वह दिन : अल–इनशिक़ाक़ और अत-तूर और अल मसीह

सूरा अल-इनशिक़ाक़ (सूरा 84 आफ़ताब का फटना) बयान करता है कि फ़ैसले के दिन (क़ियामत के दिन)किस तरह आसमान और ज़मीन हिलाई जाएंगी और बर्बाद की जायेगी ।     

जब आसमान फट जाएगा)और अपने परवरदिगार का हुक्म बजा लाएगा और उसे वाजिब भी यही है और जब ज़मीन (बराबर करके) तान दी जाएगी और जो कुछ उसमें है उगल देगी और बिल्कुल ख़ाली हो जाएगी और अपने परवरदिगार का हुक्म बजा लाएगी और उस पर लाजि़म भी यही है (तो क़यामत आ जाएगी) ऐ इन्सान तू अपने परवरदिगार की हुज़ूरी की कोशिश करता है । तो तू (एक न एक दिन) उसके सामने हाजि़र होगा फिर (उस दिन) जिसका नामाए आमाल उसके दाहिने हाथ में दिया जाएगा उससे तो हिसाब आसान तरीके़ से लिया जाएगा और (फिर) वह अपने (मोमिनीन के) क़बीले की तरफ ख़ुश ख़ुश पलटेगा लेकिन जिस शख़्स को उसका नामए आमल उसकी पीठ के पीछे से दिया जाएगा । वह तो मौत की दुआ करेगा और जहन्नुम वासिल होगा ।

सूरए अल इन्शिकाक 84:1-12

सूरा अल- इनशिक़ाक़ उन लोगों को ख़बरदार करता करता है जिनके आमाल का हिसाब किताब उनके दाहने हाथ में नहीं दिया जाएगा वह उस दिन ‘भड़कती हुई आग’ में डाले जाएंगे ।

क्या आप जानते हैं कि आप के आमाल का हिसाब किताब  आपके दहने हाथ में दिए जाएंगे या आपके पीठ पीछे दिए जाएंगे ?

सूरा अत – तूर (सूरा 52 – चढ़ना) इन्साफ़ के दिन ज़मीन के हिलाए जाने की बाबत और लोगों के ख़स्ता हाली की बाबत तफ़सील से बयान करता है ।         

तो (ऐ रसूल) तुम इनको इनकी हालत पर छोड़ दो यहाँ तक कि वह जिसमें ये बेहोश हो जाएँगे । इनके सामने आ जाए जिस दिन न इनकी मक्कारी ही कुछ काम आएगी और न इनकी मदद ही की जाएगी और इसमें शक नहीं कि ज़ालिमों के लिए इसके अलावा और भी अज़ाब है मगर उनमें बहुतेरे नहीं जानते हैं ।

सूरए अत तूर 52:45-47

क्या आपको पक्का यक़ीन है कि आप ने कोई ‘ख़ता नहीं की’ और सच्चाई का बर्ताव नहीं किया जैसे कि ‘झुटलाना’ (झूट बोलना) जिस से कि आप फ़ैसले के दिन अज़ाब से छूट जाएं ?

नबी हज़रत ईसा अल मसीह उन लोगों की मदद करने आये जिन्हें यक़ीन नहीं है कि इन्साफ़ के दिन उनके आमाल का हिसाब किताब किस तरह से दिया जाएगा । वह उनकी मदद करने आये जिनको किसी तरह की मदद मिलने के आसार नज़र नहीं आते । उन्हों ने इनजील शरीफ़ में कहा :      

7 तब यीशु ने उन से फिर कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि भेड़ों का द्वार मैं हूं।
8 जितने मुझ से पहिले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्तु भेड़ों ने उन की न सुनी।
9 द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा।
10 चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं।
11 अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है।
12 मजदूर जो न चरवाहा है, और न भेड़ों का मालिक है, भेड़िए को आते हुए देख, भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है, और भेड़िय़ा उन्हें पकड़ता और तित्तर बित्तर कर देता है।
13 वह इसलिये भाग जाता है कि वह मजदूर है, और उस को भेड़ों की चिन्ता नहीं।
14 अच्छा चरवाहा मैं हूं; जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूं।
15 इसी तरह मैं अपनी भेड़ों को जानता हूं, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं, और मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूं।
16 और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उन का भी लाना अवश्य है, वे मेरा शब्द सुनेंगी; तब एक ही झुण्ड और एक ही चरवाहा होगा।
17 पिता इसलिये मुझ से प्रेम रखता है, कि मैं अपना प्राण देता हूं, कि उसे फिर ले लूं।
18 कोई उसे मुझ से छीनता नहीं, वरन मैं उसे आप ही देता हूं: मुझे उसके देने का अधिकार है, और उसे फिर लेने का भी अधिकार है: यह आज्ञा मेरे पिता से मुझे मिली है॥

युहन्ना 10;7-18

नबी हज़रत ईसा अल मसीह ने अपनी ‘भेड़ों’ की हिफाज़त करने और उन्हें जिंदगी देने के लिए अपने बड़े इख्तियार का दावा किया – यहाँ तक कि उस आने वाले दहशतनाक दिन से बचाने के लिए भी । क्या वह इस तरह का इख्तियार रखते हैं ? इन दावों के लिए उन का इख्तियार तौरात के नबी हज़रत मूसा के ज़रिये साबित हुआ कि किसतरह उन्हों ने काएनात की छे दिनों की तख्लीक़ से उन के इख्तियारात की बाबत नबुवत की और पहले से देखा गया । फिर ज़बूर और आने वाले नबियों ने उनके आने की बाबत तफ़सील से नबुवत की ताकि हम इस बात को जानें कि हकीकत में उनका आसमान से आना आसमानी मनसूबे के तहत था । मगर कोई किस तरह से ‘उसकी भेड़’ बन सकता है और इसका क्या मतलब है कि “मैं भेड़ों के लिए अपनी जान देता हूँ” इसे हम यहाँ देखते हैं

