किस तरह ज़बूर और नबियों ने ईसा अल मसीह की नबुवत की ?

नबी हज़रत मूसा की तौरात ने हज़रत ईसा अल मसीह की इलमे पेशीन को निशानत के जरिये ज़ाहिर किया है जो नबी के आने के ऐन मुताबिक़ थे I अँबिया जो मूसा नबी का पीछा कर रहे थे , उनहों ने अल्लाह के मंसूबे को तरतीब से बयान करने के ज़रिये बताया I हज़रत दाऊद ख़ुदा के ज़रिये इलहाम शुदा थे , और मसीह के आने की बाबत दूसरे ज़बूर जो उनहों ने पहली बार नबुवत की थी वह 1000 क़बल मसीह में हुई थी I फिर ज़बूर 22 में उनहों ने किसी के बारे में एक पैगाम हासिल किया जिसके हाथ और पाओं छेदे जाकर सताया गाया था , और फिर उसे ‘मौत की मिट्टी में सुला दिया गया था’ मगर उसके बाद एक बड़ी फ़तह हासिल करने के साथ ‘ज़मीन के खानदानों को मुतासिर करेगा’ I क्या यह नबुवत नबी ईसा अल मसीह के आने वाली मस्लूबियत और क़यामत की बाबत है ? इसके लिए हम दो सूरों पर गौर करेंगे कि वह क्या कहते हैं , सूरा सबा (सूरा 34) और सूरा अन – नमल (सूरा 27) हम से कहते हैं कि किस तरह अल्लाह ने हज़रत दाऊद को इल्हाम दी (मिसाल बतोर ज़बूर 22) I            

ज़बूर 22 की नबुवत

पूरे ज़बूर का मुताला आप यहाँ कर सकते हैं I ज़ेल की फ़ेहरिस्त में ज़बूर 22 के साथ साथ ईसा अल मसीह की मस्लूबियत का भी बयान है जो इंजील में उनके शागिरदों (साथियों) के ज़रिये उन की गवाही बतोर पेश की गई है I आयतों को रंग से मिलाया गया है ताकि मवाज़िनात को आसानी से नोट किया जा सके I  

