क़ुदरत की रात, जलाल का दिन और अँबिया का कलाम

सूरा अल – क़दर (सूरा 97 – क़ुदरत) क़ुदरत की रात का ज़िकर करता है जब कुरान शरीफ का पहला मुकशफ़ा हुआ ।   

हमने (इस कु़रान) को शबे क़द्र में नाजि़ल (करना शुरू) किया । और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है । शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है । इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाजि़ल होते हैं । ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है।

सूरए अल–क़द्र  97:1-5

सूरा अल — क़दर, हालांकि क़ुदरत की रात का बयान करता है इस बतोर कि यह रात ‘एक हज़ार महीनों की रात’ से भी बेहतर है फिर भी यह पूछता है कि यह कुदरत कि रात क्या थी ? रूह क्या कर रही थी कि क़ुदरत कि रात को एक हज़ार महीनों कि रात से बेहतर बनाए ?

सूरा अल –- लैल, (सूरा 92 –- रात) इसका भी वही दिन और रोशनी का मोज़ू है जो रात का पीछा करता है । दिन जलाल के साथ निकलता है, और अल्लाह रहनुमाई करता है क्यूंकि वह हर चीज़ को शुरू से लेकर आख़िर तक जानता है । इसलिए वह हमको आख़िर में जहन्नम कि आग से ख़बरदार करता है ।           

 रात की क़सम जब (सूरज को) छिपा ले । और दिन की क़सम जब ख़ूब रौशन हो ।

सूरए अल लैल 92:1-2

हमें राह दिखा देना ज़रूर है । और आख़ेरत और दुनिया (दोनों) ख़ास हमारी चीज़े हैं। तो हमने तुम्हें भड़कती हुयी आग से डरा दिया।

सूरए अल लै ल 92:12-14

ज़ेल की इंजील शरीफ़ की आयत से सूरा अल—क़दर और सूरा अल—लैल की आयतों का मवाज़िना करें : 

और हमारे पास पैगंबरों का वचन अधिक निश्चित है, और आप उस पर ध्यान देने के लिए अच्छी तरह से करेंगे, जैसे कि एक अंधेरी जगह में एक प्रकाश चमक रहा है, जब तक कि दिन और सुबह का तारा आपके दिलों में उगता है

2 पतरस 1:19

क्या आप मुशाबहतों को देखते हैं ? जब मैं ने सूरा अल – क़दर और सूरा अल – लैल को पढ़ा तो मुझे इस हवाले को याद दिलाया गया था । यह इस बात को भी बयान करता है कि एक रात के बाद दूसरा दिन निकलता है । रात के दौरान नबियों को मुकाशफ़ा दिया जाता था । यह हमको इस बात से भी खबरदार करता है कि पैग़मबराना पैगामात को नज़र अंदाज़ न करे । वरना हम संजीदा अनजामत केए सामना करना पड़ेगा ।

इस खत को पतरस रसूल के जरिये लिखा गया था जो शागिरदों का रहनुमा और नबी हज़रत ईसा अल मसीह के ज़ियादा करीब में रहने वाला शागिर्द था । सूरा अस — साफ़ (सूरा 61 –सिलसिला) ईसा अल मसीह के शागिरदों की बाबत कहता है : 

ऐ ईमानदारों ख़ुदा के मददगार बन जाओ जिस तरह मरियम के बेटे ईसा ने हवारियों से कहा था कि (भला) ख़ुदा की तरफ़ (बुलाने में) मेरे मददगार कौन लोग हैं तो हवारीन बोल उठे थे कि हम ख़ुदा के अनसार हैं तो बनी इसराईल में से एक गिरोह (उन पर) ईमान लाया और एक गिरोह काफ़िर रहा, तो जो लोग ईमान लाए हमने उनको उनके दुशमनों के मुक़ाबले में मदद दी तो आखि़र वही ग़ालिब रहे।