नबी हज़रत ईसा अल मसीह की तालीमात हमेशा ही लोगों को एक दुसरे से अलग करती रही है । यह उन के ज़माने में सौ फ़ीसदी सहीह था । यहाँ वह बयान है कि कैसे यह बहस ख़तम होती है और किस तरह से लोग जो उनकी सुनते थे अलग हो गए थे ।       

19 इन बातों के कारण यहूदियों में फिर फूट पड़ी।
20 उन में से बहुतेरे कहने लगे, कि उस में दुष्टात्मा है, और वह पागल है; उस की क्यों सुनते हो?
21 औरों ने कहा, ये बातें ऐसे मनुष्य की नहीं जिस में दुष्टात्मा हो: क्या दुष्टात्मा अन्धों की आंखे खोल सकती है?
22 यरूशलेम में स्थापन पर्व हुआ, और जाड़े की ऋतु थी।
23 और यीशु मन्दिर में सुलैमान के ओसारे में टहल रहा था।
24 तब यहूदियों ने उसे आ घेरा और पूछा, तू हमारे मन को कब तक दुविधा में रखेगा? यदि तू मसीह है, तो हम से साफ कह दे।
25 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, कि मैं ने तुम से कह दिया, और तुम प्रतीति करते ही नहीं, जो काम मैं अपने पिता के नाम से करता हूं वे ही मेरे गवाह हैं।
26 परन्तु तुम इसलिये प्रतीति नहीं करते, कि मेरी भेड़ों में से नहीं हो।
27 मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं।
28 और मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हूं, और वे कभी नाश न होंगी, और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगा।
29 मेरा पिता, जिस ने उन्हें मुझ को दिया है, सब से बड़ा है, और कोई उन्हें पिता के हाथ से छीन नहीं सकता।
30 मैं और पिता एक हैं।
31 यहूदियों ने उसे पत्थरवाह करने को फिर पत्थर उठाए।
32 इस पर यीशु ने उन से कहा, कि मैं ने तुम्हें अपने पिता की ओर से बहुत से भले काम दिखाए हैं, उन में से किस काम के लिये तुम मुझे पत्थरवाह करते हो?
33 यहूदियों ने उस को उत्तर दिया, कि भले काम के लिये हम तुझे पत्थरवाह नहीं करते, परन्तु परमेश्वर की निन्दा के कारण और इसलिये कि तू मनुष्य होकर अपने आप को परमेश्वर बनाता है।
34 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, क्या तुम्हारी व्यवस्था में नहीं लिखा है कि मैं ने कहा, तुम ईश्वर हो?
35 यदि उस ने उन्हें ईश्वर कहा जिन के पास परमेश्वर का वचन पहुंचा (और पवित्र शास्त्र की बात लोप नहीं हो सकती।)
36 तो जिसे पिता ने पवित्र ठहराकर जगत में भेजा है, तुम उस से कहते हो कि तू निन्दा करता है, इसलिये कि मैं ने कहा, मैं परमेश्वर का पुत्र हूं।
37 यदि मैं अपने पिता के काम नहीं करता, तो मेरी प्रतीति न करो।
38 परन्तु यदि मैं करता हूं, तो चाहे मेरी प्रतीति न भी करो, परन्तु उन कामों की तो प्रतीति करो, ताकि तुम जानो, और समझो, कि पिता मुझ में है, और मैं पिता में हूं।
39 तब उन्होंने फिर उसे पकड़ने का प्रयत्न किया परन्तु वह उन के हाथ से निकल गया॥
40 फिर वह यरदन के पार उस स्थान पर चला गया, जहां यूहन्ना पहिले बपतिस्मा दिया करता था, और वहीं रहा।
41 और बहुतेरे उसके पास आकर कहते थे, कि युहन्ना ने तो कोई चिन्ह नहीं दिखाया, परन्तु जो कुछ यूहन्ना ने इस के विषय में कहा था वह सब सच था।
42 और वहां बहुतेरों ने उस पर विश्वास किया॥

युहन्ना 10:19-42

वह दिन : अल – मसाद और अल – हदीद और अल मसीह

सूरा अल – मसाद (सूरा 111 – खजूर की साख्त) आखरी दिन में (रोज़े महशर) को भड़कती हुई आगा के फैसले की बाबत ख़बरदार करता है ।     

अबु लहब के हाथ टूट जाएँ और वह ख़ुद सत्यानास हो जाए (आखि़र) न उसका माल ही उसके हाथ आया और (न) उसने कमाया वह बहुत भड़कती हुयी आग में दाखि़ल होगा और उसकी जोरू भी जो सर पर ईंधन उठाए फिरती है और उसके गले में बटी हुयी रस्सी बँधी है ।

 सूरए अल लहब 111:1-5

सूरह अल – मसाद ख़बरदार करता है कि हम बर्बाद हो सकते हैं । यहाँ तक कि हमारे अज़ीज़ भी, जैसे हमारी बीवियां, यह भी फैसले के आखरी दिन मौत की धमकी का सामना करेंगे ।

सो अल्लाह के इस इमतिहान की तय्यारी के लिए हम क्या कर सकते हैं जो हमारे तमाम शर्मनाक पोशीदा कामों से ख़ूब वाक़िफ़ है ? 

