नबी यहया (अलैहिस्सलाम) रास्ता तयार करते हैं

सूरा अल अन’आम (सूरा 6 – मवेशी जानवर) हम से कहता है कि हमको ‘तौबा करने’ की ज़रूरत है I वह कहता है :

और जो लोग हमारी आयतों पर ईमान लाए हैं तुम्हारे पास ऑंए तो तुम सलामुन अलैकुम (तुम पर ख़ुदा की सलामती हो) कहो तुम्हारे परवरदिगार ने अपने ऊपर रहमत लाज़िम कर ली है बेशक तुम में से जो शख़्श नादानी से कोई गुनाह कर बैठे उसके बाद फिर तौबा करे और अपनी हालत की (असलाह करे ख़ुदा उसका गुनाह बख्श देगा क्योंकि) वह यक़ीनी बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

रा अल अन’आम 6:54

और ये भी कि अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में (गुनाहों से) तौबा करो वही तुम्हें एक मुकर्रर मुद्दत तक अच्छे नुत्फ के फायदे उठाने देगा और वही हर साहबे बुर्ज़गी को उसकी बुर्जुगी (की दाद) अता फरमाएगा और अगर तुमने (उसके हुक्म से) मुँह मोड़ा तो मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े (ख़ौफनाक) दिन के अज़ाब का डर हैतौबा क्या है

सूरा 11 – 3

और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में अपने (गुनाहों से) तौबा करो तो वह तुम पर मूसलाधार मेह आसमान से बरसाएगा ख़ुश्क साली न होगी और तुम्हारी क़ूवत (ताक़त) में और क़ूवत बढ़ा देगा और मुजरिम बन कर उससे मुँह न मोड़ों

सूरा हूद 11:52

और (हमने) क़ौमे समूद के पास उनके भाई सालेह को (पैग़म्बर बनाकर भेजा) तो उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की परसतिश करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं उसी ने तुमको ज़मीन (की मिट्टी) से पैदा किया और तुमको उसमें बसाया तो उससे मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में तौबा करो (बेशक मेरा परवरदिगार (हर शख़्श के) क़रीब और सबकी सुनता और दुआ क़ुबूल करता है

सूरा हूद 11:61

और अपने परवरदिगार से अपनी मग़फिरत की दुआ माँगों फिर उसी की बारगाह में तौबा करो बेशक मेरा परवरदिगार बड़ा मोहब्बत वाला मेहरबान है

सूरा हूद 11:90

तौबा , गुनाहों का इक़रार करते हुए अल्लाह की तरफ़ ‘फिरने’ को कहते हैं I तौबा की बाबत कहने के लिए इंजील ए शरीफ़ में नबी हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) के पास बहुत कुछ था जिसे हम यहाँ पर देखते हैं :

हम ने देखा कि ज़बूर शरीफ़ नबी हज़रत मलाकी (अलैहिस्सलाम) के जरिये पूरा किया गया था जिन्हों ने नबुवत करी थी कि एक रासता तयार करने वाला आएगा (मलाकी 3:1) I फिर हम ने देखा कि किस तरह जिबराईल फरिश्ते के इश्तिहार से ज़रिये से जो नबी हज़रत यहया और हज़रत मसीह की पैदाइश का इश्तिहार था इंजील शरीफ़ को खोला गया I (जो इश्तिहार मसीह की बाबत था वह कुंवारी से पैदा होने का था) I

नबी हज़रत यहया अलैहिस्सलाम – नबी एलियाह की रूह और क़ुव्वत में  

इंजील इस बात को क़लमबंद करती है कि हज़रत यहया कि पैदाइश के बाद उनको यूहनना इस्तिबागी अलैहिस्सलाम भी कहा गया :

मसीह की पैदाइश : जिस तरह से अँबिया के ज़रिये पेशबीनी हुई और जिबराईल फ़रिश्ते के ज़रिये इश्तिहार दिया गया

