आने वाले ख़ादिम की निशानी

हमारी पिछली तहरीर में हम ने देखा था कि नबी दानिएल पेशबीनी की थी कि मसीह लोगों के बीच मे से काट डाला जाएगा I हम ज़बूर के वसीले से सफ़र के आखिर में आते हैं मगर हमारे पास सीखने के लिए कुछ और है I यसायाह नबी (इस को आप ज़ेल की वक़्त की लकीर में देखें जिस ने नबुवत की थी I

ज़बूर में हज़रत यसायाह (अलैहिस्सलाम) और उसके ज़माने के दीगर नबियों के साथ वक़्त की लकीर

आने वाले मसीह की बाबत एक शाख़ का इस्तेमाल करते हुए I मगर उस ने एक आने वाले शख्स की बाबत यह भी लिखा कि वह एक ख़ादिम कहलाएगा I उस ने आने वाले ‘ख़ादिम’ की बाबत एक लम्बी इबारत लिखी I यह ‘ख़ादिम’ कौन था ? वह क्या करने जा रहा था हम इबारत में तफ़सील के साथ देखते हैं I मैं इसको ज़ेल में सच मुच में दोबारा से समझाने के लिए कुछ गलतियों को जोड़ते हुए पेश करता हूँ I

आने वाले ख़ादिम की बाबत यसायाह नबी पेश बीनी करता है I उसकी मुकम्मल इबारत (यसायाह 52:13 – 53:12)

देख, मेरा नौकर बुद्धिमानी से काम करेगा;
उसे उठाया जाएगा और ऊपर उठाया जाएगा और अत्यधिक ऊंचा किया जाएगा।
बस ऐसे ही कई लोग थे, जो उस पर खुश थे-
उनकी उपस्थिति किसी भी इंसान से परे थी
और उनका रूप मानवीय समानता से परे था-
इसलिए वह कई राष्ट्रों को छिड़क देगा,
और राजा उसके कारण अपना मुंह बंद कर लेंगे।
जो उन्हें नहीं बताया गया, उसके लिए वे देखेंगे,
और जो उन्होंने नहीं सुना है, वे समझेंगे।

यसायाह 52:13-15

हम जानते हैं कि यह ख़ादिम बनी इंसान का आदमी होगा क्यूंकी यसायाह उसको सेगा ए मुज़ककर ‘वह’, ‘उसे’, ‘उसके’ बतोर हवाला देता है I जब हारून (अलैहिस्सलाम) बनी इसराईल के लिए क़ुरबानी देते थे तो उस जानवर के खून को लोगों पर छिड़कते थे I तब जाकर उन के गुनाह दूर होते थे I और फिर वह गुनाह उन के खिलाफ़ हिसाब में नहीं लाया जाता था I जब वह कहता है कि वह ख़ादिम ‘छिड़केगा’I नबी यसायाह का मतलब यह है कि इसी तरह यह खादिम लोगों को उन के गुनाहों के सबब से छिड़केगा जिस तरह से हारून (अलैहिस्सलाम) ने बनी इसराईल के लिए क़ुरबानी पेश करते वक़्त किया था I  

मगर ख़ादिम कई एक क़ौमों पर छिड़केगा I इस का मतलब यह है कि ख़ादिम सिर्फ यहूदियों के नहीं आरहा था I यह हम को हज़रत इब्राहीम के लिए किए गए वायदे को याद दिलाता है जब अल्लाह ने (निशानी 1 और निशानी 3) में कहा था कि तमाम क़ौमें उस के वसीले से बरकत पाएँगी I मगर उसके छिड़कने के ज़रिये से उस का मज़ाहिरा और ख़ादिम की शक्ल बिगड़ जाती है I हालांकि यह साफ़ नहीं है कि ख़ादिम इस तरह से अपनी सूरत बिगाड़ने के लिए क्या करेगा मगर एक दिन क़ौमें समझ जाएंगी I

53 जिसने हमारे संदेश पर विश्वास किया है
और यहोवा की भुजा किसके पास है?
2 वह [सेवक] उसके सामने बड़ा हो गया [यहोवा] एक निविदा की तरह,
और जड़ की तरह सूखी जमीन से।
हमारे पास उसे आकर्षित करने के लिए उसके पास कोई सुंदरता या ऐश्वर्य नहीं था,
उसकी उपस्थिति में कुछ भी नहीं है कि हमें उसकी इच्छा करनी चाहिए।
3 वह मानवजाति द्वारा तिरस्कृत और खारिज किया गया,
दुख का आदमी, और दर्द से परिचित।
जैसे कोई जिससे लोग अपना मुंह छिपाते हैं
वह तिरस्कृत था, और हमने उसे कम सम्मान में रखा।

यसायाह 53 :1-3

कुछ वजह के होते हुए हालांकि ख़ादिम बहुत से क़ौमों को छिड़केगा मगर वह ‘तहक़ीर’ किया जाएगा और ‘तरक’ किया जाएगा I बहुत ज़ियादा ‘दुखों’ के साथ वह ‘रंज का आशना’ होगा I

Surely he took up our pain
and bore our suffering,

yet we considered him punished by God,
stricken by him, and afflicted.
But he was pierced for our transgressions,
he was crushed for our iniquities;
the punishment that brought us peace was on him,
and by his wounds we are healed.

यसायाह 53:4-5

ख़ादिम दुखों को उठालेगा I यह ख़ादिम छेदा भी जाएगा और सज़ा बतोर कुचला भी जाएगा I और यह उसकी सज़ा हमारे लिए (सब क़ौमों के लिए) तसल्ली लेकर आएगा I और हमें शिफ़ा इनायत करेगा I

We all, like sheep, have gone astray,
each of us has turned to our own way;
and the Lord has laid on him
the iniquity of us all.

यसायाह 53:6

हम ने अपनी प्यासे की निशानी में देखा कि किस तरह अल्लाह की तरफ़ मुतवज्जा होने के बदले हम अपने ख़ुद के टूटे कुवों की तरफ़ जाते थे कि अपनी प्यास बुझाएँ I हम भटक गए थे I और हम सब ने अपनी राह ली यह हमारा गुनाह (= बदकारी) है I

7 वह उत्पीड़ित और पीड़ित था,
फिर भी उसने अपना मुँह नहीं खोला;
वह कत्ल के लिए एक मेमने की तरह था,
और उसके शीशों के सामने भेड़ के रूप में चुप है,
इसलिए उसने अपना मुँह नहीं खोला

यसायाह 53:7

जबकि नबी हाबील, नूह, इब्राहीम, मूसा और हारून (अलैहिस्सलाम)ने बररों को लेकर क़ुरबानी पेश किए थे I मगर यहाँ ख़ादिम ख़ुद ही ज़बह किया जाएगा I मगर वह मुखालफ़त नहीं करेगा  और न वह अपना मुंह खोलेगा I

8 अत्याचार कर के और दोष लगाकर वे उसे ले गए; उस समय के लोगों में से किस ने इस पर ध्यान दिया कि वह जीवतों के बीच में से उठा लिया गया? मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी।

यसायाह 53:8

यह जो ख़ादिम है वह अपनी ज़मीन से काट डाला जाएगा I क्या यह वही बात है जिसे दानिएल नबी बयान करता है कि मसीहा अपने लोगों में से काट डाला जाएगा’? जी हाँ यहाँ भी इन्हीं अलफ़ाज़ का इस्तेमाल किया गया है ! यहाँ इस का मतलब यह है कि उसको जहां वह रहता है वहाँ से काट डाला जाएगा जब तक वह मर न जाए I

9 और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उसने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी॥

यसायाह 53:9

अगर उसका मरना तय था तो उसके लिए एक क़बर तयार किया जाना था I उसको एक बदकार बतोर मौत की सज़ा दी गई ई I हालांकि उसमें कोई मकर की बात नहीं थी न उसके मुंह से कोई छल की बात निकली I

10 तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा; उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी।

सायाह 53:10

यह तमाम ज़ालिमाना मौत कोई शादीद हादसा या बद क़िसमती नहीं थी I यह ख़ास ख़ुदावंद की पाक मरज़ी थी कि उस को कुचले मगर क्यूं ? जिस तरह हारून की क़ुरबानी में देखा गया था कि गुनाह की क़ुरबानी जो किसी शख्स के गुनाह के इवज़ मे दी जाती थी तो उसको बे ऐब होना ज़रूरी था I मगर यह ख़ादिम ख़ुद अपनी क़ुरबानी पेश करेगा तो वह किसके गुनाह के लिए कुरबानी पेश करेगा ? इसपर गौर करते हुए कि उस का खून कई एक क़ौमों के लिए छिड़का जाएगा इस का मतलब यह है कि वह दूनया के तमाम लोगों के गुनाह के लिए जिस तरह ऊपर ज़िकर किया गया है छिड़का जाएगा I

11 वह अपने प्राणों का दु:ख उठा कर उसे देखेगा और तृप्त होगा; अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा; और उनके अधर्म के कामों का बोझ आप उठा लेगा।

यसायाह 53:11

हालांकि इस ख़ादिम की नबुवत यहाँ डरावना है यह आवाज़ बदलती है यानी कि ख़ुश उम्मीदी मे बदल जाती है यहाँ तक कि फ़ातिहाना भी है I (इस शादीद दुख के बाद ख़ादिम ‘ज़िंदों की ज़मीन पर से’ काट डाला जाएगा I और ‘एक क़बर’ का इंतिज़ाम होगा) और यह ख़ादिम ‘जिंदगी का नूर’ देखेगा , मतलब यह कि वह जिंदगी में वापस आएगा! और इस तरह करते हुए वह ‘बहुतों’ का ‘इनसाफ़’ करेगा I

‘इंसाफ़ करना’ बिलकुल वैसा ही है जैसे किसी को ‘रास्तबाज़’  ठहराना I याद रखें कि मूसा की शरीअत में किसी को रास्तबाज़ ठहराने का मतलब था कि एक शख्स को हमेशा तमाम अहकाम की पाबंदी करनी पड़ती थी जिस तरह हम ने निशानी 2 में हज़रत इब्राहीम की बाबत देखा कि हज़रत इब्राहीम ख़ुदा पर लाए और वह उन के लिए रास्तबाज़ी ठहराया गया I उनको यूंही रास्तबाज़ी  अता की गई I क्यूंकी उन्हों ने ख़ुदा पर पूरा भरोसा किया था I बिलकुल इसी तरह यह ख़ादिम बहुतों को रास्तबाज़ ठहराएगा I क्या यह रास्तबाज़ी वही नहीं है जो हम चाहते थे ? और जिसकी हमको ज़रूरत थी ?

12 इस कारण मैं उसे महान लोगों के संग भाग दूंगा, और, वह सामर्थियों के संग लूट बांट लेगा; क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया; तौभी उसने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और, अपराधियों के लिये बिनती करता है॥

यसायाह 53:12

यह ख़ादिम ‘बड़े लोगों’ (दौलतमंदों) में गिना जाएगा क्यूंकि उसने ख़ुद को रज़ाकाराना तोर से पेश किया है यानी अपनी ज़िंदगी को (‘उंडेला’) है मतलब यह कि ज़िंदगी से मौत की तरफ़ I और इस बतोर मरा जैसे कि एक ‘ख़ताकार’ यानी कि एक ‘गुनाहगार’ मरता है I क्यूंकि इस ख़ादिम ने ‘ख़ताकारों’ के लिए ‘शिफ़ाअत’ की है I और आप जानते हैं कि शिफ़ाअत करने वाला या दरमियानी दो जमाअत के बीच एक बीचोया बनता है I यहाँ दो जमाअत का मतलब एक तरफ़ दुनिया के बहुत से लोग और दूसरी तरफ़ ख़ुदावंद ख़ुदा I यह ख़ादिम ख़ुद अल्लाह कि जानिब से इस क़ाबिल है कि गुनहगारों कि शिफ़ाअत करे या उन की हिमायत करे !

यह ख़ादिम कौन है ? यह सारी बातें कैसे वाक़े होंगी? क्या वह बहुतों की बाइस कई एक अक़वाम की ख़ुद अल्लाह से शिफ़ाअत करेगा ? हम आख़री नबुवत पर गौर करते हुए ज़बूर को ख़त्म करते हैं और इंजील को खोलते हैं I  

मसीह: बादशाही करने … या काट डाले जाने आ रहा है ?

हमारी पिछली तहरीर में हम ने देखा है कि किस तरह नबियों ने पेशीन गोई करते हुए मसीह के नाम की बाबत निशानियाँ दीं I (पेशीन गोई के मुताबिक़ मसीह का नाम येसू था) जबकि नबियों ने उसके आमद की वक़्त की बाबत भी पेशीन गोई की I आप देखें कि यह सब हैरत अंगेज़ खास नबुवतें हैं जिन्हें लिख दिया गया था I और येसू (ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) के आने के सदियों साल पहले दस्तावेज़ों मे महफूज़ कर दिया गया था I उसकी पेशीन गोई सही तरीक़े से की गई थी I इन नबुवतों को लिख दिया था और आज भी वह दस्तावेज़ यहूदियों के नुस्ख्जात में पाई जाती हैं ! इंजील शरीफ़ या कुरान शरीफ़ में नहीं I तो फिर एक सवाल यह उठता है कि क्यूँ यहूदी लोगों ने उस ज़माने में या आज भी (अक्सर उन में से) येसू को मसीहा बतोर क़बूल नहीं किया ? यह बात उनकी किताब में लिखी हुई है I

इस सवाल पर गौर करने से पहले इस तारीक़े से सवाल पूछते हुए मैं साफ कर दें चाहता हूँ जिस तरह मैं ने किया वह सही नहीं था बहुत से यहूदी लोग येसू (ईसा अलैहिस्सलाम) कि जिंदगी में उसको मसीह बतोर क़बूल नहीं किया था I मगर आज बहुत से यहूदी ऐसे भी हैं जो येसू को मसीह बतोर क़बूल करते हैं पर यह हक़ीक़त बाक़ी रह जाती है कि एक क़ौम बतोर उनहों ने येसू को मसीह बतोर क़बूल नहीं किया I क्यूँ ?  

यहूदी लोग ईसा (अलैहिस्सलाम) को मसीह बतोर क़बूल क्यूं नहीं किया ?

मत्ती की इंजील में ईसा (अलैहिस्सलाम) और यहूदी मज़हबी उस्तादों (जिन्हें फ़रीसी और सदूक़ी कहा जाता है उन के बीच आमना सामना होने की बाबत कलमबंद करती है —(उनकी अदाकारी मौजूदा ज़माने के इमामों , पेश इमामों जैसा है) I उनहों ने चालाकी से येसू से सवाल पूछा था तो यहाँ उस का जवाब इस तरह से पेश है :

  29 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, कि तुम पवित्र शास्त्र और परमेश्वर की सामर्थ नहीं जानते; इस कारण भूल में पड़ गए हो।

मत्ती 22:29

यह अद्ल बदली हमारे लिए एक खास सिलसिला ए खयालात को पेश करता है I हालांकि यह लोग यहूदी रहनुमा थे जो लोगों को तौरेत ज़बूर की तालीम देते थे I इस के बावजूद भी येसू ने उन पर इल्ज़ाम लगाते हुए कहा कि वह लोग न तो नविशतों को जानते थे और न तो खुदा की कुदरत को। इस से येसू का क्या मतलब था ? यह कैसे हो सकता है कि किताब ए मुक़द्दस के माहिर लोग कलाम से ना वाक़िफ़ हों ?

यहूदी लोग तमाम नवीशतों को नहीं जानते थे

अगर आप इस का मुताला करेंगे कि रहनुमाओं ने क्या बात काही थी और तौरात और ज़बूर में से किस चीज़ का हवाला दिया था तो आप गौर करेंगे कि वह नविशतों के कुछ ही नबुवतों से वाक़िफ़कार — दीगर और नबुवतों से नहीं I सो हाँ ने देखा मिसाल के तोर पर कुंवारी के बेटे की निशानी में कि शरीअत के माहिर इस नबुवत को जानते थे मसीह बैथलहम से आएगा आई यहाँ वह आयात है जो शरीअत के माहिरों ने हेरोदेस बादशाह को ईसा की पैदाइश की बाबत बताया जहां मसीह को पैदा होना था I

     

“लेकिन तुम, बेतलेहेम एप्रथा,

यद्यपि तुम यहूदा के कुलों में छोटे हो,

तुम में से मेरे लिए आएगा

जो इस्राएल पर शासक होगा,

जिनकी उत्पत्ति पुराने से है,

प्राचीन काल से। ”

मीका 5:2

आप देखेंगे कि वह इस आयत को जानते थे जो ख्रीस्तुस का हवाला दिया गया था (= मसीह —यहाँ देखें कि मौसूम शुदा लफ्ज क्यूं यकसां है) ? और यह आयात उसको ‘बादशाह’ बतोर हवाला देता है I दूसरी इबारत जो यहूदी शरीअत के माहिरों की जानी पहचानी थी , वह थी ज़बूर का दूसरा बाब जो दाऊद (अलैहिस्सलाम) के ज़रिये इल्हाम किया गया था जिस मे सब से पहले लक़ब का तआरुफ़ किया गया था मसीह की बाबत कि मसीह सिययोन के तख्त पर बादशाह बतोर होगा (= येरूशलेम या अल कुदुस) जिस त्राह हम इबारत में देखते हैं I

“ख़ुदावंद और उसके मसीह के खिलाफ़ —-वह जो आसमान पर तख्त निशीन है हँसेगा   ,ख़ुदावंद उनका मज़हका उड़ाएगा —– यह कहते हुए कि “मैं तो अपने बादशाह को अपने कोह ए मुक़द्दस सिययून पर बैठा चुका हूँ

ज़बूर 2: 2,4,6

यहूदी उस्ताद लोग ज़बूर ए शरीफ़ के ज़ेल की इबारत से भी अच्छी तरह से वाक़िफ़ थे I

“अपने बनदे दाऊद की खातिर अपने मसीह की दुआ ना मंज़ूर न कर I ख़ुदावंद ने सच्चाई  के सच्चाई के साथ दाऊद से कसम खाई है और वह उस से फिरने का नहीं कि मैं तेरी औलाद में से किसी को तेरे तख्त पर बिठाऊंगा“

ज़बूर 132: 10-18

यहूदी लोग खुदा की क़ुदरत को अपने दलाइल को महदूद करने के ज़रिये नहीं जानते थे 

सो यह लोग कुछ इबारतों को जानते थे उन में से सब के सब एक ही रुख की तरफ़ इशारा करते हैं —- की मसीह कुदरत के साथ बादशाही करेगा तारीख़ बताती है कि ईसा (अलैहिस्सलाम) के ज़माने में इसराईल के मुल्क में रोमी सल्तनत के मातहत में रहते थे ! (यहाँ यहूदियों की तारीख़ को देखें) ऐसे वक़्त में डबल्यूएच सिर्फ़ एक ही तरह के मसीह को चाहते थे I डबल्यूएच ऐसे मसीह के आरज़ूमंद थे जो इक़तिदार में आए जो नफ़रती रोमियों को हटा दे या उन्हें धकेल दे और ऐसी ज़बरदस्त बादशाही क़ायम करे जिस तरह से बादशाह दाऊद ने 1000 पहले अपनी बादशाही क़ायम की थी I (यहाँ आप बादशाह दाऊद की गोशा ए गुमनामी को देखें) I यहूदी लोग अपने खुद की ख़्वाहिश के मुताबिक़ मसीह की आरज़ू करते थे वैसा नहीं जो अल्लाह के मांससूबे के मुताबिक़ उन की तमाम नवीशतों को पढ़ने के जरिये जैसा उन के लिए सोच गया था I