   ज़बूर 22 –1000 क़ब्ल मसीह में लिखा गया
(मत्ती 27: 31—48)… और वह मसलूब करने उसे (ईसा) को ले गए….39 और राह चलने वाले सर हिला हिला कर उसको लान तान करते और कहते थे “… अपने तईं बचा –अगर तू ख़ुदा का बेटा है तो सलीब पर से उतर आ !“41 इसी तरह सरदार काहिन भी फ़क़ीहों और बुज़ुरगों के साथ मिलकर ठट्ठे से कहते थे 42 इसने औरों को बचाया –मगर अपने तईं नहीं बचा सकता!यह तो इसराईल का बादशाह है – अब सलीब पर से उतर आए तो हम इसपर ईमान लाएँ – 43 इसने ख़ुदा पर भरोसा किया है , अगर वह इसे चाहता है तो अब इसको छुड़ा ले ….46 और तीसरे पहर के क़रीब येसू ने बड़ी आवाज़ से चिल्ला कर कहा….”एली – एली । लमा शबक़तनी?” यानी “ऐ मेरे ख़ुदा ! ऐ मेरे ख़ुदा तू ने मुझे क्यूँ छोड़ दिया”?…48 और फ़ौरन उनमें से एक शख्स दौड़ा और स्पंज लेकर सिरके में डुबोया और सरकंडे पर रखकर उसे चुसाया ।                मरकुस 15:16-2016 और सिपाही उसको उस सहन में ले गए जो परिटूरियुन कहलाता है और सारी पलटन को बुला लाए – और उनहों ने उसे अरगुवानी चोगा पहनाया और काँटों का ताज बना कर उसके सर पर रखा ।18 और उसे सलाम करने लगे कि “ऐ यहूदियों के बादशाह आदाब !”19 और वह बार बार उसके सर पर सरकंडा मारते और उसपर थूकते और घुटने टेक टेक कर उसे सिजदा करते रहे ।20 और जब उसे ठट्टों में उड़ा चुके तो उसपर से अरगुवानी चोगा उतार कर उसी के कपड़े उसे पहनाए फिर उसे सलीब देने को बाहर ले गए...37 फिर येसू ने बड़ी आवाज़ से चिल्लाकर डैम दे दिया । (यूहनना 19:34) लेकिन जब उनहों ने येसू के पास आकर देखा कि वह मर चुका है तो उसकी टांगें न तोड़ीं …, एक सिपाही ने भाले से उसकी पसली छेदी और फ़िल्फ़ोर उससे ख़ून और पानी बह निकला….  (यूहनना 20:25)[तोमा] जब तक मैं उसके हाथों में मेखों के सूराख़ न देख लूँ ….”… यूहनना19:23-24 जब सिपाही येसू को मसलूब कर चुके उसके कपड़े लेकर चार हिस्से किए –हर सिपाही के लिए एक हिस्सा और उसका कुर्ता भी बचे हुए कपड़ों के साथ लिया … यह कुर्ता बिन सिला सरासर बुना हुआ था , इसलिए कहा कि “इसे फाड़ें नहीं बल्कि आओ हम इस पर क़ुरा डालें –’’      1 ऐ मेरे ख़ुदा ! ऐ मेरे ख़ुदा ! तूने मुझे क्यूँ छोड़ दिया ? तू मेरी मदद और मेरे नाला व फ़रयाद से क्यूँ दूर रहता है ? 2 ऐ मेरे ख़ुदा ! मैं दिन को पुकारता हूँ पर तू जवाब नहीं देता और रात को भी खामोश नहीं होता… 7 वह सब जो मुझे देखते हैं मेरा मज़हका उड़ाते हैं ; वह मुंह चिड़ाते –वह सिर हिला हिला कर कहते हैं 
8 अपने को ख़ुदावंद के सुपुर्द करदे –वही उसे छुड़ाए – जबकि वह उससे खुश है तो वही उसे छुड़ाए – 9 पर तू ही मुझे पेट से बाहर लाया – जब मैं शीरखार ही था तूने मुझे त्वककुल करना सिखाया ।
10 मैं पैदाइश ही से तुझ पर छोड़ा गया –मेरी मां के पेट ही से तू मेरा ख़ुदा है 12 बहुत से सांडों ने मुझे घेर लिया है – बसन के ज़ोरावर सांड मुझे घेरे हुए हैं – 13 वह फाड़ने और गरजने वाले बबर की तरह मुझ पर अपना मुंह पसारे हुए हैं – 14 मैं पानी की तरह बह गया । मेरी सब हड्डियाँ उखड़ गईं । मेरा दिल मोम की मानिंद हो गया – वह मेरे सीने में पिघल गया । 15 मेरी क़ुव्वत ठीकरे की मानिंद ख़ुश्क हो गयी और मेरी ज़बान तालू से चिपक गई और तूने मुझे मौत की ख़ाक में मिला दिया।16 क्यूंकि कुत्तों ने मुझे घेर लिया है बदकारों की गुरूह मुझे घेरे हुए है । 17 मैं अपनी सब हड्डियाँ गिन सकता हूँ वह मुझे ताकते और घूरते हैं –18 वह मेरे कपड़े आपस में बाँटते हैं और मेरी पोशाक पर क़ुरा डालते हैं ।
           

