ईसा अल मसीह तमसीलों के साथ तालीम देते हैं

हम ने देखा कि किस तरह हज़रत ईसा अल मसीह ने अपने बे मिसल इख्तियार के साथ तालीम दी I उनहों ने कहानी का इस्तेमाल करते हुए भी तालीम दी जो बुनयादी उसूलों की तमसीलें थी I मिसाल के तोर पर हम ने देखा कि उनहों ने किस तरह एक बड़ी शादी की ज़ियाफ़त की कहानी का इस्तेमाल करते हुए खुदा की बादशाही की बाबत तालिम दी , और किस तरह बे रहम नौकर की कहानी के ज़रिये मु आफ़ी की बाबत तालीम दी I इन्हीं कहानियों को तमसीलें कही जाती हैं I अब इस लिए कि हज़रत ईसा अल मसीह तमाम नबियों में बे मिसल हैं देखा गया है कि तालीम देने के लिए उनहों ने कितना ज़ियादा तमसीलों का इस्तेमाल किया और किस तरह उनकी तमसीलें वार करने वाली तमसीलें हैं I

सूरा अल-‘अनकबूत’(सूरा 29 – मकड़ी) हम से कहता है कि अल्लाह तआला भी तमसीलों का इस्तेमाल करता है वह कहता है :

और हम ये मिसाले लोगों के (समझाने) के वास्ते बयान करते हैं और उन को तो बस उलमा ही समझते हैं

सूरा अल – अनकबूत 29:43

सूरा ‘इबराहीम’ (सूरा 14) हम से कहता है अल्लाह तआला किस तरह हमको सिखाने ने के लिए एक दरख़्त कि तमसील का इस्तेमाल करता है I

   (ऐ रसूल) क्या तुमने नहीं देखा कि ख़ुदा ने अच्छी बात (मसलन कलमा तौहीद की) वैसी अच्छी मिसाल बयान की है कि (अच्छी बात) गोया एक पाकीज़ा दरख्त है कि उसकी जड़ मज़बूत है और उसकी टहनियाँ आसमान में लगी होअपने परवरदिगार के हुक्म से हर वक्त फ़ला (फूला) रहता है और ख़ुदा लोगों के वास्ते (इसलिए) मिसालें बयान फरमाता है ताकि लोग नसीहत व इबरत हासिल करेंऔर गन्दी बात (जैसे कलमाए शिर्क) की मिसाल गोया एक गन्दे दरख्त की सी है (जिसकी जड़ ऐसी कमज़ोर हो) कि ज़मीन के ऊपर ही से उखाड़ फेंका जाए (क्योंकि) उसको कुछ ठहराओ तो है नहीं

सूरा इब्राहीम 14:24-26

ईसा अल मसीह की तमसीलें

उसके शागिर्दों ने एक मोक़े पर उससे पूछा कि वह तमसीलों का इस्तेमाल क्यूँ करते हैं ? सो उनहों ने जो जवाब दिया उसकी वज़ाहत इंजील में क़लमबंद किया गया है I

10 और चेलों ने पास आकर उस से कहा, तू उन से दृष्टान्तों में क्यों बातें करता है?
11 उस ने उत्तर दिया, कि तुम को स्वर्ग के राज्य के भेदों की समझ दी गई है, पर उन को नहीं।
12 क्योंकि जिस के पास है, उसे दिया जाएगा; और उसके पास बहुत हो जाएगा; पर जिस के पास कुछ नहीं है, उस से जो कुछ उसके पास है, वह भी ले लिया जाएगा।
13 मैं उन से दृष्टान्तों में इसलिये बातें करता हूं, कि वे देखते हुए नहीं देखते; और सुनते हुए नहीं सुनते; और नहीं समझते।