लूक़ा 1:80

जब वह बयाबान में तन्हा रहता था टीओ इंजील ए शरीफ़ बताती है :

4 यह यूहन्ना ऊंट के रोम का वस्त्र पहिने था, और अपनी कमर में चमड़े का पटुका बान्धे हुए था, और उसका भोजन टिड्डियां और बनमधु था।

मत्ती 3:4

यहया (अलैहिस्सलाम) की मज़बूत रूह ने उनको बयाबान में रहने , खुरदरा (ना मुलाइम) पोशाक पहनने , और जंगली खाना खाने की तरफ़ रहनुमाई की I मगर यह सिर्फ़ उसकी रूह के सबब से नहीं था — बल्कि यह उन के लिए एक अहम निशानी भी थी I हम ने ज़बूर के इख्तिताम पर देखा कि रास्ता तयार करने वाला , जिस के आने का वायदा किया गया था वह ‘एलियाह की रूह’ में होकर आएगा I एलियाह ज़बूर के इब्तिदाई (क़दीम) नबियों में से एक थे जो बयाबान में रहकर इस तरह का खाना और इस तरह का पोशाक पहनते थे I देखें यह हवाला :

“वह बहुत बालों वाला आदमी था और चमड़े का कमर बंद अपनी कमर पर कसे हुए था”

2 सलातीन 1:8

सो जब यहया (अलैहिस्सलाम) इस बतोर पोशाक पहनते और बयाबान में रहते थे तो यह इस बात की तरफ़ इशारा था कि रास्ता तयार करने वाला जिस के आने की बाबत नबुवत की गई थी वह एलियाह की रूह में होगा I उसकी पोशाक , उसका रहन सहन , और बयाबान मे उसका खान पान यह बताने के लिये निशानी थे कि यह अल्लाह के जरिये पेशगोई की गई मंसूबे के मुताबिक़ था I

इंजील शरीफ़ — को तारीख़ में साबित क़दमी से रखा गया                             

फिर इंजील हम से कहती है कि :

बिरियुस कैसर के राज्य के पंद्रहवें वर्ष में जब पुन्तियुस पीलातुस यहूदिया का हाकिम था, और गलील में हेरोदेस नाम चौथाई का इतूरैया, और त्रखोनीतिस में, उसका भाई फिलेप्पुस, और अबिलेने में लिसानियास चौथाई के राजा थे।
2 और जब हन्ना और कैफा महायाजक थे, उस समय परमेश्वर का वचन जंगल में जकरयाह के पुत्र यूहन्ना के पास पहुंचा।

लूक़ा 3:1-2

यह बयान यहया (अलैहिस्सलाम) के नबुवती खिदमत से शुरू होता है और यह बहुत ही अहम है जबकि यह अपनी शुरुआती खिदमत को तारीख़ में आने वाले कई एक जाने माने हाकिमों के सामने रखते हुए एक निशानी ठहराता है I उन दिनों के हाकिमों के पास इस दूर तक पहुँचने वाले हवाले पर गौर करें I यह हमको अनाजील में बयानात की दुरुस्ती को और ज़ियादा तारीख़ी जांच करने देती है I अगर आप ऐसा करते हैं तो आप पाएंगे कि तिबेरीउस क़ैसर , पुनतुस पिलातुस , हेरोदेस , फिलिपपुस , लिसानियस , हनना और काइफ़ा यह सब लोग रोम के मुलाज़िम और यहूदी तारीखदान हैं I यहाँ तक कि फ़रक़ फ़रक़ लक़ब जो फ़रक़ फ़रक़ हाकिमों को दिये गए हैं (मिसाल बतोर पुनतुस पिलातुस के लिए जो ‘गवर्नर’ था और ‘टेटराच’ हेरोदेस के लिये था वगैरा) यह सब तारीख़ी नज़रिये से जांचे गए हैं कि वह सही और दुरुस्त हैं I यह हमको तारीख़ी नुक़ता ए नज़र से एक ख़ालिस तोर पर तशख़ीस होने देता है कि इसको एतिबारी से क़लमबंद किया गया था I