फिर यहूदियों ने अपने ख्याल के मुताबिक़ अपने इंसानी सबब का इस्तेमाल किया कि खुदा कि कुदरत को महदूद करे I नबुवत में यह कहा गया है कि मसीह येरूशलेम में बादशाही करेगा I मगर उसने ऐसा नहीं किया I इसलिए यहूदियों ने सोचा कि यह हरगिज़ मसीह नहीं हो सकता ! यह एक सादा दलील था I उनहों ने येसु की तौसीक़ करने के जरिये कि वह उनकी नसल और इंसानी दलील से है खुदा की कुदरत को महदूद किया I

कसीर तादाद में यहूदी आज तक ज़बूर की नबुवत ना वाक़िफ़ हैं I हालांकि यह बात उनकी किताब में लिखी हुई है जिसे तनख कहा जाता है (= तौरात +ज़बूर) मगरवह अगर कुछ पढ़ते हैं तो सिर्फ़ तौरात को ही पढ़ते हैं I वह खुदा के अहकाम को जानने से गुरेज़ करते और नज़र अंदाज़ करते हैं I इन बातों के लिए वह सबब ज़ाहिर करते मसीह को बादशाही करनी ज़रूरी थी मगर ईसा ने बादशाही नहीं की I इसलिए वह दावा पेश करते हैं कि वह मसीह नहीं हो सकता था I कहानी का आखिर ! यह है कि आगे को सवालात पर तहक़ीक़ात या बहस करने की ज़रूरत नहीं है I क्यूंकी इस मामले पर अक्सर यहूदियों ने आज तक गौर नहीं किया है I

मसीह ‘काट डाले जाने के लिए’ आ रहा है

पर अगर उनहों ने नवीशतों की जांच नहीं की तो वह यह सीखेंगे कि अब हम सीखने पर हैं I पिछली तहरीर में हम ने देखा कि नबी दानीएल (अलैहिस्सलाम) ने मसीह के आने के वक़्त की सही सही पेशीन गोई की थी मगर अब गौर करें कि उस ने मसीह की बाबत और क्या कुछ कहा यानी कि मसीहा (= मसह किया हुआ = मसीह = ख्रीस्तुस) I

  25 सो यह जान और समझ ले, कि यरूशलेम के फिर बसाने की आज्ञा के निकलने से ले कर अभिषिक्त प्रधान के समय तक सात सप्ताह बीतेंगे। फिर बासठ सप्ताहों के बीतने पर चौक और खाई समेत वह नगर कष्ट के समय में फिर बसाया जाएगा।
26 और उन बासठ सप्ताहों के बीतने पर अभिषिक्त पुरूष काटा जाएगा: और उसके हाथ कुछ न लगेगा; और आने वाले प्रधान की प्रजा नगर और पवित्रस्थान को नाश तो करेगी। परन्तु उस प्रधान का अन्त ऐसा होगा जैसा बाढ़ से होता है; तौभी उसके अन्त तक लड़ाई होती रहेगी; क्योंकि उसका उजड़ जाना निश्चय ठाना गया है।

दानिएल 9:25-26

गौर करें कि दानिएल नबी क्या कहता है कि मसीह को क्या होने वाला है जब वह दूनया में पहुंचता है I क्या दानिएल नबी पेशीन गोई करता है कि मसीह बादशाही करेगा ? याने कि वह अपने बाप दादा के तख्त पर फ़ायज़ होगा और ऊंचल चल रही रोमी सल्तनत को बर्बाद करदेगा? नहीं ! दरअसल यह नबुवत साफ़ कहती है ममसूह क़त्ल किया जाएगा और उसका कुछ नहीं रहेगा फिर यह नबुवात कहती है कि बाहर के लोग पाक मुक़ाम (यहूदियों के मंदिर) को और शहर (येरूशलेम) को बर्बाद करेंगे I फिर वह वीरान और उजाड़ छोड़ दिया जाएगा I जब आप इसराएल की तारीख़ पर नज़र करते हैं तो यह हक़ीक़त में हो चुका है I येसू के आसमान पर सऊद फरमाने के 40 साल बाद रोमी लोग आए और उनहों ने मंदिर को जला डाला , येरूशलेम को बर्बाद किया और यहूदियों को आलमगीर जिलावतनी में भेज दिया ताकि उनको शहरबदर किए जाएँ और यह वाक़िआत 70 ईस्वी में पेश आया जिस्त्ढ़ दानिएल नबी ने 537 कबल मसीह में नबुवत और इसे पहले भी जिस तरह से हज़रत मूसा ने लानत की पेशबीनी की थी I

सो दानिएल नबी ने पेशीन गोई की कि मसीह अपनी पहली आमद में बादशाही नहीं करने जारहा था ! बल्कि इस के मुक़ाबले में वह ‘काट डाला जाएगा और उस का कुछ नहीं रहेगा’I यहूदी रहनुमाओं इस मौक़े को खो दिया क्यूंकि वह ‘नविशतों को नहीं जानते थे’ I मगर यह बात दूसरा मसला खड़ा करता है I दानिएल की नबुवत में जैसे कहा गया है की वह (काट डाला जाएगा) और फिर दूसरी नबुवत कि (वह बादशाही करेगा) क्या यह दोनों के बीच टकराव नहीं है ? यह महज़ ऐसी बात है कि अगर तमाम नबियों के पास अल्लाह का पैगाम है तो उन सारों को सच होना चाहिए था जिस तरह से तौरेत में मूसा के तमाम पेश गोई पूरी हुई थी I सोचने लायक बात यह है कि यह किस तरह मुमकिन है कि मसीह काट डाला जाएगा औरबादशाही करेगा ? ऐसा लगता था कि इंसानी उसूल ने खुदा की क़ुदरत को धोका देने से बेहतर साबित किया I

‘बादशाही करने’ और ‘काट डाले जाने’ के दरमियान तखालुफ़ को समझाया गया है

 मगर हाँ उन के उसूल ख़ुदा की कुदरत से ज़ियादा ताक़तवर नहीं थे वह ऐसे ही थे जैसे हम इंसान होते हैं और वह उस खुदबीनी को नहीं जानते थे जिसे वह बना रहे थे I उनहों ने गुमान करलिया था की मसीह का आना पूरे ज़माने सिर्फ़ एक ही मर्तबा होगा I अगर यह मामला था तो इन दो वाक़ियात यानी ‘बादशाही करने’ और ‘काट डाले जाने’ के बीच तखालुफ़ का होना ज़रूरी था I सो उनहों ने अपने द्माग में उनके उसूल के सबब से ख़ुदा की कुदरत को महदूद कर दिया I मगर आखिर में उन का उसूल गलत साबित हुआ I यानी मसीह का आना दो बार वाजिब हुआ  उसकी पहली आमद में वह अपने काट डाले जाने को पूरा करेगा और उसका कुछ नहीं होगा और   यह जो बादशाही करने की नबुवत है वह सिर्फ़ उसकी दूसरी आमद पर ही पूरी होगी I उस ज़ाहिरी तनासूब से “तखालुफ़”को आसानी से यहवील किया जा सकता है I

क्या हम भी तमाम नविशतों से चूक जाते और ख़ुदा की कुदरत को महदूद करते हैं ?

मगर इस के क्या मायने हुए कि मसीह काट डाला जाएगा और उसका कुछ न रहेगा ? हम इस सवाल पर बहुत बहुत जल्द गौर करेंगे I मगर अभी के लिए यह जियादा फ़ाइदामंद होगा कि आप उन बातों पर मुनअकीस करें कि किस तरह से यहूदी लोग निशानियों से चूक गए I हम ने पहले ही देखा था कि दो असबाब हैं कि यहूदियों ने मसीह की निशानियों को क्यूं नहीं देखा I एक तीसरा निशान भी यह होगा कि जो हमारे लिए यूहनना की (इंजील) में कलमबंद किया गया है एक दूसरे अद्ल बदली के बीच यानी येसू (ईसा अलैहिस्सलाम) और मज़हबी रहनुमाओं के बीच जहां वह उन से कहता है :

 39 तुम पवित्र शास्त्र में ढूंढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उस में अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है, और यह वही है, जो मेरी गवाही देता है।
40 फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते।
41 मैं मनुष्यों से आदर नहीं चाहता।
42 परन्तु मैं तुम्हें जानता हूं, कि तुम में परमेश्वर का प्रेम नहीं।
43 मैं अपने पिता के नाम से आया हूं, और तुम मुझे ग्रहण नहीं करते; यदि कोई और अपने ही नाम से आए, तो उसे ग्रहण कर लोगे।
44 तुम जो एक दूसरे से आदर चाहते हो और वह आदर जो अद्वैत परमेश्वर की ओर से है, नहीं चाहते, किस प्रकार विश्वास कर सकते हो?

यूहना 5:39-40,44

दूसरे लफ़ज़ों में तीसरा सबब यह है कि यहूदी लोग मसीह की निशानियों से चूक गए क्यूंकि उनहों ने यूं ही सादे तोर से उन्हें कबूल करने से इंकार कर दिया क्यूंकी वह लोग ख़ुदा की रसाई (पहुँच) से बढ़कर एक दूसरे की पहुँच में ज़ियादा दिलचस्पी रखते रखते थे !

आप देखें कि यहूदी लोग ज़ियादा गुमराह नहीं है और दूसरे लोगों से ज़ियादा गलत रास्ते पर नहीं हैं I इस के बावजूद भी यह हमारे लिए आसान है कि इंसाफ के मक़ाम पर बैठें यह जताने के लिए कि वह येसू की निशानियाँ देखने से चूक गए I मगर उन पर अपनी उंगली उठाने से पहले शायद हमें खुद को देखना पड़ेगा I क्या हम ईमानदारी से कह सकते हैं कि हम कलाम से वाक़िफ़ हैं ? क्या हम यहूदियों की तरह नहीं बनना चाहते हैं ? किसी तरह कलाम की तरफ़ धियान दें I जो हम जानते हैं या जिस से आपको आराम सुकून मिलता हो और जिसे समझने में आसानी हो क्या ऐसा नहीं होता कि हम अक्सर अपने दमाग में अपने इनसानी उसूल नाफ़िज़ करते हैं ताकि खुदा की कुदरत को महदूद करें I या फिर कभी कभी कलाम को क़बूल करने से इंकार करते हैं क्यूंकि हम अकसर दूसरे लोगों की बाबत फिकर करते हैं कि वह क्या सोचते हैं बजाए इसके कि खुदा ने क्या कहा है I

जिस बतोर यहूदी लोग मसीह के निशानत से चूक गए यह हमारे लिए एक तंबीह है I कलाम की जिन इबारतों से हम वाक़िफ़ हैं उन्हीं तक हम खुद को महदूद रखने की हिम्मत न करें और ऐसा हम करने की कोशिश करते हैं I और हम अपने इनसानी उसूल के ज़रीए खुदा की कुदरत को महदूद करने की हिम्मत न करें I और कलाम जो हमें सिखाता है उसको क़बूल करने से इंकार करने की हिम्मत न करें I अब हम आने वाले एक खास शखसियत को समझने के लिए इन तहरीरों का मुताला जारी रखें वह शख़्सियत हैख़ादिम ।                                                                        

आने वाला मसीह सात की निशानियाँ

अक्सर औक़ात मे कुरान शरीफ़ में हम देखते हैं कि अल्लाह सात के दौरे का इस्तेमाल करता है मिसाल के तोर पर सूरा अल – तलाक़ (सूरा 65 तलाक़) यह बयान करता है

 আল্লাহ সপ্তাকাশ সৃষ্টি করেছেন এবং পৃথিবীও সেই পরিমাণে, এসবের মধ্যে তাঁর আদেশ অবতীর্ণ হয়, যাতে তোমরা জানতে পার যে, আল্লাহ সর্বশক্তিমান এবং সবকিছু তাঁর গোচরীভূত।

सूरा अल – तलाक़ 65:12

और सूरा अल – नबा (सूरा 78 खबरें) कहता है

और तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत

आसमान) बनाए(सूरा अल – नबा 78:12

इस से हम को हैरत नहीं नहीं होनी चाहिए कि आने वाले मसीह का वक़्त भी 7 अदद में दिया गया है जिस तरह हम ज़ेल में देखते हैं I

जिस तरह हम ने नबियों की तहक़ीक़ात की है हम सीखते जा रहे हैं कि हालांकि वह कभी कभार सदियों से एक दूसरे से जुदा थे I इस के बावजूद भी उन की नबुवतें आने वाले मसीहा (= ख्रीस्तुस) की बाबत एक मरकज़ी मौज़ू को बढ़ावा दिया I हम ने देखा कि नबी यसायाह अलैहिस्सलाम ने एक तने से शाख़ की निशानी का इस्तेमाल किया I और फिर ज़क्रियाह (अलैहिस्सलाम) ने नबुवत की कि इस शाख़ का इबरानी नाम यशौआ होगा जो कि यूनानी में उस का नाम इयूसोस था I अंग्रेज़ी मे जीसस और अरबी में ईसा I जी हां यही नाम मसीह का है (= ख्रीस्तुस) I जिस तरह से 500 साल पहले ईसा अल मसीह बतोर नबुवत की जा चुकी थी इस नबुवत को यहूदियों की किताब में लिखी गई है (इंजील में नहीं) I यहूदियों की इस किताब को आज भी पढ़ी जाती है और यहूदियों के ज़रिये क़बूल की जाती है I मगर जिस ज़बान में यह लिखा गया है इस के मायने आप समझ नहीं सकते I

दानिएल नबी

अब हम दानिएल नबी तक पहुँच चुके हैं I वह बाबुल में जिलावतनी में था I बाबुल के एक ज़बरदस्त हाकिम और फ़ारस की हुकूमत के मातहत था I मगर वह एक नबी था I जेल की वक़्त की लकीर बताती है कि दानिएल नबियों की तारीख़ी वक़्त की लकीर में कहाँ रहता था

 The Prophets Daniel & Nehemiah shown in timeline with other prophets of Zabur

दो नबी दानिएल और यरम्याह दीगर ज़बूर के अँबिया के साथ तारीख़ी वक़्त की लकीर में दिखाए गए  हैं I  

उस की अपनी किताब में नबी दानिएल (अलैहिस्सलाम) जिबराईल फ़रिश्ते से पैगाम हासिल करता है I दानिएल और (येसू की माँ) मरयम यही दो हैं जिन्हों ने पूरी बाइबल (अल किताब)  में जिबराईल फ़रिश्ते के ज़रिये पैगाम हासिल किए थे I इस लिए हम को इस पैगाम पर धियान देने की ज़रूरत है I

 21 तब वह पुरूष जिब्राएल जिस मैं ने उस समय देखा जब मुझे पहिले दर्शन हुआ था, उसने वेग से उड़ने की आज्ञा पाकर, सांझ के अन्नबलि के समय मुझ को छू लिया; और मुझे समझाकर मेरे साथ बातें करने लगा।
22 उसने मुझ से कहा, हे दानिय्येल, मैं तुझे बुद्धि और प्रविणता देने को अभी निकल आया हूं।
23 जब तू गिड़गिड़ाकर बिनती करने लगा, तब ही इसकी आज्ञा निकली, इसलिये मैं तुझे बताने आया हूं, क्योंकि तू अति प्रिय ठहरा है; इसलिये उस विषय को समझ ले और दर्शन की बात का अर्थ बूझ ले॥
24 तेरे लोगों और तेरे पवित्र नगर के लिये सत्तर सप्ताह ठहराए गए हैं कि उनके अन्त तक अपराध का होना बन्द हो, और पापों को अन्त और अधर्म का प्रायश्चित्त किया जाए, और युगयुग की धामिर्कता प्रगट होए; और दर्शन की बात पर और भविष्यवाणी पर छाप दी जाए, और परमपवित्र का अभिषेक किया जाए।
25 सो यह जान और समझ ले, कि यरूशलेम के फिर बसाने की आज्ञा के निकलने से ले कर अभिषिक्त प्रधान के समय तक सात सप्ताह बीतेंगे। फिर बासठ सप्ताहों के बीतने पर चौक और खाई समेत वह नगर कष्ट के समय में फिर बसाया जाएगा।
26 और उन बासठ सप्ताहों के बीतने पर अभिषिक्त पुरूष काटा जाएगा: और उसके हाथ कुछ न लगेगा; और आने वाले प्रधान की प्रजा नगर और पवित्रस्थान को नाश तो करेगी। परन्तु उस प्रधान का अन्त ऐसा होगा जैसा बाढ़ से होता है; तौभी उसके अन्त तक लड़ाई होती रहेगी; क्योंकि उसका उजड़ जाना निश्चय ठाना गया है।

दनिएल 9:21-26

हम देखते हैं की यह एक आने वाले मसह किया हुआ (= ख्रीस्तुस = मसीह जिस तरह हम ने यहाँ देखा) जिबराईल फ़रिश्ते ने एक नक़्शा ए औक़ात दिया था जब मसीह दुनया में आने को था   I जिबराईल ने कहा एक वक़्त की मीआद होगी I “पास तू मालूम कर और समझ ले कि येरूशलेम की बहाली और तामीर का हुक्म सादर होने से ममसूह फ़र्मारवा तक सात हफ़्ते और बासठ हफ़्ते होंगे I“ हालांकि यह पैगाम दानिएल को (लगभग 537 क़ब्ल मसीह में) दिये गए थे मगर वह इस मीआद को देखने गिनती करने के लिए ज़िंदा नहीं था I

मीआद का जारी किया जाना ताकि बहाली और येरूशलेम की दोबारा तामीर हो

दरअसल वह नहेमयाह था जो दानिएल (अलैहिस्सलाम) के बाद 100 साल तक जीता रहा I उसने इस मीआद के शुरू होने को देखा I वह फ़ारसी शहंशाह अखोयरस का साक़ी था I और वह सूसन में रहता था जो मौजूदा ईरान है I इस को ऊपर के नक़्शे में वक़्त की लकीर में देखें I वह अपनी किताब में कहता है I