मत्ती 13:10-13

इसका आख़री जुमला नबी हज़रत यसायाह के अलफ़ाज़ थे जो 700 क़बल मसीह में रहा करते थे और उनहों ने उनपर अफ़सोस ज़ाहिर किया जो अपने दिलों को सख्त करते हैं I दूसरे लफ़्ज़ों में हम कभी कभी कुछ बातें नहीं समझ पाते क्यूंकि हम उसकी शरह से चूक जाते हैं या फिर उसे समझने के लिए बहुत ज़ियादा पेचीदा हो जाते हैं I ऐसी हालत में एक साफ़ वज़ाहत उलझन को दूर कर देती है I मगर दीगर औकात होते हैं जब हम बातों को समझ नहीं पाते हैं I इसका सबब यह होता है कि हम दिल की गहराई में इन बातों को उतारने के लिए तयार नहीं होते हैं I हम फलां बात से राज़ी नहीं होते इसलिए हम लगातार सवाल करते रहते हैं जैसे दमागी तोर से समझने के लिए रुकावट बन गया हो I पर अगर उलझन हमारे दिलों में है, दमाग में नहीं है तब तो फिर किसी तरह की वज़ाहत काफ़ी नहीं है I ऐसी हालत में परेशानी यह है कि हम खुद को सौंपने के लिए रज़ामंद नहीं हैं , न तो हम दमागी तोर से समझते हैं I

जब नबी हज़रत ईसा अल मसीह ने तमसीलों में तालीम दी तो लोगों की भीड़ पर काफ़ी अच्छा असर पड़ा I लोग दंग रह जाते थे कि इसको यह इल्म कहाँ से आया I वह लोग जो सादे तोर से अपने दमागी ताक़त उसकी बातें नहीं समझते थे , वह कहानी के मुश्ताक़ रहते और आगे की बाबत पूछते, समझ हासिल करते थे I जबकि वह लोग जो सुपुर्द करने लिए रज़ामंद नहीं थे वह कहानी से हिक़ारत और गैर दिलचस्पी के साथ सबक लेते और वह आगे की बातें जानने की कोशिश नहीं करते थे I तमसीलों का इस्तेमाल एक तरीक़ा था उस्तादों के लिए कि वह लोगों को उनकी इलमियत के हिसाब से तक़सीम करे जिस तरह एक किसान गहूँ को पिछोड्ने के ज़रिये भूसी से अलग करता है I जो लोग सुपुर्दगी के लिए रज़ामंद थे वह उन लोगों से अलग किए जाते थे I और जो रज़ामंद नहीं थे वह तमसील को उलझा हुआ पाते थे क्यूंकि उनके दिल उस सच्चाई के सुपुर्द होने के लिए रज़ामंद नहीं थे ताकि वह देखते हुए भी न देखें I

बीज बोने वाले की तमसील और चार तरह की ज़मीन

जब शागिर्द हज़रत ईसा अल मसीह से तमसीलों से तालीम देने की बाबत सवाल पूछ रहे थे I उसने खुदा की बादशाही की तालीम दी कि वह आदमियों पर कैसे असर करती है तो पहले असर की बाबत मत्ती का बयान इस तरह है :

3 और उस ने उन से दृष्टान्तों में बहुत सी बातें कही, कि देखो, एक बोने वाला बीज बोने निकला।
4 बोते समय कुछ बीज मार्ग के किनारे गिरे और पक्षियों ने आकर उन्हें चुग लिया।
5 कुछ पत्थरीली भूमि पर गिरे, जहां उन्हें बहुत मिट्टी न मिली और गहरी मिट्टी न मिलने के कारण वे जल्द उग आए।
6 पर सूरज निकलने पर वे जल गए, और जड़ न पकड़ने से सूख गए।
7 कुछ झाड़ियों में गिरे, और झाड़ियों ने बढ़कर उन्हें दबा डाला।
8 पर कुछ अच्छी भूमि पर गिरे, और फल लाए, कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना।
9 जिस के कान हों वह सुन ले॥

मत्ती 13:3-9

तो फिर इस तमसील के क्या मायने हैं ? हमको अंदाज़ा लगाना नहीं है I जबकि वह लोग जो कलाम के सुपुर्द होने के लिए रज़ामंद थे वह तमसील के ज़रिये क़यास करने लगे और उसका मतलब पूछने लगे जो उसने दी थी :