इंजीले शरीफ को चश्म दीद गवाहों के ज़ाहिरी तनासुब से लिखा गया है जिन्हों ने मस्लूबियत को अज़हद ग़ौर से देखा था I मगर ज़बूर 22 किसी के ज़ाहिरी तनासुब से लिखा गया जो उसका तजरूबा कर रहा था I अब सवाल यह है कि ज़बूर 22 और के ईसा अल मसीह की मस्लूबियत के मवाज़िने को कैसे समझाया जाए ? यह मुताबिक़त ज़रूर है कि तफ़सील हूबहू मिलते जुलते हैं जिस तरह शामिल करने के लिए कि कपड़े बांटे गए थे I (सिले हुए कपड़ों को फाड़ा गया था और बिन सिले को सिपाहियों में दे दिया गया था) और (बहुत कुछ बिन सिले कपड़े रह जाते और बर्बाद होजाते सो उनहों ने उनका क़ुरा डाला) I ज़बूर 22 जो कि  मस्लूबियत से पहले लिखी गई थी इसकी खोज की गई थी मगर इस की खास तफ़सीलें (हाथों पाओं को छेदा जाना, और उस की हड्डियों का जोड़ों से उखड़ जाना इस बात का सबूत है कि उसके दोनों हाथ लंबे किए गए थे जिस तरह दीगर मुजरिमों के हाथ लंबी किए जाते हैं) इस के अलावा यूहनना की इंजील बयान करती है कि जब मसीह की पसली में नेज़े से छेदा गया था तो खून और पानी बह निकला था जो इस बात का इशारा करता है कि दिल के आस पास सयाल जुज़ो का जमा हो जाना यह दिल के धड़कन के रुकने की निशानी है I इस तरह ईसा अल मसीह की मौत दिल की धड़कन रुक जाने के सबब से हुई थी I यह ज़बूर 22 के बयान से मेल खाता है की “मेरा दिल मोम में तब्दील हो गया I छेदे जाने के  लिए इबरानी का जो लफ़्ज़ है उसके सही मायने हैं जैसे बबर शेर के हमले से इंसान का जिस्म छिद जाता है वैसे ही है I दूसरे मायनों में हाथ और पाओं को काट डालना (बेकार कर देना) या बबर शेर के ज़रिये बुरी तरह मार कर ज़ख्मी करदेना, खराब कर देना वग़ैरा है I जब किसी के हाथ पैर छेदे जाते हैं ऐसी ही हालत हो जाती है I

ग़ैर ईमानदार जवाब देते हैं कि ज़बूर 22 की यक्सानियत चश्मदीद गवाहों के साथ जो इंजील मेन बयान किया गया है डबल्यूएच शायद इस वजह से क्यूंकि ईसा अल मसीह के शागिरदों ने वाक़िए को नबुवत के तोर बतोर बनाया I क्या वह यकसानियत को समझा सकती है ?      

ज़बूर 22 और ईसा अल मसीह की विरासत

मगर ज़बूर 22 मज़कूरे बाला फ़ेहरिस्त के मुताबिक 18 आयत के साथ खतम नहीं होती –बल्कि वह जारी रहती है I यहाँ नोट करें कि इसके ख़ातिमे पर –। मौत के बाद कितनी शानदार फ़तह होती है I       

26 नम्र लोग भोजन करके तृप्त होंगे; जो यहोवा के खोजी हैं, वे उसकी स्तुति करेंगे। तुम्हारे प्राण सर्वदा जीवित रहें!
27 पृथ्वी के सब दूर दूर देशों के लोग उसको स्मरण करेंगे और उसकी ओर फिरेंगे; और जाति जाति के सब कुल तेरे साम्हने दण्डवत करेंगे।
28 क्योंकि राज्य यहोवा की का है, और सब जातियों पर वही प्रभुता करता है॥
29 पृथ्वी के सब हृष्टपुष्ट लोग भोजन करके दण्डवत करेंगे; वह सब जितने मिट्टी में मिल जाते हैं और अपना अपना प्राण नहीं बचा सकते, वे सब उसी के साम्हने घुटने टेकेंगे।
30 एक वंश उसकी सेवा करेगा; दूसरा पीढ़ी से प्रभु का वर्णन किया जाएगा।
31 वह आएंगे और उसके धर्म के कामों को एक वंश पर जो उत्पन्न होगा यह कहकर प्रगट करेंगे कि उसने ऐसे ऐसे अद्भुत काम किए॥