 र्तक्षत्र राजा के बीसवें वर्ष के नीसान नाम महीने में, जब उसके साम्हने दाखमधु था, तब मैं ने दाखमधु उठा कर राजा को दिया। इस से पहिले मैं उसके साम्हने कभी उदास न हुआ था।
2 तब राजा ने मुझ से पूछा, तू तो रोगी नहीं है, फिर तेरा मुंह क्यों उतरा है? यह तो मन ही की उदासी होगी।
3 तब मैं अत्यन्त डर गया। और राजा से कहा, राजा सदा जीवित रहे! जब वह नगर जिस में मेरे पुरखाओं की कबरें हैं, उजाड़ पड़ा है और उसके फाटक जले हुए हैं, तो मेरा मुंह क्यों न उतरे?
4 राजा ने मुझ से पूछा, फिर तू क्या मांगता है? तब मैं ने स्वर्ग के परमेश्वर से प्रार्थना कर के, राजा से कहा;
5 यदि राजा को भाए, और तू अपने दास से प्रसन्न हो, तो मुझे यहूदा और मेरे पुरखाओं की कबरों के नगर को भेज, ताकि मैं उसे बनाऊं।
6 तब राजा ने जिसके पास रानी भी बैठी थी, मुझ से पूछा, तू कितने दिन तक यात्रा में रहेगा? और कब लैटेगा? सो राजा मुझे भेजने को प्रसन्न हुआ; और मैं ने उसके लिये एक समय नियुक्त किया।
7 फिर मैं ने राजा से कहा, यदि राजा को भाए, तो महानद के पार के अधिपतियों के लिये इस आशय की चिट्ठियां मुझे दी जाएं कि जब तक मैं यहूदा को न पहुंचूं, तब तक वे मुझे अपने अपने देश में से हो कर जाने दें।
8 और सरकारी जंगल के रख वाले आसाप के लिये भी इस आशय की चिट्ठी मुझे दी जाए ताकि वह मुझे भवन से लगे हुए राजगढ़ की कडिय़ों के लिये, और शहरपनाह के, और उस घर के लिये, जिस में मैं जा कर रहूंगा, लकड़ी दे। मेरे परमेश्वर की कृपादृष्टि मुझ पर थी, इसलिये राजा ने यह बिनती ग्रहण किया।
9 तब मैं ने महानद के पार के अधिपतियों के पास जा कर उन्हें राजा की चिट्ठियां दीं। राजा ने मेरे संग सेनापति और सवार भी भेजे थे।
10 यह सुन कर कि एक मनुष्य इस्राएलियों के कल्याण का उपाय करने को आया है, होरोनी सम्बल्लत और तोबियाह नाम कर्मचारी जो अम्मोनी था, उन दोनों को बहुत बुरा लगा।
11 जब मैं यरूशलेम पहुंच गया, तब वहां तीन दिन रहा।

नहेमयाह 2:1-12

यह हवाला “मीआद के जारी करने के लिए है कि बहाली और येरूशलेम की दोबारा तामीर की जाए” जिसे दानिएल नबी ने नबुवत की थी कि एक दिन ऐसा होगा I और हम यह देखते हैं कि यह बात फ़ारस के शहिंशाह अखोयरस की सल्तनत के 20 वें बरस में वाक़े हुआ I यह तारीख़ का जाना पहचाना वाक़िया है जिस का आगाज़ 465 क़ब्ल मसीह में हुआ था इस तरह उसके 20 वें बरस में इस मीआद को मुक़र्रर किया जाएगा यानी 444 क़ब्ल मसीह में I जिबराईल फ़रिश्ते ने दानिएल नबी को इस मीआद के शुरू होने की निशानी दी थी I यानी फ़ारस के शाहिंशाह की सल्तनत के 100 साल गुजरने पर I दानिएल (अलैहिस्सलाम) की इस नबुवत न जानने की बाबत यह मीआद जारी होता है — मीआद की तहरीक मुक़र्रर की जाती है जिस तरह से ममसूह यानी मश को दुनया मे लाया जाएगा I

राज़दार सात के आदाद

जिब्राईल फ़रिश्ते का पैगाम जो दानिएल नबी के ज़रिये दिया गया था वह इशारा करता था कि उस कि मीआद सात हफ़्ते और बासठ हफ़्ते होंगे तब मसीह का ज़हूर होगा I तो फिर यह “सात” क्या है ? मूसा (अलैहिस्सलाम) की तौरेत में हर एक सात साल का एक सिलसिला था I हर सातवें  साल में अपने खेती की ज़मीन को आराम देना ज़रूरी था ताकि ज़मीन की मिट्टी में दोबारा गिज़ाइयत भरी जाए और वह अच्छी फसल देने के क़ाबिल हो जाए I तो यह ‘सात’ का अदद सात साल का सिलसिला था I इस बात को द्माग में रखते हुए हम देखते हैं कि मीआद के जारी किए  जाने से लेकर आखिर तक इसे दो हिस्सों में तक़सीम किया गया था I पहला हिस्सा था सात हफ़्ते यानी एक हफ़्ता = 7 दिन के , या सात साल का ज़माना यह 7×7 = 49 साल –- यह येरूशलेम के दोबारा तामीर किए जाने की मीआद थी I यानी उसकी दोबारा तामीर में इतने साल लगे थे I फिर इसी मीआद का पीछा करते हुए बासठ हफ़्ते I इस तरह से इस की पूरी मीआद यानी कुल मीआद 7×7+62×7 = 483 साल के बाद मसीह का ज़हूर होगा I

360 दिन का एक साल

हमको एक छोटा कैलेंडर मुताबिक़ करने  के लिए बनाना पड़ेगा I जिस तरह से कई एक मुमालिक ने क़दीम ज़माने मे किया था , अँबिया एक साल के तूल का इस्तेमाल कतरे थे जो 360 दिन का होता था I कैलेंडर में ‘साल’ की लंबाई को मुक़र्रर करने के मुखतलिफ़ तरीक़े होते थे I अंग्रेज़ी कैलेंडर (जो सूरज की गर्दिश के हिसाब से है) उस में एक साल के 365॰24 दिन लंबे होते हैं I और मुस्लिम कैलेंडर में एक साल के (जो चाँद की गर्दिश की बिना पर है) 354 दिन होते हैं I और एक जिसे दानिएल ने इस्तेमाल किया वह एक साल के 360 दिन के हिसाब से था I सो 360 दिन चाँद के हिसाब से 483 साल बनते हैं पर 483 * 360 / 365.24 = 476 साल सूरज के हिसाब से I

मसीह की आमद साल के लिए पेशीन गोई की गई

इन मालूमात के साथ हम अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कब मसीह का आना मुमकिन हुआ था I हम ‘क़ब्ल मसीह’ के तारीख़ी दौर से ‘ईस्वी’ के तारीख़ी दौर में जाएंगे I और 1 क़ब्ल मसीह से लेकर 1 ईस्वी में सिर्फ़ एक साल का फ़रक़ है I (सिफ़र साल इस में कोई नहीं है) I इस हही अंदाजे की जानकारी को जेल की टेबल में शरह करके पेश किया गया है I

आगाज़ी साल 444 क़ब्ल मसीह  (अखोयरस का 20 वां साल )
वक़्त की मीआद (लंबाई ) 476 सूरज के साल
तवक़्क़ो किया हुआ आमद मगरिबी कैलेंडर के हिसाब से (-444 + 476 + 1) (‘+1’ क्यूंकी ईस्वी में कोई सिफ़र साल नहीं है ) = 33
तवक़्क़ो किया हुआ साल 33 ईस्वी

येसू नासरी एक गधी पर सवार होकर येरूशलेम में आए जिस को जाने पहचाने खजूरी इतवार  के जश्न से जाना जाता है I उस दिन उसने खुद का इश्तिहार दिया और येरूशलेम तक सवारी करके जताया कि वह उनका मसीह है I वह साल 33 ईस्वी था I

यह दो नबी दानिएल और नहेमयाह हालांकि वह एक दूसरे को नहीं जानते थे  जब से कि वह 100 साल की दूरी पर थे मगर अल्लाह की जानिब से उन्हें हम रुतबा होने का हक़ दिया और तंजीम किया गया कि वह दोनों नबुवत हासिल करें और तहरीक में मीआद क़ायम करें जो मसीह को ज़ाहिर करेगा I और 570 मीआद कि सालों के लगभग नबी दानिएल जिबराईल फ़रिश्ते से अपना पैगाम हासिल करने के बाद ईसा येरूशलेम में मसीह बतोर दाखिल हुए I यह अजहद क़ाबिल ए ज़िकर नबुवत है और ठीक ठीक (वाज़ेह तोर से) इसकी तकमील हुई है I पेशीन गोई के साथ साथ मसीह का नाम भी नबी ज़करियाह तरफ़ से दिया गया I इन नबियों ने सच मुच  बड़े ताज्जुब के साथ पेशीन गोई के मजमूए को पेश किया ताकि वह सब लोग जो अल्लाह के मनसूबे को जानना चाहते थे ज़ाहिर होते हुए देख सकते थे I पर अगर ज़बूर कि नबुवतें अज़हद क़ाबिल ए ज़िकर हैं तो , और इन्हें यहूदियों कि किताब में लिखी गई हैं तो — यहूदी लोग ईसा को मसीह बतोर क़बूल क्यूँ नहीं करते ? यह उनकी किताब में मौजूद है ! यह सोचना हमारे लिए ज़रूरी हो जाता है कि जब ख़ास तोर से इस तरह के वाज़ेह तोर से पेशीन गोइयाँ पूरी होती हैं I हमारी समझ के मुताबिक़ हम ने देखा कि यहूदियों ने ईसा को मसीह बतोर क़बूल नहीं किया , मगर क्यूं ? यूएस आने वाले की बाबत जो नबियों के ज़रिए पेशबीनी की गई थी हम केयूसीएच और क़ाबिल ए ज़िकर बातें आगे सीखेंगे I इस सवाल पर हम अगली तहरीर में गौर करते हैं I             

शाख़ की निशानी : आने वाले मसीह का नाम दिया गया

सूरा अल अहज़ाब (सूरा 33 एक साथ मिली हुई फौजें) एक मामूली इंसानी हालत के लिए हल पेश करती है — वह यह है कि किसी को क्या कहकर बुलाया जाए जब हम उसका नाम नहीं जानते I

তোমরা তাদেরকে তাদের পিতৃপরিচয়ে ডাক। এটাই আল্লাহর কাছে ন্যায়সঙ্গত। যদি তোমরা তাদের পিতৃ-পরিচয় না জান, তবে তারা তোমাদের ধর্মীয় ভাই ও বন্ধুরূপে গণ্য হবে। এ ব্যাপারে তোমাদের কোন বিচ্যুতি হলে তাতে তোমাদের কোন গোনাহ নেই, তবে ইচ্ছাকৃত হলে ভিন্ন কথা। আল্লাহ ক্ষমাশীল, পরম দয়ালু।

सूरा अल अहज़ाब 33:5

यह हम को याद दिलाता है कि इंसानी इल्म महदूद है I हम अक्सर यहाँ तक कि यह नहीं जानते कि जो हमारे अतराफ़ लोग पाये जाते हैं हम उन के नाम से वाक़िफ़ नहीं हैं सूरा अन नज्म (सूरा 53 –तारा) जिस मेन बताया गाया है कि हज़रत मुहम्मद सल्लम के जमाने में कुछ जाने माने बड़े बुतों की बाबत यानी कि ‘लात, उज़्ज़ा, ‘मनात’ की चर्चा करते हुए I

এগুলো কতগুলো নাম বৈ নয়, যা তোমরা এবং তোমাদের পূর্ব-পুরুষদের রেখেছ। এর সমর্থনে আল্লাহ কোন দলীল নাযিল করেননি। তারা অনুমান এবং প্রবৃত্তিরই অনুসরণ করে। অথচ তাদের কাছে তাদের পালনকর্তার পক্ষ থেকে পথ নির্দেশ এসেছে।

सूरा अन नज्म 53:23

झूते माबूदों के लिए कुछ खास लोगों के जरिये उन के नाम तदबीर किए गए यह आयतें सच्ची इबादत से झूठी इबादत को अलग करने की बाबत एक रहनुमाई देते हैं I जबकि हम कभी कभी अपने अतराफ़ के लोगों के नाम नहीं जानते I बनी इंसान यक़ीनी तोर से नबियों के नाम नहीं जानते थे जो मुस्तक़्बील में आने वाले थे I अगर मसीह का नाम वक़्त से बहुत पहले दिया गाया था तो यह एक निशानी होगा कि यह अल्लाह का मंसूबा है जो कभी झूटा नहीं हो सकता I यहाँ हम देखते हैं कि किस तरह ईसा अल मसीह के नाम की नबुवत की गई है I

एक नाम में निशानी

हम ने देखा कि अल्लाह ने एक आने वाली बादशाही का वादा किया था I यह बादशाही दूसरी इंसानी बादशाही से फ़रक़ होगा I आज के खबरों को उठा कर देखें कि इंसानी बादशाही में क्या कुछ हो रहा है I लड़ाई झगड़े , बिगाड़ , ज़ालिमाना बर्ताओ , कत्ल ए आम , ताक़तवरों का कमज़ोरों पर हावी होना I यह सारे गुनाह इंसानी बादशाही में वाक़े होते हैं चाहे वह मुसलमान हों , मसीही हों ,यहूदी हों , बौद्ध हों , हिन्दू हों , या मशरिक़ी मुमालिक के लोग I इन तमाम बादशाही में सिर्फ एक ही मसला है और वह यह है कि हम जो इस बादशाही में रहते हैं इस में कोई आराम देने वाली प्यास नहीं है जिस तरह नबी यरम्याह (अलैहिस्सलाम) के दिनों में देखा गाया था I यह हमको गुनाह की तरफ़ ले जाता है और इन में से कई एक मसलाजात मुख़तलिफ़ गुनाहो की शरह पेश करती हैं (मिसाल के तोर पर बिगाड़, क़त्ल ए आम, जिंसी परेशानियां वगैरा I) यह सब गुनाह के अंजाम हैं I सो जो सब से बड़ी रुकावट खुदा कि बादशाही को आने रोकती है वह हम बनी इंसान हैं I अगर अल्लाह अपनी बादशाही को अभी के अभी कायम करता है तो हम में से कोई भी उस में दाखिल नहीं हो सकता क्यूंकी हमारा गुनाह उस बादशाही को आज की तारीख़ ज़ियादा से ज़ियादा में बर्बाद करके रख देगा I यरम्याह नबी ने भी उस दिन की बाबत नबूवत की जब अल्लाह लोगों के बीच एक नया अहद क़ायम करेगा I यह नया अहद इस लिए होगा क्यूंकी इसे हमारे दिलों में लिखा जाएगा ना की पतथर की लोहों पर जिस तरह से मूसा की शरीअत थी I यह हम को तब्दील करेगी अंदर से बाहर की तरफ़ ताकि इस बादशाही के शहरी होने के क़ाबिल कर सके I  

यह किस तरह होने वाला था ? अल्लाह का मंसूबा एक पोशीदा खजाने की तरह है मगर ज़बूर के पैगामात में इस के सबूत दिये गए थे ताकि जो इस बादशाही की तलाश करते थे वह समझ सके मगर बाक़ी के लोग जो इस में दिलचसपी नहीं रखते वह इस से अंजान रहेंगे I हम इन्हें इन मौजूदा पैगामात में देखते हैं I जो मंसूबा मसीह की आमद पर मुरत्किज़ किया गाया था (जिसे हम ने यहाँ जिस तरह देखा था = मसीहा = मसीह) I हम ने पहले ही ज़बूर में देखा जो (बादशाह दाऊद के जरिये इल्हाम दिया गाया था) कि पेशीनगोई किया हुआ मसीह दाऊद के नसल से आना ज़रूरी था I यहाँ (इसे नज़र ए सानी के लिए देखें) I

दरख़त , तना … और शाख़ की बाबत यसायाह नबी

नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने ज़ाहिर किया कि यह अल्लाह का मंसूबा कैसे वाक़े होगा I ज़बूर मे यसायाह की किताब को दाऊद शाही सिलसिला (1000 –- 600 क़ब्ल मसीह) के दौरान लिखा गाया था I जब यह (750 क़ब्ल मसीह) में लिखा गया था तो शाही सिलसिला और मुकममल इसराईली हुकूमत उन के दिल की प्यास के सबब से बर्बाद हो चुकी थी I

Description: When Isaiah lived

नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ज़बूर के दीगर नबियों के साथ तारीख़ी वक़्त की लकीर में दिखाया गाया है

The dynasty of Dawud - like a Tree

दाऊद का शाही सिलसिला – एक दरख्त की मानिंद

यसायाह (अलैहिस्सलाम)को इल्हाम हुआ था कि बनी इसराईल के लिए एक तहरीरी बयान लिखे कि अल्लाह की तरफ़ फिरे और रूहानीयत और मूसा की शरीअत पर अमल पैरा हों I यसायाह नबी भी इस तौबा से वाकिफ़ थे और जानते थे कि उन का वापस आना वाक़े नहीं होगा इसलिए उस ने पेशीन गोई की कि बनी इसराईल क़ौम बर्बाद होगा और दाऊद का शाही सिलसिला बिखर कर रह जाएगा यहाँ हम ने देखा यह किस टीआरएच वाक़े हुआ I इस नबुवत में उस ने शाही सिलसिले को मिसाल बतोर एक बड़े दरख्त को पेश किया जो कि बहुत जल्द काटा जाएगा और सिर्फ़ एक तना बाक़ी रह जाएगा I ऐसा 600 क़ब्ल मसीह में वाक़े हुआ जब बाबुल के लोगों ने येरूशलेम को बर्बाद किया और उस वक़्त से लेकर इसराईल में दाऊद की नसल में से किसी भी शख्स ने येरूशलेम मे कभी हुकूमत नहीं की I

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                                    दरखत — काट डाला गया

मगर इन तमाम नबुवतों के साथ आने वाली बरबादी उस के किताब में यह खास पैगाम ले आया

तब यिशै के ठूंठ में से एक डाली फूट निकलेगी और उसकी जड़ में से एक शाखा निकल कर फलवन्त होगी।
2 और यहोवा की आत्मा, बुद्धि और समझ की आत्मा, युक्ति और पराक्रम की आत्मा, और ज्ञान और यहोवा के भय की आत्मा उस पर ठहरी रहेगी।

सायाह 11:1-2
The dynasty of Dawud (PBUH)- now a shoot emerges from the dead stump

दाऊद (अलैहिस्सलाम) का शाही सिलसिला – अब एक कोंपल मुर्दा ताने से निकलती है

यससी दाऊद बादशाह का बाप था और इस तरह से वह इस सिलसिले का जड़ था I ‘यससी का तना’ आने वाली उस आने वाली दाऊद के शाही सिलसिले की बरबादी की नबुवत थी I मगर यसायाह एक नबी होने के नाते इस बार उसने माज़ी को भी देखा और पेसीन गोई की कि तने के ज़रिये से (बादशाह के नसल से) जो मुर्दा सा दिखेगा , वह पूरी तरह से वैसा नहीं होगा I एक दिन मुस्तक़्बिल में इस मुर्दा तने से एक कोंपल निकलेगी जो कि शाख़ कहलाएगा उसी तने से फूट निकलेगा जैसा उस ने ऐलान किया था I यह शाख़ एक ‘उसे’ कहलाता है I सो यसायाह उस आने वाले शख़्स की बाबत नबुवत करता जो दाऊद की नसल से है I इस शख़्स में हिकमत क़ुव्वत और इल्म की ख़ूबियाँ होंगी और यह सिर्फ़ ख़ुदा की क़ुव्वत से मुमकिन होगा जो उसपर सुकूनत करेगी I अब याद रखें कि हम ने देखा कि मसीह की नबुवत किस तरह की गई थी कि वह दाऊद की नसल से आए — यह बहुत ही ज़रूरी था I शाख़ और मसीह क्या यह दोनों दाऊद से हैं ? क्या यह दोनों लक़ब उसी आने वाले शख़्स के लिए ही हो सकते थे ? आइए हम ज़बूर से तहक़ीक़ात करते रहें I