 18 सो तुम बोने वाले का दृष्टान्त सुनो।
19 जो कोई राज्य का वचन सुनकर नहीं समझता, उसके मन में जो कुछ बोया गया था, उसे वह दुष्ट आकर छीन ले जाता है; यह वही है, जो मार्ग के किनारे बोया गया था।
20 और जो पत्थरीली भूमि पर बोया गया, यह वह है, जो वचन सुनकर तुरन्त आनन्द के साथ मान लेता है।
21 पर अपने में जड़ न रखने के कारण वह थोड़े ही दिन का है, और जब वचन के कारण क्लेश या उपद्रव होता है, तो तुरन्त ठोकर खाता है।
22 जो झाड़ियों में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनता है, पर इस संसार की चिन्ता और धन का धोखा वचन को दबाता है, और वह फल नहीं लाता।
23 जो अच्छी भूमि में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनकर समझता है, और फल लाता है कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना।

मत्ती 13:18-23

खुदा की बादशाही की बाबत पैगाम सुनने के बाद लोगों के दिलों में चार तरह से नतीजे हासिल होते हैं I पहला है पैगाम को ‘न समझने’ का नतीजा क्यूंकि शैतान (इबलीस) इस पैगाम को उनके दिलों से छीन ले जाता है I बचे हुए तीन नतीजे पहले तो असबाती नज़र आते हैं और वह पैगाम को खुशी से क़बूल तो कर लेते हैं मगर उस पैगाम को चाहिए कि हमारे दिलों में तरक़्क़ी करे चाहे वह मुश्किल औक़ात हि क्यूँ न हों I दूसरी बात यह है कि इस पैगाम को अपने दमाग में बसा लेना ही काफ़ी नहीं है बल्कि उसको हमारी ज़िंदगियों में लगातार जारी रहने की ज़रूरत है जैसे हम चाहते हैं I सो दो तरह के यह नतीजे , हालांकि वह शुरू शुरू में पैगाम को हासिल तो कर लेते हैं मगर अपने दिल में उसे पनपने नहीं देते I सिर्फ चौथा दिल है जो कलाम को सुनता है और उसे समझता भी है I वह खुद को इस बतोर सुपुर्द करता है जैसे अल्लाह उससे तवक़्क़ो रखता है I

इस तमसील की बाबत एक बात यह है कि यह हमको सवाल करने पर मजबूर करता है कि ‘उन चार अशखास मे से मैं कौन हूँ’ ? या यूं समझें कि पैगाम सुनने वालों की चार जमाअत में से ‘मैं कौन सी जमाअत में शामिल हूँ’ ? सिर्फ वह जमाअत जो सच मुच में तमसील को ‘समझती’ है I यानी कि सब से बहतरीन ज़मीन जिस में फ़सल उगाने से अच्छी फ़सल देगा I (यहाँ फ़सल से मुराद कलाम की फ़सल से है) I पैगाम को समझने में जो बात क़ुव्वत बख्शती है वह है उस पर गौर करना जो पहले के नबियों यानि कि हज़रत आदम के साथ खुदा के मंसूबे की शुरुआत हुई थी और यह आगे बढ़ कर तौरेत और ज़बूर के नबियों में जारी रही I आदम के बाद तौरेत में अहम निशानियाँ , हज़रत इब्राहिम से किए गए वायदों और उसकी कुर्बानी से , हज़रत मूसा के दस अहकाम , हज़रत हारून के ज़बीहे यह सब के सब मसीह की कुर्बानी के अक्स और इब्तिदा हैं I इन्हें समझने के लिए इन इब्तिदाई बातों को समझना ज़रूरी है I इसके साथ ही यसायाह ,यरम्याह , ज़करियाह , दानिएल और मलाकी के मुकशफ़े यह भी हमें खुदा की बादशाही के पैगाम को समझने के लिए तयार करती हैं I