सूरा अल – हदीद (सूरा 57 – लोहा) हम से कहता है कि अल्लाह ने निशानात भेजे हैं कि हमारी शर्मनाक पोशीदा चीज़ों की तारीकी में रौशनी की तरफ़ हमारी रहनुमाई करे ।   

 वही तो है जो अपने बन्दे (मोहम्मद) पर वाज़ेए व रौशन आयतें नाजि़ल करता है ताकि तुम लोगों को (कुफ्ऱ की) तारिक़ीयों से निकाल कर (ईमान की) रौशनी में ले जाए और बेशक ख़ुदा तुम पर बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है ।

सूरए अल हदीद 57:9

मगर हमें ख़बरदार किया गया है कि जो तारीकी में रहते थे वह मुज़तरिबाना तोर से उस दिन रौशनी की तलाश करेंगे ।

उस दिन मुनाफि़क मर्द और मुनाफि़क औरतें ईमानदारों से कहेंगे एक नज़र (शफ़क़्क़त) हमारी तरफ़ भी करो कि हम भी तुम्हारे नूर से कुछ रौशनी हासिल करें तो (उनसे) कहा जाएगा कि तुम अपने पीछे (दुनिया में) लौट जाओ और (वही) किसी और नूर की तलाष करो फिर उनके बीच में एक दीवार खड़ी कर दी जाएगी जिसमें एक दरवाज़ा होगा (और) उसके अन्दर की जानिब तो रहमत है और बाहर की तरफ़ अज़ाब तो मुनाफि़क़ीन मोमिनीन से पुकार कर कहेंगे। (क्यों भाई) क्या हम कभी तुम्हारे साथ न थे तो मोमिनीन कहेंगे थे तो ज़रूर मगर तुम ने तो ख़ुद अपने आपको बला में डाला और (हमारे हक़ में गर्दिषों के) मुन्तजि़र हैं और (दीन में) शक किया किए और तुम्हें (तुम्हारी) तमन्नाओं ने धोखे में रखा यहाँ तक कि ख़ुदा का हुक्म आ पहुँचा और एक बड़े दग़ाबाज़ (शैतान) ने ख़ुदा के बारे में तुमको फ़रेब दिया ।

 सूरए अल हदीद 57:13-14

तब क्या होगा अगर हम ने उस तरह की ज़िन्दगी नहीं गुज़ारी कि इस आखरी दिन में रौशनी की इनायत होती ? क्या अभी भी हमारे लिए कोई उम्मीद नज़र आती है ?  

नबी हज़रत ईसा अल मसीह उस दिन की बदहाली में मदद करने के लिए आये । उन्हों ने साफ़ कहा कि वह वही रौशनी हैं जिसकी ज़रुरत ऐसे लोगों के लिए है जो शर्मनाक तारीकी में गुज़र बसर कर रहे है और जिन्हें फ़ैसले के दिन रौशनी की सख्त ज़रुरत है ।

12 तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा।
13 फरीसियों ने उस से कहा; तू अपनी गवाही आप देता है; तेरी गवाही ठीक नहीं।
14 यीशु ने उन को उत्तर दिया; कि यदि मैं अपनी गवाही आप देता हूं, तौभी मेरी गवाही ठीक है, क्योंकि मैं जानता हूं, कि मैं कहां से आया हूं और कहां को जाता हूं परन्तु तुम नहीं जानते कि मैं कहां से आता हूं या कहां को जाता हूं।
15 तुम शरीर के अनुसार न्याय करते हो; मैं किसी का न्याय नहीं करता।
16 और यदि मैं न्याय करूं भी, तो मेरा न्याय सच्चा है; क्योंकि मैं अकेला नहीं, परन्तु मैं हूं, और पिता है जिस ने मुझे भेजा।
17 और तुम्हारी व्यवस्था में भी लिखा है; कि दो जनों की गवाही मिलकर ठीक होती है।
18 एक तो मैं आप अपनी गवाही देता हूं, और दूसरा पिता मेरी गवाही देता है जिस ने मुझे भेजा।
19 उन्होंने उस से कहा, तेरा पिता कहां है? यीशु ने उत्तर दिया, कि न तुम मुझे जानते हो, न मेरे पिता को, यदि मुझे जानते, तो मेरे पिता को भी जानते।
20 ये बातें उस ने मन्दिर में उपदेश देते हुए भण्डार घर में कहीं, और किसी ने उसे न पकड़ा; क्योंकि उसका समय अब तक नहीं आया था॥
21 उस ने फिर उन से कहा, मैं जाता हूं और तुम मुझे ढूंढ़ोगे और अपने पाप में मरोगे: जहां मैं जाता हूं, वहां तुम नहीं आ सकते।
22 इस पर यहूदियों ने कहा, क्या वह अपने आप को मार डालेगा, जो कहता है; कि जहां मैं जाता हूं वहां तुम नहीं आ सकते?
23 उस ने उन से कहा, तुम नीचे के हो, मैं ऊपर का हूं; तुम संसार के हो, मैं संसार का नहीं।
24 इसलिये मैं ने तुम से कहा, कि तुम अपने पापों में मरोगे; क्योंकि यदि तुम विश्वास न करोगे कि मैं वहीं हूं, तो अपने पापों में मरोगे।
25 उन्होंने उस से कहा, तू कौन है यीशु ने उन से कहा, वही हूं जो प्रारम्भ से तुम से कहता आया हूं।
26 तुम्हारे विषय में मुझे बहुत कुछ कहना और निर्णय करना है परन्तु मेरा भेजनेवाला सच्चा है; और जो मैं ने उस से सुना हे, वही जगत से कहता हूं।
27 वे न समझे कि हम से पिता के विषय में कहता है।
28 तब यीशु ने कहा, कि जब तुम मनुष्य के पुत्र को ऊंचे पर चढ़ाओगे, तो जानोगे कि मैं वही हूं, और अपने आप से कुछ नहीं करता, परन्तु जैसे पिता ने मुझे सिखाया, वैसे ही ये बातें कहता हूं।
29 और मेरा भेजनेवाला मेरे साथ है; उस ने मुझे अकेला नहीं छोड़ा; क्योंकि मैं सर्वदा वही काम करता हूं, जिस से वह प्रसन्न होता है।
30 वह ये बातें कह ही रहा था, कि बहुतेरों ने उस पर विश्वास किया॥