ज़बूर 22:26-31

यह इस शख़्स की मौत की तफ़सील की बाबत बात नहीं करता I वह ज़बूर के शुरू में सुलूक या बरताव का किया जाना था I अब नबी हज़रत दाऊद आगे मुसतक़बिल की तरफ़ देख रहे हैं और इस शख़्स की मौत के ता’ससुर की तरफ़ और आयनदा की मुस्तक़बिल की नस्लों की तरफ़ मुख़ातब होता है (आयत 30) I यानी कि हम जो ईसा अल मसीह के 2000 बाद रह रहे हैं I हज़रत दाऊद हम से कहते हैं कि आयनदा की नसलें जो इस शख़्स का पीछा करती हैं वह शख़्स जिसके ‘हाथ और पाँव छिदे होंगे’, जो ऐसी शिद्दतनाक मौत मरता है जिसकी ‘ख़िदमत की जाएगी’ और उसकी चर्चा होगी I आयत 27 तरक़्क़ी (फैलाव) की बाबत पेश बीनी करता है – यह फैलाव ‘दुन्या के आख़िर तक’ ‘तमाम क़ौमों के ख़ानदानों तक’ पहुंचेगा, और यह उनके लिए ‘ख़ुदावंद की तरफ़ फिरने’ का सबब बनेगा I आयत 29 इशारा करती है कि किस तरह ‘वह लोग जो खुद को ज़िंदा नहीं रख सकते हैं’ (हम सब के सब) एक दिन उसके सामने घुटने टेकेंगे I इस शख्स की रास्तबाज़ी का लोगों में मनादी की जाएगी जिन का वजूद उस ज़माने तक नहीं हुआ था जिस ज़माने में उसकी मौत हुई थी I

इसका इस ज़माने की इंतिहा से कुछ लेना देना नहीं था चाहे इंजील शरीफ़ ज़बूर 22 से मेल खाता था या नहीं I क्यूंकि यह अभी इसका बरताव बाद के वाक़ियात से है ।।। जो हमारे ज़माने के लोग हैं I इंजील शरीफ़ के मुसन्निफ़ जो पहली सदी में थे वह ईसा अल मसीह की मौत का ताससुर हमारे ज़माने में न दे सके थे I ग़ैर ईमानदारों की अक़लियत का रंग चढ़ना एक लंबे दौर को नहीं समझाता, ईसा अल मसीह की आलमगीर विरासत का जिसका 22 ज़बूर में मुनासिब तोर से पेश बीनी की गई है वह 3000 साल पहले की गई थी I           

क़ुरान शरीफ़ – दाऊद को इलमे पेशीन अल्लाह के ज़रिये दी गई  

ज़बूर 22 के आख़िर में फ़ातिहाना हमद ओ ता’रीफ़ बिलकुल वैसा ही है जो क़ुरान शरीफ़ के सूरा सबा और सूरा अन नमल (शेबा 34 और 27 चींटी) में ज़िकर किया गया है कि हज़रत दाऊद को ज़बूर लिखने के लिए इल्हाम किया गया था I    

और हमने यक़ीनन दाऊद को अपनी बारगाह से बुर्जुग़ी इनायत की थी (और पहाड़ों को हुक्म दिया) कि ऐ पहाड़ों तसबीह करने में उनका साथ दो और परिन्द को (ताबेए कर दिया) और उनके वास्ते लोहे को (मोम की तरह) नरम कर दिया था

सूरा सबा 34:10

और हमने यक़ीनन दाऊद को अपनी बारगाह से बुज़ुर्गी इनायत की थी (और पहाड़ों को हुक्म दिया) कि ऐ पहाड़ों तसबीह करने में उनका साथ दो और परिन्द को (ताबेए कर दिया) और उनके वास्ते लोहे को (मोम की तरह) नरम कर दिया था

 और इसमें शक नहीं कि हमने दाऊद और सुलेमान को इल्म अता किया और दोनों ने (ख़ुश होकर) कहा ख़ुदा का शुक्र जिसने हमको अपने बहुतेरे ईमानदार बन्दों पर फज़ीलत दी

सूरा अन–नमल 27:15

और इसमें शक नहीं कि हमने दाऊद और सुलेमान को इल्म अता किया और दोनों ने (ख़ुश होकर) कहा ख़ुदा का शुक्र जिसने हमको अपने बहुतेरे ईमानदार बन्दों पर फज़ीलत दी

जिस तरह से यह दोनों सूराजात कहते हैं कि अल्लाह ने हज़रत दाऊद को हिकमत और फज़ल दिया कि उस हिकमत से उनहों ने ज़बूर 22 में हमद ओ तारीफ़ के गीत गाए I   

अब इस सवाल पर ग़ौर करें जो सूरा अल वाक़िया में पेश किया गया है (सूरा 56 – ना गुज़ीर वाक़िया) I   

