दिन 5 – शैतान नीचे उतरता है कि मसीह को मारे

नबी ईसा अल मसीह अपनी ज़िन्दगी के आख़री हफ़ते के चौथे दिन अपने ज़मीन पर लौटने के निशानात की बाबत नबुवत की थी I इंजील शरीफ़ फिर बयान करता कि किस तरह मज़हबी रहनुमा उन्हें गिरफ़्तार करना चाहते थे I शैतान (या इबलीस)ने यह तरीक़ा इस्तेमाल किया कि नबी को मारे – वह उनका ठहराया हुआ दुशमन है I यहाँ देखें कि इंजील में इसको किस तरह बयान किया गया है I     .

  खमीरी रोटी का पर्व्व जो फसह कहलाता है, निकट था।
2 और महायाजक और शास्त्री इस बात की खोज में थे कि उस को क्योंकर मार डालें, पर वे लोगों से डरते थे॥
3 और शैतान यहूदा में समाया, जो इस्करियोती कहलाता और बारह चेलों में गिना जाता था।
4 उस ने जाकर महायाजकों और पहरूओं के सरदारों के साथ बातचीत की, कि उस को किस प्रकार उन के हाथ पकड़वाए।
5 वे आनन्दित हुए, और उसे रूपये देने का वचन दिया।
6 उस ने मान लिया, और अवसर ढूंढ़ने लगा, कि बिना उपद्रव के उसे उन के हाथ पकड़वा दे॥                                                                                  

लूका 22:1-6

हम देखते हैं कि शैतान ने पूरा फ़ाइदा उठाया कि यहूदा इसकरयूत में समाए ताकि नबी को पकड़वाए I यह हमको हैरतज़दह नहीं करना चाहिए I सूरा फ़तीर (सूरा 35 – मोजिद) और सूरा या – सीन (सूरा 36 – यासीन) शैतान की बाबत इस तरह कहता है कि :      

 बेशक शैतान तुम्हारा दुश्मन है तो तुम भी उसे अपना दुशमन बनाए रहो वह तो अपने गिरोह को बस इसलिए बुलाता है कि वह लोग (सब के सब) जहन्नुमी बन जाएँ

सूरा फ़तीर 35:6

“बेशक शैतान तुम्हारा दुशमन है सो तुम भी (उसकी मुखालफ़त की शक्ल में) उसे दुशमन ही बनाए रखो I वह तो अपने गिरोह को इसलिए बुलाता है कि वह दोज़खियों में शामिल हो जाएँ I”    

 ऐ आदम की औलाद क्या मैंने तुम्हारे पास ये हुक्म नहीं भेजा था कि (ख़बरदार) शैतान की परसतिश न करना वह यक़ीनी तुम्हारा खुल्लम खुल्ला दुश्मन हैऔर ये कि (देखो) सिर्फ मेरी इबादत करना यही (नजात की) सीधी राह हैऔर (बावजूद इसके) उसने तुममें से बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते थे

सूरा यासीन 36:60-62

इंजील शरीफ़ के आख़िर में शैतान को रोया में बयान किया गया है I

  7 फिर स्वर्ग पर लड़ाई हुई, मीकाईल और उसके स्वर्गदूत अजगर से लड़ने को निकले, और अजगर ओर उसके दूत उस से लड़े।
8 परन्तु प्रबल न हुए, और स्वर्ग में उन के लिये फिर जगह न रही।
9 और वह बड़ा अजगर अर्थात वही पुराना सांप, जो इब्लीस और शैतान कहलाता है, और सारे संसार का भरमाने वाला है, पृथ्वी पर गिरा दिया गया; और उसके दूत उसके साथ गिरा दिए गए।

मुकाशफ़ा12:7-9

शैतान आप का भी ठहराया हुआ दुश्मन है जिसको एक ज़बरदस्त अशधा बतोर तसव्वुर किया गया है I वह इतना अययार (धूर्त) है कि पूरी दुनया को वरग़ला कर सही रास्ते से दूर ले जा सकता है I इस दुश्मन को हज़रत आदम के साथ बागे अदन में इस बतोर नबुवत किया गया था कि वह बुरे कामों को ही अंजाम देगा I सो उसने यहूदा इसकरयूत को अपने क़ाबू में लिया कि नबी ईसा अल मसीह को बर्बाद करे I जिसे इंजील इस तरह बयान करती है कि :     

  16 और वह उसी समय से उसे पकड़वाने का अवसर ढूंढ़ने लगा॥

मत्ती  26:16

दूसरे दिन – दिन 6 – फ़सह की ईद थी जेओ जेओ नबी हज़रत मूसा ने उस ज़माने के हिसाब से 1500 साल पहले शुरू किया था I किस शैतान यहूदा इसकरयूत के ज़रिये इस मुक़द्दस दिन में अपने मोक़े का फ़ाइदा उठाएगा इसे हम अगली तहरीर में देखेंगे I  

दिन 5 का खुलासा

वक़्त की लकीर बताती है कि उस हफ़्ते के पांचवें दिन वह बड़ा अज़धा शैतान हरकत में आया कि उसके सबसे बड़े दुश्मन – नबी हज़रत ईसा अल मसीह को मारे –

Shaytan, the Great Dragon, enters Judas to strike the Prophet Isa al Masih

शैतान बड़ा अज़धा यहूदा इसकरयूत में समाता है ताकि नबी हज़रत ईसा अल मसीह को मारे I

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