युहन्ना 8:12-30

नबी हज़रत ईसा अल मसीह ने दुनया का नूर होने बतोर एक बड़े इख्तियार का दावा पेश किया और जब दूसरों के ज़रिये चुनौती दी गयी तो उन्हों ने ‘शरीअत’ की किताबों का हवाला दिया । यह मूसा की तौरात है जिसमें मसीह के आने और उनके इख्तियारत की बाबत नबुवत की गयी है । फिर ज़बूर और आने वाले नबियों ने उनके आने की बाबत तफ़सील से नबुवत की ताकि हम जान सकें की उनके पास वही इख्तियारत मौजूद थे जिन का उन्हों ने दावा किया था । ‘इब्न आदम’ क्या है और ईसा अल मसीह के क्या मायने हैं और ‘इब्न आदम को ऊंचे पर चढ़ाए जाने’ का क्या मतलब है ? और अपने अन्दर ‘जिंदगी की रौशनी’ रखना क्या होता है ? इसको हम यहाँ देखते हैं । आज के दिन आप ऐसा ही करें, क्यूंकि इन्साफ़ के दिन इसे ढूंढना शुरू करना बहुत देर साबित होगा फिर जिस तरह अल हदीद ख़बरदार करता है      

जान रखो कि ख़ुदा ही ज़मीन को उसके मरने (उफ़तादा होने) के बाद जि़न्दा (आबाद) करता है हमने तुमसे अपनी (क़ुदरत की) निशानियाँ खोल खोल कर बयान कर दी हैं ताकि तुम समझो ।

 सूरए अल हदीद 57:15

इस तरह आप देख सकते हैं कि कैसे नबी हज़रत ईसा अल मसीह ने ऐसे मोक़े पर अपनी तालीम को ख़तम किया ।

31 तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।
32 और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा।
33 उन्होंने उस को उत्तर दिया; कि हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए; फिर तू क्योंकर कहता है, कि तुम स्वतंत्र हो जाओगे?
34 यीशु ने उन को उत्तर दिया; मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है।
35 और दास सदा घर में नहीं रहता; पुत्र सदा रहता है।
36 सो यदि पुत्र तुम्हें स्वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्वतंत्र हो जाओगे।
37 मैं जानता हूं कि तुम इब्राहीम के वंश से हो; तौभी मेरा वचन तुम्हारे ह्रृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो।
38 मैं वही कहता हूं, जो अपने पिता के यहां देखा है; और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है।
39 उन्होंने उन को उत्तर दिया, कि हमारा पिता तो इब्राहीम है: यीशु ने उन से कहा; यदि तुम इब्राहीम के सन्तान होते, तो इब्राहीम के समान काम करते।
40 परन्तु अब तुम मुझ ऐसे मनुष्य को मार डालना चाहते हो, जिस ने तुम्हें वह सत्य वचन बताया जो परमेश्वर से सुना, यह तो इब्राहीम ने नहीं किया था।
41 तुम अपने पिता के समान काम करते हो: उन्होंने उस से कहा, हम व्यभिचार से नहीं जन्मे; हमारा एक पिता है अर्थात परमेश्वर।
42 यीशु ने उन से कहा; यदि परमेश्वर तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्योंकि मैं परमेश्वर में से निकल कर आया हूं; मैं आप से नहीं आया, परन्तु उसी ने मुझे भेजा।
43 तुम मेरी बात क्यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते।
44 तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है।
45 परन्तु मैं जो सच बोलता हूं, इसीलिये तुम मेरी प्रतीति नहीं करते।
46 तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? और यदि मैं सच बोलता हूं, तो तुम मेरी प्रतीति क्यों नहीं करते?
47 जो परमेश्वर से होता है, वह परमेश्वर की बातें सुनता है; और तुम इसलिये नहीं सुनते कि परमेश्वर की ओर से नहीं हो।
48 यह सुन यहूदियों ने उस से कहा; क्या हम ठीक नहीं कहते, कि तू सामरी है, और तुझ में दुष्टात्मा है?
49 यीशु ने उत्तर दिया, कि मुझ में दुष्टात्मा नहीं; परन्तु मैं अपने पिता का आदर करता हूं, और तुम मेरा निरादर करते हो।
50 परन्तु मैं अपनी प्रतिष्ठा नहीं चाहता, हां, एक तो है जो चाहता है, और न्याय करता है।
51 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि यदि कोई व्यक्ति मेरे वचन पर चलेगा, तो वह अनन्त काल तक मृत्यु को न देखेगा।
52 यहूदियों ने उस से कहा, कि अब हम ने जान लिया कि तुझ में दुष्टात्मा है: इब्राहीम मर गया, और भविष्यद्वक्ता भी मर गए हैं और तू कहता है, कि यदि कोई मेरे वचन पर चलेगा तो वह अनन्त काल तक मृत्यु का स्वाद न चखेगा।
53 हमारा पिता इब्राहीम तो मर गया, क्या तू उस से बड़ा है? और भविष्यद्वक्ता भी मर गए, तू अपने आप को क्या ठहराता है।
54 यीशु ने उत्तर दिया; यदि मैं आप अपनी महिमा करूं, तो मेरी महिमा कुछ नहीं, परन्तु मेरी महिमा करनेवाला मेरा पिता है, जिसे तुम कहते हो, कि वह हमारा परमेश्वर है।
55 और तुम ने तो उसे नहीं जाना: परन्तु मैं उसे जानता हूं; और यदि कहूं कि मैं उसे नहीं जानता, तो मैं तुम्हारी नाईं झूठा ठहरूंगा: परन्तु मैं उसे जानता हूं, और उसके वचन पर चलता हूं।
56 तुम्हारा पिता इब्राहीम मेरा दिन देखने की आशा से बहुत मगन था; और उस ने देखा, और आनन्द किया।
57 यहूदियों ने उस से कहा, अब तक तू पचास वर्ष का नहीं; फिर भी तू ने इब्राहीम को देखा है?
58 यीशु ने उन से कहा; मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि पहिले इसके कि इब्राहीम उत्पन्न हुआ मैं हूं।
59 तब उन्होंने उसे मारने के लिये पत्थर उठाए, परन्तु यीशु छिपकर मन्दिर से निकल गया॥