नबी यरम्याह … शाख़ की बाबत

नबी यरम्याह (अलैहिस्सलाम) यसायाह नबी के 150 साल बाद आते हैं , जबकि हज़रत दाऊद का सिलसिला हक़ीक़त में यरम्याह नबी के आँखों के सामने वाक़े हुआ जिसे उनहों ने लिखा :

Description: http://al-injil.net/wp-content/uploads/2012/12/Jeremiah-timeline.jpg

                    

नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ज़बूर के दीगर नबियों के साथ तारीख़ी वक़्त की लकीर में दिखाया गाया है

5 यहोवा की यह भी वाणी है, देख ऐसे दिन आते हैं जब मैं दाऊद के कुल में एक धमीं अंकुर उगाऊंगा, और वह राजा बनकर बुद्धि से राज्य करेगा, और अपने देश में न्याय और धर्म से प्रभुता करेगा।
6 उसके दिनों में यहूदी लोग बचे रहेंगे, और इस्राएली लोग निडर बसे रहेंगे: और यहोवा उसका नाम यहोवा “हमारी धामिर्कता” रखेगा।

यरम्याह 23:5-6

नबी यरम्याह (अलैहिस्सलाम) बराहे रास्त शाख़ की नबुवत से अपने पैगाम को जारि रखते हैं जिसे नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने 150 साल पहले शुरू किया था I शाख़ एक बादशाह होगा I हम ने देखा मसीह भी एक बादशाह ही है I मसीह और शाख़ के दरमियान जो म्वज़िना है वह बढ़ता जा रहा है I

नबी ज़करियाह … शाख़ का नाम रखते हैं  

नबी ज़करियाह (अलैहिस्सलाम) हमारे लिए पैगाम को जारी रखते हैं वह 520 क़ब्ल मसीह में रहा करते थे जब से कि यहूदी लोग बाबुल से अपने पहले अखराज में वापस येरूशलेम को लौटे थे मगर उन दिनों में वह फ़ारस के बादशाह के जरिये हुकूमत किए जाते थे I   

Description: http://al-injil.net/wp-content/uploads/2013/02/zechariah-in-timeline.jpg

    

        नबी ज़करियाह तारीख़ी वक़्त की लकीर में ज़बूर के दीगर नबियों के साथ

नबी ज़ाकरियाह जो पुराने अहदनामे के आख़री से पहले किताब में ज़िकर पाया जाता है और नए अहदनामे के ज़करियाह में आपको किसी तरह की गलत फ़हमी नहीं होनी चाहिए I पुराने अहद नामे का ज़करियाह नए अहदनामे का ज़करियाह से 500 साल पहले रहा करते थे I दरअसल पुराने ज़करियाह के बाद ही इस ज़करियाह का नाम दिया गया था I जिस तरह मौजूदा ज़माने में बहुत से लोग मुहम्मद नाम रखते हैं और मोहम्मद (सल्लम)के वफ़ात के बाद यह नाम रखने की रिवायत चली थी I उन दिनों में (यानी 520 क़ब्ल मसीह) में यहूदी लोग बर्बाद किए हुए मंदिर को दोबारा से तामीर कर रहे थे और हारून (अलैहिस्सलाम) की क़ुरबानी को दोबारा से शुरू करना चाहते थे I इस के लिए सिर्फ़ (हारून की नसल से चले आने वाले शख़्स को ही सरदार काहिन मुक़र्रर किया जाना था) I ज़करियाह के दिनों में ज़करिया को यशौ  करके भी पुकारते थे I और उन दिनों में (520 क़ब्ल मसीह में) ज़करियाह नबी रहा करता था और सरदार काहिन यशौ था I यहाँ अल्लाह नबी ज़करियाह के वसीले से , जो सरदार काहिन यशौ की बाबत ऐलान किया गया इस तरह बयान करता है :

“अब ऐ यशौ सरदार काहिन सुन , तू और तेरे रफ़ीक़ जो तेरे सामने बैठे हैं इस बात का ईमान लाएँ कि मैं अपने बंदे शाख़ को लाने वाला हूँ I क्यूंकी उस पतथर को जो मैं ने यशौ के सामने रखा है , देख उस पर सात आँखें हैं I देख मैं उस पर कनदा करूंगा रब्बुल अफ़वाज फ़रमाता है और मैं इस मुल्क की बाद किरदारी को एक ही दिन मे दूर करूंगा I”

ज़करियाह 3:8-9

फिर से शाख़ का बयान ! मगर इस बार कहा गया है , ‘मेरा ख़ादिम’ और किसी तरीक़े सरदार काहिन यशौ आने वाले शाख़ का ऐलान करता है I तो इस तरह सरदार काहिन यशौ एक निशानी है I मगर किस बतोर ? और एक दिन के क्या मायने हैं की एक दिन ख़ुदावंद के ज़रिये गुनाहों को दूर किया जाएगा I (“मैं दूर करूंगा …”) हम ज़करियाह के बयान को जारी रखते हैं और कुछ अछमबे में डालने वाली बात सीखना जारी रखते हैं I

“फिर ख़ुदावंद का कलाम मुझ पर ज़ाहिर हुआ :”… [बाबत] यशौ सरदार काहिन को पहनाI और उस से कह कि रब्बुल अफ़वाज यूं फ़रमाता है कि देख वह शख़्स जिसका नाम शाख़ है … “

ज़करियाह 6: 9-10

गौर करें कि यशौ यह एक नाम ही शाख़ का नाम है I इन बातों को याद रखें जो हम ने इबरानी से अंग्रेज़ी में नक़ल लफ़्ज़ और तर्जुमे कि बाबत सीखा है I यहाँ हम यशौ इस लिए पढ़ते हैं क्यूंकी यह एक अंग्रेज़ी तर्जुमा है I मगर इब्रानी में इस का असल नाम क्या है ? ज़ेल का नक्शा हम को बताता है I

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                 यशौ = येसू क्यूंकि यह दोनों इसी इब्रानी नाम से नक़ल लफ़्ज़ हैं

रुबा दाइरा 1à3 में जाते वक़्त (जैसे हम ने इस बात को समझने में किया था जहां से लक़ब मसीहा या मसीह आया था) हम देखते हैं कि ‘यशौ’ नाम इब्रानी लफ़्ज़ के ‘यशोआ’ नक़ल लफ़्ज़ किया गया है I यह नाम ‘यशौ’ उस वक़्त नक़ल लफ़्ज़ किया गया जब इस का तरजुमा अंग्रेज़ी मे किया गया था I यह भी याद रखें कि तौरात ज़बूर का यूनानी तरजुमा 250 क़ब्ल मसीह में किया गया था I इसे रुबा दाइरा 1à2 में दिखाया गया है I इन तरजुमा करने वालों ने भी इब्रानी नाम ‘यशौआ’ को नक़ल लफ़्ज़ किया जब उनहों ने पुराने अहदनामे को यूनानी में तरजुमा किया था I उनका इब्रानी नक़ल लफ़्ज़ था ‘इयूसोस’ I इस तरह से पुराने अहदनामे का इब्रानी नाम ‘यशौआ’ पुराने अहदनामे के यूनानी तर्जुमे में ‘इयूसोस’ कहलाया I जब यूनानी नए अहदनामे का अंग्रेज़ी में तरजुमा किया गया तो ‘इयूसोस’ का नक़ल लफ़्ज़ ‘येसू’ पड़ गया I दूसरे मायनों मे यह हुआ कि मसीह = मसीहा = ख्रीस्तुस = मसह किया हुआ ,

                    यशौआ = इयूसोस = यशौ = येसू (= ईसा

इसी तरह नाम मुहम्मद محمد, = यशौआ = येसू I यह कितनी ताज्जुब की बात है , जिसे हर कोई जान्ने की ख़्वाहिश रखता है I ईसा अल मसीह से 500 साल पहले इंजील का नबी जो कभी रहा करता था , ज़करियह नबी के जरिये पेशीन गोई की जाती है की शाख़ का नाम येसू होगा I (या ईसा जैसे अरबी से नक़ल लफ़्ज़ किया गया है) I येसू (या ईसा) शाख़ है ! शाख़ और मसीह (या ख्रीस्तुस) यह दो लक़ब हैं एक ही शख्स के लिए ! मगर इस को दो फ़रक़ लक़ब की क्या ज़रूरत थी ? वह कौनसा काम करने जा रहा था जो बहुत ही अहम था ? ज़बूर के अँबिया अब आगे हमारी अगली तहरीर में बहुत ही तफ़सील से समझाते हैं I   

नए अहद की निशानी

इस से पहले की तहरीर में हम ने यरम्याह (अलैहिस्सलाम) के बयान में देखा था कि गुनाह दीगर चीजों के दरमियान है, हमारे प्यास की निशानी I हालांकि हम जानते हैं कि गुनाहगारी की चीज़ें गलत होती हैं और डबल्यूएच बहुत ज़ियादा शर्मिंदगी की तरफ़ ले जाती हैं I हमारी प्यास हमको अभी भी गुनाह की तरफ़ ले जाती है I नबी यरम्याह (अलैहिस्सलाम) इसराईली बादशाहों के आखरी जमाने में रहते थे I सिर्फ़ अल्लाह के इनसाफ़ से पहले ऐसे जमाने में जब बहुत ज़ियादा गुनाह मौजूद था

नबी यरम्याह के जमाने में (600) क़ब्ल मसीह में हज़रत मूसा की शरीअत के दिये जाने के लग भग एक हज़ार बाद जब बनी इसराईल क़िला बंदी से आज़ाद थे उनहों ने शरी अत की पाबंदी नहीं की थी I और इस तरह एक आम क़ौम बतोर इनसाफ़ किए जाने को थेI मज़हब ने अल्लाह और प्यासे लोग दोनों को एक ना उम्मीदी की झलक साबित कर दी थी I मगर यरम्याह (अलैहिस्सलाम)जो इनसाफ़ का पैगाम देने वाले थे उन के पास किसी की बाबत एक पैगाम था —मुस्तक़बिल में किसी दिन —-मगर वो क्या था ?

31 फिर यहोवा की यह भी वाणी है, सुन, ऐसे दिन आने वाले हैं जब मैं इस्राएल और यहूदा के घरानों से नई वाचा बान्धूंगा।
32 वह उस वाचा के समान न होगी जो मैं ने उनके पुरखाओं से उस समय बान्धी थी जब मैं उनका हाथ पकड़ कर उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया, क्योंकि यद्यपि मैं उनका पति था, तौभी उन्होंने मेरी वह वाचा तोड़ डाली।
33 परन्तु जो वाचा मैं उन दिनों के बाद इस्राएल के घराने से बान्धूंगा, वह यह है: मैं अपनी व्यवस्था उनके मन में समवाऊंगा, और उसे उनके हृदय पर लिखूंगा; और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा, और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, यहोवा की यह वाणी है।
34 और तब उन्हें फिर एक दूसरे से यह न कहना पड़ेगा कि यहोवा को जानो, क्योंकि, यहोवा की यह वाणी है कि छोटे से ले कर बड़े तक, सब के सब मेरा ज्ञान रखेंगे; क्योंकि मैं उनका अधर्म क्षमा करूंगा, और उनका पाप फिर स्मरण न करूंगा।

यरम्याह 31: 31-34

पहला मुआहदा यानि शरीअत जो नबी हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के जरिये दी गई थी वह एक नाकाम बटोर हो गई थी इस लिए नहीं कि शरीअत अच्छी नहीं थी I ऐसी बात नहीं I बल्कि मूसा की शरीअत (आज भी और अभी भी) बहुत अच्छी है I मगर मसला यह था कि इस शरीअत को सादे तोर से पथर के लोहों में लिखे गए थे I गुनाह की प्यास उन के उन के दिलों में होते हुए शरीअत की पाबंदी के ना काबिल हुए I  मसला यह नहीं था कि शरीअत में क्या कुछ लिखा था मगर मसला यह था कि शरीअत कहाँ लिखी गई थी I उसका मक़ाम कौनसा था I वक़्त का तक़ाज़ा यह था कि शरीअत को लोगों के दिलों में लिखा जाना चाहिए था ताकि लोग उसके पीछे चलते I कहने का मतलब यह है कि शरीअत को लोगों के अंदर लिखा जाना था ताकि उस की पाबंदी के लिए उन के पास ताक़त हो I

मगर क्या शरीअत की पाबंदी से नाकाम हो जाना इस लिए था कि वह यहूदी थे ? बहुत से लोग कई एक सबब से उनकी नाकामी के लिए बहुत जल्द इल्ज़ाम लगाते हैं I मगर इस मुद्दे पर हमारे लिए यह बेहतर होगा कि पहले अपनी जांच करें I जबकि इंसाफ़ के दिन मुझे बल्कि हम में से हर एक को अल्लाह के सामने अपनी नाकामी का हिसाब देना होगा , और हमको दूसरे लोगों की बाबत कुछ भी कहने का मौक़ा नहीं दिया जाएगा I जब आप अपनी जिंदगी की छानबीन करते या उसका जायज़ा लेते हैं तो क्या आप महसूस करते हैं कि आप शरीअत की पाबंदी कर रहे हैं ?क्या वह आप के दिलों में लिखी हुई है जिस से आपको ताक़त मिले कि उस की पाबंदी करो जिसतरह कि शरीअत का तक़ाज़ा है I अगर आप महसूस करते हैं कि उस के मुताबिक़ पाबंदी नहीं कर रहे हैं तो आपको ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) की तालीम की रोशनी मे आकार खुद को जाँचने की ज़रूरत है I या फिर यह आप के लिए वैसे ही होगा जैसे हज़रत मूसा से दिनों से लेकर नबी यरम्याह के दिनों में बनी इसराईल के साथ हुआ था I शरीअत तो अच्छी है मगर वह सिर्फ पथर की लोहों मे महफूज थी I जिस की पाबंदी के लिए ताक़त अता किए बगैर थी I शरीअत की इस मेयार को याद रखें जो नबी हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की तरफ़ से था I इस की मेयार यह थी कि इस शरीअत को अक्सर या कभी कभी मानना काफी नहीं था बलिक इस शरीअत को पूरे तोर से या तमाम शरीअत को तमाम वक़्तों में मानना ज़रूरी था I और आज भी इसी तरीके से अमल पैरा होने की ज़रूरत है

अगर किसी तरह आप महसूस करते हैं कि आप शरीअत के मानने में कमज़ोर हैं , या अपने बुरे कामों से शर्मिंद हों महसूस करते हैं तो अल्लाह अपने फ़ज़ल मे होकर ऊपर दिये पैगाम के मुताबिक़ आप के लिए नए मुआहिदे का एक दूसरा वादा कर रखा है जो नबी यरम्याह (अलैहिस्सलाम) से लेकर आने वाले उस दिन के मुस्तकबिल तक है I यह मुआहिदा उस से फ़रक़ होगा क्यूंकि इस का जो तक़ाज़ा है कि लोगों के दिलों में लिखा जाएगा जिसे नया मुआहिदा कहा जाता है जो इसकी मेयार के मुताबिक़ जीने कि क़ाबिलियत अता करेगा I

मगर गौर करें कि ऐसा लगता है कि यह नया मुआ हिदा इसराईल के घराने के लिए है यानि यहूदियों के लिए I हमको इसे किस तरह से समझना चाहिए ? ऐसा लगता है कि यहूदी लोग किन्हीं औकात में बहुत ही बुरे या किन्हीं औक़ात में बहत अच्छे कहलाए जाते थे I यहाँ एक और ज़बूर का बड़ा नबी यसायाह जिसने मसीह के एक कुंवारी से पैदा होने की नबुवत की थी उसने एक दूसरी नबूवतजो यरम्याह की तरफ़ से है उस के साथ जोड़ती है I हालांकि उन दोनों के बीच 150 साल का फ़ासिला था (इसे आप ज़ेल के तारीख़ी वक़्त की लकीर में देख सकते हैं) I और इस तरह से वह एक दूसरे को नहीं जानते थे I वह दोनों पैगाम की टकमेल की खबर इस बतोर देते हैं कि यह अल्लाह की जानिब से उनका आगाज़ किया हुआ था I

नबी यसायाह भी आणि वाले खादिम की बात करते हुए मुस्तकबिल की तरफ़ देख रहा है I यहाँ जो उस ने नबुवत की वह ज़ेल की आयत में है I

5 और अब यहोवा जिसने मुझे जन्म ही से इसलिये रख कि मैं उसका दास हो कर याकूब को उसकी ओर फेर ले आऊं अर्थात इस्राएल को उसके पास इकट्ठा करूं, क्योंकि यहोवा की दृष्टि में मैं आदरयोग्य हूं और मेरा परमेश्वर मेरा बल है,
6 उसी ने मुझ से यह भी कहा है, यह तो हलकी सी बात है कि तू याकूब के गोत्रों का उद्धार करने और इस्राएल के रक्षित लोगों को लौटा ले आने के लिये मेरा सेवक ठहरे; मैं तुझे अन्यजातियों के लिये ज्योति ठहराऊंगा कि मेरा उद्धार पृथ्वी की एक ओर से दूसरी ओर तक फैल जाए॥

यसायाह 49: 5-6

दूसरे अल्फ़ाज़ में यह आने वाला ख़ादिम खुदा की नजात को यहूदियों से गैर क़ौम (गैर यहूदियों)की तरफ़ बढ़ाएगा ताकि खुदा की नजात ज़मीन की इंतहा तक पहुँच जाए I यह आने वाला ख़ादिम कौन था ? इस काम को वह कैसे करने जा रहा था ? और नबी यरम्याह की नबुवत नए मुआहिदे को पत थर की लोहों केई बदले दिल की तख़्ती पर लिखने की बाबत थी वह पूरी होने को थी ? हम ज़बूर की नबुवतों पर गौर करना जारी रखेंगे I                                                                    

हमारी प्यास की निशानी

हम ने इसराईलियों की तारीख़ में देखा कि हालांकि उन्हें बाइबल (अलकिताब) की तारीख़ में उन्हें शारीअत दी गई थी मगर इस शरीअत के खिलाफ़ में उनहों ने (कसीर तादाद के लोगों ने) गुनाह किया I ज़बूर के तआरुफ़ में ने ज़िक्र किया था कि जो बादशाह हज़रत दाऊद और हज़रत सुलेमान के पीछे चले थे हालांकि यह खुदापरस्त बादशाहों के जिस्मानी नसल थे मगर उनमें कई एक बहुत बदकार भी थे I अल्लाह ने उन के पास ज़बूर के कई एक नबियों को भेजा ताकि उन्हें खबरदार करे या तंबीह करे I

यरम्याह तंबीह करने वाला नबी

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यरम्याह नबी को ज़बूर शरीफ़ के दीगर नबियों के साथ तारीख़ी वक़्त की लकीर में दिखाया गया है