 सूरए अस साफ़ 61:14

सूरा अस साफ़ एलान करता है कि ईसा अल मसीह के शागिर्द ‘ख़ुदा’ के मददगार’ थे । शागिर्दों के पैगाम पर जो ईमान वह उस क़ुवत को हासिल करता था जिस के बारे में कहा गया है । पतरस जो शागिर्दों का रहनुमा था वह एक तरह से खुदा की मदद कर रहा था । हालांकि वह नबी हज़रत ईसा अल मसीह का एक शागिर्द था, वह अल मसीह के किए हुए कई एक मोजिज़ों का गवाह था, उनकी दी हुई कई एक तालिमात को बगोर सुनता था और जो उसके इख्तियारात हैं उसका उनहों ने कैसे इस्तेमाल किया इन सब को पतरस ने नजदीकी से देखा था । ऊपर दिये गए बयानात में उसने यहाँ तक एलान किया कि नबियों के कलाम जो उसके बारे में कहे गए थे वह यक़ीन से ज़ियादा साबित हुए । नबियों के कलाम जो उसके हक़ में कहे गए थे वह यक़ीन से ज़ियादा और उसके ख़ुद की गवाही से ज़ियादा क्यूँ साबित हुए ? इस बात को वह जारी रखता है ।         

  20 पर पहिले यह जान लो कि पवित्र शास्त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती।
21 क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे॥

2 पतरस 1:20-21

यह हम से कहता है कि खुदा का पाक रूह नबियों को अपने साथ ‘लिए चलता’ था, और जो खुदा के पैगामात को वह हिफ़्ज़ करते थे उन्हें खुदा के पाक रूह की मौजूदगी में लिख लेते थे इसी लिए यह कलाम ‘खुदा के इल्हाम’ से कहलाते हैं । इसी सबब से इस तरह कीएक रात एक हज़ार महीनों की रातों से बेहतर है । इस लिए कि यह रूहुल कुदुस से जड़ पकड़ी हुई हैं इंसान की ख़्वाहिश से कभी नहीं हुई । सूरा अस साफ़ हम से कहता है कि जिन्हों ने पतरस के पैगाम पर धियान दिया वह ऐसी कुवत हासिल करेंगे जो ताक़त की रात में इस्तेमाल किया गया था  और वह गालिब आएंगे ।  

नबी हज़रत ईसा अल मसीह के ज़माने में रहते वक़्त ‘अँबिया’ जिनकी बाबत पतरस ने लिखा वह पुराने अहद नामे के नबियों की बाबत है – पुराना अहद नामा वह मुक़द्दस किताबों का मज्मूआ है जो मुक़द्दस इंजील से पहले लिखी गई थींहज़रत मूसा की तौरात में कई एक बयानात हैं जो हज़रत आदम, क़ाबील और हाबील, हज़रत नूह, हज़रत लूत और हज़रत इब्राहीम और दीगर नबियों के साथ जुड़ी हुई हैं । इन नबियों के बयानात के साथ यह भी ज़िकर है कि जब हज़रत मूसा ने फ़िरोन का सामना किया और फिर शरीयत की किताब हासिल की । उसी उनके के भाई हज़रत हारून की कुरबानियों का ज़िकर है । क़ुरान शरीफ़ में सूरह बक़रा इन्हीं कुरबानियों को लेकर नाम दिया गया है ।

तौरात के ख़ात्मे का पीछा करते हुए हम ज़बूर शरीफ़ में पहुँचते हैं जहां हज़रत दाऊद हज़रत मसीह की आमद के बारे में लिखने के लिए इल्हामी होते हैं । फिर सिलसिलेवार नबियों ने नबूवत की कि मसीह कुंवारी से पैदा होंगे तो अल्लाह की बादशाही ज़मीन के सब लोगों के लिए खुल जाएगी । मसीह को आने वाला ख़ादिम भी कहा गया है जो दुखों को सहने वाला होगा । फिर उस का नाम मसीह होगा करके नबुवत की गई । इसके साथ ही उसके ज़ाहिर होने का वक़्त भी नबुवत के ज़रिये बताया गया एक रास्ता तयार करने वाला पेशवा के वायदे के साथ