जंगली दानों की तमसील

इस तमसील की वज़ाहत के बाद नबी हज़रत ईसा अल मसीह ने जंगली दानों की तमसील की बाबत सिखाया I

 24 उस ने उन्हें एक और दृष्टान्त दिया कि स्वर्ग का राज्य उस मनुष्य के समान है जिस ने अपने खेत में अच्छा बीज बोया।
25 पर जब लोग सो रहे थे तो उसका बैरी आकर गेहूं के बीच जंगली बीज बोकर चला गया।
26 जब अंकुर निकले और बालें लगीं, तो जंगली दाने भी दिखाई दिए।
27 इस पर गृहस्थ के दासों ने आकर उस से कहा, हे स्वामी, क्या तू ने अपने खेत में अच्छा बीज न बोया था फिर जंगली दाने के पौधे उस में कहां से आए?
28 उस ने उन से कहा, यह किसी बैरी का काम है। दासों ने उस से कहा क्या तेरी इच्छा है, कि हम जाकर उन को बटोर लें?
29 उस ने कहा, ऐसा नहीं, न हो कि जंगली दाने के पौधे बटोरते हुए उन के साथ गेहूं भी उखाड़ लो।

मत्ती 13 : 24 — 29

जो उसने वज़ाहत पेश की वह इस तरह से है :

  36 तब वह भीड़ को छोड़ कर घर में आया, और उसके चेलों ने उसके पास आकर कहा, खेत के जंगली दाने का दृष्टान्त हमें समझा दे।
37 उस ने उन को उत्तर दिया, कि अच्छे बीज का बोने वाला मनुष्य का पुत्र है।
38 खेत संसार है, अच्छा बीज राज्य के सन्तान, और जंगली बीज दुष्ट के सन्तान हैं।
39 जिस बैरी ने उन को बोया वह शैतान है; कटनी जगत का अन्त है: और काटने वाले स्वर्गदूत हैं।
40 सो जैसे जंगली दाने बटोरे जाते और जलाए जाते हैं वैसा ही जगत के अन्त में होगा।
41 मनुष्य का पुत्र अपने स्वर्गदूतों को भेजेगा, और वे उसके राज्य में से सब ठोकर के कारणों को और कुकर्म करने वालों को इकट्ठा करेंगे।
42 और उन्हें आग के कुंड में डालेंगे, वहां रोना और दांत पीसना होगा।
43 उस समय धर्मी अपने पिता के राज्य में सूर्य की नाईं चमकेंगे; जिस के कान हों वह सुन ले॥

मत्ती 13 : 36 – 43

राई का दाना और ख़मीर की तमसीलें

नबी हज़रत ईसा अल मसीह ने कुछ और मुख़तसर तमसीलें भी सिखाईं I

 31 उस ने उन्हें एक और दृष्टान्त दिया; कि स्वर्ग का राज्य राई के एक दाने के समान है, जिसे किसी मनुष्य ने लेकर अपने खेत में बो दिया।
32 वह सब बीजों से छोटा तो है पर जब बढ़ जाता है तब सब साग पात से बड़ा होता है; और ऐसा पेड़ हो जाता है, कि आकाश के पक्षी आकर उस की डालियों पर बसेरा करते हैं॥
33 उस ने एक और दृष्टान्त उन्हें सुनाया; कि स्वर्ग का राज्य खमीर के समान है जिस को किसी स्त्री ने लेकर तीन पसेरी आटे में मिला दिया और होते होते वह सब खमीर हो गया॥

मत्ती 13: 31—33

खुदा की बादशाही इस दूनया में एक छोटे और अदना पैमाने से शुरू होगी मगर वह पूरी दूनया में फैल जाएगी उस ख़मीर की मानिंद जिसे बहुत सारा गुँधे हुए आटे में मिला दिया जाता है तो वह सारा गूँधा हुआ आटा ख़मीरा हो जाता है I वह एक छोटे बीज की तरह है जब उसे ज़मीन में बोया जाता है तो पहले एक छोटे पौडे की तरह होता है और आगे चल कर एक बहुत बड़ा दरख्त बन जाता है I आप देखें कि उसे बढ्ने के लिए उसपर कोई ज़बरदस्ती नहीं की जाती ना ही उसे बढ्ने के लिए मजबूर किया जाता है बल्कि वह खुद ब खुद बढ़ता ,और फलता फूलता जाता है I यह भी नहीं कि यह सब कुछ एक ही पल में होजता है बल्कि उसका बढ्ना गैबी तरीक़े से होता है मगर हर जगह और बिना रुके बढ़ता रहता है I