तिबेरीउस क़ैसर ने 14 क़ब्ल मसीह में रोमी सल्तनत के तख़्त की काया पलट करदी I सो यह उसकी सल्तनत का 15 वां साल था तब यहया (अलैहिस्सलाम) ने 29 क़ब्ल मसीह में पैगाम हासिल करना शुरू किया I

यहया (अलैहिस्सलाम) का पैगाम – तौबा करो और गुनाह का इक़रार करो

तो फिर उसका पैगाम क्या था ? उसके जीने के तरीक़े की तरह ही , उसका पैगाम भी बहुत सादा था , मगर बराहे रास्त और ज़बरदस्त था I इंजील शरीफ़ कहती है :

न दिनों में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला आकर यहूदिया के जंगल में यह प्रचार करने लगा। कि
2 मन फिराओ; क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।

मत्ती 3: 1-2

इस तरह उसके पैगाम का हिस्सा एक सच्चाई का ऐलान था – कि ख़ुदा की बादशाही ‘नज़दीक’  थी (है) हम ने देखा कि किस तरह ज़बूर के नबियों ने बहुत पहले ही ख़ुदा की बादशाही के आने की बाबत नबुवत की थी I यहया (अलैहिस्सलाम) कह रहे हैं कि वह अभी ‘नज़दीक’ है बल्कि दरवाज़े पर है I

मगर लोग इस बादशाही के लिए तयार नहीं किए जाएँगे जब तक कि वह तौबा नहीं करेंगे I दरअसल अगर वह ‘तौबा’ नहीं करते हैं तो वह इस बादशाही से चूक जाएँगे I तौबा करने के मायने हैं : “अपने ख्याल बदलना ; दुबारा से उस पर गौर करना ; या फ़रक़ तरीक़े से सोचना I”

मगर वह फ़रक़ तरीक़े से ‘किसकी बाबत सोच रहे थे ? यहया नबी के पैगाम की बिना पर लोगों के दो तरह के नतीजों को देखने के ज़रिये हम सीख सकते हैं कि वह कौन बात थी जिसके  लिये वह तौबा का हुक्म दे रहा था I इंजील इस बात को क़लमबंद करती है कि लोगों ने उसके पैगाम का कैसे जवाब दिया :

6 और अपने अपने पापों को मानकर यरदन नदी में उस से बपतिस्मा लिया।

मत्ती 3:6

आदम की निशानी के लिये किताबों के हवालों में आपको याद होगा कि आदम और हव्वा ने यूएस ममनूआ फल को खाया था :

      “उनहों ने खुद को ख़ुदावंद ख़ुदा के हुज़ूर से बाग़ के दरख्तों में छिपाया I“

दाइश 3:8

जब से हम को अपने गुनाहों को छिपाने की खसलत हुई है और यह बहाना कि इसे हम ने अपनी फ़ितरत बतोर किया है जो हमारे अंदर है I अपने गुनाहों को मानना और उसके लिये तौबा करना हमारे लिये क़रीब क़रीब ना मुमकिन है I हम ने कुंवारी के बेटे की निशानी में देखा था कि अँबिया जैसे दाऊद (अलैहिस्सलाम) और मोहम्मद (सल्लम) ने भी अपने गुनाहों का एतराफ़ किया है I यह हमारे लिये बहुत ही मुश्किल है क्यूंकि यह हमको क़ुसूरवार ठहराता और नदामत ले आता है हम कुछ और करने के लिये राज़ी हो जाते हैं मगर तौबा से गुज़ेर करते हैं I मगर यहया (अलैहिस्सलाम) ने जिस बात की मनादी की वह यह कि तौबा करते हुए आने वाली ख़ुदा की बादशाही के लिये खुद को तयार होना पड़ेगा I