हम में से अक्सर लोगों के पास मोक़ा नहीं रहा था होगा कि अपने खुद के लिए इन दस्तावेज़ों को पढ़ते यहाँ इन फ़रक़ फ़रक़ कड़ियों के साथ इन्हें पढ़ने का एक सुनेहरा मोक़ा है । सूरा अल- लैल आने वाली आग की बाबत ख़बरदार करता है । सूरा अल–क़द्र ऐलान करता है कि खुदा का रूह उस क़ुदरत की रात के दौरान खुदा का रूह काम कर रहा था । सूरा अस—साफ़ उन लोगों को रूह की क़ुवत देने का वायदा करता है जो रसूलों के पैगाम पर ईमान लाते हैं । पतरस जो शागिरदों का रहनुमा था वह हमें नसीहत देता है कि खादीम नबियों के मुकाश्फ़े जो दस्तावेज़ों में मौजूद हैं उनपर गौर तलब फ़रमाएँ, जो रात के वक़्त में दिये गए थे, जिन्हों ने अच्छे दिन की राह देखि । क्या यह समझदारी नहीं होगी कि उनके पैगामात को जानें ?  

ज़बूर ख़तम होता है उस तय्यार करने वाले को लाए जाने के वायदे के साथ

सूरा अल मुदस्सिर – (सूरा 74  पर्दा डाला हुआ) यह तस्वीरकशी करता है नबी सल्लम की जो उन की चादर वाईए पोशिश में सख्ती से बांध कर रखा है इंसाफ़ के दिन की बाबत अपनी तंबीह देते हुए I

ऐ (मेरे) कपड़ा ओढ़ने वाले (रसूल) उठोऔर लोगों को (अज़ाब से) डराओऔर अपने परवरदिगार की बड़ाई करो

सूरा अल मुदस्सिर 74:1-3

फिर जब सूर फूँका जाएगातो वह दिन काफ़िरों पर सख्त दिन होगाआसान नहीं होगाआसान नहीं होगा

सूरा अल मुदस्सिर 74:8-10

सूरा अल काफ़िरून (सूरा 109 — गैर मोमिन लोग) गैर ईमानदारों की तरफ़ से एक फ़र्क रास्ते के लिए साफ़ तोर से नबी सल्लम की तस्वीर कशी करता है I

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ काफिरोंतुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजताऔर जिस (ख़ुदा) की मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत नहीं करतेऔर जिन्हें तुम पूजते हो मैं उनका पूजने वाला नहींऔर जिसकी मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत करने वाले नहींतुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मेरे लिए मेरा दीन  

सूरा अल काफ़िरून 109:1-6

ज़बूर पीछे से नबी एलियाह (अलैहिस्सलाम) का हवाला देने के ज़रिये अपने अंजाम को पहुंचता है I इसका हवाला बिलकुल वैसे ही है जिस बतोर सूरा अल मुदस्सिर और सूरा अल काफ़िरून में हूबहू बयान किया गया है I मगर ज़बूर भी आने वाले दूसरे नबी की राह देखती है जो एलियाह की तरह हमारे दिलों को तय्यार करेगा I इसको हम नबी हज़रत यहया के नाम से पुकारते हैं I

नबी हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम) के आने की पेशीन गोई की गई है

हम ने ख़ादिम की निशानी में देखा कि एक ख़ादिम के आने का वायदा किया गया था I मगर उस के आने का तमाम वायदा एक ख़ास सवाल पर मुनहसर है I आप देखें कि यसायाह 53 एक सवाल से शुरू हुआ है I

किसने हमारे पैगाम पर ईमान लाया …?

यसायाह 53:1a

यसायाह (अलैहिस्सलाम) पेशबीनी कर रहे थे कि इस खादिम के ज़माने के लोग ईमान लाने के लिए तय्यार नहीं थे I मसला पैगाम के साथ नहीं था न ही ख़ादिम की निशानियों के साथ क्यूंकि वह आने वाले वक़्त में ‘सात’ के अरसा ए तकमील के ज़रिये ठीक ठीक वाज़ेह करेंगे I इस के अलावा नाम के ज़रीए और मख़सूस करते हुए कि वहकाट डाला जाएगा’ I मसला यह नहीं था कि वहाँ काफ़ी निशानियाँ नहीं थे I नहीं I बल्कि मसला यह था कि लोगों के दिल सख़्त थे I इस लिए किसी न किसी को ख़ादिम के आगे आना ज़रूरी था ताकि उसके आने की त्यारी के लिए लोगों को तयार करे I इसलिए नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने उस एक की बाबत पैगाम दिया जो ख़ादिम के लिये रास्ता तयार करेगा I उसने अपने किताब में यह पैगाम ज़ेल के हवाले में इस बतोर दिया :

