्होंने उसे झील पर चलते देखकर समझा, कि भूत है, और चिल्ला उठे, क्योंकि सब उसे देखकर घबरा गए थे।
50 पर उस ने तुरन्त उन से बातें कीं और कहा; ढाढ़स बान्धो: मैं हूं; डरो मत।
51 तब वह उन के पास नाव पर आया, और हवा थम गई: और वे बहुत ही आश्चर्य करने लगे।
52 क्योंकि वे उन रोटियों के विषय में ने समझे थे परन्तु उन के मन कठोर हो गए थे॥
53 और वे पार उतरकर गन्नेसरत में पहुंचे, और नाव घाट पर लगाई।
54 और जब वे नाव पर से उतरे, तो लोग तुरन्त उस को पहचान कर।
55 आसपास के सारे देश में दोड़े, और बीमारों को खाटों पर डालकर, जहां जहां समाचार पाया कि वह है, वहां वहां लिए फिरे।
56 और जहां कहीं वह गांवों, नगरों, या बस्तियों में जाता था, तो लोग बीमारों को बाजारों में रखकर उस से बिनती करते थे, कि वह उन्हें अपने वस्त्र के आंचल ही को छू लेने दे: और जितने उसे छूते थे, सब चंगे हो जाते थे॥

मर्क़ुस  6:45-56

फिर से नबी ईएसए अल मसीह ने एक इख्तियार का कलाम कहा और वह ‘हो गया’ I मगर शागिर्दों ने इसे ‘नहीं समझा’ I सबब यह नहीं था क्यूंकि वह समझदार नहीं नहीं थे ; सबब यह नहीं था कि वह वहाँ पर मौजूद नहीं थे ; सबब यह नहीं था कि वह बुरे शागिर्द थे ; न ही सबब यह था कि वह गैर ईमानदार थे I नहीं , बल्कि उन की बाबत ऐसा कहा गाय है कि ‘उनके दिल सख़्त थे ‘—नबी यरम्याह (अलैहिस्सलाम) ने नबुवत की थी कि एक नया अहद आने वाला था – जिसकी शरीअत को हमारे दिलों के अंदर लिखा जाना था I उस अहद के बदले जाने तक किसी का दिल तो सख़्त रहना ही था—यह यहाँ तक कि नबी के नज़दीकी शागिर्दों के दिल ही क्यूँ नहीं थे ! और हमारे ख़ुद के सख़्त दिल भी उन रूहानी सच्चाईयों को समझने से रोकते हैं जिन का नबियों के ज़रिये इंकिशाफ किया गया था I

यही सबब था कि नबी यहया अलैहिस्सलाम को लोगों के दिलों को तयार करने का काम सोंपा गया था जो कि बहुत ही ज़रूरी था I उसने लोगों को तौबा के लिए बुलाया कि वह आकर अपने गुनाहों का इक़रार करें बजाए इस के कि वह अपने गुनाहों को छिपाएँ I जब ईसा अल मसीह के शागिर्दों को अपने सख़्त दिली से तौबा करके उन्हें अपने गुनाहों को इक़रार करने की ज़रूरत थी तो कितना ज़ियादा आप को और मुझे ऐसा करने की ज़रूरत है ! शायद आप मेरे साथ अल्लाह की हुज़ूरी में सच्चे दिल से ख़ामोशी की दुआ में शामिल हो सकते हैं (क्यूंकि वह यहाँ तक कि हमारे खयालात से वाक़िफ़ है यह जान्ते हुए हम उस से दुआ कर सकते हैं) जिसमें हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की तरह हमारे गुनाहों का इक़रार भी शामिल हो :

4 मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।
5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा॥
6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।
9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल॥
10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल॥

ज़बूर 51:1-4,10-12

मैं यह दुआ करता हूँ और आप की हौसला अफ़ज़ाई करता हूँ आप ऐसा करें कि नबियों के जो पैगामत हैं उन्हें नर्म दिल से और स्सफ़ दिल से समझे जाएँ जबकि हम इंजील को जारी रखेंगे I

नबी हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) इख्तियार के कलाम के ज़रिये शिफ़ा इनायत करते हैं

सूरा ‘अबसा’ (सूरा 80 — उसने नापसंदीदगी ज़ाहिर की) यह सूरा हज़रत मुहम्मद (सल्लम) का एक अंधे शख़्स से मुलाक़ात की बाबत ज़िकर करती है I

वह अपनी बात पर चीं ब जबीं हो गयाऔर मुँह फेर बैठा कि उसके पास नाबीना आ गयाऔर तुमको क्या मालूम यायद वह (तालीम से) पाकीज़गी हासिल करता

सूरा ‘अबसा’ 80:1-3

हालांकि रूहानी समझ के लिए मौक़ा था मगर नबी मुहम्मद (सल्लम) उस अंधे शख़्स को बीनाई न दे सके थे I नबी हज़रत ईसा अल मसीह तमाम नबियों में बे मिसल थे कि वह किस तरह एक अंधे को शिफ़ा दे सकते थे I उनके पास एक ऐसा इख्तियार था जो  दीगर नबियों के पास नहीं था यहाँ तक कि नबी जैसे हज़रत मूसा , हज़रत इब्राहीम और हज़रत मुहम्मद (सल्लम) I हज़रत ईसा एचआई वह नबी थे जिन के पास ऐसा इख्तियार था कि वह किसी भी दावा वाईए चुनौती का सामना कर सकते थे जिस तरह सूरा ज़खरफ़ में ज़िकर किया गया है I (सूरा 43 — मुआफ़ करने वाला)

 तो (ऐ रसूल) क्या तुम बहरों को सुना सकते हो या अन्धे को और उस शख़्श को जो सरीही गुमराही में पड़ा हो रास्ता दिखा सकते हो (हरगिज़ नहीं)

सूरा ज़खरफ़ 43:40

सूरा अल माइदा (सूरा 5 — मेज़ बिछाना) ईसा अल मसीह के इस तरह मोजिज़ों को बयान करता है I

      (वह वक्त याद करो) जब ख़ुदा फरमाएगा कि ये मरियम के बेटे ईसा हमने जो एहसानात तुम पर और तुम्हारी माँ पर किये उन्हे याद करो जब हमने रूहुलक़ुदूस (जिबरील) से तुम्हारी ताईद की कि तुम झूले में (पड़े पड़े) और अधेड़ होकर (शक़ सा बातें) करने लगे और जब हमने तुम्हें लिखना और अक़ल व दानाई की बातें और (तौरेत व इन्जील (ये सब चीजे) सिखायी और जब तुम मेरे हुक्म से मिट्टी से चिड़िया की मूरत बनाते फिर उस पर कुछ दम कर देते तो वह मेरे हुक्म से (सचमुच) चिड़िया बन जाती थी और मेरे हुक्म से मादरज़ाद (पैदायशी) अंधे और कोढ़ी को अच्छा कर देते थे और जब तुम मेरे हुक्म से मुर्दों को ज़िन्दा (करके क़ब्रों से) निकाल खड़ा करते थे और जिस वक्त तुम बनी इसराईल के पास मौजिज़े लेकर आए और उस वक्त मैने उनको तुम (पर दस्त दराज़ी करने) से रोका तो उनमें से बाज़ कुफ्फ़ार कहने लगे ये तो बस खुला हुआ जादू है

सूरा अल –माइदा 5:110

सूरा आल इमरान (सूरा 3—इमरान का ख़ानदान) आगे और मोजिज़ात में नबी हज़रत ईसा अल मसीह के इख्तियार के बारे में ज़िकर करती है I

   और बनी इसराइल का रसूल (क़रार देगा और वह उनसे यूं कहेगा कि) मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) यह निशानी लेकर आया हूं कि मैं गुंधीं हुई मिट्टी से एक परिन्दे की सूरत बनाऊॅगा फ़िर उस पर (कुछ) दम करूंगा तो वो ख़ुदा के हुक्म से उड़ने लगेगा और मैं ख़ुदा ही के हुक्म से मादरज़ाद (पैदायशी) अंधे और कोढ़ी को अच्छा करूंगा और मुर्दो को ज़िन्दा करूंगा और जो कुछ तुम खाते हो और अपने घरों में जमा करते हो मैं (सब) तुमको बता दूंगा अगर तुम ईमानदार हो तो बेशक तुम्हारे लिये इन बातों में (मेरी नबूवत की) बड़ी निशानी हैऔर तौरेत जो मेरे सामने मौजूद है मैं उसकी तसदीक़ करता हूं और (मेरे आने की) एक ग़रज़ यह (भी) है कि जो चीजे तुम पर हराम है उनमें से बाज़ को (हुक्मे ख़ुदा से) हलाल कर दूं और मैं तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) निशानी लेकर तुम्हारे पास आया हूं

सूरा आल इमरान 3:49-50

अंधे देखने लगे , कोढ़ी शिफ़ायाब हुए और मुर्दे जिलाए गए I इसी लिए सूरा अल – माइदा 5:110 कहता है , ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) एनई साफ़ निशान ज़ाहिर किए और सूरा आल इमरान 3:49-50 दावा पेश करता है कि हज़रत मसीह के निशानात ख़ुदावंद की तरफ़ से तुम्हारे लिये है I इन ज़बरदस्त निशानियों को नज़र अंदाज़ कर देना क्या तुम्हारे लिये बे वक़ूफ़ी नहीं होगी ?

इससे पहले हमने देखा कि नबी हज़रत ईसा अल मसीह ने अपने बड़े इख्तियार से तालीम दी I इसी इख्तियार के तहत ही वह तालीम देते और शिफ़ा के काम अंजाम देते थे I पहाड़ी वाज़ की तालीम को ख़तम करने के बाद इंजील ए शारीफ़ इस तरह से बयान करती है :

ब वह उस पहाड़ से उतरा, तो एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली।
2 और देखो, एक कोढ़ी ने पास आकर उसे प्रणाम किया और कहा; कि हे प्रभु यदि तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है।
3 यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छूआ, और कहा, मैं चाहता हूं, तू शुद्ध हो जा और वह तुरन्त को ढ़ से शुद्ध हो गया।
4 यीशु ने उस से कहा; देख, किसी से न कहना परन्तु जाकर अपने आप को याजक को दिखला और जो चढ़ावा मूसा ने ठहराया है उसे चढ़ा, ताकि उन के लिये गवाही हो।

मत्ती 8:1-4

नबी ईसा अल मसीह अब अपने इख्तियार का मज़ाहिरा पेश करते हुए एक कोढ़ी को शिफ़ा इनायत करते हैं I उनहों साफ़ लफ़्ज़ों उस कोढ़ी से कहा “तू पाकसाफ़ होजा” वह फिर पाक साफ़ हो गया उस के कलाम में न सिर्फ़ शिफ़ा देने का इख्तियार था बलकि तालीम देने का भी इख्तियार था I

फिर ईसा (अलैहिस्सलाम) की मुलाक़ात एक रोमी ‘दुश्मन’ से हुई I यह लोग नफ़रती पट्टेदार थे जो मसीह के ज़माने में यहूदियों की ज़मीनें छीनने में माहिर थे I यहूदी लोग रोमियों को वैसे ही नज़र से देखते थे जिस तरह से आज की तारीख़ में कुछ फ़ालिस्तीनी लोग इसराईल को देखते हैं (यहूदियों के ज़रिये) सबसे ज़ियादा नफ़रत किए गए लोग रोमी सिपाही लोग थे जिनको अक्सर उनकी ताक़त के लिये गालियां देते थे I उनसे ज़ियादा बदतर रोमी हाकिम लोग थे –‘सूबेदार लोग’               जो सिपाहियों पर हुकुम चलाते थे I नबी हज़रत मसीह की मुलाक़ात अब इस नफ़रती ‘दुश्मन’ से होती है I यहाँ आप देखें कि इन की मुलाक़ात कैसे हुई :

ईसा अल – मसीह (अलैहिस्सलाम) और एक सूबेदार

5 और जब वह कफरनहूम में आया तो एक सूबेदार ने उसके पास आकर उस से बिनती की।
6 कि हे प्रभु, मेरा सेवक घर में झोले का मारा बहुत दुखी पड़ा है।
7 उस ने उस से कहा; मैं आकर उसे चंगा करूंगा।
8 सूबेदार ने उत्तर दिया; कि हे प्रभु मैं इस योग्य नहीं, कि तू मेरी छत के तले आए, पर केवल मुख से कह दे तो मेरा सेवक चंगा हो जाएगा।
9 क्योंकि मैं भी पराधीन मनुष्य हूं, और सिपाही मेरे हाथ में हैं, और जब एक से कहता हूं, जा, तो वह जाता है; और दूसरे को कि आ, तो वह आता है; और अपने दास से कहता हूं, कि यह कर, तो वह करता है।
10 यह सुनकर यीशु ने अचम्भा किया, और जो उसके पीछे आ रहे थे उन से कहा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि मैं ने इस्राएल में भी ऐसा विश्वास नहीं पाया।
11 और मैं तुम से कहता हूं, कि बहुतेरे पूर्व और पश्चिम से आकर इब्राहीम और इसहाक और याकूब के साथ स्वर्ग के राज्य में बैठेंगे।
12 परन्तु राज्य के सन्तान बाहर अन्धियारे में डाल दिए जाएंगे: वहां रोना और दांतों का पीसना होगा।
13 और यीशु ने सूबेदार से कहा, जा; जैसा तेरा विश्वास है, वैसा ही तेरे लिये हो: और उसका सेवक उसी घड़ी चंगा हो गया॥

मत्ती 8:5-13

हज़रत मसीह के कलाम इतने पुर इख्तियार थे कि वह यूं ही वह दूर ही से किसी बात का हुक्म देते थे और वह हो जाता था ! मगर ईसा (अलैहिस्सालाम) को जिस बात ने हैरतज़दा किया वह इस गैर कौम ‘दुश्मन’ का ईमान था जिस ने येसू के कलाम के इख्तियार को मालूम किया और पहचाना — कि उसका कलाम कभी खाली नहीं जाता वह ज़रूर फल लाता है I जिस शख्स की हम उम्मीद करते थे कि उसका ईमान नहीं होगा (क्यूंकि वह गलत लोगों में से था और उसका मज़हब भी गलत था), हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के अल्फ़ाज़ से ऐसा लगता है कि वह एक दिन जन्नत की ज़ियाफ़त में हज़रत इब्राहीम और दीगर रास्त्बाज़ों के साथ शामिल होगा जबकि सही मज़हब के सही लोग पीछे रह जाएंगे I ईसा (अलैहिस्सलाम) हमको तंबीह देते और ख़बरदार करते हैं कि न तो मज़हब और न मीरास (परमपरा) जन्नत के लिये ज़ामिन टहराएगा I