युहन्ना 8:31-59

वह ख़ास दिन : अल – क़ारीअह और अत – तकासुर और अल मसीह

सूरा अल – क़ारिअह (सूरा 101 – आफ़त) बयान करता है कि आने वाला इन्साफ़ का दिन ऐसा होगा :

वह खड़खड़ाने वाली क्या है और तुम को क्या मालूम कि वह खड़खड़ाने वाली क्या है । जिस दिन लोग (मैदाने हर्ष में) टिड्डियों की तरह फैले होंगे और पहाड़ धुनकी हुयी रूई के से हो जाएँगे तो जिसके (नेक आमालका ) के पल्ले भारी होंगे वह मन भाते ऐश में होंगे और जिनके आमाल के पल्ले हल्के होंगे तो उनका ठिकाना न रहा ।

सूरए अल क़ारिअह 101:2-9

सूरा अल क़ारिआ हम से कहता है कि क़ियामत के दिन जिन के नेक आमाल का पलडा भारी होगा उन्हीं के लिए दोज़ख़ की आग से बचने की उम्मीद की जा सकती है ।

मगर उनका क्या होगा जिन के नेक आमाल का पलडा हल्का होगा ?

  सूरा अत – तकासुर (सूरा 102 दुनया में रक़ाबत बढ़ती जाती है) हमको ख़बरदार करता है    

कुल व माल की बहुतायत ने तुम लोगों को ग़ाफि़ल रखा यहाँ तक कि तुम लोगों ने कब्रें देखी (मर गए)। देखो तुमको अनक़रीब ही मालुम हो जाएगा । फिर देखो तुम्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा । देखो अगर तुमको यक़ीनी तौर पर मालूम होता (तो हरगिज़ ग़ाफिल न होते) तुम लोग ज़रूर दोज़ख़ को देखोगे
फिर तुम लोग यक़ीनी देखना देखोगे फिर तुमसे नेअमतों के बारें ज़रूर बाज़ पुर्स की जाएगी।

सूरए अत तकासुर 102:1-8

सूरा अत – तकासुर हम से कहता है कि इन्साफ़ के दिन जहन्नुम की आग हमको धमकाती है जब हम सवालों के घेरे में होएंगे ।    

क्या हम उस दिन की तय्यारी कर सकते हैं जब हमारे नेक आमाल का पलडा हल्का होगा ?

नबी हज़रत ईसा अल मसीह ख़ास तोर से उनकी मदद के लिए आए जिन के नेक आमाल का पलडा सच मुच में उस दिन हल्का होगा । उन्हों ने इंजील शरीफ़ में कहा कि :

35 यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा।
36 परन्तु मैं ने तुम से कहा, कि तुम ने मुझे देख भी लिया है, तोभी विश्वास नहीं करते।
37 जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा।
38 क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, वरन अपने भेजने वाले की इच्छा पूरी करने के लिये स्वर्ग से उतरा हूं।
39 और मेरे भेजने वाले की इच्छा यह है कि जो कुछ उस ने मुझे दिया है, उस में से मैं कुछ न खोऊं परन्तु उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊं।
40 क्योंकि मेरे पिता की इच्छा यह है, कि जो कोई पुत्र को देखे, और उस पर विश्वास करे, वह अनन्त जीवन पाए; और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा।
41 सो यहूदी उस पर कुड़कुड़ाने लगे, इसलिये कि उस ने कहा था; कि जो रोटी स्वर्ग से उतरी, वह मैं हूं।
42 और उन्होंने कहा; क्या यह यूसुफ का पुत्र यीशु नहीं, जिस के माता पिता को हम जानते हैं? तो वह क्योंकर कहता है कि मैं स्वर्ग से उतरा हूं।
43 यीशु ने उन को उत्तर दिया, कि आपस में मत कुड़कुड़ाओ।
44 .कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिस ने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले; और मैं उस को अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा।
45 भविष्यद्वक्ताओं के लेखों में यह लिखा है, कि वे सब परमेश्वर की ओर से सिखाए हुए होंगे। जिस किसी ने पिता से सुना और सीखा है, वह मेरे पास आता है।
46 यह नहीं, कि किसी ने पिता को देखा परन्तु जो परमेश्वर की ओर से है, केवल उसी ने पिता को देखा है।
47 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसी का है।
48 जीवन की रोटी मैं हूं।
49 तुम्हारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया और मर गए।
50 यह वह रोटी है जो स्वर्ग से उतरती है ताकि मनुष्य उस में से खाए और न मरे।
51 जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है