 तो क्या जब जान गले तक पहुँचती हैऔर तुम उस वक्त (क़ी हालत) पड़े देखा करते होऔर हम इस (मरने वाले) से तुमसे भी ज्यादा नज़दीक होते हैं लेकिन तुमको दिखाई नहीं देतातो अगर तुम किसी के दबाव में नहीं होतो अगर (अपने दावे में) तुम सच्चे हो तो रूह को फेर क्यों नहीं देते

सूरा अल – वाक़िया 56:83-87

कौन मौत से अपनी जान को वापस बुला सकता है ? यह दावा इस बतोर है कि इंसान के काम को अल्लाह के काम से अलग करदे I इसके बावजूद भी सूरा अल..वाक़िया वही बात पेश कर रहा है जो ज़बूर 22 में बयान किया गया है I हज़रत दाऊद ने जो हज़रत ईसा अल मसीह की बाबत जो बयान दी उसको उनहों ने पेशबीनी या नबुवत के ज़रिये दीI  

जिस तरह से ज़बूर 22 में नबी हज़रत ईसा अल मसीह की असरदार मस्लूबियत का ज़िकर पाया जाता है इस से बेहतर तरीक़े से कोई पेशबीनी नहीं कर सकता I दुनया की तारीख़ में ऐसा कौन शख़्स है जो उसकी मौत की तफ़सीलात पेश करने का दावा करे जिस बतोर उसकी ज़िन्दगी की विरासत मुस्तक़्बिल की दूरी में चली जाए और दूनया में उसके वजूद के1000 साल पहले पेशबीनी की जाए ? जबकि कोई भी इंसान दूर मुस्तक़्बिल की बातों का इतनी तफ़सील से पेशगोई करे टीओ इससे यह साबित होता है कि ईसा अल मसीह की क़ुरबानी ख़ुदा के आज़ाद मनसूबे और इलमे पेशीन के ज़रिये ही मुमकिन थी I       

दीगर अंबिया ईसा अल मसीह की क़ुरबानी की बाबत पेश बीनी करते हैं

जिस तरह तौरात शरीफ़ ने आईने की तसवीर के साथ ईसा अल मसीह के आख़री दिनों के वाक़ियात के साथ शुरू किया और फिर तसवीर को और ज़ियादा सफ़ाई से आगे की तफ़सील पेश की, और अंबिया जिन्हों ने हज़रत दाऊद का पीछा किया उनहों ने भी ईसा अल मसीह की मौत और क़ियामत को और ज़ियादा सफ़ाई के साथ तफ़सीलें पेश की I ज़ेल की फ़ेहरिस्त उन बातों का ख़ुलासा पेश करती है जिनपर हम ने ग़ौर करके मुताला किया है I   