मक़्दिस के रहनुमा की मुरदा बेटी को येसू जिलाते हैं

इसका मतलब यह नहीं कि हज़रत ईसा ने यहूदी रहनुमाओं या उन के खानदान वालों को शिफ़ा नहीं दी I दरअसल मक़्दिस के रहनुमा की बेटी को मरे हुओं में से जिलाना उसके ज़बरदस्त मोजिज़ों में से एक था I इंजील में इसको इस तरह से बयान किया गया है :

40 जब यीशु लौट रहा था, तो लोग उस से आनन्द के साथ मिले; क्योंकि वे सब उस की बाट जोह रहे थे।
41 और देखो, याईर नाम एक मनुष्य जो आराधनालय का सरदार था, आया, और यीशु के पांवों पर गिर के उस से बिनती करने लगा, कि मेरे घर चल।
42 क्योंकि उसके बारह वर्ष की एकलौती बेटी थी, और वह मरने पर थी: जब वह जा रहा था, तब लोग उस पर गिरे पड़ते थे॥
43 और एक स्त्री ने जिस को बारह वर्ष से लोहू बहने का रोग था, और जो अपनी सारी जिविका वैद्यों के पीछे व्यय कर चुकी थी और तौभी किसी के हाथ से चंगी न हो सकी थी।
44 पीछे से आकर उसके वस्त्र के आंचल को छूआ, और तुरन्त उसका लोहू बहना थम गया।
45 इस पर यीशु ने कहा, मुझे किस ने छूआ जब सब मुकरने लगे, तो पतरस और उसके साथियों ने कहा; हे स्वामी, तुझे तो भीड़ दबा रही है और तुझ पर गिरी पड़ती है।
46 परन्तु यीशु ने कहा: किसी ने मुझे छूआ है क्योंकि मैं ने जान लिया है कि मुझ में से सामर्थ निकली है।
47 जब स्त्री ने देखा, कि मैं छिप नहीं सकती, तब कांपती हुई आई, और उसके पांवों पर गिरकर सब लोगों के साम्हने बताया, कि मैं ने किस कारण से तुझे छूआ, और क्योंकर तुरन्त चंगी हो गई।
48 उस ने उस से कहा, बेटी तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है, कुशल से चली जा।
49 वह यह कह ही रहा था, कि किसी ने आराधनालय के सरदार के यहां से आकर कहा, तेरी बेटी मर गई: गुरु को दु:ख न दे।
50 यीशु ने सुनकर उसे उत्तर दिया, मत डर; केवल विश्वास रख; तो वह बच जाएगी।
51 घर में आकर उस ने पतरस और यूहन्ना और याकूब और लड़की के माता-पिता को छोड़ और किसी को अपने साथ भीतर आने न दिया।
52 और सब उसके लिये रो पीट रहे थे, परन्तु उस ने कहा; रोओ मत; वह मरी नहीं परन्तु सो रही है।
53 वे यह जानकर, कि मर गई है, उस की हंसी करने लगे।
54 परन्तु उस ने उसका हाथ पकड़ा, और पुकारकर कहा, हे लड़की उठ!
55 तब उसके प्राण फिर आए और वह तुरन्त उठी; फिर उस ने आज्ञा दी, कि उसे कुछ खाने को दिया जाए।
56 उसके माता-पिता चकित हुए, परन्तु उस ने उन्हें चिताया, कि यह जो हुआ है, किसी से न कहना॥

लूक़ा 8:40-56

एसओ आप देखें कि एक बार फिर हज़रत ईसा ने अपने इख्तियार के कलाम से एक छोटी लड़की को जो मर गई थी उसे जिलाया I लोगों को मोजिज़ों के ज़रिये शिफ़ा देने के लिये मज़हब या गैर मज़हब , यहूदी या गैर यहूदी इनसे हज़रत ईसा अल मसीह को कोई एतराज़ नहीं था , या यह चीज़ें उन्हें कोई रुकावट नहीं डालते थे I जहां भी कहीं वह ईमान को पाते थे , इस में न कोई जिंस का लिहाज़ था , न नसल का , न क़बीले का और न मज़हब का वह शिफ़ा देने के लिये अपने इख्तियार का इस्तेमाल करते थे I

ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) दोस्तों को शामिल करते हुए बहुतों को शिफ़ा देते हैं

इंजील ए शारीफ़ यह भी बयान करती है कि हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) पतरस के घर पर गए जो आगे चलकर 12 शागिर्दों (साथियों) का राहनुमा बनने वाला था I जेएबी येसू अंदर दाखिल हुए तो उनहों ने ज़रूरत महसूस किया और ख़िदमत अंजाम दी जिस तरह इंजील में पेश है :

14 और यीशु ने पतरस के घर में आकर उस की सास को ज्वर में पड़ी देखा।
15 उस ने उसका हाथ छूआ और उसका ज्वर उतर गया; और वह उठकर उस की सेवा करने लगी।
16 जब संध्या हुई तब वे उसके पास बहुत से लोगों को लाए जिन में दुष्टात्माएं थीं और उस ने उन आत्माओं को अपने वचन से निकाल दिया, और सब बीमारों को चंगा किया।
17 ताकि जो वचन यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था वह पूरा हो, कि उस ने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया॥

त्ती 8:14-17

उन्हें तमाम बदरूहों पर भी इख्तियार था जिनको वह अपने ‘मुंह के अल्फ़ाज़’ से डांट कर निकाल देते थे I तो फिर इंजील ए शारीफ़ हमको याद दिलाती है ज़बूर ने पेशीन गोई की है कि मोजिज़ाना शिफ़ाएँ मसीह की आमद की निशानी है I दरअसल नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने भी एक दूसरी इबारत में मसीह की आमद से मुताल्लिक़ नबुवत की:

भु यहोवा का आत्मा मुझ पर है; क्योंकि यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया और मुझे इसलिये भेजा है कि खेदित मन के लोगों को शान्ति दूं; कि बंधुओं के लिये स्वतंत्रता का और कैदियों के लिये छुटकारे का प्रचार करूं;
2 कि यहोवा के प्रसन्न रहने के वर्ष का और हमारे परमेश्वर के पलटा लेने के दिन का प्रचार करूं; कि सब विलाप करने वालों को शान्ति दूं
3 और सिय्योन के विलाप करने वालों के सिर पर की राख दूर कर के सुन्दर पगड़ी बान्ध दूं, कि उनका विलाप दूर कर के हर्ष का तेल लगाऊं और उनकी उदासी हटाकर यश का ओढ़ना ओढ़ाऊं; जिस से वे धर्म के बांजवृक्ष और यहोवा के लगाए हुए कहलाएं और जिस से उसकी महिमा प्रगट हो।

यसायाह 61:1-3

नबी यसायाह ने (750 क़बल मसीह) में पेशीन गोई की थी कि मसीह हलीमों के लिये ‘खुशख़बरी’ (= ‘बशारत’= ‘इंजील’), गरीबों को तसल्ली , क़ैदियों के लिये रिहाई और असीरों के लिये आज़ादी का ऐलान करने आएंगे I एसओ तालीम देना , बीमारों को शिफ़ा देना , और मुरदों को जिलाना यह सारी बातें हैं जिन को नबी ईसा (अलैहिस्सलाम) ने नबुवत के तोर पर पूरा किया I और इन सब कामों को उनहों ने अपने कलाम के इख्तियार से अंजाम दिया और उनका यह इख्तियार लोगों पर था , बीमारी पर थी , बदरूहों पर थी साथ ही यहां तक कि क़ुदरत और मौत पर भी थी I इसी लिये सूरा आल –इमरान उसको अल्लाह की तरफ़ से कलिमा कहता है :

(वह वाक़िया भी याद करो) जब फ़रिश्तों ने (मरियम) से कहा ऐ मरियम ख़ुदा तुमको सिर्फ़ अपने हुक्म से एक लड़के के पैदा होने की खुशख़बरी देता है जिसका नाम ईसा मसीह इब्ने मरियम होगा (और) दुनिया और आखेरत (दोनों) में बाइज्ज़त (आबरू) और ख़ुदा के

मुक़र्रब बन्दों में होगासूरा 3:45

इसी तरह इंजील शारीफ़ भी ईसा (अलैहिस्सलाम) की बाबत कहती है कि

      … और उसका नाम ‘कलाम ए ख़ुदा’ कहलाता है –

मुकाशफ़ा 19:13

नबी हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) , मसीह होने के नाते कलाम पर ऐसा इख्तियार था कि उन्हे ‘ख़ुदा की तरफ़ से कलिमा’ और ‘कलाम –ए- ख़ुदा’ भी कहलाए I अब तक यह वह बातें हैं जो मुक़द्दस किताबों में कही गई हैं , इस लिये समझदारी की बात यह है कि उसकी तालीमात को मानें और उनकी इज़्ज़त करें I अगली तहरीर में हम देखेंगे कि किस तरह क़ुदरत उनके कलाम का हुक्म मानती है I                         

एक इंजील के लिए चार अनाजील के बयान क्यूँ हैं?

मुझ से कभी कभी पूछा जाता है कि जबकि इंजील एक ही है तो अल किताब बाइबल में चार अनाजील की किताबें क्यूँ पाई जाती हैं जो कि चार फ़रक़ इनसानी मुसन्निफ़ों के ज़रिये लिखा हुआ है ? क्या यह अल्लाह की तरफ़ से न होकर असल बनी इनसान की ख़ताकारी (और तख़ालुफ़) का सबब न बनाएगा ?

बाइबल अल किताब ख़ुद ही अपने बारे में कहती है

16 हर एक पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है।
17 ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्पर हो जाए॥

2 तीमूथियुस 3:16–17

सो बाइबल अल किताब दावा करती है कि ख़ुदा इसका आख़री मुसन्निफ़ है जबकि उस ने ही इन इनसानी मूसन्निफ़ों को इलहाम बख़्शा I इस मुद्दे पर कुरान शरीफ़ पूरे तोर पर राज़ी है जिस तरह से हम ने पिछले तहरीर में देखा था , जिसका मज़मून था “बाइबल की बाबत क़ुरान शरीफ़ क्या कहता है”  

मगर एक इंजील के लिए चार इंजील की किताबों को कैसे समझें ? दरअसल कुरान शरीफ़ में अक्सर कई एक इबारतें हैं जो एक ही वाक़िए को दुहराते हैं जो इन सब को लेकर साफ़ तोर से वाक़िए की तस्वीर की तरफ़ ले जाने देते हैं I मिसाल के तोर पर ‘आदम की निशानी के लिए नविशते’ जो सूरा (7:19-26 ‘अल आराफ़’  बुलंदी) जन्नत में हज़रत आदम की बाबत हम से कहती है I मगर यही ज़िकर सूरा 20 (सूरा ता हा 20:120-123) में भी हुआ है I मगर इस दूसरी इबारत में हज़रत आदम की बाबत कुछ मजीद बातें समझने के लिए पेश की गई हैं यह समझाते हुए कि वह शैतान के ज़रिये वारगलाया गया था जबकि ‘सूरा अल आराफ़’ इस का बयान नहीं करती I आप देखें कि यह दोनों बयानात मिलकर जो वाक़े हुआ उसकी एक कामिल तस्वीर को पेश करती है I इन दो इबारतों से मुराद और मंशा यह थी कि एक दूसरे की तारीफ़ की जाये I

इसी तरह बाइबल (अल किताब) में चार अनाजील के बयानात हमेशा एक ही इंजील की बाबत हैi इन सब को लेकर यह साफ़ तोर से नबी हज़रत ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) से मुताल्लिक़ एक समझ अता करती है I चारों बयानात में से हर एक बयान मज़मून से मुताल्लिक़ एक अहम बयान पेश करता हैं जो दीगर तीन बयानात में नहीं पाये जाते है I इसलिए इसब को एक साथ लिया गया है ताकि वह सब मिलकर एक इंजील की मज़ीद कामिल तस्वीर को पेश कर सके I

इसी लिए जब भी इंजील की फ़हरिस्त ए मज़मीन की बाबत बात की जाती है इसे हमेशा वाहिद के सेगे मे लिया जाता है , क्यूंकि एक वाहिद इंजील मौजूद है I मिसाल के तोर पर हम यहाँ पर नए अहद नामे के हवाले मे देखते हैं कि एक ही वाहिद इंजील है I

मैं चाहता हूं कि आप यह जान लें कि भाइयों, मैंने जो सुसमाचार प्रचार किया है, वह कुछ ऐसा नहीं है जो मनुष्य ने बनाया है। मैंने इसे किसी आदमी से प्राप्त नहीं किया, न ही मुझे इसे सिखाया गया था; बल्कि, मैंने इसे ईसा मसीह के रहस्योद्घाटन से प्राप्त किया।

गलतियों 1:11-13

मुक़द्दस क़ुरान शरीफ़ में भी इंजील के लफ़्ज़ को वाहिद मे लिखा गया है I उस तहरीर को देखें जिसका मज़मून है (क़ुरान शरीफ़ मे ‘इंजील’ का नमूना) I मगर जब हम गवाहियों और इंजील कि किताबों का ज़िकर करते हैं तो चार का ज़िकर करते हैं I दरअसल तौरात में एक इबारत को लेकर  एक गवाह के गवाही के ज़रिये फैसला नहीं लिया जाता I मूसा की शरीअत में किसी जुर्म के खिलाफ़ या किसी खास वाक़िया या पैगाम की बाबत ‘दो या तीन गवाहों’ की ज़रूरत होती थी I (इस्तिसना 19:15) I ऊपर दिये बयान में शरीअत जिस तरह तीन की ज़रूरत थी इसी तरह चार गवाहों के बयानात मुहय्या करते हुए इंजील को सहारा दिया जाता है I                                      

इखतियार के साथ तालीम के ज़रिये मसीह का इज़हार हुआ

सूरा अल अलक़ (सूरा 96 – मुंजमिद होना) हमसे कहती है अल्लाह हमको एक नई बात सिखाता है जिसे हम पहले नहीं जानते थे I

  जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दीउसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था

सूरा अल — अलक़ 96:45

सूरा अर रोम (सूरा 30 – रोमियों) आगे समझाती है अल्लाह नबियों को पैगामात देने के ज़रिये ऐसा करता है ताकि हम समझें कि खुदा की सच्ची इबादत हम कौनसी गलती पर हैं I

  क्या हमने उन लोगों पर कोई दलील नाज़िल की है जो उस (के हक़ होने) को बयान करती है जिसे ये लोग ख़ुदा का शरीक ठहराते हैं (हरग़िज नहीं)