3 किसी की पुकार सुनाई देती है, जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो।
4 हर एक तराई भर दी जाए और हर एक पहाड़ और पहाड़ी गिरा दी जाए; जो टेढ़ा है वह सीधा और जो ऊंचा नीचा है वह चौरस किया जाए।
5 तब यहोवा का तेज प्रगट होगा और सब प्राणी उसको एक संग देखेंगे; क्योंकि यहोवा ने आप ही ऐसा कहा है॥

यसायाह 40:3—5

यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने एक शख़्स की बाबत लिखा कि वह बयाबान में आएगा ताकि ख़ुदावंद की राह तयार करे I यह शख़्स रास्ते की सारी रुकावटों को दूर करते हुए उसे हमवार करेगा ताकि ख़ुदावंद का जलाल ज़ाहिर हो I मगर यसायाह ने यह बात मख़सूस तरीक़े से नहीं समझाया कि किस तरीक़े से इस काम को किया जाएगा I

नबी मलाकी —- ज़बूर शरीफ़ का आख़री नबी

The Prophets Isaiah, Malachi and Elijah (PBUT) shown in historical timeline

नबी हज़रत यसायाह, मलाकी और एलियाह (अलैहिस्सलाम) को उनकी तारीक़ी वक़्त की लकीर में दिखाए गए हैं I

यसायाह नबी के आने के 300 साल बाद मलाकी नबी ने ज़बूर की आख़री किताब को लिखा I इस आख़री किताब मलाकी में जो बात यसायाह ने रास्ता तयार करने वाले की बाबत बयान किया था इसे खोल कर बयान किया जाता है I उसने लिखा :

“मैं अपने दूत भेजूंगा, जो मेरे सामने रास्ता तैयार करेगा। तब अचानक आप जो भगवान मांग रहे हैं वह उनके मंदिर में आ जाएगा; वाचा का दूत, जिसे आप चाहते हैं, वह आएगा, ”भगवान सर्वशक्तिमान कहते हैं।

मलाकी 3:1

यहाँ फिर से पैगाम देने वाले ने जो रास्ता तय्यार किया इस की बाबत पेशीन गोई की गई है I इस के बाद रास्ता तय्यार करने वाला आता है I फिर वह अहद का पैगामबर आएगा I यहाँ मलाकी नबी किस अहद का हवाला दे रहे हैं ? याद रखें कि नबी यरम्याह (अलैहिस्सलाम) ने पेशबीनी की थी कि अल्लाह एक नए अहद को हमारे दिलों के अंदर लिखेगा तभी हमारी प्यास बुझ पाएगी जो हर हमेशा हमको गुनाह केआई तरफ़ ले जाती है I यह वही अहद है जिस की बाबत मलाकी (अलैहिस्सलाम) हवाला दे रहे हैं I इस अहद का दिया जाना ही आने वाले रास्ता तयार करने वाले की निशानी ठहरेगी I

टीओ फिर मलाकी (अलैहिस्सलाम) अपनी किताब के आख़री पैरग्राफ़ के साथ इस पूरे ज़बूर को ख़तम करते हैं I इस आख़री पैरगिराफ़ में वह फिर से मुस्तक़बिल केआई तरफ़ देखते और लिखते हैं :

“देख, मैं यहोवा के महान और भयानक दिन से पहले पैगंबर एलियाह को तुम्हारे पास भेजूंगा। वह माता-पिता के दिलों को अपने बच्चों के लिए और बच्चों के दिलों को उनके माता-पिता के लिए बदल देगा; वरना मैं कुल विनाश के साथ भूमि पर आकर प्रहार करूंगा। ”