पोशीदा ख़ज़ाना और बेश क़ीमती मोती की तमसील

44 स्वर्ग का राज्य खेत में छिपे हुए धन के समान है, जिसे किसी मनुष्य ने पाकर छिपा दिया, और मारे आनन्द के जाकर और अपना सब कुछ बेचकर उस खेत को मोल लिया॥
45 फिर स्वर्ग का राज्य एक व्यापारी के समान है जो अच्छे मोतियों की खोज में था।
46 जब उसे एक बहुमूल्य मोती मिला तो उस ने जाकर अपना सब कुछ बेच डाला और उसे मोल ले लिया॥

मत्ती 13:44—46

यह तमसीलें खुदा की बादशाही की क़दर ओ क़ीमत को ज़ाहिर करती हैं I उस खजाने की बाबत सोचें जो किसी खेत में छिपाया गया है या गड़ा हुआ है I ऊपर से तो वह एक मामूली खेत है I हर आने जाने वाला सोचता है उसकी एक मामूली क़ीमत होगी इस लिए उसको खरीदने में कोई दिलचस्पी ज़ाहिर नहीं करता I मगर जिस शख्स ने उस खेत में खज़ाना छिपाया वह जानता है कि उस खेत की क़ीमत क्या है I सचमुच उसकी बड़ी क़ीमत है I इतनी बड़ी क़ीमत कि अपना सबकुछ बेचकर उसे ख़रीदने के लिए तयार हो जाता है I सो आप देखें कि यह ख़ुदा की बादशाही की बाबत है I उसकी एक क़ीमत है जिसकी बहुतों को इल्म नहीं है I ऐसे बहुत कम लोग हैं जो उसके मुस्तहक़ हैं I वह एक बहुत ही आला और बेहतरीन चीज़ के हक़दार होंगे I

एक बड़े जाल की तमसील

 47 फिर स्वर्ग का राज्य उस बड़े जाल के समान है, जो समुद्र में डाला गया, और हर प्रकार की मछिलयों को समेट लाया।
48 और जब भर गया, तो उस को किनारे पर खींच लाए, और बैठकर अच्छी अच्छी तो बरतनों में इकट्ठा किया और निकम्मी, निकम्मीं फेंक दी।
49 जगत के अन्त में ऐसा ही होगा: स्वर्गदूत आकर दुष्टों को धमिर्यों से अलग करेंगे, और उन्हें आग के कुंड में डालेंगे।
50 वहां रोना और दांत पीसना होगा।

मत्ती 13:47—50

ख़ुदा की बादशाही लोगों को अलग करेगी I इस अलगाओ को इंसाफ़ के दिन मुकम्मल तरीक़े से इंकिशाफ़ किया जाएगा — जब दिलों को खाली छोड़ दिया जाएगा I

ख़ुदा की बादशाही पोशीदा तोर से बढ़ती जाती है आटे में ख़मीर की तरह , इसकी बड़ी क़दर ओ क़ीमत है जो बहुतों से छिपी है I और यह लोगों के दरमियान फ़रक़ फ़रक़ ज़िम्मेदारियों के लिये सबब बनता है I और जो लोग इसे समझते हैं और जो लोग इसे नहीं समझते उन्हें उनसे जुदा करता है I इन तमसीलों की तालिम देने के बाद नबी हज़रत ईसा अल मसीह ने सामईन से एक ज़रूरी सवाल पूछा I

क्या तुम ने ये सब बातें समझीं?

मत्ती 13 : 51

आप के बारे में क्या ख़याल है ?