सूरा अर—रोम 30 -35

यह अँबिया खुदा की तरफ़ से इखतियार रखते हैं हमें ज़ाहिर करने के लिए कि खुदा के साथ हमारे ताल्लुक़ात गलत तरीक़े से कहां पर पाए जाते हैं चाहे वह हमारे सोच में हों चाहे वह हमारे बोलचाल में या या हमारे आदत ओ अतवार मे पाए जाते हों I नबी हज़रत ईसा अल मसीह अलैहिस्सलाम एक ऐसे बे मिसल उस्ताद और इखतियार रखने वाले थे कि हरेक के बातिनी खयालात खुद ब ख़ुद उसके सामने ज़ाहिर हों जाते थे I इसे हम यहाँ पर उसके इख्तियार की निशानी में देखते हैं जो उसकी शिफ़ा के मोजिज़ों के ज़रिये दिये गए हैं I

ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) के शैतान (इबलीस) के ज़रिये आज़माए जाने के बाद तालीम के ज़रिये एक नबी बतोर अपनी ख़िदमत शुरु की I उसकी सब से ज़ियादा लंबी तालीम को इंजील ए शरीफ़ में क़लमबंद किया गया है जिसे पहाड़ी वाज़ कहते हैं I यहाँ आप मुकम्मल पहाड़ी वाज़ को पढ़ सकते हैं I हम ज़ेल में कुछ सुर्खियां पेश कर रहे हैं और फिर हज़रत ईसा की तालीम के साथ यूएस तालीम को भी जोड़ेंगे जो तौरात में नबी मूसा के ज़रिये पेशीन गोई की गई थीं I

ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) ने ज़ेल में लिखी बातों की तालीम दी:

21 तुम सुन चुके हो, कि पूर्वकाल के लोगों से कहा गया था कि हत्या न करना, और जो कोई हत्या करेगा वह कचहरी में दण्ड के योग्य होगा।
22 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि जो कोई अपने भाई पर क्रोध करेगा, वह कचहरी में दण्ड के योग्य होगा: और जो कोई अपने भाई को निकम्मा कहेगा वह महासभा में दण्ड के योग्य होगा; और जो कोई कहे “अरे मूर्ख” वह नरक की आग के दण्ड के योग्य होगा।
23 इसलिये यदि तू अपनी भेंट वेदी पर लाए, और वहां तू स्मरण करे, कि मेरे भाई के मन में मेरी ओर से कुछ विरोध है, तो अपनी भेंट वहीं वेदी के साम्हने छोड़ दे।
24 और जाकर पहिले अपने भाई से मेल मिलाप कर; तब आकर अपनी भेंट चढ़ा।
25 जब तक तू अपने मुद्दई के साथ मार्ग ही में हैं, उस से झटपट मेल मिलाप कर ले कहीं ऐसा न हो कि मुद्दई तुझे हाकिम को सौंपे, और हाकिम तुझे सिपाही को सौंप दे और तू बन्दीगृह में डाल दिया जाए।
26 मैं तुम से सच कहता हूं कि जब तक तू कौड़ी कौड़ी भर न दे तब तक वहां से छूटने न पाएगा॥
27 तुम सुन चुके हो कि कहा गया था, कि व्यभिचार न करना।
28 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्टि डाले वह अपने मन में उस से व्यभिचार कर चुका।
29 यदि तेरी दाहिनी आंख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकालकर अपने पास से फेंक दे; क्योंकि तेरे लिये यही भला है कि तेरे अंगों में से एक नाश हो जाए और तेरा सारा शरीर नरक में न डाला जाए।
30 और यदि तेरा दाहिना हाथ तुझे ठोकर खिलाए, तो उस को काटकर अपने पास से फेंक दे, क्योंकि तेरे लिये यही भला है, कि तेरे अंगों में से एक नाश हो जाए और तेरा सारा शरीर नरक में न डाला जाए॥
31 यह भी कहा गया था, कि जो कोई अपनी पत्नी को त्याग दे तो उसे त्यागपत्र दे।
32 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं कि जो कोई अपनी पत्नी को व्यभिचार के सिवा किसी और कारण से छोड़ दे, तो वह उस से व्यभिचार करवाता है; और जो कोई उस त्यागी हुई से ब्याह करे, वह व्यभिचार करता है॥
33 फिर तुम सुन चुके हो, कि पूर्वकाल के लोगों से कहा गया था कि झूठी शपथ न खाना, परन्तु प्रभु के लिये अपनी शपथ को पूरी करना।
34 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि कभी शपथ न खाना; न तो स्वर्ग की, क्योंकि वह परमेश्वर का सिंहासन है।
35 न धरती की, क्योंकि वह उसके पांवों की चौकी है; न यरूशलेम की, क्योंकि वह महाराजा का नगर है।
36 अपने सिर की भी शपथ न खाना क्योंकि तू एक बाल को भी न उजला, न काला कर सकता है।
37 परन्तु तुम्हारी बात हां की हां, या नहीं की नहीं हो; क्योंकि जो कुछ इस से अधिक होता है वह बुराई से होता है॥
38 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था, कि आंख के बदले आंख, और दांत के बदले दांत।
39 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि बुरे का सामना न करना; परन्तु जो कोई तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे, उस की ओर दूसरा भी फेर दे।
40 और यदि कोई तुझ पर नालिश करके तेरा कुरता लेना चाहे, तो उसे दोहर भी ले लेने दे।
41 और जो कोई तुझे कोस भर बेगार में ले जाए तो उसके साथ दो कोस चला जा।
42 जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे; और जो तुझ से उधार लेना चाहे, उस से मुंह न मोड़॥
43 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर।
44 .परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो।
45 जिस से तुम अपने स्वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनो पर अपना सूर्य उदय करता है, और धमिर्यों और अधमिर्यों दोनों पर मेंह बरसाता है।
46 क्योंकि यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों ही से प्रेम रखो, तो तुम्हारे लिये क्या फल होगा? क्या महसूल लेने वाले भी ऐसा ही नहीं करते?
47 और यदि तुम केवल अपने भाइयों ही को नमस्कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो? क्या अन्यजाति भी ऐसा नहीं करते?
48 इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्वर्गीय पिता सिद्ध है॥

मत्ती 5:21-48

मसीह और पहाड़ी वाज़

ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) ने अपने इस बतोर शक्ल दी , मुबारकबादियों के बाद उसने इस तरह से कहना शुरू किया ,”तुम सुन चुके हों कि कहा गया था … मगर मैं तुम से कहता हूँ कि … “ I बयान की इस तरकीब में वह सब से पहले तौरेत का हवाला देता है और फिर हुक्मों की वुसअत को मंशाओं और लफ़्ज़ों की सोच की तरफ़ बढ़ाता है I हज़रत ईसा अल मसीह ने उन सख़्त हुक्मों को जो मूसा नबी के ज़रिये से दिये गए थे उन्हें करने के लिए या अमली जामा  पहनाने के लिए यहाँ तक कि और भी ज़ियादा मुश्किल कर दिये थे !

मगर क़ाबिल ए ज़िकर बात यह भी है कि जिस तरीक़े से उसने तौरेत के हुक्मों की वुसअत कीI वह अपने ख़ुद के इखतियार की बिना पर ऐसा करता है I वह सादे तोर कहता है “मगर मैं तुम से कहता हूँ … “ और इस के साथ वह हुक्म की गुंजाइश को बढ़ाता है I उसकी तालीम में यही एक बात बे मिसल पाई जाती है I जब उसने अपने इस वाज़ को ख़त्म किया था तो देखें की इंजील ए शरीफ़ हम से क्या कहती है :

28 जब यीशु ये बातें कह चुका, तो ऐसा हुआ कि भीड़ उसके उपदेश से चकित हुई।
29 क्योंकि वह उन के शास्त्रियों के समान नहीं परन्तु अधिकारी की नाईं उन्हें उपदेश देता था॥

मत्ती 7:28-29

हक़ीक़त में ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) ने इस बतोर तालीम दी जैसे कि एक साहिब ए इखतियार तालीम देता है I अक्सर अँबिया सिर्फ़ एक पैगंबर थे जो अल्लाह की जानिब से नाज़िल शुदा पैगाम को लोगों तक पहुंचाते थे I मगर यहाँ कुछ फ़रक़ था I ईसा अल मसीह ऐसा क्यूँ कर सका था ? ‘मसीह’ होने के नाते जो हम ने यहाँ देखा , ज़बूर शरीफ़ में आने वाले का एक लक़ब था कि उसके पास एक बड़ा इखतियार था ,ज़बूर ए शरीफ़ का 2 बाब जहां सब से पहले दिये गए मसीह के लक़ब का बयान है I ज़ेल मे दिये तरीक़े से अल्लाह मसीह से बात कर रहा है :

8 मुझ से मांग, और मैं जाति जाति के लोगों को तेरी सम्पत्ति होने के लिये, और दूर दूर के देशों को तेरी निज भूमि बनने के लिये दे दूंगा।

ज़बूर 2:8

मसीह को यहाँ तक कि ज़मीन की इंतिहा तक क़ौमों पर इखतियार दिया गया था , इसी तरह मसीह होने के नाते उसको इखतियार दिया गया था कि वह इस तरीक़े से तालीम दे जैसे उसने दी I

नबी और पहाड़ी वाज़

दरअसल जैसे हम ने यहाँ देखा , तौरात में नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) ने आने वाले ‘नबी’ की बाबत पेशीन गोई की थी कि ‘जिस बतोर उसने तालीम दी थी उस बतोर उसपर गौर किया जाएगा सो मूसा ने लिखा :

18 सो मैं उनके लिये उनके भाइयों के बीच में से तेरे समान एक नबी को उत्पन्न करूंगा; और अपना वचन उसके मुंह में डालूंगा; और जिस जिस बात की मैं उसे आज्ञा दूंगा वही वह उन को कह सुनाएगा।
19 और जो मनुष्य मेरे वह वचन जो वह मेरे नाम से कहेगा ग्रहण न करेगा, तो मैं उसका हिसाब उस से लूंगा।

इस्तिसना 18:18 -19

जिस तरीक़े से उसने तालीम दी उसमें हज़रत ईसा मसीह होने बतोर अपने इखतियार का रियाज़ कर रहे थे और मूसा की नबुवत जो आने वाले नबी की बाबत थी उस नबुवत को पूरा कर रहे थे कि वह एक बड़े इख्तियार के साथ तालीम देगा I वह मसीह और नबी दोनों थे I

आप और मैं और पहाड़ी वाज़

अगर आप इस पहाड़ी वाज़ का गौर से मुताला करते हैं तो यह देखने के लिए कि कैसे उस पर अमल की जाए तो आप गालिबन उलझन में रह जाएंगे I किस तरह कोई ऐसे अहकाम के साथ जी सकता है जो हमारे दिलों और मंशाओं से मुखताब हो ? इस पहाड़ी वाज़ से ईसा अल मसीह का मक़सद क्या था ? इस सवाल के जवाब को हम पाँच बाब की आख़री आयत को देख सकते हैं I

48 इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्वर्गीय पिता सिद्ध है॥

मत्ती 5:48

गौर करें कि यह हुकुम था , मशवरा नहीं था I उस का तक़ाज़ा यह था कि हम कामिल बनें ! क्यूँ ? क्यूंकि खुदा कामिल है और अगर हम जन्नत में उसके साथ रहना रहना है तो कमिलियत के अलावा और कोई चीज़ काम नहीं दे सकती I हम अक्सर सोचते हैं कि शायद ज़ियादा अच्छा बनना हमारे बुरे आमाल से बेहतर है —यह काफ़ी होगा I पर अगर यह मामला था तो अल्लाह हमको जन्नत में दाख़िल होने देता और हम जन्नत की कामिलियत को बर्बाद कर देते और उसे एक गंदा मक़ाम बतोर बदल कर रख देते जिस तरह से इस दूनया में मौजूद है I यह हमारी नफ़सानी ख़ाहिश , शहवत परस्ती , लालच और गुस्सा वगैरा जो आज यहाँ पर हमारी ज़िंदगियों को बर्बाद करता है I अगर हम ऊपर की चीजों को लेकर जन्नत में दाख़िल होंगे तो वह जननत बहुत जल्द हमारी इस दुन्या की तरह ही हो जाएगी – बहुत सारी पेशानियों से भरपूर जो हम ही ने पैदा किए हैं I

दरअसल ईसा अल मसीह की तालीम का अक्सर हिस्सा हमारी बाहिरी रसम के बदले हमारे दिल की बातिनी हिस्से को लेकर हमें फिकरमंद बनाती है I उसकी दूसरी तालीम से गौर करें कि यह किस तरह हमारे दिलों के अंदरूनी हिस्से पर असर डालता है I

20 फिर उस ने कहा; जो मनुष्य में से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।
21 क्योंकि भीतर से अर्थात मनुष्य के मन से, बुरी बुरी चिन्ता, व्यभिचार।
22 चोरी, हत्या, पर स्त्रीगमन, लोभ, दुष्टता, छल, लुचपन, कुदृष्टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं।
23 ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं॥

मर्क़ुस  7:20-23

सो हमारे अंदर जो पाकीज़गी पाई जाती है वह बहुत अहमियत रखता है इस के अलावा हमारी कामिलियत का मेयार भी बहुत मायने रखता है I अल्लाह अपने कामिल मक़ाम ए जन्नत में कामिलियत को ही दाख़िल होने देगा I मगर यह हालांकि लिखावट मे अच्छा लगता हो मगर यह बहुत बड़ी परेशानी खड़ा करता है : कि हम इस मक़ाम तक कैसे पहुँच पाएंगे ? कामिल बनने की हमारी सख़्त ना मुमकिन मायूसी का सबब बनने के लिए काफ़ी हों सकता है I

मगर यही बात तो वह चाहता है I जब हम कभी अच्छे बनने की ख़्वाहिश से ना उम्मीद हो जाते ,जब हम ख़ुद के आमाल पर भरोसा करना छोड़ देते हैं तभी हम ‘दिल के गरीब’ बनते हैं I और ईसा अल मसीह ने इस पहाड़ी वाज़ के शुरू मेँ यही कहा I