मलाकी 4:5-6

मलाकी जो एलियाह की बाबत ख़ुदावंद के उस बड़े दिन में आने की बात कर रहा है तो इस का क्या मतलब है? यह एलियाह कौन था? वह दूसरा नबी था जिसे हम ने नहीं देखा I और हम ज़बूर के सारे नबियों को हरगिज़ नहीं देख सकते जबकि यह बहुत लंबा हो जाएगा I मगर हम ऊपर की वक़्त की लकीर में देख सकते हैं I एलियाह (अलैहिस्सलाम) 850 क़ब्ल मसीह में रहते थे I उनका बयाबान में रहना और जानवरों की खाल और बालों के कपड़े पहनना जंगली खाना खाना मशहूर था I वह गालिबन देखने में बहुत ही अजीब था I मलाकी (अलैहिस्सलाम) ने लिखा कि किसी तरह से वह रास्ता तय्यार करने वाला नए अहदनामे से पहले आता है वह एलियाह की मानिंद होगा I इस बयान के साथ ज़बूर शरीफ़ मुकम्मल हो गया था I यह ज़बूर शरीफ़ में आख़री पैगाम है I और इसको 450 क़बल मसीह में लिखा गया था I तौरात और ज़बूर यह दोनों वाक़े होने वाले वायदों से भरे हुए थे I आइये हम आईएन में से कुछ की नज़र ए सानी करें I                    

तौरात और ज़बूर के वायदों की नज़र ए सानी जो पूरे होने के मुंतज़र थे

  • नबी हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) क़ुरबानी की निशानी में एलान किया था कि मोरया पहाड़ पर इंतज़ाम किया जाएगा I उन दिनों यहूदी ज़बूर के आख़िर में उस वक़्त भी इस इंतज़ाम के वाक़े होने के इंतज़ार में थे I
  • नबी हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा था कि बनी इसराईल के लिये फ़सह एक निशानी थी, और बनी इसराईल ने अपने सारी तारीख़ के ज़रिये फ़सह को मनाया था मगर वह उसे भूल गए थे I वह एक निशानी बतोर था जो यह इशारा कर रहा था कि उसे अब तक ज़ाहिर नहीं किया गया I
  • नबी हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने तौरेत में पेशबीनी की थी कि एक ऐसा नबी रूनुमा होगा जिस की बाबत अल्लाह ने कहा था कि मैं अपना कलाम उसके मुंह में डालूँगा I इस आने वाले नबी के वायदे की बाबत अल्लाह ने यह भी एलान किया था कि “मैं ख़ुद ही उस शख़्स का इंसाफ करूंगा जो मेरे कलाम पर अमल नहीं करता और उन बातों पर यक़ीन जो एक नबी मेरे नाम से पैगाम सुनाता है I
  • बादशाह दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने आने वाले ‘ख्रिसतुस’ वाईए ‘मसीह’ की बाबत अपनी लंबी तारीख़ के ज़रिये पेशबीनी की जिस पर बनी इसराईल ने ताज्जुब किया कि यह मसीह की बादशाही किस की मानिंद दिखेगी I
  • नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने नबुवत की कि एक कुंवारी ‘बेटा’ जनेगी I ज़बूर के इख़तिताम पर यहूदी उस वक़्त भी इस अजीब ओ गरीब वाक़े के पीईएसएच आने के इंतज़ार में थे I
  • नबी यरम्याह (अलैहिस्सलाम) ने पेशबीनी की थी कि एक नया अहद जो होगा उसे तख़्तियों के बदले हमारे दिलों में लिखा जाएगा I वह एक दिन ज़ाहिर होगा I
  • नबी ज़करियाह (अलैहिस्सलाम) ने पेशबीनी की कि आने वाले का नाम “ख्रीस्तुस” (या मसीह) होगा I
  • नबी दानिएल (अलैहिस्सलाम) ने नबुवत की थी कि जब ख्रिसतुस या मसीह का आना होगा तो बजाए इस के कि वह बादशाही करे वह अपनों के बीच में से ‘काट डाला जाएगा’ I
  • नबी यसायाह (अलैहिस्सलाम) ने एक आने वाले ‘ख़ादिम’ की बाबत लिखा कि वह बहुत ज़ियादा दुख उठाएगा और वह ज़मीन पर से काट डाला जाएगा I
  • और जिस तरह हम ने यहाँ देखा कि नबी मलाकी (अलैहिस्सलाम) ने पेशबीनी की कि यह सब कुछ रास्ता तय्यार करने वाले की तरफ़ से रहनुमाई की जाएंगी I उसको लोगों को तय्यार करने के लिए था क्यूंकि हमारे दिल ख़ुदा की चीज़ों (बातों) के खिलाफ़ बहुत जल्द और आसानी से सख़्त हो जाते हैं I                 