। युहन्ना 6:35-51

नबी हज़रत ईसा अल मसीह ने दावा किया कि वह आसमान से नीचे आए और यह कि जो उन पर ईमान लाते हैं उन्हें हमेशा की ज़िन्दगी अता करते हैं । यहूदी लोग जो उनकी बातों को सुन रहे थे उन्हों ने उन से इस बात के लिए सबूत मांगे । नबी ने उनसे पहले के नबियों का हवाला पेश किया जो उनके आने और उनके इख्तियार की बाबत नबुवत किये थे । हम देख सकते हैं कि किस तरह मूसा की तौरात ने उन के आने की पेश बीनी की और हज़रत मूसा के बाद आने वाले नबियों ने भी । मगर इसका क्या मतलब है ‘जो उसपर ईमान लाये’? इसको हम यहाँ देखते हैं ।

नबी हज़रत ईसा अल मसीह ने भी बीमारों को शिफ़ा देने की , और कुदरत पर इख्तियार रखने की निशानियों के ज़रिये अपने शख्सी इख्तियार का इज़हार किया । उन्हों ने इस बात को अपनी तालीम के दौरान समझाया ।   

14 और जब पर्व के आधे दिन बीत गए; तो यीशु मन्दिर में जाकर उपदेश करने लगा।
15 तब यहूदियों ने अचम्भा करके कहा, कि इसे बिन पढ़े विद्या कैसे आ गई?
16 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, कि मेरा उपदेश मेरा नहीं, परन्तु मेरे भेजने वाले का है।
17 यदि कोई उस की इच्छा पर चलना चाहे, तो वह इस उपदेश के विषय में जान जाएगा कि वह परमेश्वर की ओर से है, या मैं अपनी ओर से कहता हूं।
18 जो अपनी ओर से कुछ कहता है, वह अपनी ही बड़ाई चाहता है; परन्तु जो अपने भेजने वाले की बड़ाई चाहता है वही सच्चा है, और उस में अधर्म नहीं।
19 क्या मूसा ने तुम्हें व्यवस्था नहीं दी? तौभी तुम में से काई व्यवस्था पर नहीं चलता। तुम क्यों मुझे मार डालना चाहते हो?
20 लोगों ने उत्तर दिया; कि तुझ में है; कौन तुझे मार डालना चाहता है?
21 यीशु ने उन को उत्तर दिया, कि मैं ने एक काम किया, और तुम सब अचम्भा करते हो।
22 इसी कारण मूसा ने तुम्हें खतने की आज्ञा दी है (यह नहीं कि वह मूसा की ओर से है परन्तु बाप-दादों से चली आई है), और तुम सब्त के दिन को मनुष्य का खतना करते हो।
23 जब सब्त के दिन मनुष्य का खतना किया जाता है ताकि मूसा की व्यवस्था की आज्ञा टल न जाए, तो तुम मुझ पर क्यों इसलिये क्रोध करते हो, कि मैं ने सब्त के दिन एक मनुष्य को पूरी रीति से चंगा किया।
24 मुंह देखकर न्याय न चुकाओ, परन्तु ठीक ठीक न्याय चुकाओ॥
25 तब कितने यरूशलेमी कहने लगे; क्या यह वह नहीं, जिस के मार डालने का प्रयत्न किया जा रहा है।
26 परन्तु देखो, वह तो खुल्लमखुल्ला बातें करता है और कोई उस से कुछ नहीं कहता; क्या सम्भव है कि सरदारों ने सच सच जान लिया है; कि यही मसीह है।
27 इस को तो हम जानते हैं, कि यह कहां का है; परन्तु मसीह जब आएगा, तो कोई न जानेगा कि वह कहां का है।
28 तब यीशु ने मन्दिर में उपदेश देते हुए पुकार के कहा, तुम मुझे जानते हो और यह भी जानते हो कि मैं कहां का हूं: मैं तो आप से नहीं आया परन्तु मेरा भेजनेवाला सच्चा है, उस को तुम नहीं जानते।
29 मैं उसे जानता हूं; क्योंकि मैं उस की ओर से हूं और उसी ने मुझे भेजा है।
30 इस पर उन्होंने उसे पकड़ना चाहा तौभी किसी ने उस पर हाथ न डाला, क्योंकि उसका समय अब तक न आया था।
31 और भीड़ में से बहुतेरों ने उस पर विश्वास किया, और कहने लगे, कि मसीह जब आएगा, तो क्या इस से अधिक आश्चर्यकर्म दिखाएगा जो इस ने दिखाए?
32 फरीसियों ने लोगों को उसके विषय में ये बातें चुपके चुपके करते सुना; और महायाजकों और फरीसियों ने उसके पकड़ने को सिपाही भेजे।
33 इस पर यीशु ने कहा, मैं थोड़ी देर तक और तुम्हारे साथ हूं; तब अपने भेजने वाले के पास चला जाऊंगा।
34 तुम मुझे ढूंढ़ोगे, परन्तु नहीं पाओगे और जहां मैं हूं, वहां तुम नहीं आ सकते।
35 यहूदियों ने आपस में कहा, यह कहां जाएगा, कि हम इसे न पाएंगे: क्या वह उन के पास जाएगा, जो यूनानियों में तित्तर बित्तर होकर रहते हैं, और यूनानियों को भी उपदेश देगा?
36 यह क्या बात है जो उस ने कही, कि तुम मुझे ढूंढ़ोगे, परन्तु न पाओगे: और जहां मैं हूं, वहां तुम नहीं आ सकते?
37 फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए।
38 जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके ह्रृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी।
39 उस ने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे; क्योंकि आत्मा अब तक न उतरा था; क्योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था।
40 तब भीड़ में से किसी किसी ने ये बातें सुन कर कहा, सचमुच यही वह भविष्यद्वक्ता है।
41 औरों ने कहा; यह मसीह है, परन्तु किसी ने कहा; क्यों? क्या मसीह गलील से आएगा?
42 क्या पवित्र शास्त्र में यह नहीं आया, कि मसीह दाऊद के वंश से और बैतलहम गांव से आएगा जहां दाऊद रहता था?
43 सो उसके कारण लोगों में फूट पड़ी।
44 उन में से कितने उसे पकड़ना चाहते थे, परन्तु किसी ने उस पर हाथ न डाला॥