मज़हबी रहनुमाओं को तंबीह जो तौबा नहीं करेंगे

और कुछ लोगों ने हक़ीक़त में ऐसा किया है मगर हरगिज़ ईमानदारी से अपने गुनाह क़बूल नहीं किए ना ही उनसे तौबा करी I इंजील कहती है :

7 जब उस ने बहुतेरे फरीसियों और सदूकियों को बपतिस्मा के लिये अपने पास आते देखा, तो उन से कहा, कि हे सांप के बच्चों तुम्हें किस ने जता दिया, कि आने वाले क्रोध से भागो?
8 सो मन फिराव के योग्य फल लाओ।
9 और अपने अपने मन में यह न सोचो, कि हमारा पिता इब्राहीम है; क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि परमेश्वर इन पत्थरों से इब्राहीम के लिये सन्तान उत्पन्न कर सकता है।
10 और अब कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा हुआ है, इसलिये जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।

मत्ती 3:7-10

फ़रीसी और सदूक़ी मूसा की शरीअत के उस्ताद थे I यह बहुत ही ज़ियादा मज़हबी थे और पाबंदियों (जैसे नमाज़ , रोज़ा और क़ुरबानियाँ वगैरा) को जो शरीअत के हुक्म थे पूरा करने में ख़ूब मेहनत करते थे I हर कोई सोचता था कि यह रहनुमा जो लोगों को मज़हबी बातें सिखाते हैं वह यक़ीनी तोर से अल्लाह की जानिब से तसदीक़ किए गए हैं I मगर यहया अलैहिस्सलाम उनको सांप के बच्चो कहकर पुकारता है और उन्हें आने वाले जहन्नुम की आग और इंसाफ के दिन की तंबीह देता है ! क्यूँ ? इसलिए कि वह ‘तौबा के मुवाफ़िक़ फल नहीं लाये थे’ I यह बताता है कि उनहों ने हक़ीक़ी मायनों में तौबा नहीं करी थी I उनहों ने अपने गुनाहों का इक़रार नहीं किया था मगर दिखावे के लिये मज़हबी पाबंदियों का इस्तेमाल अपने गुनाहों को छिपाने के लिये करते थे I इस के अलावा अपने गुनाहों से तौबा करने के बदले उन का मज़हबी मीरास जो हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) से चला आता था उसपर फ़खर किया करते थे I

दाऊद की तौबा और इक़रार हमारे लिये एक नमूना है                                         

सो हम हज़रत यहया की तंबीह से देख सकते हैं कि गुनाहों से तौबा और इक़रार मजाज़ी तोर से अहम है (यह क़ुव्वत ए हयात बतोर है) I दरअसल इस के बगैर हम ख़ुदा की बादशाही मे दाख़िल नहीं हो पाएंगे I और जिस दिन फरीसियों और सदूक़ियों को तंबीह मिली थी तब से हम देख सकते हैं कि मज़हब की आड़ में हमें अपने गुनाहों को छिपाना कितना आसान और फ़ितरती है I सो आप के और मेरी बाबत क्या कहना ? यह एक तंबीह बतोर हमारे लिये लिखा गया है कि अपने ज़िद में आकर या अपने दिलों को सख़्त करते हुए अपने गुनाहों को ना छिपाएं और तौबा करने से इंकार न करें I बजाए इसके कि हम अपने गुनाहों के लिये बहाने बनाएँ यह ज़ाहिर करते हुए कि हम ने कोई गुनाह नहीं किया या उन्हें छिपाते हैं तो हमको हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के नमूने के पीछे चलना चाहिए कि उसने गुनाह का मुक़ाबला करने के बाद ज़बूर शरीफ़ मे ज़ेल की आयतों के साथ अपने गुनाहों का इक़रार किया I

परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।
2 मुझे भलीं भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर!
3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।
4 मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।
5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा॥
6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।
9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल॥
10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल॥