3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है।

मत्ती 5:3

हमारे लिए हिकमत का शुरू आईएन तालीमात को छोड़ना नहीं है यह सोचकर कि यह बातें हमपर नाफ़िज़ नहीं होते , बल्कि यह हम पर ज़रूर नफ़िज़ होते हैं ! मगर इस का मेयार वही है कि हमको ‘कामिल बनना’ है I जैसे ही हम इस मेयार को अपने अन्दर डूबने देते हैं, और महसूस करते हैं कि हम इस क़ाबिल नहीं हैं तभी हम सीधी सच्ची रह से भटकने लगते और नीचे की तरफ़ जाने लगते हैं I हम इस सीधी सच्ची राह से इसलिए भटकते हैं क्यूंकि हम अपनी कोताही को जानते है I हम मदद को कबूल करने के लिए ज़ियादा तयार रह सकते है बनिस्बत अगर हम यह सोचें कि इसे हम अपने ख़ुद की कोशिश से अंजाम दे सकते हैं I                 

ईसा अल मसीह शैतान के जरिये आज़माए गये

सूरा अल अनफ़ाल (सूरा 8 – माल ए गनीमत) हम से कहता है कि शैतान लोगों को किस तरह से आज़माता है I

और जब शैतान ने उनकी कारस्तानियों को उम्दा कर दिखाया और उनके कान में फूंक दिया कि लोगों में आज कोई ऐसा नहीं जो तुम पर ग़ालिब आ सके और मै तुम्हारा मददगार हूं फिर जब दोनों लश्कर मुकाबिल हुए तो अपने उलटे पॉव भाग निकला और कहने लगा कि मै तो तुम से अलग हूं मै वह चीजें देख रहा हूं जो तुम्हें नहीं सूझती मैं तो ख़ुदा से डरता हूं और ख़ुदा बहुत सख्त अज़ाब वाला है

सूरा अल अनफ़ाल 8:48

सूरा ता – हा (सूरा 20 ता – हा) बयान करता है कि किस तरह इबलीस आदम के गुनाह के लिए ज़िम्मेदार था I वह बयान करता है :

तो शैतान ने उनके दिल में वसवसा डाला (और) कहा ऐ आदम क्या मैं तम्हें (हमेशगी की ज़िन्दगी) का दरख्त और वह सल्तनत जो कभी ज़ाएल न हो बता दूँ

सूरा ता – हा 20:120

शैतान ने वही दाव पेच नबी ईसा अल मसीह पर भी आज़माए जो उसने हज़रत आदम और हववा पर आज़माए थे I इंजील ए शरीफ़ नबी हज़रत यहया के ज़ाहिर होने के फ़ौरन बाद तनहाई मे ले गया , वरगलाया और कानापूसी की I हम ने देखा कि किस तरह हज़रत यहया मसीह की आमद के लिए लोगों को तयार करने के लिए आए I उनका ज़बरदस्त पैगाम था कि हर एक को तौबा करने की ज़रूरत है I इंजील ए शरीफ़ मुफ़स्सिल तोर से बयान जारी रखता है कि नबी हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) हज़रत यहया के ज़रिये बपतिस्मा लिया I इस बपतिस्मे के ज़रिये ऐलान किया गया कि हज़रत ईसा की ख़िदमत गुज़ारि शुरू की जानी थी I मगर इससे पहले कि हज़रत ईसा की ख़िदमत का आगाज़ हो उन्हें हम सब का — बड़ा दुश्मन शैतान के ज़रिये आज़माया जाना ज़रूरी था जिसको इबलीस भी कहा जाता है I

इंजील ए शरीफ़ इस आज़माए जाने को तीन ख़ास आज़माइश बतोर बयान करती है जिसे शैतान हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के सामने लेकर आया था I आइये हम इन तीनों को बारी बारी से देखें (आप देखें कि शैतान हज़रत ईसा को ‘खुदा के बेटे’ के लक़ब के साथ मुखातब होता है I इस का क्या मतलब है इसे समझने के लिए यहाँ देखें) I

रोटी की आज़माइश

ब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्लीस से उस की परीक्षा हो।
2 वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, अन्त में उसे भूख लगी।
3 तब परखने वाले ने पास आकर उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियां बन जाएं।
4 उस ने उत्तर दिया; कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।

मत्ती 4:1-4

यहाँ हम एक मुतवाज़ियत को देखते है जब शैतान ने आदम और हव्वा को बाग ए अदन में आज़माया था I उस आज़माइश में ममनूआ फल था ‘… खाने के लिए अच्छा … ‘ और यही एक आज़माइश का बहुत ज़ियादा सबब था I इस सूरत में हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के साथ जो फ़ाक़ा कर रहे थे (और इस फ़ाक़े का कोई ख़त्मा (ठहराव)—इफ़तार , वक़्फ़ा या हर दिन शाम के वक़्त रोज़ा तोड़ना वगैरा कुछ नहीं था) I ऐसे एक लंबे अरसे में शैतान ने गुमान किया कि रोटी एक सोची समझी आज़माने वाली चीज़ है I मगर इस का जो अंजाम था वह आदम से बिलकुल फ़रक़ था क्यूँकि हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने आज़माइश को रोक दिया जबकि हज़रत आदम इसे रोक नहीं पाये थे I  

मगर सवाल यह है कि उसे इन चालीस दिनों के दौरान कुछ भी खाने पीने से मना क्यूँ किया गया था ? इंजील ए शरीफ़ खास तोर से हमें इस कि वजह नहीं बताती I मगर ज़बूर शरीफ़ में यह पेशीन गोई की गई है कि आने वाला ख़ादिम इसराईल के यहूदी क़ौम के लिए एक नुमाइंदा बतोर होगा I बनी इसराईल क़ौम नबी हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के मातहत सिर्फ़ आसमान से मन्न खाकर बयाबान में 40 साल तक घूमते रहे I इसी तरह यह 40 दिन की फ़ाक़ा कशी और खुदा के कलाम पर गौर ओ फ़िकर बयाबान में एक वायदा किया हुआ ख़ादिम बतोर उस वक़त के वज़ा ए क़ानून के लिए एक रूहानी खूराक की निशानी थी I

खुदा को आज़माने के लिए आज़माइश

दूसरी आज़माइश मसावी तोर से मुश्किल थी I इंजील ए शरीफ़ हम से कहती है कि :

5 तब इब्लीस उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया।
6 और उस से कहा यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगा; और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।
7 यीशु ने उस से कहा; यह भी लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।

मत्ती 4:5-7

यहाँ शैतान हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को आज़माने के लिए ज़बूर शरीफ़ का हवाला देता है I  इसलिए यह ज़रूरी है कि अल्लाह के खिलाफ़ खड़े होने के लिए इन मुक़द्दस तहरीरों का मुताला कर रखा था ताकि उस के खीलाफ़ तदबीर कर सके I वह नवीशतों को अच्छी तरह जानता था और उन्हें तोड़ मोड़ कर पेश करने में भी माहिर था I

मैं ज़बूर शरीफ़ की पूरी इबारतों को दोबारा से पेश करता हूँ जिन का शैतान ने थोड़ा हिस्सा हवाला बतोर पेश किया I (मैं उनके नीचे लकीर खींच कर बताता हूँ जो उसने हवाला दिया)I

10 इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा॥
11 क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।
12 वे तुझ को हाथों हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।
13 तू सिंह और नाग को कुचलेगा, तू जवान सिंह और अजगर को लताड़ेगा।
14 उसने जो मुझ से स्नेह किया है, इसलिये मैं उसको छुड़ाऊंगा; मैं उसको ऊंचे स्थान पर रखूंगा, क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है।

ज़बूर 91:10-14

आप यहाँ ज़बूर में देख सकते हैं एक लाफ़्ज़ ‘वह’ की बाबत जिसके लिए शैतान को एतक़ाद था कि यह मसीह को पेश करता है I मगर यह इबारत बराहे रास्त मसीह या ख्रीस्तुस के लिए नहीं कहती एसओ शैतान इसे कैसे जानता था ?

आप इस जुमले पर गौर करें कि ‘वह‘ उस बड़े ‘शेर बबर’ और ‘अफ़ई’ को रोंदेगा I (आयत 13 –- इसको मैं लाल रंग देता हूँ ) ‘बबर शेर’ बनी इसराईल के यहूदा के क़बीले का एक हवाला है जबसे कि याक़ूब (अलैहिस्सलाम) तौरात में इसकी नबुवत की थी I

8 हे यहूदा, तेरे भाई तेरा धन्यवाद करेंगे, तेरा हाथ तेरे शत्रुओं की गर्दन पर पड़ेगा; तेरे पिता के पुत्र तुझे दण्डवत करेंगे॥
9 यहूदा सिंह का डांवरू है। हे मेरे पुत्र, तू अहेर करके गुफा में गया है: वह सिंह वा सिंहनी की नाईं दबकर बैठ गया; फिर कौन उसको छेड़ेगा॥
10 जब तक शीलो न आए तब तक न तो यहूदा से राजदण्ड छूटेगा, न उसके वंश से व्यवस्था देनेवाला अलग होगा; और राज्य राज्य के लोग उसके आधीन हो जाएंगे॥ (पैदाइश 49: 8-10)

याक़ूब (अलैहिस्सलाम) एक नबी होने के नाते तौरात में बहुत पहले ज़िकर किए थे कि (मिसाल बतोर 1700 क़बल मसीह में) कि यहूदा एक बबर शेर की मानिंद है जिसमें से एक शख्स निकलेगा और वह हुकूमत करेगा I ज़बूर शरीफ़ में इस नबुवत को जारी रखा गया है यह ऐलान करते हुए कि वह बबर शेर को कुचलेगा ज़बूर में यह कहा गया था कि वह यहूदा का हाकिम होगा I

ज़बूर शरीफ़ का हवाला जो शैतान दे रहा था वहाँ पर यह भी लिखा है कि वह अफ़ई को रोंदेगा I यह एक बराहे रास्त हवाला उस पहले वायदे के लिए जो आदम की पहली निशानी में अल्लाह की जानिब से थी जिसमें कहा गया था कि औरत की नसल साँप के सिर को को कुचलेगा I यहाँ पर फिर से नक़्शे में इस पहले वायदे के शख़्सियतों और किरदारों को समझाया गया है :

एसओ ख़ुदावंद खुदा ने साँप से कहा …

15 और मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करुंगा, वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा।

पैदाइश 3:15
http://al-injil.net/wp-content/uploads/2012/11/the-offspring-diagram.jpg

 यह वायदा पहले पहल आदम की निशानी में दिया गया था मगर इसकी तफ़सील पूरी तरह से साफ़ नहीं थी I अब हम जानते हैं कि इस औरत को मरयम के नाम से जाना जाता है I क्यूंकि सिर्फ़ यही एक शख़्स है जिसके पास बगैर आदमी के एक नसल मौजूद है – वह कुँवारी थी I और उसकी नसल ‘वह‘ वायदा किया हुआ है जिसका नाम ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) है जिस तरह से आप इसको नक़्शे में देख सकते हैं I उस पुराने वायदे में कहा गया था कि ईसा अल मसीह (‘वह’) शैतान के सर को कुचलेगा I ज़बूर की जिस नबुवत को शैतान ने हवाला दिया था वह दुहराया गया था जैसे वहाँ कहा गया है कि

“तू बबर शेर और अफ़ई को पामाल करेगा”

आयत 13

ज़बूर से शैतान ने जो हवाला दिया था इस के बदले में यह दो क़दीम नबुवतें ‘वह’ उनके लिए आएगा जो उसका हुक्म मानेंगे और ‘वह’ (सांप) यानी शैतान के सर को कुचलेगा I शैतान जानता था कि ज़बूर की जिन आयतों का हवाला वह मसीह के सामने पेश कर रहा था हालांकि उसमें मसीह का नाम नहीं है मगर शैतान कि आज़माइश की कोशिश थी कि गलत तरीक़े से पूरी हो I यह तौरात और ज़बूर की नबुवतें पूरी तो होनी ही थीं मगर इस बतोर नहीं की वह मंदिर के ऊपर से छलांग लगाकर ख़ुद को लोगों की तरफ़ मुताससिर करे मगर अल्लाह के मंसूबे का पीछा करते हुए बगैर किसी तजावुज़ के जिस तरह तौरात और ज़बूर में अल्लाह के ज़रिये इंकिशाफ़ हुआ है I

इबादत करने की आज़माइश

फिर शैतान ने उसके क़ाबू में जो कुछ था उससे आज़माने लगा – इंजील ए शरीफ़ बयान करती है

8 फिर शैतान उसे एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्य और उसका विभव दिखाकर
9 उस से कहा, कि यदि तू गिरकर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूंगा।
10 तब यीशु ने उस से कहा; हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर।
11 तब शैतान उसके पास से चला गया, और देखो, स्वर्गदूत आकर उस की सेवा करने लगे॥

मत्ती 4:8-11

मसीह के मायने हैं मसह किया हुआ ताकि हुकूमत करे I सो मसीह का हक़ था कि वह हुकूमत करे इसी तरह शैतान हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की आज़माइश की जैसा उसका हक़ बनता था वैसा उसने किया I मगर मसीह की हुकूमत के लिए शैतान एक छोटे रास्ते की तजवीज़ करते हुए उसकी आज़माइश की वह यह था कि अगर मसीह को हुकूमत करनी थी तो सब से पहले ख़ुद उसकी इबादत करे और हुकूमत हासिल करे I यह शिर्क है जिसे अल्लाह पसंद नहीं करता I तब ईसा ने (दुबारा से) तौरात का हवाला देते हुए शैतान की आज़माइश को रोका कि “तू अपने ख़ुदावंद ख़ुदा की आज़माइश न कर” I ईसा अल मसीह ने तौरात को एक अहम इलहमी किताब बतोर देखा और मालूम किया था और ज़रूरी तोर से उसे बहुत अच्छे तरीक़े से जाना था और उसपर भरोसा किया था I

ईसा एक वह शख़्स हैं जो हमको समझते हैं  

हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की आज़माइश के दौर हमारे लिए बहुत मायने रखता है। इंजील हज़रत ईसा के बारे यूं कहती है कि:

18 क्योंकि जब उस ने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है॥

इब्रानियों 2:18

और

15 क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्पाप निकला।
16 इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे॥

इब्रानियों 4:15-16

याद रखें कि हज़रत हारून (अलैहिस्सलाम) एक सरदार काहिन होने के नाते कुरबानियाँ गुज़रानते थे  — जिससे कि बनी इसराईल गुनाहों कि मुआफ़ी हासिल कर सके I अब ईसा (अलैहिस्सलाम) भी इसी तरह से एक सरदार काहिन जाने जाते हैं जो हम से हमदर्दी रखते और हमें समझते हैं —यहाँ तक कि हमारी आज़माइशों में हमारी मदद करते हैं क्यूंकि हूबहू वह ख़ुद भी हमारी तरह आज़माए गए थे – फिर भी वह बे – गुनाह रहे I सो हम अल्लाह के हुज़ूर ईसा पर यक़ीन कर सकते हैं क्यूंकि उनहों ने सरदार काहीन का किरदार निभाया है और बहुत सख़्त आज़माइश मे से होकर गुज़रे हैं मगर उनहों ने कभी कोई गुनाह नहीं किया था I वह एक ऐसे शख़्स हैं जो हमें समझते हैं और हमारी ख़ुद की आज़माइशों और गुनाहों को दूर करने में हमारी मदद करते हैं I मगर सवाल यह है कि : क्या हम उनको ऐसा करने देंगे ?                          