नबी यरम्याह (अलैहिस्सलाम) को हम नबियों की वक़्त की लकीर में देखते हैं जो बादशाहों के आखरी दौर में रहा करते थे जिन दिनों में गुनाह और बुराई का बहुत बोल बाला था I यरम्याह नबी जिन गुनाहों की फेहरिस्त बताते हैं वह मौजूदा दिनों में बहुत ही आम हैं , जैसे की : जिनकारी,शराब खोरी, जिंसी बदकारीयां , जादूगरी , बिगड़ , लड़ाई झगड़े , दहशत गरदी , बे ईमानी , दौलत मंदों का गरीबों पर ज़ुल्म ढाया जाना वगैरा I मगर यरम्याह अपनी किताब को उन के कई एक गुनाह का खुलासा बयान करते हुए इन सब के निचोड़ को दो मुहावरों में पेश करता है I देखें :

“मेरे लोगों ने दो पाप किए हैं: उन्होंने मुझे जीवित पानी के झरने को छोड़ दिया है, और अपने स्वयं के गढ्ढों को खोदा है, टूटे हुए गंदे पानी को नहीं पकड़ सकते।”

यरम्याह 2:13

यरम्याह नबी गुनाह को बेहतर तरीके से समझने के लिए एक तमसील का इस्तेमाल करते हैं I इस नबी के जरिये अल्लाह तआला फरमाता है कि उस के लोग प्यासे थे I प्यासा होने में कोई बुराई नहीं है I मगर उन्हें अच्छे पानी में से पीने की ज़रूरत थी I अल्लाह खुद ही एक अच्छा पानी था (है)जो उनकी प्यास को बुझा सकता था (है) I मगर किसी तरह उस के पास आकार अपनी प्यास बुझाने के बजाए बनी इसराईल दूसरे हौज़ों की तरफ़ रागिब हुए (मिसाल बतोर जिन में पानी रखा रहता है) ताकि अपनी प्यास बुझा सको , मगर यह हौज़ें टूटी हुई थीं और हक़ीक़त में उन में पानी नहीं समा सकता था I दूसरे अल्फ़ाज़ में उनके गुनाह कई एक शक्लों में ज़ाहिर होते हैं यानि अल्लाह को छोड़ कर दूनया की दूसरी चीजों की तरफ़ मायल होने को कहा जाता है I मगर यह चीज़ें हक़ीक़त में उनकी प्यास को नहीं बुझा सकती I आखिर में अपने गुनाह का पीछा करते हुए बनी इसराईल तो प्यासे के प्यासे रह गए I अब अल्लाह उन के साथ नहीं था I क्यूंकी उनहों ने अपनी राहें तलाश कर ली थीं I वह अपने उन टूटे हौजों को ही पकड़े हुए थे —मिसाल बतोर उन तमाम मसलजात और मुश्किलात को जो उन के गुनाहों के सबब से थे I

सुलेमान की हिकमत हमारे टूटे हौज़ों का आशकारा करती है

दर असल सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के ज़रिये भी इस मसले का तजुरबा किया गया था और इसे समझाया गया था I जब मैं इन का बयान करता हूँ तो जिस हिकमत को मैं ने सीखा वह अल्लाह के फ़ज़ल के सबब से मखसूस हुआ I यह हज़रत सुलेमान की तहरीरें थीं जिन ने मुझ पर गहरे असर छोड़ रखे थे I वह अपनी ज़िनदगी को इस बतोर बयान करता है कि उसके पास ऐश ओ इशरत की  सारी चीज़ें दस्तियाब थीं जिस की वह चाहत रखता था I मगर उसकी जिंदगी के आखिर मेन वह प्यासे का प्यासा ही आरएच गया I यहाँ वह उन टूटे हौज़ों का बयान करता है कि उस ने उन हौज़ों से पीने की कोशिश की थी जो उस के चारों तरफ दसतियाब थे I

मैं, यरुशलम में इजरायल के ऊपर राजा था। मैंने अपने आप को अध्ययन के लिए और ज्ञान के द्वारा समर्पित करने के लिए समर्पित किया है जो स्वर्ग के तहत किया जाता है … मैंने उन सभी चीजों को देखा है जो सूर्य के तहत की जाती हैं; वे सब निरर्थक हैं, हवा के बाद एक पीछा।

मैंने अपने बारे में सोचा, “देखो, मैं अपने से अधिक यरूशलेम में शासन करने वाले किसी भी व्यक्ति की तुलना में अधिक बुद्धि में बढ़ा और बढ़ा हूं; मैंने बहुत ज्ञान और ज्ञान का अनुभव किया है। ” फिर मैंने खुद को ज्ञान की समझ पर लागू किया, और पागलपन और मूर्खता का भी, लेकिन मैंने सीखा कि यह भी हवा के बाद एक पीछा है।

मैंने अपने दिल में सोचा, “अब आओ, मैं तुम्हारे साथ खुशी का परीक्षण करूँगा कि क्या अच्छा है।” लेकिन वह भी निरर्थक साबित हुआ। “हँसी,” मैंने कहा, “मूर्ख है। और आनंद क्या मिलता है? ” मैंने खुद को शराब के साथ खुश करने की कोशिश की, और मूर्खता से गले लगाते हुए – मेरा मन अभी भी मुझे ज्ञान के साथ मार्गदर्शन कर रहा है। मैं देखना चाहता था कि पुरुषों के लिए उनके जीवन के कुछ दिनों के दौरान स्वर्ग में क्या करना उचित था।

मैंने महान परियोजनाएं शुरू कीं: मैंने अपने लिए घर बनाए और अंगूर के बाग लगाए। मैंने बगीचे और पार्क बनाए और उनमें सभी प्रकार के फलों के पेड़ लगाए। मैंने फलते-फूलते पेड़ों की टहनियों को जलाशय बना दिया। मैंने नर और मादा दास खरीदे और मेरे घर में जन्म लेने वाले अन्य दास थे। मैं भी मुझसे पहले यरूशलेम में किसी से अधिक झुंड और झुंड का मालिक था। मैंने अपने लिए चाँदी और सोना, और राजाओं और प्रांतों का खजाना जमा किया। मैंने पुरुषों और महिलाओं के गायकों का अधिग्रहण किया, साथ ही साथ एक अन्त: पुर भी मनुष्य के दिल के प्रसन्न थे। मैं मुझसे पहले यरूशलेम में किसी से भी बड़ा हो गया। इस सब में मेरी बुद्धि मेरे साथ रही।

मैंने खुद से इनकार किया कि मेरी आँखों को कुछ भी नहीं चाहिए; मैंने अपने दिल को मना कर दिया कोई खुशी नहीं। मेरा दिल मेरे सभी कामों में खुश था, और यह मेरे सभी श्रम का इनाम था। फिर भी जब मैंने उन सभी का सर्वेक्षण किया, जो मेरे हाथों ने किए थे और जो मैंने हासिल करने के लिए कुछ किया था, वह सब कुछ व्यर्थ था, हवा के बाद एक पीछा; कुछ भी हासिल नहीं हुआ था।(वाइज़ 1-2 बाब)

सुलेमान की हिकमत और यरम्याह की तंबीह आज हमारे लिए लिखी गयी हैं I यह खास तोर से हमारे लिए इस लिए मायने रखती हैं क्यूंकी जिस दौर से हम गुज़र रहे हैं वहाँ अक्सर लोगों के पास पिछली पीढ़ी से ज़ियादा दौलत का ख़ज़ाना है I तफ़रीह बाज़ी (मनोरंजन) , नाच गाना और मौसीक़ी वगैरा हैं I हमारा माजूदा मुआशरा सब से जियादा दौलतमंदी मेन आगे है , बेहतरीन तालीम याफ़्ता है , बहुत जियादा सफ़र करने वाले , तफ़रीह बाज़ , खुश नज़र आते हैं और किसी ज़माने से बढ़कर तकनीकी जरायों से लेस पाये जाते हैं I जब मौजूदा जमाने की यह हालत है तो हम आसानी से इन चीज़ों की तरफ़ मुताससीर हो सकते हैं I और जो दीगर चीज़ें हमारी ज़िंदगियों में आजमाइश बन कर आते हैं वह हैं तसव्वुर में गैरों से जिंसी ताल्लुक़ात की बाबत सोचना , और नाजायज़ रिश्ते कायम करना , नशीली दवाओं का इस्तेमाल , शराब खोरी , लालच , न जायज़ तरीके से दौलत कमाना गुस्सा , अदावत , हसद वगैरा यह उम्मीद करते हुए कि इन से प्यास बुझाई जा सकती है I तमाम नबियों की शरीअत से हम जानते हैं कि यह चीज़ें गलत हैं मगर हम समझ बैठें हैं कि इन चीज़ों से हम को दिली राहत मिल सकती है I मगर इन चीज़ों से दुख के अलावा और कोई चीज़ हासिल नहीं होती I

यह सारी बातें सुलेमान के ज़माने में, दीगर नबियों के ज़माने में सच थीं और आज भी सच हैं I नबी यरम्याह और सुलेमान की तंबीह अल्लाह के ज़रिये भेजी गई थी I यह हमारेलिए सबब बनाती है कि हमारे खुद से कुछ जायज़ स्वालात पूछे जाएँ I

  • हमारे अपने मौजूदा ज़माने में हम क्यूँ इतना कुछ सदमों, खुद कुशियों, मोटापा, तलाक़,एक दूसरे से जलन, हसद, कीना, अदावत, तसव्वुर में गैरों से जिंसी ताल्लुक़ात, नशीली दवाओं के इस्तेमाल से जूझ रहे हैं ?
  • अपनी प्यास बुझाने के लिए आप किन हौज़ों का इस्तेमाल करते हैं ?क्या उन मे पानी समाने की गुंजाइश है ?
  • क्या आप समझते हैं कि आप कभी सुलेमान की तरह खुदा की हिकमत, उसकी महब्बत और दौलत की तकमील को हासिल कर पाएंगे ? अगर वह अपने हुसूल से तसल्ली बख़श नहीं था तो आप क्या सोचते हैं कि आप अपने हुसूल से तसल्ली बख़्श हो पाएंगे ?

गुनाह अहकाम मानने से दूर नहीं रखता मगर यह भी कुछ बात है — यह कुछ ऐसी बात है जिस पर गौर करना ज़रूरी है I यह हमारे प्यास की एक निशानी है I एक बार जब हम इस प्यास को पहचान जाते हैं कि यह किस लिए है तो तो समझ लें कि हम ने कुछ हिकमत को पा लिया है I अल्लाह ने इस हिकमत की किताब को दीगर ज़बूर की किताबों में शामिल कर दिया क्यूंकी वह हमारी प्यास से अच्छी टीआरएच वाकिफ़ है I और डबल्यूएच चाहता है कि हम भी उस से अच्छी टीआरएच से वाक़िफ़ हो जाएँ I क्यूंकि वही अकेला हमारी प्यास को बुझा सकता है —और डबल्यूएच ऐसा चाहता भी है — और डबल्यूएच अपने हस्ब ए मामूल तरीके से एक खास नबुवती वायदे को देते हुए इसे शुरू करता है I अब आइये हम फिर से एक बार नबी यरम्याह के जरिये अगली तहरीर को देखेंगे I

ईसा का लफ्ज़ ‘मसीह’ और येसू का लफ्ज़ ‘खिरिस्तुस’ कहां से आया ?

कुरान शरीफ़ हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को ‘अल – मसीह’ बतोर हवाला देता है I इसके क्या मायने हैं ? यह लफ्ज़ कहां से आया ? मसीही लोग उसको क्यूँ ‘मसीहा’ बतोर हवाला देते हैं ? क्या लफ्ज़ मसीह वही है जैसे ‘ख्रिस्तुस’ है या इस में कुछ तख़ालुफ़ या बिगाड़ पाया जाता है ? ज़बूर ए शरीफ़ इन अहम् सवालों के लिए जवाब पेश करता है I किसी तरह इस तहरीर को समझने के लिए आप को सब से पहले इस तहरीर को पढने की ज़रुरत है जिस का नाम है ‘बाइबिल को किसतरह तर्जुमा किया गया था ?‘ जिसतरह से यहां इस मालूमात को इस्तेमाल किया जाएगा I

‘मसीह’ का मब्दा

ज़ेल के नक्शे में 1 नंबर तर्जुमे के तरीक़ ए अमल का पीछा करता है जैसे के तहरीर ‘बाइबिल का तर्जुमा किसतरह किया गया’? में समझाया गया हैमगर ख़ास तोर से लफ्ज़ मसीह पर धियान दिया गया है जो इंजील ए शरीफ़ या नया अहद्नामे में इस तेमाल किया गया है I

‘मसीह’ लफ्ज़ के तर्जुमे का बहाव इब्रानी से मजुदा ज़बान में

आप देख सकते हैं कि ज़बूर के असली मतन इब्रानी में (रुबअ दाईरे का चौथाई हिस्सा #1) में जो ‘मसीहा’ था इसको इबानी डिक्शनरी में एक मसह किया हुआ शख्स बतोर वाज़ाहत पेश करती है I ज़बूर की कुछ इबारतें एक ख़ास मसीहा का बयान करते हैं (अंग्रेजी में एक ख़ास हुरुफ़ ए तारीफ़ ‘द’ के साथ) जिस की नबुवत की गई थी कि वह आएगा I जब 250 क़ब्ल मसीह में सेपटुआ जिंट का फ़रोग हुआ (देखें कि बाइबिल का तर्जुमा कैसे हुआ),उलमा ने इबरानी मसीहा एक युनानी लफ्ज़ का इस्तेमाल किया जिसका यकसां मायने Χριστός = Christosरखता थाजो ‘खिरियो’ लफ्ज़ से लिया गया था जिस के मायने हैं रस्मी तोर से तेल से रगड़ा जाना I इसलिए लफ्ज़ ‘ख्रिस्तुस’ का तर्जुमा मायने के ज़रिये से किया गया (न कि आवाज़ के नक़ल लफ़ज़ के ज़रिये) I इबरानी ‘mashiyach’ से सेपटुआजिंट यूनानी में ताकि इस ख़ास शख्स का हवाला दे I इसको रुबअ दाइरा #2 में दिखाया गया है I हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के शागिर्द वह यही शख्स है जिसका सेपटुआजिंट में ज़िक्र किया गया है I इसलिए उन्हों ने ख्रिस्तुस के नाम को इंजील ए शरीफ़ (नए अहद्नामे में) जारी रखा I (फिर से इसको रुबअ दाइरा #2 में देखें)I

मगर मौजूदा ज़माने के ज़ुबानों के साथ ‘ख्रिस्तुस’ एक नक़ल लफ्ज़ हैजिसको यूनानी से अंग्रेजी में तर्जुमा किया गया था और (दीगर मौजूदा ज़ुबानों) में ‘मसीह’ बतोर तर्जुमा किया गया था Iइसको नक्शे के निचले हिस्से के आधे हिस्से में #3 में दिखाया गया है I इसतरह अंग्रेजी का मसीह ज़बूर से लिया गया ख़ास लक़ब है जो इब्रानी से यूनानी में तर्जुमा किया गया है , और फिर नक़ल लफ्ज़ किया गया है यूनानी से अंग्रेजी में I इबरानी के ज़बूरों को बराहे रास्त मौजूदा ज़बानों में तर्जुमा किया गया और तर्जुमा करने वालों ने मुख्तलिफ लफ़्ज़ों का इस्तेमाल किया है ‘mashiyach’ के मायने में असल इब्रानी में तर्जुमा करते हुए I कुछ तर्जुमे (जैसे किंग जेम्स) इबरानी ‘mashiyach’ का नक़ल लफ्ज़ अंग्रेजी में किया जो आवाज़ के ज़रिये से है I दीगर (जैसे न्यू इनटरनेशनल) ‘mashiyach’ का तर्जुमा उस के मायने के साथ किया जो ज़बूर की ख़ास इबारत के मुताबिक़ ‘मसह किया हुआ‘ है I इन दोनों मामलों में हम अक्सर लफ्ज़ ‘मसीह’ को अँगरेज़ी के ज़बूर में नहीं देखते और इस लिए इस का ताल्लुक़ पुराने अहद्नामे से है जिस की ज़रुरत नहीं है I मगर इस खुलासे से हम जानते हैं कि बाइबिल या अल किताब में :

   ‘मसीह’ = ‘मसयाह’ = ‘मसह किया हुआ’

 और यह एक ख़ास लक़ब है

सो कुरान शरीफ़ में मसीह लफ्ज़ कहां से आया है ?

हम ने देखा कि किसतरह ‘मसीह’ = ‘मसीहा’ = ‘मसह किया हुआ’ यह सरे यकसां लफ्ज़ हैं जिसे आप बाइबिल अल किताब के मुख्तलिफ हिस्सों में पाएंगे I मगर सवाल यह है कि लफ्ज़ ‘मसीह’ को कुरान शरीफ़ में किसतरह हवाला दिया गया है ? इस के जवाब के लिए मैं ऊपर के नक्शे से अंदाज़ा लगाऊंगा जो बाइबिल में ‘mashiyach’àमसीह के बहाव को दिखाया था I

ज़ेल का नक़शा तरीक़े को अरबी के क़ुरान शरीफ़ के तरीक़ ए अमल को खोल कर बयान करता है जो ‘बाइबिल’ (अल किताब) के इब्रानी औंर यूनानी तर्जुमे के बाद लिखा गया है I आप देख सकते हैं कि मैं ने रुबअ दाइरा के #1 को दो हिस्सों में बांट दिया है I हिस्सा 1a वही है जो इब्रानी ज़बूर में असली ‘mashiyach’ की बाबत बताता है जिसतरह से ऊपर समझाया गया है I हिस्सा 1b अब इस नाम को अरबी में पीछा करता है I आप देख सकते हैं कि ‘मसीहा’ का नाम क़ुरान शरीफ़ में ( مسيح) बतोर नक़ल लफ्ज़ किया गया था (मिसाल के तोर पर यकसां आवाज़) I तो फिर जब कुरान शरीफ़ के अरबी बोलने वाले क़ारिईन लफ्ज़ को अंग्रेज़ी में तर्जुमा करते थे तो उनहोंने उसे फिर से ‘मसीह’ के लफ्ज़ बतोर नक़ल लफ्ज़ किया I

तर्जुमे का तरीक़ ए अमल बता रहा है कि ‘मसह किया हुआ’ = ‘मसीह’ = ‘मसीहा’ = ‘ख्रिस्तुस’

इस गोशा ए गुमनामी की समझ के साथ हम देख सकते हैं कि वह सब के सब यकसां लक़बके हैं और सब के सब एक ही मायने रखते हैं इसी तरह जैसे कि “4 = ‘four’ (अंग्रेज़ी) = ‘क्वाटर’ (फ़्रांसीसी) =≥(रोमी अदद)=6-2 =2+2

पहली सदी में लफ़ज़ मसीह का इस्तेमाल किया गया  

इस इल्म के साथ आइये इंजील से मशाहिदे बनाएं I ज़ेल में हेरोद बादशाह का रद्दे अमल पेश किया गया है जब यहूदियों के बादशाह को जो पैदा हुआ था देखने के लिए पूरब से कुछ मजूसी आये थे I यह एक जानी पहचानी ईसा (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश की कहानी का हिस्सा है Iगौर करें कि हुरुफ़ ए तारीफ़ ‘द’  मसीह से पहले चलता है हालाँकि वह ख़ास तोर से वह ईसा (अलैहिस्सलाम) की बाबत हवाला पेश नहीं करता I

3 यह सुनकर हेरोदेस राजा और उसके साथ सारा यरूशलेम घबरा गया।
4 और उस ने लोगों के सब महायाजकों और शास्त्रियों को इकट्ठे करके उन से पूछा, कि मसीह का जन्म कहाँ होना चाहिए?