 तो फिर 450 क़बल मसीह में ज़बूर के इख़तिताम पर यहूदी लोग उन हैरतअंगेज़ वायदों के पूरा होने के इंतज़ार में जी रहे थे I और वह इंतिज़ार पर इंतिज़ार किए जा रहे थे I एक नसल जाती रहती थी और दूसरी नसल का सिलसिला जारी था I इसके बावजूद भी आईएन वायदों का पूरा होना बाक़ी था I

जब ज़बूर का इख्तिताम तकमील पर पहुंचा तब क्या हुआ ?

जब हम ने बनी इसराईल की तारीख़ में देखा कि सिकन्दर ए आज़म ने 330 क़बल मसीह के दौरान दूनया के कई एक मुलकों पर फ़तह हासिल की तो फ़तह किए हुए लोगों और तहज़ीबों ने यूनानी ज़बान को अपनाया जिस तरह अंग्रेज़ी ज़बान मौजूदा ज़माने में तिजारत , तालीम , तसनीफ़ ओ तालीफ़ के लिये एक आलमगीर ज़बान बन चुकी है I इसी तरह उस ज़माने में भी यूनानी ज़बान दीगर ज़बानों पर हावी थी I यहूदी उस्तादों ने तौरेत और ज़बूर को जो इबरानी ज़बान में लिखी गई थी उसको 250 क़बल मसीह में यूनानी ज़बान में तर्जुमा किया I इस तरजुमे को सेप्टूयाजिंट कहा गया I जिस तरह से हम ने यहां देखा कि यह वह युनानी तर्जुमा है जिस में ख्रीस्तुस का लफ़्ज़ आता है और हमने यहां यह भी देखा जहां से येसू का नाम भी इस्तेमाल होता है I

The Prophets Isaiah, Malachi and Elijah (PBUT) shown in historical timeline

नबी हज़रत यसायाह , मलाकी , और एलियाह (अलैहिस्सलाम) को  तारीख़ी वक़्त की लकीर में दिखाया गया है

इस दौरान (क़बल मसीह 300 -100 को जिसे तारीख़ी वक़्त की लकीर के नीले रंग में दिखाया गया है) उन दिनों मिस्र , सीरिया और इसराईल के बीच एक फ़ौजी मुआहदा चल रहा था I और इन सल्तनतों के बीच जंग के दौरान बनी इसराईल पकड़े जाते थे I कुछ ख़ास सीरियाई बादशाहों ने यूनानी मज़हब को (बुतपरस्त मज़हब बतोर) क़रार दिया और एक ख़ुदा की इबादत करने पर ज़ोर दिया I कुछ यहूदी रहनुमाओं ने भी इस तरक़्क़ी याफ़्ता जमाअत की रहनुमाई की ताकि अपने वहदानियत परस्ती का मुक़ाबला कर सके और इबादत की पाकीज़गी को बर क़रार रख सके जिसे हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने क़ायम की थी I क्या इन मज़हबी रहनुमाओं ने उन वायदों के पूरा होने का इंतज़ार किया जिस की यहूदियों ने किया था ? इन लोगों ने हालांकि वैसे ही वफ़ादारी से इबादत की जिस तरह से तौरेत और ज़बूर में हिदायत दी गई थी मगर वह नबुवती निशान के लिये मौज़ू नहीं बैठते थे I दरअसल वह ख़ुद ही नबी होने के दावे के क़ाबिल नहीं थे I एसआईआरएफ़ ख़ुदा परस्त यहूदी ही बुत परस्ती के खिलाफ़ इबादत का बचाओ कर रहे थे I