नबी यहया (अलैहिस्सलाम) रास्ता तयार करते हैं

सूरा अल अन’आम (सूरा 6 – मवेशी जानवर) हम से कहता है कि हमको ‘तौबा करने’ की ज़रूरत है I वह कहता है :

और जो लोग हमारी आयतों पर ईमान लाए हैं तुम्हारे पास ऑंए तो तुम सलामुन अलैकुम (तुम पर ख़ुदा की सलामती हो) कहो तुम्हारे परवरदिगार ने अपने ऊपर रहमत लाज़िम कर ली है बेशक तुम में से जो शख़्श नादानी से कोई गुनाह कर बैठे उसके बाद फिर तौबा करे और अपनी हालत की (असलाह करे ख़ुदा उसका गुनाह बख्श देगा क्योंकि) वह यक़ीनी बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

रा अल अन’आम 6:54

और ये भी कि अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में (गुनाहों से) तौबा करो वही तुम्हें एक मुकर्रर मुद्दत तक अच्छे नुत्फ के फायदे उठाने देगा और वही हर साहबे बुर्ज़गी को उसकी बुर्जुगी (की दाद) अता फरमाएगा और अगर तुमने (उसके हुक्म से) मुँह मोड़ा तो मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े (ख़ौफनाक) दिन के अज़ाब का डर हैतौबा क्या है

सूरा 11 – 3

और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में अपने (गुनाहों से) तौबा करो तो वह तुम पर मूसलाधार मेह आसमान से बरसाएगा ख़ुश्क साली न होगी और तुम्हारी क़ूवत (ताक़त) में और क़ूवत बढ़ा देगा और मुजरिम बन कर उससे मुँह न मोड़ों

सूरा हूद 11:52

और (हमने) क़ौमे समूद के पास उनके भाई सालेह को (पैग़म्बर बनाकर भेजा) तो उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की परसतिश करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं उसी ने तुमको ज़मीन (की मिट्टी) से पैदा किया और तुमको उसमें बसाया तो उससे मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में तौबा करो (बेशक मेरा परवरदिगार (हर शख़्श के) क़रीब और सबकी सुनता और दुआ क़ुबूल करता है

सूरा हूद 11:61

और अपने परवरदिगार से अपनी मग़फिरत की दुआ माँगों फिर उसी की बारगाह में तौबा करो बेशक मेरा परवरदिगार बड़ा मोहब्बत वाला मेहरबान है

सूरा हूद 11:90

तौबा , गुनाहों का इक़रार करते हुए अल्लाह की तरफ़ ‘फिरने’ को कहते हैं I तौबा की बाबत कहने के लिए इंजील ए शरीफ़ में नबी हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) के पास बहुत कुछ था जिसे हम यहाँ पर देखते हैं :

हम ने देखा कि ज़बूर शरीफ़ नबी हज़रत मलाकी (अलैहिस्सलाम) के जरिये पूरा किया गया था जिन्हों ने नबुवत करी थी कि एक रासता तयार करने वाला आएगा (मलाकी 3:1) I फिर हम ने देखा कि किस तरह जिबराईल फरिश्ते के इश्तिहार से ज़रिये से जो नबी हज़रत यहया और हज़रत मसीह की पैदाइश का इश्तिहार था इंजील शरीफ़ को खोला गया I (जो इश्तिहार मसीह की बाबत था वह कुंवारी से पैदा होने का था) I

नबी हज़रत यहया अलैहिस्सलाम – नबी एलियाह की रूह और क़ुव्वत में  

इंजील इस बात को क़लमबंद करती है कि हज़रत यहया कि पैदाइश के बाद उनको यूहनना इस्तिबागी अलैहिस्सलाम भी कहा गया :

मसीह की पैदाइश : जिस तरह से अँबिया के ज़रिये पेशबीनी हुई और जिबराईल फ़रिश्ते के ज़रिये इश्तिहार दिया गया

लूक़ा 1:80

जब वह बयाबान में तन्हा रहता था टीओ इंजील ए शरीफ़ बताती है :

4 यह यूहन्ना ऊंट के रोम का वस्त्र पहिने था, और अपनी कमर में चमड़े का पटुका बान्धे हुए था, और उसका भोजन टिड्डियां और बनमधु था।

मत्ती 3:4

यहया (अलैहिस्सलाम) की मज़बूत रूह ने उनको बयाबान में रहने , खुरदरा (ना मुलाइम) पोशाक पहनने , और जंगली खाना खाने की तरफ़ रहनुमाई की I मगर यह सिर्फ़ उसकी रूह के सबब से नहीं था — बल्कि यह उन के लिए एक अहम निशानी भी थी I हम ने ज़बूर के इख्तिताम पर देखा कि रास्ता तयार करने वाला , जिस के आने का वायदा किया गया था वह ‘एलियाह की रूह’ में होकर आएगा I एलियाह ज़बूर के इब्तिदाई (क़दीम) नबियों में से एक थे जो बयाबान में रहकर इस तरह का खाना और इस तरह का पोशाक पहनते थे I देखें यह हवाला :

“वह बहुत बालों वाला आदमी था और चमड़े का कमर बंद अपनी कमर पर कसे हुए था”

2 सलातीन 1:8

सो जब यहया (अलैहिस्सलाम) इस बतोर पोशाक पहनते और बयाबान में रहते थे तो यह इस बात की तरफ़ इशारा था कि रास्ता तयार करने वाला जिस के आने की बाबत नबुवत की गई थी वह एलियाह की रूह में होगा I उसकी पोशाक , उसका रहन सहन , और बयाबान मे उसका खान पान यह बताने के लिये निशानी थे कि यह अल्लाह के जरिये पेशगोई की गई मंसूबे के मुताबिक़ था I

इंजील शरीफ़ — को तारीख़ में साबित क़दमी से रखा गया                             

फिर इंजील हम से कहती है कि :

बिरियुस कैसर के राज्य के पंद्रहवें वर्ष में जब पुन्तियुस पीलातुस यहूदिया का हाकिम था, और गलील में हेरोदेस नाम चौथाई का इतूरैया, और त्रखोनीतिस में, उसका भाई फिलेप्पुस, और अबिलेने में लिसानियास चौथाई के राजा थे।
2 और जब हन्ना और कैफा महायाजक थे, उस समय परमेश्वर का वचन जंगल में जकरयाह के पुत्र यूहन्ना के पास पहुंचा।

लूक़ा 3:1-2

यह बयान यहया (अलैहिस्सलाम) के नबुवती खिदमत से शुरू होता है और यह बहुत ही अहम है जबकि यह अपनी शुरुआती खिदमत को तारीख़ में आने वाले कई एक जाने माने हाकिमों के सामने रखते हुए एक निशानी ठहराता है I उन दिनों के हाकिमों के पास इस दूर तक पहुँचने वाले हवाले पर गौर करें I यह हमको अनाजील में बयानात की दुरुस्ती को और ज़ियादा तारीख़ी जांच करने देती है I अगर आप ऐसा करते हैं तो आप पाएंगे कि तिबेरीउस क़ैसर , पुनतुस पिलातुस , हेरोदेस , फिलिपपुस , लिसानियस , हनना और काइफ़ा यह सब लोग रोम के मुलाज़िम और यहूदी तारीखदान हैं I यहाँ तक कि फ़रक़ फ़रक़ लक़ब जो फ़रक़ फ़रक़ हाकिमों को दिये गए हैं (मिसाल बतोर पुनतुस पिलातुस के लिए जो ‘गवर्नर’ था और ‘टेटराच’ हेरोदेस के लिये था वगैरा) यह सब तारीख़ी नज़रिये से जांचे गए हैं कि वह सही और दुरुस्त हैं I यह हमको तारीख़ी नुक़ता ए नज़र से एक ख़ालिस तोर पर तशख़ीस होने देता है कि इसको एतिबारी से क़लमबंद किया गया था I

तिबेरीउस क़ैसर ने 14 क़ब्ल मसीह में रोमी सल्तनत के तख़्त की काया पलट करदी I सो यह उसकी सल्तनत का 15 वां साल था तब यहया (अलैहिस्सलाम) ने 29 क़ब्ल मसीह में पैगाम हासिल करना शुरू किया I

यहया (अलैहिस्सलाम) का पैगाम – तौबा करो और गुनाह का इक़रार करो

तो फिर उसका पैगाम क्या था ? उसके जीने के तरीक़े की तरह ही , उसका पैगाम भी बहुत सादा था , मगर बराहे रास्त और ज़बरदस्त था I इंजील शरीफ़ कहती है :

न दिनों में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला आकर यहूदिया के जंगल में यह प्रचार करने लगा। कि
2 मन फिराओ; क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।

मत्ती 3: 1-2

इस तरह उसके पैगाम का हिस्सा एक सच्चाई का ऐलान था – कि ख़ुदा की बादशाही ‘नज़दीक’  थी (है) हम ने देखा कि किस तरह ज़बूर के नबियों ने बहुत पहले ही ख़ुदा की बादशाही के आने की बाबत नबुवत की थी I यहया (अलैहिस्सलाम) कह रहे हैं कि वह अभी ‘नज़दीक’ है बल्कि दरवाज़े पर है I

मगर लोग इस बादशाही के लिए तयार नहीं किए जाएँगे जब तक कि वह तौबा नहीं करेंगे I दरअसल अगर वह ‘तौबा’ नहीं करते हैं तो वह इस बादशाही से चूक जाएँगे I तौबा करने के मायने हैं : “अपने ख्याल बदलना ; दुबारा से उस पर गौर करना ; या फ़रक़ तरीक़े से सोचना I”

मगर वह फ़रक़ तरीक़े से ‘किसकी बाबत सोच रहे थे ? यहया नबी के पैगाम की बिना पर लोगों के दो तरह के नतीजों को देखने के ज़रिये हम सीख सकते हैं कि वह कौन बात थी जिसके  लिये वह तौबा का हुक्म दे रहा था I इंजील इस बात को क़लमबंद करती है कि लोगों ने उसके पैगाम का कैसे जवाब दिया :

6 और अपने अपने पापों को मानकर यरदन नदी में उस से बपतिस्मा लिया।

मत्ती 3:6

आदम की निशानी के लिये किताबों के हवालों में आपको याद होगा कि आदम और हव्वा ने यूएस ममनूआ फल को खाया था :

      “उनहों ने खुद को ख़ुदावंद ख़ुदा के हुज़ूर से बाग़ के दरख्तों में छिपाया I“

दाइश 3:8

जब से हम को अपने गुनाहों को छिपाने की खसलत हुई है और यह बहाना कि इसे हम ने अपनी फ़ितरत बतोर किया है जो हमारे अंदर है I अपने गुनाहों को मानना और उसके लिये तौबा करना हमारे लिये क़रीब क़रीब ना मुमकिन है I हम ने कुंवारी के बेटे की निशानी में देखा था कि अँबिया जैसे दाऊद (अलैहिस्सलाम) और मोहम्मद (सल्लम) ने भी अपने गुनाहों का एतराफ़ किया है I यह हमारे लिये बहुत ही मुश्किल है क्यूंकि यह हमको क़ुसूरवार ठहराता और नदामत ले आता है हम कुछ और करने के लिये राज़ी हो जाते हैं मगर तौबा से गुज़ेर करते हैं I मगर यहया (अलैहिस्सलाम) ने जिस बात की मनादी की वह यह कि तौबा करते हुए आने वाली ख़ुदा की बादशाही के लिये खुद को तयार होना पड़ेगा I

मज़हबी रहनुमाओं को तंबीह जो तौबा नहीं करेंगे

और कुछ लोगों ने हक़ीक़त में ऐसा किया है मगर हरगिज़ ईमानदारी से अपने गुनाह क़बूल नहीं किए ना ही उनसे तौबा करी I इंजील कहती है :

7 जब उस ने बहुतेरे फरीसियों और सदूकियों को बपतिस्मा के लिये अपने पास आते देखा, तो उन से कहा, कि हे सांप के बच्चों तुम्हें किस ने जता दिया, कि आने वाले क्रोध से भागो?
8 सो मन फिराव के योग्य फल लाओ।
9 और अपने अपने मन में यह न सोचो, कि हमारा पिता इब्राहीम है; क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि परमेश्वर इन पत्थरों से इब्राहीम के लिये सन्तान उत्पन्न कर सकता है।
10 और अब कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा हुआ है, इसलिये जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।

मत्ती 3:7-10

फ़रीसी और सदूक़ी मूसा की शरीअत के उस्ताद थे I यह बहुत ही ज़ियादा मज़हबी थे और पाबंदियों (जैसे नमाज़ , रोज़ा और क़ुरबानियाँ वगैरा) को जो शरीअत के हुक्म थे पूरा करने में ख़ूब मेहनत करते थे I हर कोई सोचता था कि यह रहनुमा जो लोगों को मज़हबी बातें सिखाते हैं वह यक़ीनी तोर से अल्लाह की जानिब से तसदीक़ किए गए हैं I मगर यहया अलैहिस्सलाम उनको सांप के बच्चो कहकर पुकारता है और उन्हें आने वाले जहन्नुम की आग और इंसाफ के दिन की तंबीह देता है ! क्यूँ ? इसलिए कि वह ‘तौबा के मुवाफ़िक़ फल नहीं लाये थे’ I यह बताता है कि उनहों ने हक़ीक़ी मायनों में तौबा नहीं करी थी I उनहों ने अपने गुनाहों का इक़रार नहीं किया था मगर दिखावे के लिये मज़हबी पाबंदियों का इस्तेमाल अपने गुनाहों को छिपाने के लिये करते थे I इस के अलावा अपने गुनाहों से तौबा करने के बदले उन का मज़हबी मीरास जो हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) से चला आता था उसपर फ़खर किया करते थे I