मत्ती 2:3-4

आप देख सकते हैं कि मसीह का ख़याल पहले से ही आम तोर पर हेरोद बादशाह और उसके मज़हबी सलाहकारों के दरमियान क़बूल किया जा चुका था —- यहां तक कि ईसा (अलैहिस्सलाम) के पैदा होने से पहले – और यहाँ उसे इस्तेमाल किया  गया है बगैर उसका हवाला दिए हुए I यह इस लिए कि जिसतरह ऊपर समझाया गया है कि मसीह का लफ्ज़ ज़बूर ए शरीफ़ से था जो सद्सियों पहले बादशाह और नबी हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम के ज़रिये लिखा गे था I और आम तोर से यहूदियों के ज़रिये पहली सदी में (हेरोद की तरह) यूनानी सेपटुआजिंट में I लफ्ज़ “मसीह” यह एक लक़ब था और आज भी इसी लक़ब से लोग उसे जानते है I इस के ज़रिये से हम अभी के अभी न माक़ूल तसव्वुर को इस बतोर ख़ारिज कर सकते हैं कि लफ्ज़ ‘मसीह’ एक मसीही ईजाद है या किसी और के ज़रिये किया हुआ है Iजैसे कि रोमी शाहंशाह कान्सटनटाईन जो 300 ईस्वी में मौजूद था और वह एक फ़िल्म डा विन्सी कोड के ज़रिये मशहूर हुआ था I मगर मसीह के लक़ब का वजूद कई सौ साल पहले जब मसीही लोग मौजूद नहीं थे या फिर कान्सटनटाइन के इक़तिदार में आने से पहले हो चुका था I

ज़बूर में मसीह की बाबतनबुवत

आइये हम आयात को देखें, यह नबुवती लक़ब ‘मसीह’ ज़बूर शरीफ़ में पहली बार कहां वुक़ूअ में आये I ज़बूर शरीफ़       जो ईसा (अलैहिस्सलाम) के पैदा होने के 1000 साल क़ब्ल मसीह से बहुत बहुत पहले हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के ज़रिये लिखे गए थे I

“खुदवान्द और उसके मसह किये हुए के खिलाफ़ ज़मीन के बादशाह साफ आराई करके और हाकिम आपस में मशवराकरके कहते हैं ….वह जो आसमान पर तख़्त निशीन है हंसेगा ; खुदावंद उनका मज़ह्का उड़ाएगा….उन से कलाम करते  हुए , कि मैं तो अपने बादशाह को अपने कोह ए मुक़द्दस सिय्योन पर बिठा चुका हूँ …”

ज़बूर 2:2-4

ज़बूर का दूसरा बाब सेपटुआजिंट में ज़ेल के इस तरीक़े से पढ़ा जाएगा जैसे यूनानी सेपटुआजिंट में है I (मैं इसको एक मकाल लफ्ज़ ख्रिस्तुस को शामिल कर रहा हूँ ताकि आप ‘देख’ सकें कि मसीह का लक़ब वैसा है जैसे सेपटुआजिंट का पढ़ने वाला देख सकता है )

“खुदवान्द और उसके ख्रिस्तुस के खिलाफ़ ज़मीन के बादशाह साफ आराई करके और हाकिम आपस में मशवरा करके कहते हैं ….वह जो आसमान पर तख़्त निशीन है हंसेगा ; खुदावंद उनका मज़ह्का उड़ाएगा….उन से कलाम करते  हुए , कि मैं तो अपने बादशाह को अपने कोह ए मुक़द्दस सिय्योन पर बिठा चुका हूँ …”

ज़बूर 2

अब आप मसीह को इस इबारत इस बतोर ‘देख’ सकते हैं जैसे कि पहली सदी का पढ़ने वाला पढ़ेगा I और ज़ेल का नक़ल लफ्ज़ किया जाना हू बहू यकसां मायने रखेगा :

 “खुदवान्द और उसके मसीह के खिलाफ़ ज़मीन के बादशाह साफ आराई करके और हाकिम आपस में मशवरा करके कहते हैं ….वह जो आसमान पर तख़्त निशीन है हंसेगा ; खुदावंद उनका मज़ह्का उड़ाएगा….उन से कलाम करते  हुए , कि मैं तो अपने बादशाह को अपने कोह ए मुक़द्दस सिय्योन पर बिठा चुका हूँ …”

ज़बूर 2

मगर ज़बूर इस आने वाले मसीह के लिए मजीद हवालाजात को जारी रखता है I मैं एक मेयारी इबारत को एक नक़ल लफ्ज़ के साथ साथ रखता हूँ ताकि आप उसे देख सकें :

ज़बूर 132 – इब्रानी से ज़बूर 132 सेपटुआजिंट से ज़बूर 132 अरबी के नक़ल लफ्ज़ केसाथ
10 “ऐ खुदावंद , –अपने बन्दे दाऊद की खातिर अपने मम्सूह की दुआ न मंज़ूर न कर I 11 खुदावंद ने सच्चाई के साथ दाऊद से क़सम खाई है: कि मैं तेरी औलाद में से किसी को तेरे तख़्त पर बिठाऊंगा … 17 ‘‘वहीँ मैं दाऊद के एक लिए  सींग निकालूँगा चिराग़ तय्यार किया है ।‘‘ 10 “ऐ खुदावंद ,–अपने बन्दे दाऊद की खातिर 11  अपने ख्रिस्तुसकी दुआ न मंज़ूर न कर खुदावंद ने सच्चाई केसाथ दाऊद से क़सम खाई है: कि मैं तेरी औलाद में से किसी को तेरे तख़्त पर बिठाऊंगा… 17 वहीँ मैं दाऊद के एक लिए सींग निकालूँगा।  ‘‘मै ने अपने ख्रिस्तुसके लिए  चिराग़ तय्यार किया है।‘‘ 10 “ऐ खुदावंद ,–अपने बन्दे दाऊद की खातिर अपने मसीहकी दुआ न मंज़ूर न कर I 11 खुदावंद ने सच्चाई केसाथ दाऊद से क़सम खाई है:कि मैं तेरी औलाद में से किसी को तेरे तख़्त 17 वहीँ मैं दाऊद के एक लिए सींग निकालूँगा। मै ने अपने मसीहके लिए  चिराग़ तय्यार किया है I

आप देख सकते हैं कि ज़बूर 132 ख़ास तोर से ज़माना ए मुस्तक़बिल कि बात करती है Iजैसे 17 आयत में हम पढ़ते हैं (“…. मैं दाऊद के लिए एक सींग निकालूँगा …..”)I इस तरह की इबारतें तौरेत और ज़बूर में कई एक पाई जाती हैं I जब भी आप किन्हें नबुवतों का तअय्युन करते हैं तो इन्हें याद रखना ज़रूरी होता है I यह साफ़ है कि ज़बूरों में जो नाबुवातें और पेशनगोइयाँ हैं वह सिर्फ़ मुसतक़बिल की तरफ़ ही इशारा करती हैं I हेरोद इस बात से वाक़िफ़ था कि पुराने अहद नाम के अंबिया ने ‘मसीह’ की आमद की बाबत कई एक पेशन गोइयाँ की हुईं थीं —–इसी लिए इस से पहले कि इस का एलान किया जाए वह इस के लिए तय्यार था I वह अपने सलाहकारों से चाहता था कि उसे इन पेशन गोइयों की अहमियत की बाबत समझाया जाए क्यूंकि वह इन ज़बूरों से ज़ियादा वाक़िफ़ नहीं था I मगर यहूदी जानते थे और अपने मसीहा या ख्रिस्तुस का इंतज़ार कर रहे थे I मगर एक सच्चाई यह भी है कि जब वह अपने मसीहा का इंतज़ार कर रहे थे तो उन्हें येसू या ईसा (अलैहिस्सलाम) से कुछ लेना देना नहीं था जिसतरह इंजील में ज़िक्र पाया जाता है I जबकि हक़ीक़त में वाज़ेह तोर से ज़बूर में जो नबुवत मुस्तक़बिल के लिए कि गयी थी उसी पर मुनहसिर था I

तौरेत शरीफ़ और ज़बूर शरीफ़ की नबुवतें : जैसे क़ुफ़ुल और चाबी के उसूल बतोर ताला बंद  

यह हक़ीक़त कि तौरात और ज़बूर ख़ास तोर से जो मुसतक़बिल की पेश बीनी है उन यहूदियों के लिए एक दरवाज़े का ताला जैसा बताता है I एक ऐसा ताला जिसे इस बतोर शक्ल दी गई है जो एक ख़ास चाबी से मिलता जुलता हो यानि जो उसी क़ुफ़ुल के लिए बनाई गई चाबी हो I इसी तरह पुराना अहदनामा एक ताले की तरह है I हम ने पहले ही हज़रत इबराहीम (अलैहिस्सलाम) कि बड़ी क़ुरबानी और हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के फ़सह को देखा है I और इस के साथ ही आने वाले कुंवारी के बेटे की निशानी को देखा है I (अगर यह मशहूर नहीं है तो इस की नज़र ए सानी करें कि वह आने वाले शख्स की बाबत ख़ास नबुवत थी I 132 ज़बूर इस क़ाइदे को शामिल करता है कि मसीह बादशाह और नबी हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के नसल से होगा I जब हम पुराने अहद्नामे के ज़रिये नबुवतों की  इबारतों को पढ़ते हैं तो फिर यह ताला ज़ियादा से ज़ियादा बा क़ाइदा तोर से मौज़ूं बन जाता है I इन नबुवतों के साथ ज़बूर कि इन्तहा नहीं होजाती I यह हमको और ज़ियादा तफ़सील के साथ बताती है कि मसीह और क्या कुछ करने वाला है I हम ज़बूर को आगे जारी रखेंगे I

आने वाली बादशाही

क़ुरान शरीफ़ का आख़री सूरा सूरा ए नास (114 – बनी इंसान)बयान करता है I

   (ऐ रसूल) तुम कह दो मैं लोगों के परवरदिगारलोगों के बादशाह

सूरा अन नास 114:1-2

अल्लाह क़ादिर ए मुतलक़ या बनी इंसान का बादशाह है I अगर वह एक बादशाह है तो उसकी एक बादशाही भी होनी चाहिए ख़ुदा कि बादशाही किस कि मानिंद है ? सूरा 108 अल कौसर (सूरा 108 –- फ़रावानी) एकी जवाब देता है I

 ऐ रसूल) हमनें तुमको को कौसर अता किया,

सूरा अल कौसर 108:1

जबकि बादशाह फ़रावानी बख्शता है तो उस की बादशाही में भी फ़रावानी होनी चाहिए I मगर किसतरह की फ़रावानी ?इसको ज़बूर के नबियों पर ज़ाहिर किया गया I

नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने आने वाला कुंवारी का बेटा बतोर नबुवत की थी जो कि इस नबुवत कई सौ साल बाद ईसा अल मसीह की पैदाइश में पूरी हुईI किसी तरह दीगर नबुवतें अनक़रीब होने वाली सलामती और बरकतों की बाबत भी ज़बूर में पेश की गई थी I

बनी इसराईल की तारीख़ में बादशाह हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) जो एक नबी भी थे बाद्शाओं की क़तार में सब से पहले थे जिन को अल्लाह ने मुक़र्रर किया था कि वह येरूशलेम से बादशाही करे I किसी तरह हज़रत दाऊद और हज़रत सुलेमान के बाद कई एक बादशाह बहुत ही खराब थे I सो उनकी बादशाहत के मातहत रहना , जैसे कि मौजूदा ज़माने में कई एक हाहिमों के मातहत रहा जाता है I उन दिनों लोगों और क़ौमों के दरमियान जंग और लडाइयां लड़ी जाती थीं जिसतरह मौजूदा ज़माने में होते हैं ; उन दिनों सियासी बिगाड़ और किसी आमिर का एक ग़रीब से न जायज़ फ़ाइदा उठाने का एक अन चाहा दस्तूर सा बना हुआ था जिस तरह आज भी कई मुल्कों में देखा जा जा सकता है ; उन दिनों मौतें और परेशानियां मुसीबतें थीं जिसतरह आज है I मगर ज़बूर के नबियों ने कहा कि एक दिन — मुस्तक़बिल में — एक नई बादशाही क़ायम की जाएगी I यह बादशाही इंसाफ़ , रहम , महब्बत और सलामती की होगी I नबी हज़रत यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने पेशीन गोई की है कि इस बादशाही में ज़िन्दगी कैसी होगी I

4 वह जाति जाति का न्याय करेगा, और देश देश के लोगों के झगड़ों को मिटाएगा; और वे अपनी तलवारें पीट कर हल के फाल और अपने भालों को हंसिया बनाएंगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध फिर तलवार न चलाएगी, न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे॥

यसायाह 2:4

जहां लिखा है कि जंग नहीं होगा ! यक़ीनी तोर से आज की दुनया के लिए यह सच नहीं है I मगर यहाँ तक कि लोगों के बीच जो क़ुदरती तोर से ज़िन्दा रहने वालों और माहोल के बीच के ताल्लुक़ात के बदलाव की बाबत जो पेश्बीनी है वह ज़रूर पूरा होकर रहेगा I

6 तब भेडिय़ा भेड़ के बच्चे के संग रहा करेगा, और चीता बकरी के बच्चे के साथ बैठा रहेगा, और बछड़ा और जवान सिंह और पाला पोसा हुआ बैल तीनों इकट्ठे रहेंगे, और एक छोटा लड़का उनकी अगुवाई करेगा।
7 गाय और रीछनी मिलकर चरेंगी, और उनके बच्चे इकट्ठे बैठेंगे; और सिंह बैल की नाईं भूसा खाया करेगा।
8 दूधपिउवा बच्चा करैत के बिल पर खेलेगा, और दूध छुड़ाया हुआ लड़का नाग के बिल में हाथ डालेगा।
9 मेरे सारे पवित्र पर्वत पर न तो कोई दु:ख देगा और न हानि करेगा; क्योंकि पृथ्वी यहोवा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसा जल समुद्र में भरा रहता है॥

यसायाह 11:6-9

यह बात हम जानते हैं कि (अब तक) ऐसा हरगिज़ नहीं हुआ है मगर नाबुवातें इंसानी जिंदगियों को उन के काम करने के दिनों और शख्सी मुहाफ़िज़त से आगे ले जाती हैं I

20 उस में फिर न तो थोड़े दिन का बच्चा, और न ऐसा बूढ़ा जाता रहेगा जिसने अपनी आयु पूरी न की हो; क्योंकि जो लड़कपन में मरने वाला है वह सौ वर्ष का हो कर मरेगा, परन्तु पापी सौ वर्ष का हो कर श्रपित ठहरेगा।
21 वे घर बनाकर उन में बसेंगे; वे दाख की बारियां लगाकर उनका फल खाएंगे।
22 ऐसा नहीं होगा कि वे बनाएं और दूसरा बसे; वा वे लगाएं, और दूसरा खाए; क्योंकि मेरी प्रजा की आयु वृक्षों की सी होगी, और मेरे चुने हुए अपने कामों का पूरा लाभ उठाएंगे।
23 उनका परिश्रम व्यर्थ न होगा, न उनके बालक घबराहट के लिये उत्पन्न होंगे; क्योंकि वे यहोवा के धन्य लोगों का वंश ठहरेंगे, और उनके बाल-बच्चे उन से अलग न होंगे।
24 उनके पुकारने से पहिले ही मैं उन को उत्तर दूंगा, और उनके मांगते ही मैं उनकी सुन लूंगा।
25 भेडिय़ा और मेम्ना एक संग चरा करेंगे, और सिंह बैल की नाईं भूसा खाएगा; और सर्प का आहार मिट्टी ही रहेगा। मेरे सारे पवित्र पर्वत पर न तो कोई किसी को दु:ख देगा और न कोई किसी की हानि करेगा, यहोवा का यही वचन है॥

यसायाह 65:20 -25

मुहाफ़िज़त , सलामती , दुआ का फ़ौरी जवाब … इन में से कोई भी नबुवतें — अब तक पूरी नहीं हुईं हैं मगर इन की चर्चा ज़रूर हुई है और लिखी गई हैं I कई लोग सोचते हैं कि यह उम्मीद दिलाने वाली नबुवतों के किये जाने मेंकुछ गलती ज़रूर हुई है – मगर लफ़ज़ बा लफ़ज़ जो नबुवतें हुईं वह कुंवारी के बेटे की निशानी थी I और यही नबुवत दीगर नाबुवातों की तरफ़ हमको संजीदा तोर से ले जाती है – और इन के पूरे होने कि तरफ़ ताकते रहने पर मजबूर करती है I

ख़ुदा की बादशाही

अगर हम मुनअकिस होते हैं तो हम समझ सकते हैं कि यह बातें अब तक क्यूँ पूरी नहीं हुईं I इस बात पर गौर करें कि यह बातें ख़ुदा की बादशाही की सयाक़ ए इबारत में एलान किये गए थे — मतलब ख़ुदा की हुकूमत लोगों कि जिंदगियों और दिल के मामलात में बादशाही करती है I (ख़ुदा की बादशाही) के आने की बाबत एक और नबुवत पढ़ें I

10 हे यहोवा, तेरी सारी सृष्टि तेरा धन्यवाद करेगी, और तेरे भक्त लोग तुझे धन्य कहा करेंगे!
11 वे तेरे राज्य की महिमा की चर्चा करेंगे, और तेरे पराक्रम के विषय में बातें करेंगे;
12 कि वे आदमियों पर तेरे पराक्रम के काम और तेरे राज्य के प्रताप की महिमा प्रगट करें।
13 तेरा राज्य युग युग का और तेरी प्रभुता सब पीढ़ियों तक बनी रहेगी॥
14 यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है।

ज़बूर 145:10 –14

यह पैग़ाम बादशाह और नबी हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के ज़रिये 1000 क़ब्ल मसीह के दौरान दिया गया (यहाँ इस को उस सिलसिले से जोड़ें जब हज़रत दाऊद और ज़बूर शरीफ़ के अंबिया रहा करते थे) I यह नबुवत उन सुनहरे दिनों की नबुवत करती है जिन में ख़ुदा की बादशाही हुकूमत करेगी I इस बादशाही का जलाल होगा और शान ओ शौकत होगी और यह बादशाही इंसानों कि जैसी आरज़ी नहीं होगी बल्कि मुस्तक़िल और अब्दी होगी (यानि हमेशा हमेशा के लिए अबद तक क़ायम रहने वाली होगी I इस बादशाही को दुनया में आज तक लाया नहीं गया है और इसी लिए हम भी दीगर नबुवत की बातों को यानी सलामती की बातों को नहीं देख पा रहे हैं क्यूंकि यह सलामती ख़ुदा कि उस बादशाही के साथ ही आएगी I