ज़बूर 51:1-12

तौबा का फल

तौबा और इक़रार से एक फ़रक़ तारीक़े से जीने की उम्मीद पैदा होती है I लोगों ने हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) से पूछा की उन्हें तौबा के मुवाफ़िक़ फल लाने का मज़ाहिरा किस तरह करना चाहिए ? इसके बारे में हज़रत यहया ने जो बातें कहीं उसे ज़ेल की आयात मे इस तरह पेश किया गया है :

10 और लोगों ने उस से पूछा, तो हम क्या करें?
11 उस ने उन्हें उतर दिया, कि जिस के पास दो कुरते हों वह उसके साथ जिस के पास नहीं हैं बांट दे और जिस के पास भोजन हो, वह भी ऐसा ही करे।
12 और महसूल लेने वाले भी बपतिस्मा लेने आए, और उस से पूछा, कि हे गुरू, हम क्या करें?
13 उस ने उन से कहा, जो तुम्हारे लिये ठहराया गया है, उस से अधिक न लेना।
14 और सिपाहियों ने भी उस से यह पूछा, हम क्या करें? उस ने उन से कहा, किसी पर उपद्रव न करना, और न झूठा दोष लगाना, और अपनी मजदूरी पर सन्तोष करना॥

लूक़ा 3:10-14

क्या हज़रत यहया मसीह थे ?

जिस जोश और कुवत के साथ वह तक़रीर या मनादी करता था , उससे बहुत से लोग मुताससिर और हैरत ज़दह हुए थे कि वह मसीह तो नहीं है I इस बहस को इंजील शरीफ़ मे इस तरह लिखा हुआ है देखें :

15 जब लोग आस लगाए हुए थे, और सब अपने अपने मन में यूहन्ना के विषय में विचार कर रहे थे, कि क्या यही मसीह तो नहीं है।
16 तो यूहन्ना ने उन सब से उत्तर में कहा: कि मैं तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा देता हूं, परन्तु वह आनेवाला है, जो मुझ से शक्तिमान है; मैं तो इस योग्य भी नहीं, कि उसके जूतों का बन्ध खोल सकूं, वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा।
17 उसका सूप, उसके हाथ में है; और वह अपना खलिहान अच्छी तरह से साफ करेगा; और गेहूं को अपने खत्ते में इकट्ठा करेगा, परन्तु भूसी को उस आग में जो बुझने की नहीं जला देगा॥
18 सो वह बहुत सी शिक्षा दे देकर लोगों को सुसमाचार सुनाता रहा।

लूक़ा 3:15-18

इख्तिताम

नबी  हज़रत  यहया  (अलैहिस्सलाम)  लोगों  को  तयार करने  के  लिये  आए  थे  कि  वह ख़ुदा  की बादशाही के लिये आमादा किए जाएँ I मगर उसने उन्हें और ज़ियादा शरीअत के अहकाम देने के जरिये तयार नहीं किया बल्कि बराहे रास्त उन्हें दावत दी कि वह अपने गुनाहों से तौबा करें और अपने गुनाहों का इक़रार करें I दरअसल ऐसा करना मुश्किल है बनिस्बत इसके कि हमारे गुनाह ज़हीर किए जाएँ और क़ुसूरवार साबित किए जाएँ I इसके बदले में उनहों ने दिखावटी मज़हब का इस्तेमाल किया ताकि अपने गुनाह छिपा सकें I मगर जिस तरह से उनहों ने चुनाव किया उसके मुताबिक़ मसीह को क़बूल करने और ख़ुदा की बादशाहि को समझने में गैर आमादा हुए जबकि वह इसी पैगाम को देने के लिये आया था I हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) की यह तंबीह आज के ज़माने मे हमारे लिये बा मौक़ा और मुनासिब है I वह हम से तक़ाज़ा करता है कि हम अपने गुनाहों से तौबा करें और उनका इक़रार करें I क्या हम इसके लिये तयार हैं ?                         

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