अंबिया कलाम करते हैं वह किसतरह आने वाले मसीह के मनसूबे को ज़ाहिर किया   
कुंवारी से पैदा होने की निशानी ‘एक कुंवारी बेटा जनेगी’ इस की पेशीन गोई नबी हज़रत यसायाह ने 700 क़बल मसीह में की थी और यह भी कि वह बग़ैर गुनाह के जिएगा I जिस की कामिल ज़िन्दगी हो वही दूसरों के लिए क़ुरबानी दे सकता है I इसी सोच के मातहत ही उस नबुवत की तामील में होकर ईसा अल मसीह पैदा हुए और एक पाक ज़िन्दगी गुज़ारी I     
आने वाली ‘शाख़’ की नबूवत हुई ईसा के नाम से जो हमारे गुनाहों की मौक़ूफ़ी है   नबी यसायाह , यरमियाह और ज़करियाह ने उस आने वाले की बाबत नबूवतों का एक सिलसिला अता किया जिसको नबी ज़करियाह ने ईसा की पैदाइश के 500 साल पहले ही ईसा करके सही नाम दिया I उन्हों ने नबुवत की कि ‘एक दिन’ उसके ईमानदारों के गुनाह मौक़ूफ़ किए जाएंगे I इन तमाम नबुवतों को पूरा करते हुए ईसा नबी ने ख़ुद की क़ुरबानी पेश की ताकि एक दिन उसपर ईमान लाने वालों के गुनाहों का कफ़्फ़ारा हो सके I         
नबी दानिएल और आने वाले मसीह का वक़्त   नबी दानिएल ने नबुवत की और मसीह के आने का ठीक 480 सालों का एक नक्शा।ए।औक़ात पेश किया I ईसा अल मसीह की आमद नबुवत के ऐन मुताबिक़ हुई I      
नबी दनिएल ने यह भी नबुवत की कि मसीह ‘काट डाला जाएगा’  मसीह के आने के बाद, दानिएल नबी ने लिखा कि वह ‘काट डाला जाएग और उसका कुछ भी बाक़ी न रहेगा’ I ईसा अल मसीह के आने वाली मौत कि बाबत यह एक नबुवत थी कि वह ज़िन्दगी से काट डाला गया था I   
नबी यसायाह आने वाले ख़ादिम की मौत और क़यामत की बाबत पेशगोई करते हैं   नबी यसायाह ने बड़ी तफ़सील के साथ पेश गोई की कि किस तरह मसीह ‘ज़िनदों की ज़मीन से काट डाला जाएग’ इसके साथ ही यह भी पेश गोई की कि वह सताया जाएग, रद्द किया जाएगा , हमारे गुनाहों की ख़ातिर ज़ख़्मी किया जाएगा, बररे की तरह ज़बह करने को ले जाया जाएगा, उसकी ज़िन्दगी गुनाहों की क़ुरबानी साबित होगी , मगर उसके बाद वह अपनी ज़िन्दगी दोबारा देखेगा और फ़तहयाब होगा I यह तमाम मुफ़स्सिल पेश बीनियाँ तब पूरी हुईं जब ईसा अल मसीह मसलूब हुए और मुरदों में से जी उठे I इस तरह की तफ़सीलें जिन की पेश गोई 700 साल पहले हुई थी एक बड़ी निशानी है जिसका अल्लाह ने मनसूबा किया था I          
 नबी यूनुस और ईसा अल मसीह की मौत   नबी यूनुस ने क़बर का तजुरबा जब वह एक बड़ी मछ्ली के पेट मे थे I यह एक तसवीर थी कि ईसा अल मसीह ने समझाया कि इसी तरीक़े से वह ख़ुद भी मौत का तजुरबा करेंगे I    
नबी ज़करियाह और मौत के असीरी से आज़ाद किया जाना  ईसा अल मसीह नबी ज़करियाह की एक नबुवत का हवाला पेश करते हैं कि वह ‘मौत के असीरों’ को आज़ाद करेंगे (यानी वह जो पहले से मुर्दा हैं) उनकी ख़िदमत यह होगी कि वह मौत में दाख़िल होंगे और जो फंसे हुए हैं उन्हें आज़ाद करेंगे जिस तरह नबियों के ज़रिये पेश गोई की गई थी I     

इन बहुत सी नबुवतों के साथ नबियों से जिन्हों ने ख़ुद सदियों साल पहले मुख़तलिफ़ मुल्कों में रहते हुए , मुखतलिफ़ गोशा–ए।गुमनामी के होते हुए भी उन सब ने ईसा अल मसीह की बड़ी फ़तह की कुछ हिस्सों की बाबत पेश गोई की जो उन की मौत और क़यामत के वसीले से थी I यह इस बात का सबूत है कि यह अल्लाह के मनसूबे के मुताबिक़ था I इसी सबब से पतरस जो ईसा अल मसीह के शागिर्दों का रहनुमा था, अपने सामईन से कहा :        

  18 परन्तु जिन बातों को परमेश्वर ने सब भविष्यद्वक्ताओं के मुख से पहिले ही बताया था, कि उसका मसीह दु:ख उठाएगा; उन्हें उस ने इस रीति से पूरी किया।

आमाल 3:18

इस बात को कहने के फ़ौरन बाद, फिर उसने ऐलान किया : 

  19 इसलिये, मन फिराओ और लौट आओ कि तुम्हारे पाप मिटाए जाएं, जिस से प्रभु के सम्मुख से विश्रान्ति के दिन आएं।

आमाल 3:19

हमारे लिए एक बरकत का वायदा है कि अब हम अपने गुनाहों को मिटा सकते, धो सकते हैं I इसके क्या मायने हैं इसे हम यहाँ देखते हैं I