ज़बूर ए शरीफ़ के दुसरे नबी दानिएल (अलैहिस्सलाम) जो 550 क़ब्ल मसीह में बाबुल में जिलावतन बतोर रहते थे उन्हों ने नबुवत की कि इस बादशाही को किस तरह क़ायम की जाएगी I

जब नबी दानिएल (अलैहिस्सलाम) रहते थे तो उन का म्वाज़िना ज़बूर शरीफ़ के दीगर नबियों के साथ किया गया था I

दानिएल (अलैहिस्सलाम) ने उन ख़्वाबों को जो बुल के बादशाह ने देखे थे उन सब की ताबीर की क्यूंकि वह सब अल्लाह की जानिब से बुल के बादशाह के लिए था ताकि मुस्तक़बिल की बाबत नबुवत करे जिन का आशकारा किया जाना था I यहां वह बात है कि किसतरह दानिएल नबी ने बाबुल के बादशाह के ख्व़ाब की ताबीर की I

36 स्वपन तो यों ही हुआ; और अब हम उसका फल राजा को समझा देते हैं।
37 हे राजा, तू तो महाराजाधिराज है, क्योंकि स्वर्ग के परमेश्वर ने तुझ को राज्य, सामर्थ, शक्ति और महिमा दी है,
38 और जहां कहीं मनुष्य पाए जाते हैं, वहां उसने उन सभों को, और मैदान के जीवजन्तु, और आकाश के पक्षी भी तेरे वश में कर दिए हैं; और तुझ को उन सब का अधिकारी ठहराया है। यह सोने का सिर तू ही है।
39 तेरे बाद एक राज्य और उदय होगा जो तुझ से छोटा होगा; फिर एक और तीसरा पीतल का सा राज्य होगा जिस में सारी पृथ्वी आ जाएगी।
40 और चौथा राज्य लोहे के तुल्य मजबूत होगा; लोहे से तो सब वस्तुएं चूर चूर हो जाती और पिस जाती हैं; इसलिये जिस भांति लोहे से वे सब कुचली जाती हैं, उसी भांति, उस चौथे राज्य से सब कुछ चूर चूर हो कर पिस जाएगा।
41 और तू ने जो मूर्ति के पांवों और उनकी उंगलियों को देखा, जो कुछ कुम्हार की मिट्टी की और कुछ लोहे की थीं, इस से वह चौथा राज्य बटा हुआ होगा; तौभी उस में लोहे का सा कड़ापन रहेगा, जैसे कि तू ने कुम्हार की मिट्टी के संग लोहा भी मिला हुआ देखा था।
42 और जैसे पांवों की उंगलियां कुछ तो लोहे की और कुछ मिट्टी की थीं, इसका अर्थ यह है, कि वह राज्य कुछ तो दृढ़ और कुछ निर्बल होगा।
43 और तू ने जो लोहे को कुम्हार की मिट्टी के संग मिला हुआ देखा, इसका अर्थ यह है, कि उस राज्य के लोग एक दूसरे मनुष्यों से मिले जुले तो रहेंगे, परन्तु जैसे लोहा मिट्टी के साथ मेल नहीं खाता, वैसे ही वे भी एक न बने रहेंगे।
44 और उन राजाओं के दिनों में स्वर्ग का परमेश्वर, एक ऐसा राज्य उदय करेगा जो अनन्तकाल तक न टूटेगा, और न वह किसी दूसरी जाति के हाथ में किया जाएगा। वरन वह उन सब राज्यों को चूर चूर करेगा, और उनका अन्त कर डालेगा; और वह सदा स्थिर रहेगा;
45 जैसा तू ने देखा कि एक पत्थर किसी के हाथ के बिन खोदे पहाड़ में से उखड़ा, और उसने लोहे, पीतल, मिट्टी, चान्दी, और सोने को चूर चूर किया, इसी रीति महान् परमेश्वर ने राजा को जताया है कि इसके बाद क्या क्या होने वाला है। न स्वप्न में और न उसके फल में कुछ सन्देह है॥

दानिएल 12:36-45

यह बादशाही एक (बड़े पहाड़ के चट्टान के छोटे से टुकड़े) से शुरू होकर आखिर में हमेशा कि बादशाही में ख़तम होता है , जिसतरह ऊपर दिए गए नक्शे में दानिएल (अलैहिस्सलाम) की नबुवत से पेश किया गया है I सो अब यह सवाल उठता है कि अल्लाह अपनी बादशाही को इतनी देरी से क्यूँ क़ायम कर रहा है ? क्यूँ यह इतना तूल पकड़ता जा रहा है ? क्यूँ यह अब तक नहीं आया ? जब आप इस बारे में सोचते हैं कि तमाम बादशाही ज़ेल की चार बातों पर मुश्तमिल है :

° एक बादशाह या हाकिम

° शहरी (रहने वाले लोग)

°एक आईन या क़ानून

° फ़ितरत (क़ुदरती माहोल)

अब तक की मिसाल में, केनडा में, जहाँ मैं रहता हूँ एक बादशाही बतोर है I केनडा के पास एक हाकिम है —आज की तारीख़ में बनाम जस्टिन रूडी हमारा चना हुआ वज़ीर ए आज़म है केनडा में शहरी हैं —जिन में से एक मैं भी हूँ I केनडा के पास अपना एक आईन क़ानून है जो उसके तमाम शहरियों के हक़ाइक़ और ज़िम्मेदारियों की बाबत फ़ैसले लेता है I केनडा के पास भी क़ुदरत का एक हिस्सा है I इस मामले में केनडा ज़मीन के एक ऐसे हिस्से में वाक़े है जो उसे एक क़ुदरती (माद्दी) जसामत (नाप) आब ओ हवा मोसमात और क़ुदरती ज़राए वगैरा देता है I तमाम ममालिक और बाद्शाहें जो माजी में थी और हाल में पाई जाती हैं उन के पास यह चार मुश्तमिल ज़रूर पाये जाते हैं I

आप और मैं ख़ुदा की बादशाही में बुलाए गए हैं

ख़ुदा की बादशाही की यह भी एक सच्चाई है I हम ने पहले से ही ऊपर दी गई नबुवतों से देखा है कि इस बादशाही के पास एक ख़ास क़ुदरत (जलाल और अब्दीयत) होगा और एक आईन यानी क़ानून होगा (जिसमें सलामती , इंसाफ़ और सदाक़त वगैरा होगा) I दो और मुश्तमिल हैं जो ख़ुदा की बादशाही को मुमकिन करेंगी : और वह है उसका बादशाह और उसके शहरी I अगले तहरीर में हम बादशाह पर गौर करेंगे I इसी दरान आप ख़ुदा से पूछना चाहेंगे कि क्या आप इस ख़ुदा की बादशाही के शहरी बनना चाहेंगे I यहाँ वह बात है कि किसतरह यसायाह (अलै.) अपने पैग़ाम के वसीले से https://hindi.al-injil.one/2020/06/20/where-does-masih-of-isa-christ-of-jesus-come-from/माम लोगों को दावत देता है जो इस बादशाही के शहरी बनना चाहते हैं I

हो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ; और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो।
2 जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
3 कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करूणा की वाचा।
4 सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।
5 सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उसने तुझे शोभायमान किया है॥
6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;

यसयाह 55:1-3, 6

अल्लाह उन सब लोगों को जो इस बादशाही के ‘प्यासे’ हैं जो आने को है और जो महब्बत क़दीम बादशाह दाऊद (अलै.) को दिया गया उन सब के लिए बढ़ाया जाएगा जो उस के पास आते हैं I अगर आप के पास किसी बात के लिए सिर्फ़ दावत नामा है तो इसका मतलब यह नहीं कि आप को उस में शिरकत करने का हक़ नहीं है मगर हक़ीक़त यह है कि अल्लाह हमको अब तक दावत देता है I मतलब यह कि वह चाहता है कि हम उसकी बादशाही के शहरी बने और इस सलामती की बादशाही में ख़ुशी से रहें I ज़बूर की बाबत आगे की तहरीरों में इस को हम जारी रखेंगे I मगर एक सवाल जो रह जाता है जिस का जवाब आपको देना है वह यह है कि : “क्या मैं इस बादशाही में रहना चाहता हूँ ?”

बाइबिल के मुख्तलिफ़ तर्जुमें क्यों हैं ?

हाल ही में मैं एक मस्जिद में इमाम साहिब की तालीम को सुन रहा था I उन्हों ने जो कुछ कहा वह बिलकुल गलत था I जो उन्हों ने कहा उस को मैं इस से पहले अपने अच्छे दोस्तों से कई दफ़ा सुन चुका था I शायद आप ने भी इसे सुना होगा और आपके दमाग़ में सवालात उठे होंगे I सो आइए हम इस पर गौर करें I

इमाम ने कहा कि बाइबिल (अल-किताब) के मुख्तलिफ़ तर्जुमेंपाए जाते हैं I आप इसे अंग्रेज़ी ज़ुबान में हासिल कर सकते हैं और (उन्हों ने इन के नाम दिए) जैसे द किंग जेम्स का तर्जुमा , द न्यू इन्टरनेशनल तर्जुमा , द न्यू अमेरिकन स्टैण्डर्ड तर्जुमा , द न्यू इंगलिश तरजुमा वगैरा वगैरा I तब इमाम साहिब ने बताया कि जबकि यह सारे मुख्तलिफ़ तरजुमे हैं तो यह ज़ाहिर है कि बाइबिल (अल किताब) बिगड़ चुकी है या फिर इतना है कि हम नहीं जानते कि कौन सा ‘सही’ है I जी हाँ हम जानते हैं कि मुख्तलिफ तर्जुमे हैं I मगर इस का बाइबिल के बिगाड़ से कोई लेना देना नहीं है या फिर यह कि सच मुच फ़रक़ फ़रक़बाइबिलें हैं I यह सिर्फ़ ग़लत फ़हमी है , दर असल सिर्फ़ एक बाइबिल/अल किताब है I

जब हम मिसाल के तोर पर द न्यू इन्टरनेशनल तर्जुमे की बात करते हैं तो हम असल यूनानी (इंजील) और इब्रानी (तौरेत ज़बूर) से अंग्रेज़ी में एक तर्जुमे की बात करते हैं Iद अमेरिकन स्टैंडर्ड तर्जुमा अंग्रेजी का एक दूसरा तर्जुमा है मगर वह यूनानी और इबरानी मतन से फ़रक़ नहीं है I

यही हालत कुरान शरीफ़ की भी नज़र आती है I मैं आम तोर पर युसूफ अली के तर्जुमे का इस्तेमाल करता हूँ मगर कभी कभी पिकथाल का तर्जुमा भी इस्तेमाल करता हूँ I पिकथाल उसी अरबी कुरान से तर्जुमा करते हैं जिस से यूसुफ़ अली करते हैं I मगर वह अपने तर्जुमे में जिन अंग्रेजी लफ़्ज़ों का चुनाव करते हैं वह दोनों एक जसे नहीं होते I इस तरह से वह फ़रक़ तरजुमे कहलाते हैं I मगर किसी ने भी न तो एक मसीही , एक यहूदी ,या यहाँ तक कि एक काफ़िर भी नहीं कह रहा है अंग्रेजी के कुरान के दो फ़रक तर्जुमे हैं यानि (एक पिकथाल का और दूसरा यूसुफ़ अली का) I क्या यह फ़रक़ फ़रक़ क़ुरान है या कुरान बिगड़ गया है ? इसी तरीक़े से यहां यूनानी मतन की  इंजील है (इसे नक्शे में देखें) और वहां इब्रानी मतन तौरात और ज़बूर है (इसे नक्शे में देखें) I मगर बहुत से लोग इन ज़बानों को नहीं पढ़ सकते I और आप यह भी देहें कि मुख्तलिफ़ अंग्रेजी तर्जुमे दस्तियाब हैं (या फिर दीगर ज़ुबानों में भी)I पर यह सिर्फ़ इसलिए है कि लोगों की अपनी ज़ुबान में बाइबिल के पैग़ाम को समझा जा सके I ‘तर्जुमे’ तो महज़ फ़रक़ फ़रक़ ज़बानों का तबादला है ताकि पैग़ाम को बेहतर तरीक़े समझा जा सके I

मगर तर्जुमों में जो गलतियां शामिल हैं उस का क्या किया जा सकता है ? क्या यह हक़ीक़त कि मुख्तलिफ़ तर्जुमे बताते हैं कि बिलकुल सही तोर से तर्जुमा करना मुश्किल है जिसे असल मुसन्निफों ने लिखा था इस बतोर कि ज़ियादा तादाद में यूनानी ज़बान में रोमी किताबें लिखी गयीं जिस से यह मुमकिन हो गया कि सही और साफ़ तोर पर असली मुसंनिफों के सोच और लफ़्ज़ों का तर्जुमा करे I दर असल फ़रक़ फ़रक़ मौजूदा तरजुमे इसे बताते हैं I मिसाल बतोर यहां नए अहद्नामे की एक आयत है जो 1 तीमुथियुस 2:5 को जो असल यूनानी से लिखा गया है I

εις γαρ θεοςεις και μεσιτηςθεου και ανθρωπων ανθρωπος χριστοςιησους

1 Timothy 2:5

इस आयत के लिए यहाँ कुछ मशहूर (जाने माने) तर्जुमे हैं I

क्योंकि ईश्वर और मानव जाति के बीच एक ईश्वर और एक मध्यस्थ है, मनुष्य मसीह यीशु, नया अंतर्राष्ट्रीय संस्करण
क्योंकि एक ईश्वर है, और एक ईश्वर और पुरुषों के बीच मध्यस्थ, जो मसीह यीशु है; किंग जेम्स संस्करण
क्योंकि एक ईश्वर है, और एक मध्यस्थ ईश्वर और पुरुषों के बीच में भी है, वह आदमी है ईसा मसीह, न्यू अमेरिकन स्टैंडर्ड वर्जन

1 तीमुथियुस 2:5 फ़रक़ फ़रक़ तरजुमों में

जिस तरह आप अपने लिए देख सकते हैं कि वह अपने तर्जुमे में बहुत नज़दीक हैं – एक दो अलफ़ाज़ का फ़रक़ रखते हुए I मगर ज़ियदा अहमियत यह है कि हलके से फ़रक़ अलफ़ाज़ के इस्तेमाल के साथ हु बहु वही मायने रहते हैं I यह कि एक ही अल किताब बाइबिल है और इसलिए उसके तर्जुमे भी यकसां ही होंगे I “फ़रक़ फरक़” बाइबिलें नहीं हैं I जिसतरह मैं ने शुरू में लिखा था किसी शख्स का यह कहना बिलकुल गलत है कि मुख्तलिफ़ तर्जुमों के होने कि वजह से फ़रक़ फ़रक़ बाइबिलें पाई जाती हैं I

मैं हरेक से इल्तिजा करता हूँ कि अल किताब /बाइबिल के एक तर्जुमे का अपने मकामी ज़बान में पढ़ने के लिए चुनाव करेंI यह कोशिश आप के लिए सही साबित होगी I

कुंवारी के बेटे का निशान

ज़बूर के तआरुफ़ में ने ज़िक्र किया था कि बादशाह और नबी हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने ज़बूर की किताब की तहरीरों का आग़ाज़ किया था और बाद के नबियों ने इस के साथ दीगर किताबों को भी शामिल किया था I एक बहुत ही अहम् नबी जिस का नाम बड़े नबियों में से एक गिना जाता है वह है यसायाह I (वह इसलिए कि उसकी किताब बहुत लम्बी है) I वह 750 क़ब्ल मसीह में रहा करता था I ज़ेल की वक़्त की लकीर बताती है कि जब यसायाह दीगर ज़बूर के नबियों के साथ किसतरह रहा किया I

नबी हज़रत यसायाह (अलैहिस्सलाम) की तारीख़ी वक़्त की लकीर ज़बूर शरीफ़ के दीगर नबियों के साथ

हालाँकि यसायाह बहुत सालों पहले (लगभग 2800 साल पहले) रहते थे I उन्हों ने मुसतक़बिल के वाक़िये की पेशबीनी करते हुए कई एक नबुवतें कीं I जिस तरह हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने पहले कहा था कि एक

नबी को ऐसा करना चाहिए I उनकी नबुवत ने कुछ ऐसी अछम्बे में डालने वाली पेश्बीनी की जिसे कुरान शरीफ़ सूरा 66 यानि सूरा तहरीम आयत 12 में बयान करके इसे दुहराता है I

  और (दूसरी मिसाल) इमरान की बेटी मरियम जिसने अपनी शर्मगाह को महफूज़ रखा तो हमने उसमें रूह फूंक दी और उसने अपने परवरदिगार की बातों और उसकी किताबों की तस्दीक़ की और फरमाबरदारों में थी

सूरा अल तहरीम 66:12

सूरा तहरीम क्या बयान कर रहा है ? आइये हम यसायाह की नबुवत पर इसे समझने के लिए पीछे चलते हैं I

जिस तरह ज़बूर के तआरुफ़ में समझाया गया था , वह बादशाह जो हज़रत सुलेमान के पीछे चले , उनमें से बहुत से खराब थे और यसायाह के ज़माने में बादशाहों की यह बात सच साबित हुई I इस लिए उस की यह किताब आने वाले इंसाफ़ की बाबत कई एक तंबीह के लिए मशहूर है I जब येरूशलेम बाबुल के ज़रिये बरबाद कर दिया गया (तो उसके 150 साल बाद यसायाह की इस किताब की शुरुआत हुई —- तारीख़ के लिए यहां नक़शे को देखें) I किसी तरह उसने इस से भी बहुत आगे कई सारी बातों की नबुवत की और बहुत गहराई से मुस्तकबिल की तरफ़ देखा जब अल्लाह एक ख़ास निशान भेजने वाला था —- जो अब तक इनसानियत के लिए भेजा नहीं गया था I यसायाह इसराईल के बादशाह से मुख़ातब है जो हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की नसल से था I इसी लिए इस निशान को ‘दाऊद के घराने’ से मुखाताब होते हुए दिखाई दिया था I

  13 तब उसने कहा, हे दाऊद के घराने सुनो! क्या तुम मनुष्यों को उकता देना छोटी बात समझकर अब मेरे परमेश्वर को भी उकता दोगे?
14 इस कारण प्रभु आप ही तुम को एक चिन्ह देगा। सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानूएल रखेगी।
15 और जब तक वह बुरे को त्यागना और भले को ग्रहण करना न जाने तब तक वह मक्खन और मधु खाएगा।

यसायाह 7:13 -15

यह यक़ीनी तो से एक दिलेराना पेशीन गोई थी !जो कि किसी ने भी कानों कान नहीं सुना था कि एक कुंवारी से बेटा होगा ? यह ऐसी हैरत नाक और ना क़ाबिल ए यक़ीन पेशबीनी थी कि कई सालों तक लोग इस पर यह कह कर हैरत ज़दह होते थे कि कहीं न कहीं गलती ज़रूर हुई है I मगर यह इस बतोर सच था कि एक शख्स जो यूँ ही मुस्तक़बिल की बाबत अन्दाज़ा लगाए वह उसे नहीं बताएगा न ही उसे हाथ से लिखकर उसकी दस्तावेज़ बनाएगा कि आने वाली नसल उसको पढ़े और उसका यक़ीन करे I क्यूंकि यह नामुमकिन दिखने वाली पेशबीनी मालूम पड़ती थी I मगर वह सच्ची पेशबीनी थी I और यह बहीरा ए मुरदार के तूमार हैं जो आज भी मौजूद हैंI हम जानते हैं कि यह कई सौ साल पहले की नबुवत है —- यानि हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के पैदा होने के कई सौ साल पहले के थे I