दाऊद की तौबा और इक़रार हमारे लिये एक नमूना है                                         

सो हम हज़रत यहया की तंबीह से देख सकते हैं कि गुनाहों से तौबा और इक़रार मजाज़ी तोर से अहम है (यह क़ुव्वत ए हयात बतोर है) I दरअसल इस के बगैर हम ख़ुदा की बादशाही मे दाख़िल नहीं हो पाएंगे I और जिस दिन फरीसियों और सदूक़ियों को तंबीह मिली थी तब से हम देख सकते हैं कि मज़हब की आड़ में हमें अपने गुनाहों को छिपाना कितना आसान और फ़ितरती है I सो आप के और मेरी बाबत क्या कहना ? यह एक तंबीह बतोर हमारे लिये लिखा गया है कि अपने ज़िद में आकर या अपने दिलों को सख़्त करते हुए अपने गुनाहों को ना छिपाएं और तौबा करने से इंकार न करें I बजाए इसके कि हम अपने गुनाहों के लिये बहाने बनाएँ यह ज़ाहिर करते हुए कि हम ने कोई गुनाह नहीं किया या उन्हें छिपाते हैं तो हमको हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के नमूने के पीछे चलना चाहिए कि उसने गुनाह का मुक़ाबला करने के बाद ज़बूर शरीफ़ मे ज़ेल की आयतों के साथ अपने गुनाहों का इक़रार किया I

परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।
2 मुझे भलीं भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर!
3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।
4 मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।
5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा॥
6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।
9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल॥
10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल॥

ज़बूर 51:1-12

तौबा का फल

तौबा और इक़रार से एक फ़रक़ तारीक़े से जीने की उम्मीद पैदा होती है I लोगों ने हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) से पूछा की उन्हें तौबा के मुवाफ़िक़ फल लाने का मज़ाहिरा किस तरह करना चाहिए ? इसके बारे में हज़रत यहया ने जो बातें कहीं उसे ज़ेल की आयात मे इस तरह पेश किया गया है :

10 और लोगों ने उस से पूछा, तो हम क्या करें?
11 उस ने उन्हें उतर दिया, कि जिस के पास दो कुरते हों वह उसके साथ जिस के पास नहीं हैं बांट दे और जिस के पास भोजन हो, वह भी ऐसा ही करे।
12 और महसूल लेने वाले भी बपतिस्मा लेने आए, और उस से पूछा, कि हे गुरू, हम क्या करें?
13 उस ने उन से कहा, जो तुम्हारे लिये ठहराया गया है, उस से अधिक न लेना।
14 और सिपाहियों ने भी उस से यह पूछा, हम क्या करें? उस ने उन से कहा, किसी पर उपद्रव न करना, और न झूठा दोष लगाना, और अपनी मजदूरी पर सन्तोष करना॥

लूक़ा 3:10-14

क्या हज़रत यहया मसीह थे ?

जिस जोश और कुवत के साथ वह तक़रीर या मनादी करता था , उससे बहुत से लोग मुताससिर और हैरत ज़दह हुए थे कि वह मसीह तो नहीं है I इस बहस को इंजील शरीफ़ मे इस तरह लिखा हुआ है देखें :

15 जब लोग आस लगाए हुए थे, और सब अपने अपने मन में यूहन्ना के विषय में विचार कर रहे थे, कि क्या यही मसीह तो नहीं है।
16 तो यूहन्ना ने उन सब से उत्तर में कहा: कि मैं तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा देता हूं, परन्तु वह आनेवाला है, जो मुझ से शक्तिमान है; मैं तो इस योग्य भी नहीं, कि उसके जूतों का बन्ध खोल सकूं, वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा।
17 उसका सूप, उसके हाथ में है; और वह अपना खलिहान अच्छी तरह से साफ करेगा; और गेहूं को अपने खत्ते में इकट्ठा करेगा, परन्तु भूसी को उस आग में जो बुझने की नहीं जला देगा॥
18 सो वह बहुत सी शिक्षा दे देकर लोगों को सुसमाचार सुनाता रहा।

लूक़ा 3:15-18

इख्तिताम

नबी  हज़रत  यहया  (अलैहिस्सलाम)  लोगों  को  तयार करने  के  लिये  आए  थे  कि  वह ख़ुदा  की बादशाही के लिये आमादा किए जाएँ I मगर उसने उन्हें और ज़ियादा शरीअत के अहकाम देने के जरिये तयार नहीं किया बल्कि बराहे रास्त उन्हें दावत दी कि वह अपने गुनाहों से तौबा करें और अपने गुनाहों का इक़रार करें I दरअसल ऐसा करना मुश्किल है बनिस्बत इसके कि हमारे गुनाह ज़हीर किए जाएँ और क़ुसूरवार साबित किए जाएँ I इसके बदले में उनहों ने दिखावटी मज़हब का इस्तेमाल किया ताकि अपने गुनाह छिपा सकें I मगर जिस तरह से उनहों ने चुनाव किया उसके मुताबिक़ मसीह को क़बूल करने और ख़ुदा की बादशाहि को समझने में गैर आमादा हुए जबकि वह इसी पैगाम को देने के लिये आया था I हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) की यह तंबीह आज के ज़माने मे हमारे लिये बा मौक़ा और मुनासिब है I वह हम से तक़ाज़ा करता है कि हम अपने गुनाहों से तौबा करें और उनका इक़रार करें I क्या हम इसके लिये तयार हैं ?                         

मसीह की पैदाइश : जिस तरह से अँबिया के ज़रिये पेशबीनी हुई और जिबराईल फ़रिश्ते के ज़रिये इश्तिहार दिया गया

हम ने तौरात ज़बूर और नबियों की किताबों से क़दीम इसराईल के जायज़े केओ ख़तम किया था I हमने अपने ज़बूर के ख़ातमे पर देखा था मुस्तक़्बिल के वायदों की तकमील को लेकर इसपर उम्मीद रखने वाईए पहल करने के ईके नमूने को देखा था I

मगर 400 साल से भी ज़ियादा गुज़रने के बाद जबकि ज़बूर शरीफ़ का ज़माना ख़तम होगया – हमने देखा कि बीएएनआई इसराईल कि तारीख़ में कई एक सियासी और म्ज़्हबी वाक़िआत पीईएसएच आए I जबकि उनहों ने वायदों के पूरा होने का इंतज़ार किया मगर उन्हें कोई नया पैगाम नबियों के ज़रीए से नहीं दिया गया था I बनी इसराईल किसी तरह हेरोदेस आज़म की हुकूमत का ज़रिये मंदिर की तरक़्कियात , तामीरात और खिदमात को जारी रखा जबतक कि वह एक जलाली ढांचा बतोर तयार नहीं हो गया था I और यह लोगों को अपनी तरफ़ मुताससिर किए हुए था I दुनया के चारों तरफ़ से यहूदी लोग इबादत , क़ुरबानी , और दुआ बंदगी के लिए आते थे I किसी तरह से लोगों के दिल अभी हालांकि बहुत मज़हबी और बुतपरस्ती से दूर थे जो कि अगले नबियों के ज़माने में उन्हें जाल में फाँसते थे I एबी वह उन आज़्माइशों से दूर हो चुके थे और बाहरी बातों पर धियान देते थे जिस तरह आज भी बहुत से लोगों की तरह मज़हबी कारवाइयों और दुआओं के दौरान लोगों के दिल बदलने की ज़रूरत है I सो हेरोदेस आज़म की हुकूमत के आख़िर में लगभग 5 क़बल मसीह में एक बे मिसल पैगामबर को एक बहुत बड़े इश्तिहार को देने के लिए भेजा गया I

सूरा मरयम (सूरा 19) के मुताबिक़ मरयम के पास जो पैगाम पहुंचा आईएस खुलासे को पेश करती है I

और (ऐ रसूल) कुरान में मरियम का भी तज़किरा करो कि जब वह अपने लोगों से अलग होकर पूरब की तरफ़ वाले मकान में (गुस्ल के वास्ते) जा बैठेंफिर उसने उन लोगों से परदा कर लिया तो हमने अपनी रूह (जिबरील) को उन के पास भेजा तो वह अच्छे ख़ासे आदमी की सूरत बनकर उनके सामने आ खड़ा हुआ(वह उसको देखकर घबराई और) कहने लगी अगर तू परहेज़गार है तो मैं तुझ से खुदा की पनाह माँगती हूँ(मेरे पास से हट जा) जिबरील ने कहा मैं तो साफ़ तुम्हारे परवरदिगार का पैग़मबर (फ़रिश्ता) हूँ ताकि तुमको पाक व पाकीज़ा लड़का अता करूँमरियम ने कहा मुझे लड़का क्योंकर हो सकता है हालाँकि किसी मर्द ने मुझे छुआ तक नहीं है औ मैं न बदकार हूँजिबरील ने कहा तुमने कहा ठीक (मगर) तुम्हारे परवरदिगार ने फ़रमाया है कि ये बात (बे बाप के लड़का पैदा करना) मुझ पर आसान है ताकि इसको (पैदा करके) लोगों के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी क़रार दें और अपनी ख़ास रहमत का ज़रिया बनायें

सूरा मरयम 19:16-21

जिबराईल फ़रिश्ता यूहनना इस्तिबागी  (यहया (अलैहिस्सलाम) के आने का इश्तिहार देता है

यह पैगम्बर जिबराईल फ़रिश्ता था I यह बाइबल (अल किताब) के मुताबिक़ ऊंचे दर्जे का या मुक़र्रब फ़रिश्ता माना जाता है जो ख़ास तोर से खुदा के पैगाम को लोगों तक पहुंचाता है I इस वक़्त से पहले तक जिबराईल को सिर्फ़ नबी दानिएल (अलैहिस्सलाम) के पास भेजा गया था इस पैगाम (यहाँ देखें) के साथ कि मसीह का आना कब होगा ? इस वक़्त जिबराईल फ़रिश्ता हज़रत ज़करियाह (अलैहिस्सलाम) के पास उस वक़्त भेजा गया था जब वह मंदिर में दुआ के रसम को अंजाम दे रहा था I वह और उसकी बीवी एलिशिबा दोनों बूढ़े थे और उनके कोई औलाद नहीं थी I मगर जिबराईल उसपर ज़ेल के पैगाम के साथ ज़ाहिर हुआ जिसे इंजील में इस तरह क़लमबंद किया गया है :

13 परन्तु स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे जकरयाह, भयभीत न हो क्योंकि तेरी प्रार्थना सुन ली गई है और तेरी पत्नी इलीशिबा से तेरे लिये एक पुत्र उत्पन्न होगा, और तू उसका नाम यूहन्ना रखना।
14 और तुझे आनन्द और हर्ष होगा: और बहुत लोग उसके जन्म के कारण आनन्दित होंगे।
15 क्योंकि वह प्रभु के साम्हने महान होगा; और दाखरस और मदिरा कभी न पिएगा; और अपनी माता के गर्भ ही से पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाएगा।
16 और इस्राएलियों में से बहुतेरों को उन के प्रभु परमेश्वर की ओर फेरेगा।
17 वह एलिय्याह की आत्मा और सामर्थ में हो कर उसके आगे आगे चलेगा, कि पितरों का मन लड़के बालों की ओर फेर दे; और आज्ञा न मानने वालों को धमिर्यों की समझ पर लाए; और प्रभु के लिये एक योग्य प्रजा तैयार करे।
18 जकरयाह ने स्वर्गदूत से पूछा; यह मैं कैसे जानूं? क्योंकि मैं तो बूढ़ा हूं; और मेरी पत्नी भी बूढ़ी हो गई है।
19 स्वर्गदूत ने उस को उत्तर दिया, कि मैं जिब्राईल हूं, जो परमेश्वर के साम्हने खड़ा रहता हूं; और मैं तुझ से बातें करने और तुझे यह सुसमाचार सुनाने को भेजा गया हूं।
20 और देख जिस दिन तक ये बातें पूरी न हो लें, उस दिन तक तू मौन रहेगा, और बोल न सकेगा, इसलिये कि तू ने मेरी बातों की जो अपने समय पर पूरी होंगी, प्रतीति न की।

लूक़ा 1:13-20

ज़बूर का इख्तिताम इस वायदे के साथ होता है कि रास्ता तयार करने वाला आएगा जो हज़रत एलियाह की मानिंद होगा I जिबराईल फ़रिश्ता इस ख़ास वायदे को यह कहते हुए दुहराता है कि ज़करियाह (अलैहीस्सालाम) का यह बेटा एलियाह की क़ुव्वत और रूह को लेकर पैदा होगा I वह इस लिए आ रहा था कि लोगों को ख़ुदावंद के पीछे चलने के लिए तयार करे I यह इश्तिहार इस बात को ज़ाहिर कर रहा रहा था कि ख़ुदावंद की राह तयार करने वाले की आमद का वादा भूला नहीं गया था — इस आने वाले ज़करियाह और एलिशिबा के बेटे की पैदाइश और जिंदगी मे इस वायदे को पूरा होना था I किसी तरह ज़ाकरियाह इस पैगाम पर पूरी तरह से ईमान नहीं लाया था जिस की सज़ा बतोर उसको कुछ अरसे के लिए गूंगा बनकर रहना पड़ा था I

जिबराईल फ़रिश्ता आने वाले कुंवारी से पैदा होने वाले का इश्तिहार देता है

तयार करने वाले के आने का मतलब है वह ऐसा शख्स होगा जो मसीह या ख्रीस्तुस या मसीहा के लिए रास्ता तयार करेगा — वह बहुत जल्द आएगा I यानी यक़ीनी तोर से कुछ ही महीनों में I जिबराईल फ़रिश्ते को फिर से एक कुंवारी जिसका नाम मरयम था ज़ेल के इश्तिहार को देने के लिए भेजा गया जिसको इंजील में क़लमबंद किया गया है :

28 और स्वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा; आनन्द और जय तेरी हो, जिस पर ईश्वर का अनुग्रह हुआ है, प्रभु तेरे साथ है।
29 वह उस वचन से बहुत घबरा गई, और सोचने लगी, कि यह किस प्रकार का अभिवादन है?
30 स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे मरियम; भयभीत न हो, क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह तुझ पर हुआ है।
31 और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना।
32 वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उस को देगा।
33 और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्त न होगा।
34 मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, यह क्योंकर होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं।
35 स्वर्गदूत ने उस को उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा।
36 और देख, और तेरी कुटुम्बिनी इलीशिबा के भी बुढ़ापे में पुत्र होनेवाला है, यह उसका, जो बांझ कहलाती थी छठवां महीना है।
37 क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरिहत नहीं होता।
38 मरियम ने कहा, देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो: तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया॥