उस ज़माने से मुताललिक़ तारीख़ी किताबें उन कशमकश का बयान करते हैं कि लिखी हुई इबादत की पाकीज़गी को उनहों ने बरक़रार रखा I यह किताबें तारीख़ी और मज़हबी बसीरत अता करती हैं और यह बहुत क़ीमती हैं I मगर यहूदी लोग वैसी इज़्ज़त नहीं देते थे जैसे कि उन्हें नबियों के ज़रिये लिखा गया हो I फिर उनहों ने उसको ज़बूर की किताबों में शामिल नहीं किया I हालांकि वह अच्छे किताब थे और मज़हबी लोगों के ज़रिये लिखी गई थीं I मगर वह नबियों के ज़रिये लिखे नहीं गए थे I इन किताबों को ही अपक्रिफ़ा कहा गया है I

मगर इस लिये कि यह किताबें मुफ़ीद और फ़ाइदेमंद थीं उन्हें अक्सर तौरेत और ज़बूर के साथ साथ शामिल किया गया ताकि यहूदियों की एक मुकम्मल तारीख़ को पेश कर कर सके I जब अनाजील और दीगर किताबें जेआईएन में येसु मसीह के पैगामत थे और (ख़ुतूत) के लिखे जाने के बाद इन सब को मिलाकर एक किताब अल किताब बाइबल नाम दिया गया I आज भी कुछ बाइबलें हैं जिन में अपकरिफ़ा को शामिल किया गया है जबकि यह तौरात , ज़बूर और इंजील के हिस्से माने नहीं जाते I

मगर जो वायदे तौरेत ज़बूर में दिये गए हैं उनका अभी भी पूरा होना बाक़ी है I यूनानी ज़बान से मुताससिर होते हुए ज़बरदस्त रोमी सलतनत ने इसको फैलाया और यहूदियों के बदले यूनानियों को रखा ताकि यहूदियों पर हुकूमत कर सके I यह पीले रंग का ज़माना है जो ऊपर की तारीख़ी वक़्त की लकीर में नीले रंग के बाद दिखाया गया है I रोमियों ने कामिलियत के साथ हुकूमत की मगर ज़ुल्म के साथ I महसूल , लगान और जिज़ये की रक़म बहुत ज़ियादा थी और रोमी किसी का भी भेद नहीं करते थे I यहूदी लोग चाहते थे कि तौरेत और ज़बूर में यहूदियों के हक़ में जो वादे किए गए थे वह पूरे हों और इसी के इंतज़ार में उन की इबादतें महज़ एक दस्तूर बनकर आरएच गईं और शरीअत के साथ कुछ और क़ानून को भी जोड़ दिया जो कि नबियों के ज़रिये नहीं थीं और न ही वह रिवायत के मुताबिक़ थे I यह फ़ालतू अहकाम कुछ अच्छे खयालात बतोर लगते थेजब उन्हें पहली बार अमल करने के लिए मशवरा दिया जाता था मगर बहुत जल्द तौरात और ज़बूर के असली हुक्म को उन की जगह पर रख दिया जाता था जो यहूदी उस्तादों के दिल ओ दमाग में हिफ़्ज़ किए हुए रहते थे I

और फिर आखिरकार जब वह एक जैसे लगते थे तो वह ऐसा लगता था कि तमाम वायदे अल्लाह के ज़रिये भुला दिये गए I उनही दिनों में ज़बरदस्त फ़रिश्ता जिबराईल आया और एक रास्ता तयार करने वाले शख़्स के पैदा होने की खुशख़बरी दी I जिसे आज हम यहया नबी कहते हैं या बाइबल में यूहनना इस्तिबागी (अलैहिस्सलाम) कहते हैं मगर यह इंजील की शुरुआत है जिसे हम आगे देखेंगे I