ईसा अल मसीह (अलैहिस्सलाम) के लिए नबुवत हुई कि वह कुंवारी से पैदा हो 

हम जिस ज़माने में जी रहे है हज़रत ईसा अल मसीह के आसमान पर उठाए जाने के बाद का ज़माना है जिस में हम उस के दुबारा आमद की नबुवत को देख सकते हैं I दूसरा कोई हज़रत इब्राहीम को शामिल करते हुए हज़रत मूसा और हज़रत मुहम्मद (सल्लम) इन में से कोई भी कुंवारी से पैदा नहीं हुए I तमाम बनी इंसान में से जो कभी पैदा हुए थे इस तरीक़े से दुनया में नहीं आए जिस तरीक़े से हज़रत ईसा दुनया में तशरीफ़ लाये सो अल्लाह तआला उसके पैदा होने कई सौ साल पहले ही उस के आने का निशाँ दे रहा था और हमें तय्यार कर रहा था कि कुंवारी के बेटे की आमद की बाबत कुछ बातें सेख जाएं I हम ख़ास तोर से दो बातें नोट करते हैं :

उस की मां उसका नाम ‘इम्मानुएल’ रखेगी

सब से पहले इस कुंवारी के बेटे का नाम उसकी मां की तरफ से ‘इम्मानुएल’ रखा जाएगा I इस नाम के लाफ्ज़ी मायने हैं ख़ुदा हमारे साथI मगर इसका क्या मतलब है ? इसके ग़ालिबन कई मायने थे , मगर जब इस नबुवत को शरीर बादशाहों के सामने एलान किया गया जिन का अल्लाह बहुत जल्द इंसाफ़ करने वाला था I एक ख़ास मतलब यह था कि  जब यह बेटा पैदा होने वाला होगा तो यह एक निशाँ था कि ख़ुदा इंसाफ की सूरत में आगे को उन के खिलाफ नहीं था बल्कि वह उन के साथ था I जब ईसा (अलैहिस्सलाम) पैदा हुए थे तो ऐसा लगता था कि दर असल अल्लाह ने बनी इस्राईल को छोड़ दिया था क्यूंकि उस वक़्त इसराईल में उनके दुशमन उनपर बादशाही करते थे I पर ऐसे हालात में कुंवारी से बेटे की पैदाइश एक निशान था कि ख़ुदा उन के साथ था I उन के खिलाफ़  नहीं था I लूक़ा की इंजील इस बात को क़लमबंद करती है कि बच्चे की मां ने (यानी कि मरयम ने) एक मुक़द्दस गीत गाया जब फ़रिश्ते ने उसके एक बेटा होने का पैग़ाम दिया I इस गीत को हम ज़ेल के हवाले में पाते हैं :

46 तब मरियम ने कहा, मेरा प्राण प्रभु की बड़ाई करता है।
47 और मेरी आत्मा मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर से आनन्दित हुई।
48 क्योंकि उस ने अपनी दासी की दीनता पर दृष्टि की है, इसलिये देखो, अब से सब युग युग के लोग मुझे धन्य कहेंगे।
49 क्योंकि उस शक्तिमान ने मेरे लिये बड़े बड़े काम किए हैं, और उसका नाम पवित्र है।
50 और उस की दया उन पर, जो उस से डरते हैं, पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।
51 उस ने अपना भुजबल दिखाया, और जो अपने आप को बड़ा समझते थे, उन्हें तित्तर-बित्तर किया।
52 उस ने बलवानों को सिंहासनों से गिरा दिया; और दीनों को ऊंचा किया।
53 उस ने भूखों को अच्छी वस्तुओं से तृप्त किया, और धनवानों को छूछे हाथ निकाल दिया।
54 उस ने अपने सेवक इस्राएल को सम्भाल लिया।
55 कि अपनी उस दया को स्मरण करे, जो इब्राहीम और उसके वंश पर सदा रहेगी, जैसा उस ने हमारे बाप-दादों से कहा था।

लूक़ा 1:46-55

आप देख सकते हैं कि मरयम को जब ख़बर पहुंचाया गया कि उसके बेटा होगा , हालाँकि वह कुंवारी थी , वह समझ गई थी कि खुदावंद ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) पर और उनकी नसल पर हमेशा के लिए रहम करने के लिए याद किया है I उसके इंसाफ़ का यह मतलब नहीं था कि अल्लाह आगे को फिर से बनी इसराईल के साथ कभी भी नहीं रहेगा I

कुंवारी का बेटा ‘बुराई का इनकार करता और भलाई का चुनाव करता है’

यसायाह में यह जो हैरत अंगेज़ नबुवत का हिस्सा है वह यह है कि यह लड़का दही और शहद खाएगा जब तक कि वह नेकी और बदी को रद्द ओ क़ुबूल के क़ाबिल हो I दुसरे  मायनों में यसायाह यह कह रहा है कि लड़का अपने शुऊर तक पहुच कर अपने ज़मीर के मुताबिक़ फ़ैसला लेने के क़ाबिल होगा I तब वह “नेकी और बदी के रद्द ओ क़ुबूल के काबिल हो जाएगा”I मेरा एक बेटा है I मैं उसको प्यार करता हूँ , मगर वह यक़ीनी तोर से इस काबिल नहीं कि गलत का इंकार करे और सही का चुनाव करे I इस के लिए मुझे और मेरी अहलिया को उस के पीछे पड़ना पड़ता है , सिखाना , याद दिलाना , डांटना , समझाना , नसीहत करना , मशवरा देना , एक नमूना बनना , तरबियत देना , अच्छे दोस्तों का इंतजाम करना , यह देखना कि क्या वोह एक मिसाली लड़का है कि नहीं वगैरा ताकि वह इस लायक़ हो जाए कि वह सही बातों का चुनाव करे और गलत का इनकार करे I और इन तमाम किये गए कोशिशों के बाद भी कोई ज़िम्मेदारी नहीं ले सकते I मां बाप होने के नारे जब मैं ऐसा करने की कोशिश कर रहा था तो यह मुझे अपने बचपन के ज़माने में ले गया जब मेरे मां बाप भी मुझे सिखाने के लिए कशमकश कर रहे थे ताकि मैं इस क़ाबिल हो जाऊं कि सही और ग़लत के बीच फ़ैसला कर सकूं I और अगर मांबाप अपने बच्चों के लिए कोशिश नहीं करते तो क़ुदरत पर छोड़ देते हैं तो बच्चा इस क़ाबिल नहीं रह जाता कि भाले और बुरे की तमीज़ कर सके I यह ऐसा होगा कि हम ‘दीनी अहमियत’ के लिए कशमकश कर रहे हों : जहाँ हम जैसे ही बंद करेंगे तो नीचे आजाएंगे I

इसी लिए हम अपने घरों और कमरों के दरवाजों पर ताले लगाते हैं ; क्यूँ हरेक मुल्क को पुलिस की ज़र्रत होती है ;क्यूँ हमारे बैंक की करवाई के लिए ख़ुफ़िया और पहचान के आंकड़े और अलफ़ाज़ की ज़रुरत होती है ; और क्यूँ तमाम मुल्कों में नए कानून नाफ़िज़ किये जाते हैं —- क्यूंकि हमें एक दूसरे के ख़िलाफ़ खुद की हिफाज़त करनी पड़ती है फिर भी हम बुराई का इनकार और भलाई का चुनाव नहीं करते हैं I

यहां तक कि नबी भी हमेशा ग़लत का इनकार और सही का चुनाव नहीं करते

और यह यहाँ तक कि यह बात नबियों कि बाबत सच है I तौरात कलमबंद करता है कि दो मौक़ों पर हज़रत इब्राहीम ने अपनी बीवी की बाबत झूट बोला कि वह उनकी बहिन थी (पैदाइश 12:10-13 —- 20:1-2) I यह बात भी क़लमबंद है कि हज़रत मूसा ने एक मिसरी का क़त्ल किया (ख़ुरूज 2:12) , और एक मौक़े पर उन्हों ने दुरुस्त तरीक़े से अल्लाह के हुक्म की ताबेदारी नहीं की (गिनती 20:6-12) I हज़रत मुहम्मद (सल्लम) को अल्लाह ने हुक्म फ़रमाया कि अपनी ग़लती के लिए मुआफ़ी मांगे (सूरा मुहम्मद सूरा 47) —- यह बताता है कि उन्हों ने खुद भी ग़लत का इनकार नहीं किया और सही का चुनाव नहीं किया I

  तो फिर समझ लो कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद नहीं और (हम से) अपने और ईमानदार मर्दों और ईमानदार औरतों के गुनाहों की माफ़ी मांगते रहो और ख़ुदा तुम्हारे चलने फिरने और ठहरने से (ख़ूब) वाक़िफ़ है

सूरा मुहम्मद 47:19

ज़ेल की हदीस जो मुस्लिम की है यह बताती है कि किस मुस्तेद्दी के साथ हज़रत मुहम्मद (सल्लम) ने मुआफ़ी के लिए दुआ की I

अबू मूसा अश्हरी ने अपने वालिद साहिब के इख्तियार पर रिपोर्ट दी कि अल्लाह के नबी मुहम्मद (सल्लम) ने इन अलफ़ाज़ के साथ मिन्नत की :”ऐ अल्लाह मेरी ग़लतियों , मेरी ला इल्मी , और मेरे सरोकार रखने में मेरी मियाना रवी को  मुआफ़ फरमाएं I और ऐ अल्लाह तू मेरे खुद से ज़ियादा मेरे मामलात से वाक़िफ़ है I ऐ अल्लाह जो खताएं मैं ने कीं हैं चाहे वह संजीदा तोर से , ग़ैर इरादी तोर से या आज़ादी से किये हों उन्हें बख्श दे I यह सारी कमियाँ मुझ में है I ऐ अल्लाह मेरी ख़ताएं बख्श दे चाहे मैं उजलत में लिहाज़ करते हुए किये हों या फिर पोशीदगी में या सरे आम किये हों I मेरी शख्सी ज़िन्दगी से बेहतर तू मेरी ख़ताओं से वाक़िफ़ है I तू अव्वल ओ आखिर ख़ुदा है , तू क़ादिर ए मुतलक़ ख़ुदा है I

मुस्लिम 35:6563

यह बिलकुल हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की दुआ की तरह है जब उन्हों ने अपने गुनाहों के लिए दुआ की थी I इसको हम इस तरह पढ़ते हैं :

”ऐ ख़ुदा अपनी शफ़क़त के मुताबिक़ मुझ पर रहम कर I अपनी रहमत कि कसरत के मुताबिक़ मेरी खताएं मिटा दे I मेरी बदी को मुझ से धो डाल और मेरे गुनाह से मुझे पाक कर I क्यूंकि मैं अपनी खताओं को मानता हूँ और मेरा गुनाह हमेशा मेरे सामने है I मैं ने फ़क़त तेरा ही गुनाह किया है और वह काम किया जो तेरी नज़र में बुरा है ताकि तू अपनी बातों में रास्त ठहरे और अपनी अदालत में बे ऐब रहे I देख मैं ने बदी में सूरत पकड़ी और मैं गुनाह की हालत में मां के पेट में पड़ा ……मेरे गुनाहों की तरफ़ से अपना मुंह फेर ले ले और मेरी सब बदकारी मिटा डाल I

ज़बूर शरीफ़ 51:1-9

सो हम देखते हैं कि यह लोग —- भले ही अंबिया थे —- गुनाह से जूझ रहे थे I गुनाह से वह मुआफ़ी मांगते थे क्यूंकि उन्हें मुआफ़ी की सख़त ज़रुरत थी I क्या यह ऐसा नहीं लगता कि गुनाह का मसला आदम की नसल के लिए (बनी आदम के लिए) एक आलमगीर मसला है I

कुंवारी का मुक़द्दस बेटा

मगरयह बेटा जो नबी यसायाह के ज़रिये नबुवत किया गया था I पैदा होने के शुरू से हीक़ुदरती तोर से ग़लत का इनकार करता और सही का चुनाव करता है I यह उस के लिए अन्दरूनी तहरीक थी I यह उस के लिए मुमकिन था इस लिए कि उसका सिलसिला ए नसब फ़रक होना था I दीगर तमाम अंबिया अपने अपने आबा ओ अजदाद के वसीले से थे , (नसब से थे) जो पीछे हज़रत आदम के ख़ाके की तरफ़ ले जाता है I और उसने “ग़लत का इनकार नहीं किया और सही का चुनाव नहीं किया था” जिसतरह हम ऊपर के बयानात में देख चुके हैं I जिसतरह बाप की फ़ितरत जिसमानी तनासुल के ज़रिये से उसकी औलाद में मुन्तक़ल होते हैं उसी तरह हज़रत आदम का यह बग़ावती फ़ितरत दुनया के तमाम लोगों में मुन्तक़ल हो गया था और यह यहाँ तक कि नबियों में भी फैल गया Iमगर जो कुंवारी से पैदा हुआ था नुमायाँ तोर पर एक बाप की तरह उसके सिलसिला ए नसब में आदम नहीं था I इस बेटे के आबा व अजदाद का सिलसिला फ़रक होना ज़रूरी था , इसलिए वह मुक़द्दस होगा I इसी लिए कुरान शरीफ़ जब मरयम के पास फ़रिश्ते के पैग़ाम की बाबत बताता है तो उसे “मुक़द्दस बेटा” करके हवाला देता है I

  (मेरे पास से हट जा) जिबरील ने कहा मैं तो साफ़ तुम्हारे परवरदिगार का पैग़मबर (फ़रिश्ता) हूँ ताकि तुमको पाक व पाकीज़ा लड़का अता करूँमरियम ने कहा मुझे लड़का क्योंकर हो सकता है हालाँकि किसी मर्द ने मुझे छुआ तक नहीं है औ मैं न बदकार हूँजिबरील ने कहा तुमने कहा ठीक (मगर) तुम्हारे परवरदिगार ने फ़रमाया है कि ये बात (बे बाप के लड़का पैदा करना) मुझ पर आसान है ताकि इसको (पैदा करके) लोगों के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी क़रार दें और अपनी ख़ास रहमत का ज़रिया बनायेंऔर ये बात फैसला शुदा है ग़रज़ लड़के के साथ वह आप ही आप हामेला हो गई फिर इसकी वजह से लोगों से अलग एक दूर के मकान में चली गई

सूरा 19:19 -22 सूरा मरयम

हज़रत यसायाह (अलैहिस्सलाम) का बयान बिलकुल साफ़ था और उसकी आगे की किताबें भी उस से रज़ामंद थीं—कि जो बेटा पैदा होने वाला था वह कुंवारी से होगा I इसतरह उस के कोई ज़मीनी बाप के न होने से उस में गुनाह की फ़ितरत नहीं थी और इस तेह वह ‘मुक़द्दस’ कहलाया I

जन्नत में हज़रत आदम की पिछली ज़ाहिरदारी

न सिर्फ़ बाद के आने वाली किताबें इस कुंवारी के बेटे की बाबत बताती हैं बल्कि यह भी बताती हैं कि उस का वजूद शुरू से ही था यानि कि वह पहले से ही मौजूद था I हम ने आदम कि निशानी में देखा था कि अल्लाह ने शैतान से  एक वायदे कि बात की थी कि ;

15 और मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करुंगा, वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा।

पैदाइश 3:15

अल्लाह ऐसा  इंतज़ाम करेगा कि इब्लीस और औरत कि एक नसल हो I इन दोनों के नसल के बीच दुश्मनी या नफ़रत होगी यानि औरत की नसल और शैतान की नसल के बीच I शैतान की नसल औरत की नसल को एढ़ी पर काटेगा और औरत की नसल शैतान के सर को कुचलेगा I इन रिश्तों को ज़ेल के नक्शे में देखा जा सकता है I

शख्सियतें और उनके ताल्लुक़ात जो अल्लाह के वायदे में जन्नत में दिए गए थे

बराए मेहरबानी नोट करें कि अल्लाह ने कभी भी आदमी को एक नसल का वायदा नहीं किया जिसतरह से वह औरत से करता है I यह बिलकुल ग़ैर मामूली है ख़ास तोर से बापों के ज़रिये तौरात ज़बूर और इंजील (अल किताब बाइबिल का वसीले से बेटों के होने पर जोर दिया गया है I डर असल इन किताबों की एक नुक्ता चीनी जो मौजूदा मगरीबी लोगों की तरफ़ से है कि उन्हों ने उस खून के रिश्ते को  नज़र अंदाज़ किया है जो औरतों से होकर जाती है I उन कि नज़रों में यह सब से ज़ियादा जिंसी है क्यूंकि यह सिर्फ़ आदमियों के बेटों पर धियान देते हैं I मगर यह मामला फ़रक है —– यहाँ नसल का वायदा एक (मुज़क्कर) नहीं है जो औरत से है I बल्कि यह वायदा सिर्फ़ यह कहता है कि आने वाला नसल , बगैर एक आदमी का ज़िक्र करते हुए एक औरत से होगा I

यसायाह का “कुंवारी का बेटा” औरत की नसल से है

अब यसायाह नबी की नबुवत जो कुंवारी से एक बेटे की बाबत है उसका ज़ाहिरी तनासुब बिलकुल साफ़ मायने रखता है I यहां तक कि बहुत अरसा पहले जिस नसल (बेटे) की बाबत कही वह सिर्फ़ एक औरत से ही होगी I (इसतरह यह कुंवारी को ज़ाहिर करता है I मैं आप को तवज्जा दिलाता हूँ कि आप पीछे जाएं और आदम की निशानी में इस बहस का मुताला करेंI इस ज़ाहिरी तनासुब में आप देखेंगे कि यह इस में माक़ूल बैठता है I तारीख़ के शुरू से लेकर अब तक आदम के तमाम बेटे इसी मसले से जूझ रहे हैं और वह मसला है “गलत का इनकार न करना और सही चुनाव न करना” जिस तरह हमारे बाप दादा ने किया था I जब अल्लाह ने देखा कि गुनाह दुनया में दाखिल हो चुका है तब उस ने वायदा किया कि एक शख्स आएगा जो आदम से नहीं होगा I वह मुक़द्दस होगा और वह शैतान का सर कुचलेगा I

मगर यह मुक़द्दस बेटा इसे कैसे करने जा रहा था ? अगर यह अल्लाह की तरफ़ से पैग़ाम देने वाली बात थी तो दीगर अंबिया जैसे हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) और हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पहले से ही ईमानदारी से पैग़ाम दे चुके होते I नहीं ! इस मुक़द्दस बेटे का किरदार फ़रक़ था मगर इसे समझने के लिए हमको ज़बूर ए शरीफ़ में आगे रुजू’  करने की ज़रुरत पड़ेगी I