लूक़ा 1:28-38

नबी यहया (अलैहिस्सलाम) यूहनना इस्तिबागी की पैदाइश

जिबराईल फ़रिश्ते के इस इश्तिहार में ख़ुद ही हम उसके हैरत कर देने वाले लक़ब ख़ुदा के बेटे का लफ़्ज़ इस्तेमाल करते हुए देखते हैं I मेरी इस तहरीर में मैं यहाँ बहस करता हूँ I इस तहरीर में हम पैदाइश से मुताल्लिक़ बयानात का सिलसिला जारी रखेंगे I

हक़ीक़त में यह वाक़िए बढ़ते ही गए जिस तरह से ज़बूर शरीफ़ के नबियों के ज़रिये पेश की गई थी नबी हज़रत मलाकी ने पेशगोई की थी कि तयार करने वाला एलियाह कि क़ुव्वत और रूह से मामूर होगा I और अब जिबराईल फ़रिश्ते ने उस कि पैदाइश का इश्तिहार दिया I इसी इश्तिहार के साथ इंजीवल ए शरीफ़ अपना बयान जारी रखती है I

57 तब इलीशिबा के जनने का समय पूरा हुआ, और वह पुत्र जनी।
58 उसके पड़ोसियों और कुटुम्बियों ने यह सुन कर, कि प्रभु ने उस पर बड़ी दया की है, उसके साथ आनन्दित हुए।
59 और ऐसा हुआ कि आठवें दिन वे बालक का खतना करने आए और उसका नाम उसके पिता के नाम पर जकरयाह रखने लगे।
60 और उस की माता ने उत्तर दिया कि नहीं; वरन उसका नाम यूहन्ना रखा जाए।
61 और उन्होंने उस से कहा, तेरे कुटुम्ब में किसी का यह नाम नहीं।
62 तब उन्होंने उसके पिता से संकेत करके पूछा।
63 कि तू उसका नाम क्या रखना चाहता है? और उस ने लिखने की पट्टी मंगाकर लिख दिया, कि उसका नाम यूहन्ना है: और सभों ने अचम्भा किया।
64 तब उसका मुंह और जीभ तुरन्त खुल गई; और वह बोलने और परमेश्वर का धन्यवाद करने लगा।
65 और उसके आस पास के सब रहने वालों पर भय छा गया; और उन सब बातों की चर्चा यहूदिया के सारे पहाड़ी देश में फैल गई।
66 और सब सुनने वालों ने अपने अपने मन में विचार करके कहा, यह बालक कैसा होगा क्योंकि प्रभु का हाथ उसके साथ था॥

लूक़ा 1:57-66

ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश

नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने बे मिसल तरीक़े से जो पेशबीनी की थी (इसको यहाँ पर कामिल तोर से समझाया गया है) I यह की :

14 इस कारण प्रभु आप ही तुम को एक चिन्ह देगा। सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानूएल रखेगी।

यसायाह 7:14

अब मुक़र्रब फ़रिश्ता जिबराईल ने मरयम को इसके आने का इश्तिहार दिया जबकि वह एक कुंवारी औरत थी I इस नबुवत के बराहे रास्त तकमील में जो कई एक अरसे पहले की गई थी I ज़ेल में इंजील का बयान पेश है जो हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश की बाबत क़लमबंद करती है।

4 सो यूसुफ भी इसलिये कि वह दाऊद के घराने और वंश का था, गलील के नासरत नगर से यहूदिया में दाऊद के नगर बैतलहम को गया।
5 कि अपनी मंगेतर मरियम के साथ जो गर्भवती थी नाम लिखवाए।
6 उन के वहां रहते हुए उसके जनने के दिन पूरे हुए।
7 और वह अपना पहिलौठा पुत्र जनी और उसे कपड़े में लपेटकर चरनी में रखा: क्योंकि उन के लिये सराय में जगह न थी।
8 और उस देश में कितने गड़ेरिये थे, जो रात को मैदान में रहकर अपने झुण्ड का पहरा देते थे।
9 और प्रभु का एक दूत उन के पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उन के चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए।
10 तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा।
11 कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है।
12 और इस का तुम्हारे लिये यह पता है, कि तुम एक बालक को कपड़े में लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे।
13 तब एकाएक उस स्वर्गदूत के साथ स्वर्गदूतों का दल परमेश्वर की स्तुति करते हुए और यह कहते दिखाई दिया।
14 कि आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शान्ति हो॥
15 जब स्वर्गदूत उन के पास से स्वर्ग को चले गए, तो गड़ेरियों ने आपस में कहा, आओ, हम बैतलहम जाकर यह बात जो हुई है, और जिसे प्रभु ने हमें बताया है, देखें।
16 और उन्होंने तुरन्त जाकर मरियम और यूसुफ को और चरनी में उस बालक को पड़ा देखा।
17 इन्हें देखकर उन्होंने वह बात जो इस बालक के विषय में उन से कही गई थी, प्रगट की।
18 और सब सुनने वालों ने उन बातों से जो गड़िरयों ने उन से कहीं आश्चर्य किया।
19 परन्तु मरियम ये सब बातें अपने मन में रखकर सोचती रही।
20 और गड़ेरिये जैसा उन से कहा गया था, वैसा ही सब सुनकर और देखकर परमेश्वर की महिमा और स्तुति करते हुए लौट गए॥
21 जब आठ दिन पूरे हुए, और उसके खतने का समय आया, तो उसका नाम यीशु रखा गया, जो स्वर्गदूत ने उसके पेट में आने से पहिले कहा था।

लूक़ा 2:4-21

आने वाले इन दो बड़े नबियों के किरदार

दो बड़े नबियों की पैदाइश में कुछ ही महिनों का फ़रक़ था साथ ही जबकि इन दोनों की पैदाइश के लिये जो नबुवत हुई थी इसकी तकमील सदियों साल बाद हुई I अब सवाल यह है कि इनकी जिंदगी कैसी होगी और इन का पैगाम केवाईए होगा I ज़करियाह (अलैहिस्सलाम) जो हज़रत यहया (यूहनना इस्तिबागी) का बाप था वह दोनों बेटों की बाबत नबुवत करता है जिस तरह ज़ेल के हवाले में पेश किया गया है :

67 और उसका पिता जकरयाह पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गया, और भविष्यद्ववाणी करने लगा।
68 कि प्रभु इस्राएल का परमेश्वर धन्य हो, कि उस ने अपने लोगों पर दृष्टि की और उन का छुटकारा किया है।
69 और अपने सेवक दाऊद के घराने में हमारे लिये एक उद्धार का सींग निकाला।
70 जैसे उस ने अपने पवित्र भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा जो जगत के आदि से होते आए हैं, कहा था।
71 अर्थात हमारे शत्रुओं से, और हमारे सब बैरियों के हाथ से हमारा उद्धार किया है।
72 कि हमारे बाप-दादों पर दया करके अपनी पवित्र वाचा का स्मरण करे।
73 और वह शपथ जो उस ने हमारे पिता इब्राहीम से खाई थी।
74 कि वह हमें यह देगा, कि हम अपने शत्रुओं के हाथ से छुटकर।
75 उसके साम्हने पवित्रता और धामिर्कता से जीवन भर निडर रहकर उस की सेवा करते रहें।
76 और तू हे बालक, परमप्रधान का भविष्यद्वक्ता कहलाएगा, क्योंकि तू प्रभु के मार्ग तैयार करने के लिये उसके आगे आगे चलेगा,
77 कि उसके लोगों को उद्धार का ज्ञान दे, जो उन के पापों की क्षमा से प्राप्त होता है।
78 यह हमारे परमेश्वर की उसी बड़ी करूणा से होगा; जिस के कारण ऊपर से हम पर भोर का प्रकाश उदय होगा।
79 कि अन्धकार और मृत्यु की छाया में बैठने वालों को ज्योति दे, और हमारे पांवों को कुशल के मार्ग में सीधे चलाए॥

लूक़ा 1:67 –79

ज़करियाह (अलैहिस्सलाम) को एक नज़्म का इलहाम हुआ जो नबुवत के तोर पर थी और जो हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश से ताल्लुक़ रखता था I यह हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम – को दिये गए वायदे की बाबत था), इसे आप पढ़ कर देखें I बलकि यह वायदा आख़िर में हज़रत इब्राहीम तक लेजाती है I खुदा का मंसूबा जिसकी पेशीनगोई की गई थी इसमें सदियों से तरक़्क़ी होती जा रही थी I और अब वह इख्तिताम पर पहुँचने जा रही थी I मगर सवाल यह है कि खुदा के इस मनसूबे में वह कौन सी बातें शामिल थीं ?  क्या वह दुशमन रोमियों से नजात की बाबत था ? क्या वह मूसा की शरीअत के बदले कोई नई शरीअत थी ? क्या वह कोई नया मज़हब या कोई सियासी निज़ाम था ? इन में से कोई भी नहीं था जो हम इंसान पर नाफ़िज़ किया जाता जिनका बयान किया गया है I इस के बदले में मनसूबे का खुलासा किया गया है और हमें इस काबिल कर रहा है की बगैर खौफ़ के साथ उस की ख़िदमत पाकीज़गी और रास्तबाज़ी से करें I यह ख़िदमत नजात के साथ गुनाहों से मुआफ़ी हासिल करते हुए और हमारे दिल खुदा के फ़ज़ल से क़ायल हुए होना चाहिए I क्यूंकि यह नाजात उनके लिये है जो मौत के साये में बैठे हैं ताकि हमारे क़दम की रहनुमाई तसल्ली के उस राह में हो जो खुदा की जानिब से ठहराया गया है I आदम का गुनाह हमें खुदा से दुशमनी और ख़ुद की मौत के लिये ज़िम्मेदार ठहराता है I हम रास्तबाज़ी और गुनाहों की मुआफ़ी हासिल करने की कोशिश करते हैं I इनही हालात में आदम और हव्वा और शैतान की मौजूदगी में अल्लाह ने एक मनसूबे का ऐलान किया था और वह ऐलान था एक औरत की नसल के तोर से इस तरह का मनसूबा जंग के मनसूबों से और समझ के निज़ामों और रविश से बेहतर होते हैं। यह मनसूबा हमारे बातिनी निज़ाम की जरूरतों को पूरा करेगा न कि सतही निज़ाम की ज़रूरत को I मगर किस तरह यह मनसूबा रास्ता तयार करने वाले पर और मसीह पर ज़ाहिर होगा ? हम इंजील ए शरीफ़ की बशारत की बाबत सीखना जारी रखेंगे I                               

ज़बूर ख़तम होता है उस तय्यार करने वाले को लाए जाने के वायदे के साथ

सूरा अल मुदस्सिर – (सूरा 74  पर्दा डाला हुआ) यह तस्वीरकशी करता है नबी सल्लम की जो उन की चादर वाईए पोशिश में सख्ती से बांध कर रखा है इंसाफ़ के दिन की बाबत अपनी तंबीह देते हुए I

ऐ (मेरे) कपड़ा ओढ़ने वाले (रसूल) उठोऔर लोगों को (अज़ाब से) डराओऔर अपने परवरदिगार की बड़ाई करो

सूरा अल मुदस्सिर 74:1-3

फिर जब सूर फूँका जाएगातो वह दिन काफ़िरों पर सख्त दिन होगाआसान नहीं होगाआसान नहीं होगा

सूरा अल मुदस्सिर 74:8-10

सूरा अल काफ़िरून (सूरा 109 — गैर मोमिन लोग) गैर ईमानदारों की तरफ़ से एक फ़र्क रास्ते के लिए साफ़ तोर से नबी सल्लम की तस्वीर कशी करता है I

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ काफिरोंतुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजताऔर जिस (ख़ुदा) की मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत नहीं करतेऔर जिन्हें तुम पूजते हो मैं उनका पूजने वाला नहींऔर जिसकी मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत करने वाले नहींतुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मेरे लिए मेरा दीन  

सूरा अल काफ़िरून 109:1-6

ज़बूर पीछे से नबी एलियाह (अलैहिस्सलाम) का हवाला देने के ज़रिये अपने अंजाम को पहुंचता है I इसका हवाला बिलकुल वैसे ही है जिस बतोर सूरा अल मुदस्सिर और सूरा अल काफ़िरून में हूबहू बयान किया गया है I मगर ज़बूर भी आने वाले दूसरे नबी की राह देखती है जो एलियाह की तरह हमारे दिलों को तय्यार करेगा I इसको हम नबी हज़रत यहया के नाम से पुकारते हैं I

नबी हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) के आने की पेशीन गोई की गई है

हम ने ख़ादिम की निशानी में देखा कि एक ख़ादिम के आने का वायदा किया गया था I मगर उस के आने का तमाम वायदा एक ख़ास सवाल पर मुनहसर है I आप देखें कि यसायाह 53 एक सवाल से शुरू हुआ है I

किसने हमारे पैगाम पर ईमान लाया …?