युहन्ना 7:14-44

जिस जिंदगी के पानी के लिए उन्हों ने वायदा किया था वह रूहुल कुदुस है जो पेंतिकुस्त के दिन रसूलों पर नाज़िल हुआ था और अब हमें वह जिंदगी मुफ़्त में बख्शता है जो हमको इन्साफ़ के दिन की मौत से और जहन्नुम की आग से बचाएगा । इस के लिए हमें सिर्फ़ अपनी पियास को पहचानने की ज़रुरत है

वह ख़ास दिन : अत-तारिक़, अल -आदियात और अल मसीह

सूरा अत – तारिक़ (सूरा 86 – आने वाली रात) हमको आने वाले इन्साफ के दिन के लिए ख़बरदार करता है जब   

बेषक ख़ुदा उसके दोबारा (पैदा) करने पर ज़रूर कु़दरत रखता है । जिस दिन दिलों के भेद जाँचे जाएँगे।
तो (उस दिन) उसका न कुछ ज़ोर चलेगा और न कोई मददगार होगा।

सूरए अत तारिक़   86:8-10

सूरा अत – तारिक़ हमसे कहता है कि उस दिन अल्लाह हमारी पोशीदा बातों का और शर्मनाक ख़यालात और अमल की जांच करेगा और उस दिन उसके फ़ैसले की जांच से कोई भी शख्स रोकने में मदद नहीं कर सकता । इसी तरह सूरा अल – आदियात (सूरा 100 लानत भेजने वाला) उसी दिन का बयान करता है जब    

(ग़रज़ क़सम है) कि बेशक इन्सान अपने परवरदिगार का नाशुक्रा है और यक़ीनी ख़ुदा भी उससे वाकि़फ़ है और बेषक वह माल का सख़्त हरीस है तो क्या वह ये नहीं जानता कि जब मुर्दे क़ब्रों से निकाले जाएँगे और दिलों के भेद ज़ाहिर कर दिए जाएँगे बेशक उस दिन उनका परवरदिगार उनसे ख़ूब वाकि़फ़ होगा ।

सूरए अल आदियात 100:6-11

सूरा अल – आदियात ख़बरदार करता है कि उस दिन यहाँ तक कि हमारी शर्मनाक पोशीदा बातें जो हमारे सीनों में दबी हैं वह भी आशकारा हो जाएंगे जबकि अल्लाह तआला हमारे तमाम कामों से ख़ूब वाक़िफ है ।

हम उस दिन के आने के ख़याल को तरक कर सकते हैं , और सिर्फ़ यह उम्मीद कर सकते हैं यह हमारे लिए काम करता है , मगर सूरा अत – तारिक़ और सूरा अल – आदियात उस दिन की बाबत बहुत सफ़ाई से हमको ख़बरदार करते हैं ।   

क्या यह मुनासिब नहीं है कि हम इसके लिए तययार रहें ? मगर कैसे ?

नबी हज़रत ईसा अल मसीह उनके लिए आए जो उस दिन के लिए तययार रहते हैं । उन्हों ने इंजील शरीफ़ में इस तरह कहा है :

21 क्योंकि जैसा पिता मरे हुओं को उठाता और जिलाता है, वैसा ही पुत्र भी जिन्हें चाहता है उन्हें जिलाता है।
22 और पिता किसी का न्याय भी नहीं करता, परन्तु न्याय करने का सब काम पुत्र को सौंप दिया है।
23 इसलिये कि सब लोग जैसे पिता का आदर करते हैं वैसे ही पुत्र का भी आदर करें: जो पुत्र का आदर नहीं करता, वह पिता का जिस ने उसे भेजा है, आदर नहीं करता।
24 मैं तुम से सच सच कहता हूं, जो मेरा वचन सुनकर मेरे भेजने वाले की प्रतीति करता है, अनन्त जीवन उसका है, और उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती परन्तु वह मृत्यु से पार होकर जीवन में प्रवेश कर चुका है।
25 मैं तुम से सच सच कहता हूं, वह समय आता है, और अब है, जिस में मृतक परमेश्वर के पुत्र का शब्द सुनेंगे, और जो सुनेंगे वे जीएंगे।
26 क्योंकि जिस रीति से पिता अपने आप में जीवन रखता है, उसी रीति से उस ने पुत्र को भी यह अधिकार दिया है कि अपने आप में जीवन रखे।
27 वरन उसे न्याय करने का भी अधिकार दिया है, इसलिये कि वह मनुष्य का पुत्र है।