यसायाह 53:1a

यसायाह (अलैहिस्सलाम) पेशबीनी कर रहे थे कि इस खादिम के ज़माने के लोग ईमान लाने के लिए तय्यार नहीं थे I मसला पैगाम के साथ नहीं था न ही ख़ादिम की निशानियों के साथ क्यूंकि वह आने वाले वक़्त में ‘सात’ के अरसा ए तकमील के ज़रिये ठीक ठीक वाज़ेह करेंगे I इस के अलावा नाम के ज़रीए और मख़सूस करते हुए कि वहकाट डाला जाएगा’ I मसला यह नहीं था कि वहाँ काफ़ी निशानियाँ नहीं थे I नहीं I बल्कि मसला यह था कि लोगों के दिल सख़्त थे I इस लिए किसी न किसी को ख़ादिम के आगे आना ज़रूरी था ताकि उसके आने की त्यारी के लिए लोगों को तयार करे I इसलिए नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने उस एक की बाबत पैगाम दिया जो ख़ादिम के लिये रास्ता तयार करेगा I उसने अपने किताब में यह पैगाम ज़ेल के हवाले में इस बतोर दिया :

3 किसी की पुकार सुनाई देती है, जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो।
4 हर एक तराई भर दी जाए और हर एक पहाड़ और पहाड़ी गिरा दी जाए; जो टेढ़ा है वह सीधा और जो ऊंचा नीचा है वह चौरस किया जाए।
5 तब यहोवा का तेज प्रगट होगा और सब प्राणी उसको एक संग देखेंगे; क्योंकि यहोवा ने आप ही ऐसा कहा है॥

यसायाह 40:3—5

यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने एक शख़्स की बाबत लिखा कि वह बयाबान में आएगा ताकि ख़ुदावंद की राह तयार करे I यह शख़्स रास्ते की सारी रुकावटों को दूर करते हुए उसे हमवार करेगा ताकि ख़ुदावंद का जलाल ज़ाहिर हो I मगर यसायाह ने यह बात मख़सूस तरीक़े से नहीं समझाया कि किस तरीक़े से इस काम को किया जाएगा I

नबी मलाकी —- ज़बूर शरीफ़ का आख़री नबी

The Prophets Isaiah, Malachi and Elijah (PBUT) shown in historical timeline

नबी हज़रत यसायाह, मलाकी और एलियाह (अलैहिस्सलाम) को उनकी तारीक़ी वक़्त की लकीर में दिखाए गए हैं I

यसायाह नबी के आने के 300 साल बाद मलाकी नबी ने ज़बूर की आख़री किताब को लिखा I इस आख़री किताब मलाकी में जो बात यसायाह ने रास्ता तयार करने वाले की बाबत बयान किया था इसे खोल कर बयान किया जाता है I उसने लिखा :

“मैं अपने दूत भेजूंगा, जो मेरे सामने रास्ता तैयार करेगा। तब अचानक आप जो भगवान मांग रहे हैं वह उनके मंदिर में आ जाएगा; वाचा का दूत, जिसे आप चाहते हैं, वह आएगा, ”भगवान सर्वशक्तिमान कहते हैं।

मलाकी 3:1

यहाँ फिर से पैगाम देने वाले ने जो रास्ता तय्यार किया इस की बाबत पेशीन गोई की गई है I इस के बाद रास्ता तय्यार करने वाला आता है I फिर वह अहद का पैगामबर आएगा I यहाँ मलाकी नबी किस अहद का हवाला दे रहे हैं ? याद रखें कि नबी यरम्याह (अलैहिस्सलाम) ने पेशबीनी की थी कि अल्लाह एक नए अहद को हमारे दिलों के अंदर लिखेगा तभी हमारी प्यास बुझ पाएगी जो हर हमेशा हमको गुनाह केआई तरफ़ ले जाती है I यह वही अहद है जिस की बाबत मलाकी (अलैहिस्सलाम) हवाला दे रहे हैं I इस अहद का दिया जाना ही आने वाले रास्ता तयार करने वाले की निशानी ठहरेगी I

टीओ फिर मलाकी (अलैहिस्सलाम) अपनी किताब के आख़री पैरग्राफ़ के साथ इस पूरे ज़बूर को ख़तम करते हैं I इस आख़री पैरगिराफ़ में वह फिर से मुस्तक़बिल केआई तरफ़ देखते और लिखते हैं :

“देख, मैं यहोवा के महान और भयानक दिन से पहले पैगंबर एलियाह को तुम्हारे पास भेजूंगा। वह माता-पिता के दिलों को अपने बच्चों के लिए और बच्चों के दिलों को उनके माता-पिता के लिए बदल देगा; वरना मैं कुल विनाश के साथ भूमि पर आकर प्रहार करूंगा। ”

मलाकी 4:5-6

मलाकी जो एलियाह की बाबत ख़ुदावंद के उस बड़े दिन में आने की बात कर रहा है तो इस का क्या मतलब है? यह एलियाह कौन था? वह दूसरा नबी था जिसे हम ने नहीं देखा I और हम ज़बूर के सारे नबियों को हरगिज़ नहीं देख सकते जबकि यह बहुत लंबा हो जाएगा I मगर हम ऊपर की वक़्त की लकीर में देख सकते हैं I एलियाह (अलैहिस्सलाम) 850 क़ब्ल मसीह में रहते थे I उनका बयाबान में रहना और जानवरों की खाल और बालों के कपड़े पहनना जंगली खाना खाना मशहूर था I वह गालिबन देखने में बहुत ही अजीब था I मलाकी (अलैहिस्सलाम) ने लिखा कि किसी तरह से वह रास्ता तय्यार करने वाला नए अहदनामे से पहले आता है वह एलियाह की मानिंद होगा I इस बयान के साथ ज़बूर शरीफ़ मुकम्मल हो गया था I यह ज़बूर शरीफ़ में आख़री पैगाम है I और इसको 450 क़बल मसीह में लिखा गया था I तौरात और ज़बूर यह दोनों वाक़े होने वाले वायदों से भरे हुए थे I आइये हम आईएन में से कुछ की नज़र ए सानी करें I                    

तौरात और ज़बूर के वायदों की नज़र ए सानी जो पूरे होने के मुंतज़र थे

  • नबी हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) क़ुरबानी की निशानी में एलान किया था कि मोरया पहाड़ पर इंतज़ाम किया जाएगा I उन दिनों यहूदी ज़बूर के आख़िर में उस वक़्त भी इस इंतज़ाम के वाक़े होने के इंतज़ार में थे I
  • नबी हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा था कि बनी इसराईल के लिये फ़सह एक निशानी थी, और बनी इसराईल ने अपने सारी तारीख़ के ज़रिये फ़सह को मनाया था मगर वह उसे भूल गए थे I वह एक निशानी बतोर था जो यह इशारा कर रहा था कि उसे अब तक ज़ाहिर नहीं किया गया I
  • नबी हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने तौरेत में पेशबीनी की थी कि एक ऐसा नबी रूनुमा होगा जिस की बाबत अल्लाह ने कहा था कि मैं अपना कलाम उसके मुंह में डालूँगा I इस आने वाले नबी के वायदे की बाबत अल्लाह ने यह भी एलान किया था कि “मैं ख़ुद ही उस शख़्स का इंसाफ करूंगा जो मेरे कलाम पर अमल नहीं करता और उन बातों पर यक़ीन जो एक नबी मेरे नाम से पैगाम सुनाता है I
  • बादशाह दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने आने वाले ‘ख्रिसतुस’ वाईए ‘मसीह’ की बाबत अपनी लंबी तारीख़ के ज़रिये पेशबीनी की जिस पर बनी इसराईल ने ताज्जुब किया कि यह मसीह की बादशाही किस की मानिंद दिखेगी I
  • नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने नबुवत की कि एक कुंवारी ‘बेटा’ जनेगी I ज़बूर के इख़तिताम पर यहूदी उस वक़्त भी इस अजीब ओ गरीब वाक़े के पीईएसएच आने के इंतज़ार में थे I
  • नबी यरम्याह (अलैहिस्सलाम) ने पेशबीनी की थी कि एक नया अहद जो होगा उसे तख़्तियों के बदले हमारे दिलों में लिखा जाएगा I वह एक दिन ज़ाहिर होगा I
  • नबी ज़करियाह (अलैहिस्सलाम) ने पेशबीनी की कि आने वाले का नाम “ख्रीस्तुस” (या मसीह) होगा I
  • नबी दानिएल (अलैहिस्सलाम) ने नबुवत की थी कि जब ख्रिसतुस या मसीह का आना होगा तो बजाए इस के कि वह बादशाही करे वह अपनों के बीच में से ‘काट डाला जाएगा’ I
  • नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने एक आने वाले ‘ख़ादिम’ की बाबत लिखा कि वह बहुत ज़ियादा दुख उठाएगा और वह ज़मीन पर से काट डाला जाएगा I
  • और जिस तरह हम ने यहाँ देखा कि नबी मलाकी (अलैहिस्सलाम) ने पेशबीनी की कि यह सब कुछ रास्ता तय्यार करने वाले की तरफ़ से रहनुमाई की जाएंगी I उसको लोगों को तय्यार करने के लिए था क्यूंकि हमारे दिल ख़ुदा की चीज़ों (बातों) के खिलाफ़ बहुत जल्द और आसानी से सख़्त हो जाते हैं I                 

 तो फिर 450 क़बल मसीह में ज़बूर के इख़तिताम पर यहूदी लोग उन हैरतअंगेज़ वायदों के पूरा होने के इंतज़ार में जी रहे थे I और वह इंतिज़ार पर इंतिज़ार किए जा रहे थे I एक नसल जाती रहती थी और दूसरी नसल का सिलसिला जारी था I इसके बावजूद भी आईएन वायदों का पूरा होना बाक़ी था I

जब ज़बूर का इख्तिताम तकमील पर पहुंचा तब क्या हुआ ?

जब हम ने बनी इसराईल की तारीख़ में देखा कि सिकन्दर ए आज़म ने 330 क़बल मसीह के दौरान दूनया के कई एक मुलकों पर फ़तह हासिल की तो फ़तह किए हुए लोगों और तहज़ीबों ने यूनानी ज़बान को अपनाया जिस तरह अंग्रेज़ी ज़बान मौजूदा ज़माने में तिजारत , तालीम , तसनीफ़ ओ तालीफ़ के लिये एक आलमगीर ज़बान बन चुकी है I इसी तरह उस ज़माने में भी यूनानी ज़बान दीगर ज़बानों पर हावी थी I यहूदी उस्तादों ने तौरेत और ज़बूर को जो इबरानी ज़बान में लिखी गई थी उसको 250 क़बल मसीह में यूनानी ज़बान में तर्जुमा किया I इस तरजुमे को सेप्टूयाजिंट कहा गया I जिस तरह से हम ने यहां देखा कि यह वह युनानी तर्जुमा है जिस में ख्रीस्तुस का लफ़्ज़ आता है और हमने यहां यह भी देखा जहां से येसू का नाम भी इस्तेमाल होता है I

The Prophets Isaiah, Malachi and Elijah (PBUT) shown in historical timeline

नबी हज़रत यसायाह , मलाकी , और एलियाह (अलैहिस्सलाम) को  तारीख़ी वक़्त की लकीर में दिखाया गया है

इस दौरान (क़बल मसीह 300 -100 को जिसे तारीख़ी वक़्त की लकीर के नीले रंग में दिखाया गया है) उन दिनों मिस्र , सीरिया और इसराईल के बीच एक फ़ौजी मुआहदा चल रहा था I और इन सल्तनतों के बीच जंग के दौरान बनी इसराईल पकड़े जाते थे I कुछ ख़ास सीरियाई बादशाहों ने यूनानी मज़हब को (बुतपरस्त मज़हब बतोर) क़रार दिया और एक ख़ुदा की इबादत करने पर ज़ोर दिया I कुछ यहूदी रहनुमाओं ने भी इस तरक़्क़ी याफ़्ता जमाअत की रहनुमाई की ताकि अपने वहदानियत परस्ती का मुक़ाबला कर सके और इबादत की पाकीज़गी को बर क़रार रख सके जिसे हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने क़ायम की थी I क्या इन मज़हबी रहनुमाओं ने उन वायदों के पूरा होने का इंतज़ार किया जिस की यहूदियों ने किया था ? इन लोगों ने हालांकि वैसे ही वफ़ादारी से इबादत की जिस तरह से तौरेत और ज़बूर में हिदायत दी गई थी मगर वह नबुवती निशान के लिये मौज़ू नहीं बैठते थे I दरअसल वह ख़ुद ही नबी होने के दावे के क़ाबिल नहीं थे I एसआईआरएफ़ ख़ुदा परस्त यहूदी ही बुत परस्ती के खिलाफ़ इबादत का बचाओ कर रहे थे I

उस ज़माने से मुताललिक़ तारीख़ी किताबें उन कशमकश का बयान करते हैं कि लिखी हुई इबादत की पाकीज़गी को उनहों ने बरक़रार रखा I यह किताबें तारीख़ी और मज़हबी बसीरत अता करती हैं और यह बहुत क़ीमती हैं I मगर यहूदी लोग वैसी इज़्ज़त नहीं देते थे जैसे कि उन्हें नबियों के ज़रिये लिखा गया हो I फिर उनहों ने उसको ज़बूर की किताबों में शामिल नहीं किया I हालांकि वह अच्छे किताब थे और मज़हबी लोगों के ज़रिये लिखी गई थीं I मगर वह नबियों के ज़रिये लिखे नहीं गए थे I इन किताबों को ही अपक्रिफ़ा कहा गया है I

मगर इस लिये कि यह किताबें मुफ़ीद और फ़ाइदेमंद थीं उन्हें अक्सर तौरेत और ज़बूर के साथ साथ शामिल किया गया ताकि यहूदियों की एक मुकम्मल तारीख़ को पेश कर कर सके I जब अनाजील और दीगर किताबें जेआईएन में येसु मसीह के पैगामत थे और (ख़ुतूत) के लिखे जाने के बाद इन सब को मिलाकर एक किताब अल किताब बाइबल नाम दिया गया I आज भी कुछ बाइबलें हैं जिन में अपकरिफ़ा को शामिल किया गया है जबकि यह तौरात , ज़बूर और इंजील के हिस्से माने नहीं जाते I

मगर जो वायदे तौरेत ज़बूर में दिये गए हैं उनका अभी भी पूरा होना बाक़ी है I यूनानी ज़बान से मुताससिर होते हुए ज़बरदस्त रोमी सलतनत ने इसको फैलाया और यहूदियों के बदले यूनानियों को रखा ताकि यहूदियों पर हुकूमत कर सके I यह पीले रंग का ज़माना है जो ऊपर की तारीख़ी वक़्त की लकीर में नीले रंग के बाद दिखाया गया है I रोमियों ने कामिलियत के साथ हुकूमत की मगर ज़ुल्म के साथ I महसूल , लगान और जिज़ये की रक़म बहुत ज़ियादा थी और रोमी किसी का भी भेद नहीं करते थे I यहूदी लोग चाहते थे कि तौरेत और ज़बूर में यहूदियों के हक़ में जो वादे किए गए थे वह पूरे हों और इसी के इंतज़ार में उन की इबादतें महज़ एक दस्तूर बनकर आरएच गईं और शरीअत के साथ कुछ और क़ानून को भी जोड़ दिया जो कि नबियों के ज़रिये नहीं थीं और न ही वह रिवायत के मुताबिक़ थे I यह फ़ालतू अहकाम कुछ अच्छे खयालात बतोर लगते थेजब उन्हें पहली बार अमल करने के लिए मशवरा दिया जाता था मगर बहुत जल्द तौरात और ज़बूर के असली हुक्म को उन की जगह पर रख दिया जाता था जो यहूदी उस्तादों के दिल ओ दमाग में हिफ़्ज़ किए हुए रहते थे I

और फिर आखिरकार जब वह एक जैसे लगते थे तो वह ऐसा लगता था कि तमाम वायदे अल्लाह के ज़रिये भुला दिये गए I उनही दिनों में ज़बरदस्त फ़रिश्ता जिबराईल आया और एक रास्ता तयार करने वाले शख़्स के पैदा होने की खुशख़बरी दी I जिसे आज हम यहया नबी कहते हैं या बाइबल में यूहनना इस्तिबागी (अलैहिस्सलाम) कहते हैं मगर यह इंजील की शुरुआत है जिसे हम आगे देखेंगे I