युहन्ना 5:21-27

नबी हज़रत ईसा अल मसीह बहुत बड़े इख्तियारात का दावा करते हैं – यहाँ तक कि इन्साफ़ के दिन की निगरानी करने की बाबत । इन दावों के लिए उन का इख्तियार तौरात के नबी हज़रत मूसा के ज़रिये साबित हुआ कि किसतरह उन्हों ने काएनात की छे दिमों तख्लीक़ से उन के इख्तियारात की बाबत नबुवत की फिर ज़बूर और आने वाले नबियों ने उनके आने की बाबत तफ़सील से नबुवत की जो इस बात को ज़ाहिर करता है कि उनका आसमान से आना अल्लाह के एक मनसूबे के तहत था । नबी के यह कहने का क्या मतलब है  कि “जो कोई मेरे कलाम को सुनता और जिसने मुझे भेजा उस पर ईमान लाए तो हमेश की जिंदगी उसकी है और वह कभी हलाक नहीं होगा” ? इसके लिए हम यहाँ देखते है

एक ख़ास दिन : अल – हुमज़ह और अल – मसीह

सूरा अल – हुमज़ह (सूरा 104 – बुह्तान बाँधने वाला) इन्साफ के दिन की बाबत हमको इस तरीक़े से ख़बरदार करता है :

हर ताना देने वाले चुग़लख़ोर की ख़राबी है जो माल को जमा करता है और गिन गिन कर रखता है वह समझता है कि उसका माल उसे हमेषा जि़न्दा बाक़ी रखेगा हरगिज़ नहीं वह तो ज़रूर हुतमा में डाला जाएगा और तुमको क्या मालूम हतमा क्या है वह ख़ुदा की भड़काई हुयी आग है जो (तलवे से लगी तो) दिलों तक चढ़ जाएगी ।

सूरए अल हुमज़ह 104:1-6

सूरा अल हुमज़ह कहता है कि अल्लाह की जानिब से ग़ज़ब की आग हमारा इंतज़ार कर रही है , ख़ास तोर से अगर हम ने लालच किया हो और दूसरों की बाबत बुरी बातें की हों ।  मगर उनके लिए जो लगातार उन सब के लिए खैराती है जो उस से मदद मांगते हैं , उन के लिए जिन्हों ने कभी अमीर आदमी की दौलत का लालच न किया हो , वह जो दूसरों की बाबत कभी भी बुरी बातें न की हों , वह जो पैसों के मामले में कभी किसी से बहस न किया हो शायद ऐसे लोगों के लिए एक उम्मीद है कि उनकी जान का कुछ नुक़सान नहीं होगा और उस दिन वह खुदा के ग़ज़ब के घेरे में नहीं होंगे ।

मगर हम बाक़ियों का क्या होगा ? 

नबी हज़रत ईसा अल मसीह ख़ास तोर से उनके लिए आए जो आने वाले उस ख़ुदा के ग़ज़ब से खौफ़ज़दा हैं जो उनपर आने वाली है जिस तरह से उन्हों ने इंजील शरीफ़ में कहा है ।

13 और कोई स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा, अर्थात मनुष्य का पुत्र जो स्वर्ग में है।
14 और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए।
15 ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनन्त जीवन पाए॥
16 क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।
17 परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।
18 जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहर चुका; इसलिये कि उस ने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।
19 और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उन के काम बुरे थे।
20 क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए।
21 परन्तु जो सच्चाई पर चलता है वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों, कि वह परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।   

युहन्ना 3:13-21  

नबी हज़रत ईसा अल मसीह ने अपने बड़े इख्तियार का दावा किया — यहाँ तक कि उन्हों ने कहा कि ‘वह आसमान से उतरे हैं’ । एक सामरी औरत के साथ बात चीत के दौरान उन्हों ने कुछ और बातें समझाईं (जिसकी तफ़सील यहाँ पर है) नबी ने खुद को ‘जिंदगी का पानी’ होने बतोर दावा किया ।    

10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।
11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?
12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिस ने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया?
13 यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा।
14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।

युहन्ना 4:10-14

इन दावों के लिए उन का इख्तियार तौरात के नबी हज़रत मूसा के ज़रिये साबित हुआ कि किसतरह उन्हों ने काएनात की छे दिमों की तख्लीक़ से उन के इख्तियारात की बाबत नबुवत की । फिर ज़बूर और आने वाले नबियों ने उनके आने की बाबत तफ़सील से नबुवत की जो इस बात को ज़ाहिर करता है कि उनका आसमान से आना अल्लाह के एक मनसूबे के तहत था । मगर नबी के कहने का क्या मतलब था कि ‘मुझे ऊंचे पर चढ़ाया जाना ज़रूरी है’ ताकि ‘जो उस पर ईमान लाए हमेशा की ज़िन्दगी उसकी होजाए’? इसको यहाँ पर समझाया गया है ।